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अंतरिक्ष में भारत की नई ‘आंख’

  • लेखक की तस्वीर: Ashok kumar Singh
    Ashok kumar Singh
  • 3 घंटे पहले
  • 2 मिनट पठन
ISRO का GSLV-F17 रॉकेट EOS-05 उपग्रह लॉन्च करते दिखा, पृथ्वी पृष्ठभूमि; बड़े अक्षरों में बड़ी सफलता लिखा है

भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com श्रीहरिकोटा, 4 सितंबर 2026। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए शुक्रवार तड़के GSLV-F17 रॉकेट के माध्यम से EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया। यह मिशन भारत की अंतरिक्ष आधारित पृथ्वी निगरानी क्षमता को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण परिसर से सुबह 2:55 बजे GSLV-F17 ने उड़ान भरी। इसरो के अनुसार, रॉकेट ने EOS-05 को सफलतापूर्वक निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया।


जियोसिंक्रोनस कक्षा से भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह


EOS-05 एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन अंतरिक्ष यान है। इसरो के अनुसार, यह भारत का पहला ऐसा इमेजिंग उपग्रह है, जिसे जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी की निगरानी के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

इस प्रकार की कक्षा से उपग्रह किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र की अपेक्षाकृत निरंतर निगरानी करने की क्षमता प्रदान कर सकता है। इससे पृथ्वी अवलोकन और विभिन्न भौगोलिक गतिविधियों के अध्ययन में भारत की तकनीकी क्षमता को विस्तार मिलने की संभावना है।

EOS-05 मिशन को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।


18 मिनट में तय की अंतरिक्ष यात्रा का अहम चरण


प्रक्षेपण के बाद GSLV-F17 ने निर्धारित उड़ान क्रम के अनुसार उपग्रह को उसके लक्षित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह मिशन GSLV प्रक्षेपण यान की 19वीं उड़ान थी।

EOS-05 के सफल प्रक्षेपण के साथ इसरो ने एक बार फिर जटिल अंतरिक्ष मिशनों को अंजाम देने की अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है।


पृथ्वी निगरानी में मिलेगी नई मजबूती


EOS-05 को पृथ्वी अवलोकन से जुड़े उद्देश्यों के लिए विकसित किया गया है। उपग्रह से प्राप्त आंकड़े भविष्य में मौसम, पर्यावरण, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य भू-आधारित गतिविधियों की निगरानी जैसे क्षेत्रों में उपयोगी हो सकते हैं।

जियोसिंक्रोनस कक्षा से इमेजिंग की क्षमता भारत के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इससे किसी व्यापक क्षेत्र पर लगातार नजर रखने की संभावना बढ़ती है।

हालांकि उपग्रह की विभिन्न सेवाओं और परिचालन उपयोग से संबंधित विस्तृत जानकारी मिशन के आगामी चरणों और इसरो की आधिकारिक घोषणाओं के बाद और स्पष्ट होगी।


प्रधानमंत्री ने दी इसरो टीम को बधाई


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन की सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की उत्कृष्टता, नवाचार और बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में इसरो और भारतीय उद्योग के बीच बढ़ते सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे देश की अंतरिक्ष क्षमताओं को नई मजबूती मिल रही है।


आत्मनिर्भर भारत की अंतरिक्ष यात्रा में महत्वपूर्ण कदम


EOS-05 मिशन भारत की वैज्ञानिक क्षमता और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सफलता ऐसे समय में आई है, जब भारत अंतरिक्ष अनुसंधान, पृथ्वी अवलोकन, उपग्रह प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं के क्षेत्र में लगातार अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

GSLV-F17 और EOS-05 मिशन की सफलता ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। आने वाले समय में उपग्रह के परिचालन चरण और इससे मिलने वाले आंकड़ों की उपयोगिता पर वैज्ञानिक जगत की नजर रहेगी।

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