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पूर्णिमा पर कबीर सत्संग में उमड़ा श्रद्धा का सागर, संत सुमिरन दास जी के प्रवचनों ने किया भाव-विभोर

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 2
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु। शहर के नेहरू रोड स्थित हेमाराम सीरवी के निवास हीरा पन्ना निकेतन पर पूर्णिमा के पावन अवसर पर भव्य कबीर सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण में भक्ति रस का आनंद लिया। संत कबीर साहेब के अनुयायी संत सुमिरन दास जी के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम ने श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक जागरण का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।


कार्यक्रम की शुरुआत महाप्रसादी के साथ हुई, जहां उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर सत्संग में सहभागिता की। इसके बाद कबीर साहेब की वाणी का पाठ एवं स्मरण किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु आध्यात्मिक भाव में डूब गए।



संत सुमिरन दास जी ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में कबीर साहेब के उपदेशों को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए कहा कि मानव जीवन का मूल उद्देश्य आत्मा का जागरण और परम सत्य की प्राप्ति है। उन्होंने बताया कि कबीर साहेब की वाणी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उनके समय में थी। यह वाणी मनुष्य को अज्ञानता से बाहर निकालकर सत्य और सद्मार्ग की ओर अग्रसर करती है।



सत्संग के दौरान भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत किए गए मधुर भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भजन गायक जोगाराम परिहार ने “सती बिछड़ियोड़ा राम ने मिलाया”, “राम भजन गायलों बीरा छुट जाएला शरीर” और “सुन-सुन सत्संग री बातों, जीवन सफल हो जावेला” जैसे भजनों की प्रस्तुति दी। वहीं सुरेश वैष्णव एंड पार्टी ने “आज मेरे सतगुरु साहेब आया बिनजारा” जैसे भजनों से समां बांध दिया। सतगुरु सुमिरन साहेब द्वारा प्रस्तुत “आज रो दिवस सखी जाऊं बलिहारी” एवं “सतगुरु मोए जगायो अबके” जैसे भजनों ने कार्यक्रम को और अधिक भक्तिमय बना दिया।


कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने संत सुमिरन दास जी से आशीर्वाद प्राप्त किया और आयोजन के लिए हेमाराम सीरवी का आभार व्यक्त किया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संचार देखने को मिला, जिसने उपस्थित जनसमूह के मन में गहरी आध्यात्मिक छाप छोड़ी।

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