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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • हनुमान जयंती पर महाप्रसाद का भव्य आयोजन, समाजसेवी रमेश बाफना की पहल सराहनीय

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हुबली-धारवाड़। हनुमान जयंती के पावन अवसर पर कर्नाटक के प्रसिद्ध व्यवसायी, समाजसेवी एवं उद्यमी रमेश भाई बाफना (मोकलसर), एमडब्ल्यूबी ग्रुप द्वारा भव्य महाप्रसाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस श्रद्धामय आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान हनुमान के प्रति अपनी आस्था प्रकट की और प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह भक्ति, श्रद्धा और उत्साह से ओत-प्रोत रहा। आयोजन स्थल पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद महाप्रसाद वितरण का सिलसिला प्रारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने अनुशासित व्यवस्था के साथ प्रसाद ग्रहण किया और आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा की। इस अवसर पर कृषि उपज मंडी से जुड़े कई पदाधिकारी एवं अधिकारीगण सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे सामाजिक समरसता और सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। आयोजन के माध्यम से रमेश बाफना ने समाज सेवा और धार्मिक आस्था का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। उपस्थित जनों ने इस सफल एवं प्रेरणादायक आयोजन के लिए आयोजक मंडल के प्रति हार्दिक धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

  • हर आयोजन में अग्रणी: आंजणा पटेल समाज बना सामाजिक एकता की मिसाल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हुबली-धारवाड़। शहर में सामाजिक समरसता, सहभागिता और एकजुटता की मिसाल पेश करते हुए श्री आंजणा पटेल समाज, हुबली-धारवाड़ निरंतर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करा रहा है। जैन समुदाय हो या अन्य समाज, धार्मिक आयोजन हों या सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम—हर मंच पर इस समाज की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से दिखाई देती है। समाज की यह विशेषता रही है कि कार्यक्रम का आकार चाहे छोटा हो या बड़ा, हर अवसर पर सदस्य पूरे उत्साह और जिम्मेदारी के साथ शामिल होते हैं। सामूहिकता की यह भावना न केवल समाज को मजबूत बनाती है, बल्कि अन्य समुदायों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है। समाज के वरिष्ठजनों का मानना है कि किसी भी समाज की असली पहचान उसकी एकजुटता और सक्रियता से होती है। श्री आंजणा पटेल समाज ने इस विचार को व्यवहार में उतारते हुए यह सिद्ध किया है कि सहभागिता ही समाज की सबसे बड़ी पूंजी होती है। यही जुड़ाव समाज की सच्ची कमाई और पहचान बनकर उभर रहा है। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक आयोजनों में समाज के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि समाज निरंतर प्रगति और समरसता की दिशा में अग्रसर है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से समाज न केवल अपने सांस्कृतिक मूल्यों को सहेज रहा है, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी मजबूत कर रहा है। स्थानीय नागरिकों और अन्य समाजों के प्रतिनिधियों ने भी श्री आंजणा पटेल समाज की इस सक्रियता और सहयोग भावना की सराहना की है। उनका कहना है कि इस प्रकार की भागीदारी समाज में भाईचारे और एकता को और अधिक सुदृढ़ करती है। निस्संदेह, श्री आंजणा पटेल समाज, हुबली-धारवाड़ अपनी सतत सहभागिता और सकारात्मक सोच के माध्यम से सामाजिक एकता की नई मिसाल कायम कर रहा है, जो आने वाले समय में भी अन्य समाजों के लिए मार्गदर्शक साबित होगी।

  • पूर्णिमा पर कबीर सत्संग में उमड़ा श्रद्धा का सागर, संत सुमिरन दास जी के प्रवचनों ने किया भाव-विभोर

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। शहर के नेहरू रोड स्थित हेमाराम सीरवी के निवास हीरा पन्ना निकेतन पर पूर्णिमा के पावन अवसर पर भव्य कबीर सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण में भक्ति रस का आनंद लिया। संत कबीर साहेब के अनुयायी संत सुमिरन दास जी के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम ने श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक जागरण का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की शुरुआत महाप्रसादी के साथ हुई, जहां उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर सत्संग में सहभागिता की। इसके बाद कबीर साहेब की वाणी का पाठ एवं स्मरण किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु आध्यात्मिक भाव में डूब गए। संत सुमिरन दास जी ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में कबीर साहेब के उपदेशों को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए कहा कि मानव जीवन का मूल उद्देश्य आत्मा का जागरण और परम सत्य की प्राप्ति है। उन्होंने बताया कि कबीर साहेब की वाणी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उनके समय में थी। यह वाणी मनुष्य को अज्ञानता से बाहर निकालकर सत्य और सद्मार्ग की ओर अग्रसर करती है। सत्संग के दौरान भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत किए गए मधुर भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भजन गायक जोगाराम परिहार ने “सती बिछड़ियोड़ा राम ने मिलाया”, “राम भजन गायलों बीरा छुट जाएला शरीर” और “सुन-सुन सत्संग री बातों, जीवन सफल हो जावेला” जैसे भजनों की प्रस्तुति दी। वहीं सुरेश वैष्णव एंड पार्टी ने “आज मेरे सतगुरु साहेब आया बिनजारा” जैसे भजनों से समां बांध दिया। सतगुरु सुमिरन साहेब द्वारा प्रस्तुत “आज रो दिवस सखी जाऊं बलिहारी” एवं “सतगुरु मोए जगायो अबके” जैसे भजनों ने कार्यक्रम को और अधिक भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने संत सुमिरन दास जी से आशीर्वाद प्राप्त किया और आयोजन के लिए हेमाराम सीरवी का आभार व्यक्त किया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संचार देखने को मिला, जिसने उपस्थित जनसमूह के मन में गहरी आध्यात्मिक छाप छोड़ी।

  • भाजपा युवा नेता मनोहर नागर का जन्मोत्सव श्रद्धा और सेवा भाव के साथ मनाया गया

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी ( Bhaarataarth.com ) मध्य प्रदेश के बेरसिया विधानसभा क्षेत्र के निवासी , सहज और सरल स्वभाव के धनी, जनसेवक, सनातन प्रेमी एवं राष्ट्रवादी भाजपा युवा नेता मनोहर नागर जी  का जन्मोत्सव सनातन संस्कृति के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा-चौदस (दिनांक 1 अप्रैल 2026, बुधवार) को हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मनोहर नागर जी ने अपने आराध्य प्रभु श्री राम  एवं संकट मोचन हनुमान जी  के मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया और कई सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में भाग लिया। जन्मोत्सव के मौके पर उनके निवास एवं अन्य स्थानों पर शुभचिंतकों, मित्रों और सहयोगियों का आना-जाना लगा रहा। इस दौरान समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उन्हें पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया और जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। (फोटो में)  मनोहर नागर जी अपने सहयोगियों और समर्थकों के साथ सम्मान ग्रहण करते हुए नजर आ रहे हैं, जहां उन्हें माल्यार्पण कर अभिनंदन किया गया। सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के माध्यम से भी उन्हें बड़ी संख्या में शुभकामनाएं प्राप्त हुईं। मनोहर नागर जी ने सभी शुभचिंतकों का अभिवादन करते हुए आभार व्यक्त किया और उनके स्नेह एवं समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। मित्रों एवं सहयोगियों के अनुसार, मनोहर नागर जी एक सनातनप्रेमी, राष्ट्रवादी और प्रखर हिंदुत्ववादी छवि  के रूप में क्षेत्र में अपनी पहचान रखते हैं। वे विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं और हर कार्य में बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं। वर्तमान में वे धाकड़ महासभा युवा संघ, मध्य प्रदेश के प्रदेश प्रवक्ता  तथा राष्ट्रीय मोदी सेवा समिति, मध्यप्रदेश के प्रदेश महामंत्री  के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। ✍️ स्रोत: स्थानीय संवाददाता मनोहर नागर जी 🌐 Website: https://www.bhaarataarth.com अन्य समाचार भी पढ़ें: 🔹 राजनीति समाचार देश और राज्य की ताजा राजनीतिक हलचल, बयानबाजी और नीतिगत फैसलों की पूरी जानकारी 🔹 मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश के हर जिले से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें, विकास, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्ट 🔹 खेल समाचार क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों की ताजा अपडेट, खिलाड़ियों का प्रदर्शन और विश्लेषण 🔹 मनोरंजन समाचार फिल्म, टीवी और वेब सीरीज की दुनिया की खबरें, सेलिब्रिटी अपडेट और रिव्यू चुनाव समाचार लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय चुनावों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर और विश्लेषण आज की ताज़ा खबरें समाचार भी देखें

  • “मां, माटी, मानुष” की ताकत: भाजपा की चुनौती के बीच भी अडिग दीदी का जनाधार

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का सफर केवल एक राजनीतिक उभार नहीं, बल्कि जनआंदोलनों से निकली उस ताकत की कहानी है जिसने राज्य की सियासत को नई दिशा दी। 1998 में कांग्रेस से अलग होकर बनी टीएमसी आज लगभग 48 प्रतिशत वोट शेयर के साथ राज्य की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति बन चुकी है। जनआंदोलनों से सत्ता तक का सफर टीएमसी का राजनीतिक विस्तार सिंगुर और नंदीग्राम जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों से जुड़ा रहा है। वाम मोर्चा सरकार की भूमि अधिग्रहण नीतियों के खिलाफ ममता बनर्जी के नेतृत्व में चले इन आंदोलनों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर बदल दी। साल 2011 में 34 वर्षों के वाम शासन का अंत हुआ, जिसके पीछे “मां, माटी, मानुष” का नारा जन-जन तक पहुंचा और सत्ता परिवर्तन का आधार बना। शुरुआती संघर्ष और वापसी स्थापना के बाद 1998 और 1999 के लोकसभा चुनावों में टीएमसी ने क्रमशः 24.4 प्रतिशत और 26 प्रतिशत वोट हासिल कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उस समय ममता बनर्जी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा थीं और रेल मंत्री के रूप में कार्य कर रही थीं। हालांकि 2004 और 2006 का दौर पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। 2004 लोकसभा चुनाव में सीटें घटकर 1 रह गईं। 2006 विधानसभा में सीटें 60 से घटकर 30 पर आ गईं। लेकिन इसी दौर के बाद सिंगुर-नंदीग्राम आंदोलनों के जरिए पार्टी ने जोरदार वापसी की। 2011: ऐतिहासिक जीत और सत्ता में स्थिरता 2009 के लोकसभा चुनाव में 19 सीटें जीतने के बाद टीएमसी ने 2011 विधानसभा चुनाव में 184 सीटों और करीब 39 प्रतिशत वोट शेयर के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसके साथ ही ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद संभाला और तब से लगातार सत्ता में बनी हुई हैं। बढ़ता वोट शेयर, मजबूत जनाधार टीएमसी की खासियत यह रही कि कई चुनावों में सीटें घटने के बावजूद उसका वोट प्रतिशत लगातार बढ़ता गया। 2019 लोकसभा चुनाव में सीटें 34 से घटकर 22 हुईं, लेकिन वोट शेयर बढ़कर 43 प्रतिशत हो गया। 2021 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 47.9 प्रतिशत वोट और 213 सीटों के साथ रिकॉर्ड प्रदर्शन किया। लोकसभा चुनावों में प्रदर्शन (संक्षेप): 1998: 24.4 प्रतिशत | 1999: 26 प्रतिशत | 2004: 21 प्रतिशत | 2009: 31 प्रतिशत | 2014: 39 प्रतिशत | 2019: 43 प्रतिशत | 2024: 46 प्रतिशत विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन: 2001: 30.7 प्रतिशत | 2006: 26.6 प्रतिशत | 2011: 38.9 प्रतिशत | 2016: 44.9 प्रतिशत | 2021: 47.9 प्रतिशत यह आंकड़े दर्शाते हैं कि पार्टी का जनाधार लगातार मजबूत हुआ है और ममता बनर्जी का व्यक्तिगत प्रभाव भी बढ़ा है। भाजपा की चुनौती और भविष्य की राह राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की है, जिससे टीएमसी के सामने कड़ी चुनौती खड़ी हुई है। इसके बावजूद टीएमसी की मजबूती के पीछे महिला मतदाताओं और अल्पसंख्यक समुदायों का भरोसा महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है। ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं ने पार्टी के सामाजिक आधार को और मजबूत किया है। आज तृणमूल कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की क्षेत्रीय अस्मिता का प्रतीक बन चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक ममता बनर्जी का सीधा संवाद जनता से बना रहेगा, तब तक उनके मजबूत गढ़ को भेदना किसी भी विपक्षी दल के लिए आसान नहीं होगा। अन्य समाचार भी पढ़ें: 🔹 राजनीति समाचार देश और राज्य की ताजा राजनीतिक हलचल, बयानबाजी और नीतिगत फैसलों की पूरी जानकारी 🔹 बंगाल समाचार बिहार के हर जिले से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें, विकास, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्ट 🔹 खेल समाचार क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों की ताजा अपडेट, खिलाड़ियों का प्रदर्शन और विश्लेषण 🔹 मनोरंजन समाचार फिल्म, टीवी और वेब सीरीज की दुनिया की खबरें, सेलिब्रिटी अपडेट और रिव्यू 🔹 चुनाव समाचार लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय चुनावों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर और विश्लेषण

  • जनगणना 2026 में ‘कलबी’ नाम से पंजीकरण का आह्वान, गादीपति महंत दयाराम जी का संदेश

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिकारपुरा तीर्थधाम। आगामी जनगणना 2026 को लेकर सामाजिक, राजनैतिक और शासकीय भागीदारी के निर्धारण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए कलबी समाज के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया गया है। शिकारपुरा स्थित पावन तीर्थधाम में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में वर्तमान गादीपति महंत दयाराम जी महाराज ने समाज को संबोधित करते हुए स्पष्ट आह्वान किया कि आगामी जनगणना में सभी समाजबंधु अपनी जाति का पंजीकरण “कलबी” नाम से ही करवाएं। महंत दयाराम जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि भविष्य में सामाजिक, राजनैतिक एवं शासकीय हिस्सेदारी का आधार होती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति से बचते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को ठोस एवं प्रमाणिक जानकारी के साथ सही निर्णय लेना आवश्यक है। उन्होंने समाज के बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों तथा शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों से अपील की कि वे जाति से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों एवं साक्ष्यों का संकलन कर उनका गहन अध्ययन एवं विचार-विमर्श करें। विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मनन-मंथन और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही यह निर्णय लिया गया है कि समाज को “कलबी” नाम से ही संगठित रूप में प्रस्तुत होना चाहिए। इस अवसर पर महंत श्री ने समाज के पूर्व गुरुवर किशनाराम जी महाराज के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 से लेकर अपने निर्वाण काल तक गुरुवर ने जाति को “कलबी” के रूप में स्थापित करने के लिए सतत प्रयास किए थे। प्रारंभ में विभिन्न संस्थाओं के नाम “आंजणा” से प्रचलित होने के बावजूद, बाद में उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर उन्होंने “कलबी” नाम को ही उपयुक्त माना और उसी दिशा में कार्य किया। महंत दयाराम जी महाराज ने समाज से आग्रह किया कि वे गुरु परंपरा के इस मार्गदर्शन को स्वीकार करते हुए एकजुटता के साथ आगे बढ़ें, ताकि भविष्य में समाज को उचित प्रतिनिधित्व और अधिकार प्राप्त हो सकें। कार्यक्रम के अंत में समाज के सर्वांगीण विकास एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए भगवान श्री कृष्ण एवं गुरु महाराज की कृपा सभी पर बनी रहने की प्रार्थना की गई।

  • मल्लतहल्ली में क्रिकेट स्पर्धा का आयोजन, 14 टीमों ने दिखाया दमखम

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। मल्लतहल्ली क्रिकेटर्स के तत्वावधान में स्थानीय एआईटी खेल मैदान में भव्य क्रिकेट स्पर्धा का आयोजन किया गया, जिसमें कुल 14 टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल न केवल शारीरिक विकास का माध्यम है, बल्कि यह अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता को भी विकसित करता है। उन्होंने सभी प्रतिभागी टीमों की सराहना करते हुए खेल भावना के साथ प्रतिस्पर्धा करने की अपील की। प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों के बीच रोमांचक संघर्ष देखने को मिला, जहां खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा और कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। अंततः विजेता टीम को ट्रॉफी एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। साथ ही उपविजेता टीम को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आयोजकों ने मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय खेल प्रेमी, युवा एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार की प्रतियोगिताओं से क्षेत्र में खेल गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है और युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का मंच मिलता है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे आयोजन जारी रखने की बात कही।

  • वैशाली की धरती पर इतिहास से साक्षात्कार: शिक्षा, संस्कार और सच का संगम,खबर नहीं, उसका अर्थ

    भारतार्थ खबर, संवाददाता मकेश्वर सिंह वैशाली बिहार ( Bhaarataarth.com ) बिहार की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर वैशाली एक बार फिर शिक्षा और संस्कार के संगम का केंद्र बनी। उच्च माध्यमिक विद्यालय, कौरू-धौरू, मदीपुर कला (बिहार) के विद्यार्थियों को प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार राम  जी के सौजन्य से शैक्षिक भ्रमण पर वैशाली लाया गया। इस अवसर पर मकेश्वर सिंह  सहित विद्यालय के अन्य सहयोगियों ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर इस ऐतिहासिक यात्रा को साकार किया। इस भ्रमण के दौरान छात्रों ने वैशाली के प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया, जिनमेंबुद्ध स्तूप, राजा विशाल का गढ़, महावीर जैन मंदिर और बुद्ध मंदिर प्रमुख रहे। इतिहास को देखने का नहीं, समझने का अवसर यह यात्रा केवल एक शैक्षिक भ्रमण नहीं थी, बल्कि छात्रों के लिए इतिहास को करीब से महसूस करने का एक अवसर था।बुद्ध स्तूप के सामने खड़े होकर छात्रों ने शांति और करुणा के संदेश को महसूस किया,तो वहीं राजा विशाल के गढ़ ने उन्हें भारत के प्राचीन लोकतांत्रिक स्वरूप की झलक दिखाई। खबर का अर्थ: शिक्षा का असली स्वरूप आज की शिक्षा प्रणाली में किताबों का महत्व तो है,लेकिन अनुभव आधारित शिक्षा की कमी साफ दिखाई देती है। ऐसे में यह भ्रमण एक महत्वपूर्ण संदेश देता है —👉 शिक्षा केवल जानकारी नहीं, बल्कि समझ और अनुभव का मेल है। जब छात्र इन ऐतिहासिक स्थलों को देखते हैं,तो वे केवल पढ़ाई नहीं करते, बल्कि इतिहास को जीते हैं। युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा इस प्रकार के शैक्षिक भ्रमण से छात्रों में: 1.अपनी संस्कृति और इतिहास के प्रति जागरूकता बढ़ती है 2.सोचने और समझने की क्षमता विकसित होती है 3.राष्ट्र के प्रति जुड़ाव मजबूत होता है विश्लेषण: क्यों जरूरी हैं ऐसे प्रयास   डिजिटल युग में जहां बच्चे मोबाइल और स्क्रीन तक सीमित हो रहे हैं,वहीं इस तरह के प्रयास उन्हें वास्तविक दुनिया और अपने अतीत से जोड़ते हैं। यह केवल भ्रमण नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और जागरूकता की यात्रा है। वैशाली केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि एक संदेश है —कि मजबूत समाज और राष्ट्र का निर्माण तभी संभव हैजब नई पीढ़ी अपने इतिहास और मूल्यों को समझे। ऐसे प्रयास हर विद्यालय में होने चाहिए,ताकि हमारे बच्चे केवल पढ़े-लिखे नहीं, बल्कि जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनें। स्रोत: स्थानीय संवाददाता मकेश्वर सिंह समाचार🌐 Website: https://www.bhaarataarth.com   अन्य समाचार भी पढ़ें: 🔹 राजनीति समाचार देश और राज्य की ताजा राजनीतिक हलचल, बयानबाजी और नीतिगत फैसलों की पूरी जानकारी 🔹 बिहार समाचार बिहार के हर जिले से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें, विकास, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्ट 🔹 खेल समाचार क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों की ताजा अपडेट, खिलाड़ियों का प्रदर्शन और विश्लेषण 🔹 मनोरंजन समाचार फिल्म, टीवी और वेब सीरीज की दुनिया की खबरें, सेलिब्रिटी अपडेट और रिव्यू 🔹 चुनाव समाचार लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय चुनावों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर और विश्लेषण आज की ताज़ा खबरें समाचार भी देखें

  • कर्नाटक में ममता चौधरी ने रचा इतिहास, पीयू परीक्षा में हासिल किए 100 प्रतिशत अंक

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। कर्नाटक सरकार के प्री-विश्वविद्यालय शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित वार्षिक परीक्षा में माउंट कार्मेल पीयू कॉलेज की छात्रा ममता चौधरी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 प्रतिशत अंक प्राप्त कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 31 मार्च 2026 को घोषित परिणामों में ममता की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे शैक्षणिक क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। पंजीकरण संख्या 25P1344 के साथ परीक्षा में शामिल हुई ममता चौधरी ने SEBA संयोजन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सभी विषयों में पूर्ण अंक हासिल किए। यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, लगन और अनुशासन का परिणाम मानी जा रही है। ममता की माता भावना चौधरी और पिता नरेश चौधरी ने बेटी की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ममता ने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रही। परिवार ने उसकी सफलता को ईश्वर की कृपा और निरंतर परिश्रम का फल बताया। शिक्षकों ने भी ममता की सराहना करते हुए उसे एक प्रेरणास्रोत बताया है। उनका कहना है कि ममता की यह उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी और यह साबित करती है कि दृढ़ निश्चय और मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। ममता चौधरी की इस ऐतिहासिक सफलता पर परिजनों, मित्रों और समाज के लोगों ने उन्हें हार्दिक बधाई दी है तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

  • शादी से लौट रहे युवक की तलवार से हत्या, उदयपुर के गांव में तनाव—6-7 हमलावरों पर केस

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) उदयपुर (राजस्थान)। जिले के पाटिया थाना क्षेत्र स्थित खेड़ाघाटी (बलीचा) गांव में सोमवार देर रात एक युवक की तलवार से निर्मम हत्या कर दी गई। घटना उस समय हुई जब युवक शादी समारोह से लौट रहा था। वारदात के बाद पूरे गांव में तनाव फैल गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तीन थानों की पुलिस मौके पर तैनात कर दी गई है। पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान नीलेश गरासिया (35) पुत्र लालजी के रूप में हुई है, जो अहमदाबाद में बिल्डिंग ठेकेदारी का कार्य करता था। वह अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए कुछ दिन पहले ही गांव आया था। सोमवार रात करीब 2 बजे वह अपने चचेरे भाई नरेश गरासिया के साथ स्कूटी से घर लौट रहा था। घात लगाकर किया हमला बताया जा रहा है कि शादी समारोह से निकलते ही पहले से घात लगाए बैठे 6-7 बदमाशों ने उनका पीछा शुरू कर दिया। करीब 200 मीटर आगे सुनसान स्थान पर आरोपियों ने स्कूटी रुकवाकर नीलेश पर अचानक हमला कर दिया। तलवार से किए ताबड़तोड़ वार हमलावरों के पास तलवार सहित अन्य धारदार हथियार थे। उन्होंने नीलेश के हाथ, गर्दन और कमर पर लगातार कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के दौरान साथ मौजूद नरेश किसी तरह जान बचाकर भाग निकला। हमलावरों की पहचान, कई नाम सामने आए प्रत्यक्षदर्शी नरेश के अनुसार हमलावरों में अनिल, विपिन, जयदीप, बद्री, हितेश सहित अन्य युवक शामिल थे। इनमें से कुछ आरोपी शादी समारोह में मौजूद थे, जबकि अन्य बाहर इंतजार कर रहे थे। घटना के बाद आरोपी फरार वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को खेरवाड़ा अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया। परिजनों की सहमति के बाद पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई की जाएगी। पुरानी रंजिश बनी वजह प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मृतक और आरोपियों के बीच लंबे समय से चली आ रही रंजिश इस हत्या का कारण हो सकती है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है। गांव में आक्रोश, प्रदर्शन घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश फैल गया। परिजन और ग्रामीण आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी व मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने ढोल बजाकर पंचायत भी बुलाई, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। तीन थानों की पुलिस तैनात स्थिति को देखते हुए पाटिया, पहाड़ा और खेरवाड़ा थानों का अतिरिक्त पुलिस जाब्ता गांव में तैनात किया गया है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं। फॉरेंसिक जांच और पुलिस कार्रवाई फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। पाटिया थानाधिकारी देवेन्द्र सिंह राव ने बताया कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद घटना के कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।

  • असम चुनाव से पहले बड़ा दलबदल: अमीनुल इस्लाम कांग्रेस में शामिल, बदरुद्दीन के बाद थे एआईयूडीएफ के ‘नंबर दो’

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मनकचर से विधायक अमीनुल इस्लाम ने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट छोड़कर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दामन थाम लिया है। कभी एआईयूडीएफ में बदरुद्दीन अजमल के बाद ‘नंबर दो’ की हैसियत रखने वाले इस्लाम का यह कदम चुनावी समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है। बुधवार को उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान राज्य कांग्रेस नेतृत्व भी मौजूद रहा। उतार-चढ़ाव भरा रहा राजनीतिक सफर अमीनुल इस्लाम का हालिया राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। एआईयूडीएफ से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने असम गण परिषद में शामिल होने का मन बनाया था, लेकिन टिकट नहीं मिलने के कारण वहां उनका सफर बेहद छोटा साबित हुआ। अंततः उन्होंने कांग्रेस को अपना नया ठिकाना चुना। कांग्रेस नेताओं से मुलाकात को बताया ‘सार्थक’ कांग्रेस में शामिल होने के बाद इस्लाम ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए गौरव गोगोई, जितेंद्र सिंह और भूपेश बघेल के साथ हुई मुलाकात को “सार्थक और सौहार्दपूर्ण” बताया। उन्होंने कहा कि यह चर्चा मनकचर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण रही और इससे एक नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत होगी। एआईयूडीएफ ने किया था 6 साल के लिए निलंबित गौरतलब है कि मार्च महीने में एआईयूडीएफ ने अमीनुल इस्लाम को छह साल के लिए निलंबित कर दिया था। पार्टी के महासचिव हाफिज बशीर अहमद द्वारा जारी आदेश में इस्लाम पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और संगठन के हितों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे। चुनावी मुकाबला होगा सीधा असम में आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और कांग्रेस के बीच होने की संभावना है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही है। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्य की 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। राजनीतिक समीकरणों पर असर संभव विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाले अमीनुल इस्लाम के कांग्रेस में शामिल होने से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। इससे कांग्रेस को कुछ क्षेत्रों में मजबूती मिल सकती है, वहीं एआईयूडीएफ को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

  • ऊपरी असम पर सियासी संग्राम तेज, पहचान की राजनीति के बीच बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) जोरहाट (असम)। असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है और विशेष रूप से ऊपरी असम क्षेत्र राजनीतिक दलों के लिए निर्णायक रणभूमि बनकर उभरा है। 40 से अधिक विधानसभा सीटों वाले इस क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। दोनों ही दल इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। ऊपरी असम में इस बार चुनावी मुद्दे विकास से ज्यादा ‘पहचान’ और ‘अधिकार’ के इर्द-गिर्द घूमते नजर आ रहे हैं। बीजेपी जहां खुद को असमिया पहचान का रक्षक बताने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस सामाजिक संतुलन और गठबंधन के जरिए वापसी की रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी की रणनीति: पहचान और जमीन का मुद्दा राज्य की बीजेपी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में अतिक्रमण हटाने के बड़े अभियान चलाए हैं। सरकारी और वन भूमि से करीब 1.5 लाख बीघा जमीन को मुक्त कराया गया है। इन अभियानों के दौरान लगभग 50 हजार लोगों को बेदखल किया गया, जिसे बीजेपी ‘कानून और व्यवस्था’ तथा ‘स्थानीय अधिकारों की रक्षा’ के रूप में पेश कर रही है। इसके अलावा मतदाता सूचियों में संशोधन और कथित फर्जी वोटरों की पहचान को भी पार्टी अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित कर रही है। लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ बीजेपी ने टिकट वितरण में भी बदलाव करते हुए करीब 19 विधायकों के टिकट काटे हैं। कांग्रेस का गठबंधन दांव दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस बार व्यापक गठबंधन के सहारे चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। पार्टी ने असम जातीय परिषद, रायजोर दल, वाम दलों—भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी)—और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस के साथ तालमेल किया है। हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव में ऊपरी असम में कांग्रेस को केवल 5 सीटों पर जीत मिली थी, जिससे उसकी स्थिति कमजोर मानी जा रही है। नए खिलाड़ी और बदलता समीकरण इस बार चुनावी मैदान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। पार्टी ने 16 उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे वोटों का बंटवारा होने की संभावना है। इसके अलावा, क्षेत्रीय दलों—रायजोर दल और असम जातीय परिषद—ने पिछले पांच वर्षों में अपनी जमीनी पकड़ मजबूत की है, जिससे पारंपरिक दलों की चुनौती बढ़ गई है। दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई जोरहाट से चुनाव लड़ रहे हैं, जिसे ऊपरी असम का राजनीतिक केंद्र माना जाता है। वहीं अखिल गोगोई सिबसागर से मैदान में हैं, जिन्होंने पिछली बार जेल में रहते हुए जीत दर्ज की थी। खोवांग सीट पर लुरिनज्योति गोगोई और बीजेपी के चक्रधर गोगोई के बीच कड़ा मुकाबला है। दुलियाजान में कांग्रेस के ध्रुबा गोगोई और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रामेश्वर तेली आमने-सामने हैं।नाहरकटिया सीट पर कांग्रेस, बीजेपी, वामपंथी दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। क्यों अहम है ऊपरी असम? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऊपरी असम न केवल सीटों की संख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां के चाय बागान श्रमिक, आदिवासी समुदाय और असमिया पहचान से जुड़े मुद्दे पूरे राज्य की राजनीति को प्रभावित करते हैं। पिछले एक दशक में इन वर्गों पर कांग्रेस की पकड़ कमजोर हुई है, जबकि बीजेपी ने संगठित तरीके से अपने जनाधार को मजबूत किया है। ऐसे में यह क्षेत्र आगामी चुनावों के परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। कुल मिलाकर, ऊपरी असम इस बार चुनावी जंग का केंद्र बन गया है, जहां पहचान, जमीन और गठबंधन की राजनीति के बीच बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। आने वाले चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि इस रणनीतिक क्षेत्र में किसकी पकड़ मजबूत होती है और असम की सत्ता किसके हाथ में जाती है।

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