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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • नोएडा हिंसा: वॉट्सऐप साजिश से भड़की भीड़, 150 हिरासत में

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) ग्रेटर नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सोमवार को भड़की हिंसा ने प्रशासन को चौंका दिया। शुरुआती जांच में यह मामला केवल श्रमिक असंतोष नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश के संकेत दे रहा है। पुलिस का दावा है कि हिंसा में शामिल कई लोग वास्तविक फैक्ट्री कर्मचारी नहीं, बल्कि बाहरी उपद्रवी थे, जिन्होंने माहौल को जानबूझकर बिगाड़ा। पुलिस का खुलासा: शांत माहौल में अचानक भड़की आग गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि प्रदर्शन पहले ही शांत हो चुका था, लेकिन अचानक बाहरी तत्व सक्रिय हो गए। ये लोग आसपास के गांवों से संगठित रूप से पहुंचे और उन्होंने ही तोड़फोड़ व आगजनी को हवा दी। पुलिस के अनुसार, श्रमिकों की आड़ में घुसे इन तत्वों ने भीड़ को उकसाकर स्थिति को हिंसक बना दिया। वॉट्सऐप ग्रुप बना हथियार जांच में सामने आया है कि हिंसा भड़काने के लिए रातों-रात कई वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए। क्यूआर कोड के जरिए लोगों को इन ग्रुप्स से जोड़ा गया और उनमें भड़काऊ संदेश प्रसारित किए गए। पुलिस इसे एक संगठित डिजिटल साजिश मान रही है, जिसका मकसद शांतिपूर्ण प्रदर्शन को उग्र बनाना था। सतर्कता के बावजूद बिगड़े हालात हरियाणा में हालिया घटनाओं के बाद प्रशासन पहले से अलर्ट था और संवेदनशील क्षेत्रों में फोर्स तैनात की गई थी। बावजूद इसके, बाहरी भीड़ के अचानक शामिल होने से हालात कुछ समय के लिए नियंत्रण से बाहर हो गए। हालांकि, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर स्थिति को काबू में कर लिया। 150 से अधिक हिरासत में, जांच तेज अब तक 150 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इनमें वास्तविक कर्मचारी कितने हैं और बाहरी उपद्रवी कितने। साथ ही इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सक्रिय संगठनों या नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। बिना नेतृत्व के बढ़ती गई भीड़ सूत्रों के अनुसार, पिछले चार दिनों से चल रहे इस प्रदर्शन का कोई स्पष्ट नेतृत्व नहीं था। अलग-अलग कंपनियों के कर्मचारी इकट्ठा होते गए और भीड़ स्वतः बढ़ती चली गई। प्रशासन के बातचीत प्रयासों के दौरान भी कोई सामने आकर नेतृत्व करने को तैयार नहीं हुआ, जिससे समाधान में बाधा आई। मजदूरों की मांगें बनीं मूल मुद्दा श्रमिकों ने न्यूनतम मजदूरी, 8 घंटे की शिफ्ट, ओवरटाइम भुगतान और नाइट ड्यूटी अलाउंस जैसी मांगें उठाईं। राज्य सरकार, जिसकी अगुवाई योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं, का दावा है कि कई मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। हालांकि, कुछ कर्मचारियों का कहना है कि उद्योग प्रबंधन की भूमिका स्पष्ट नहीं रही। प्रशासन की अपील: अफवाहों से रहें दूर जिला प्रशासन ने श्रमिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार, कंपनियों के साथ हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं— कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति का गठन शिकायत पेटियों की व्यवस्था हर महीने 10 तारीख तक वेतन भुगतान सुनिश्चित करना कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार को प्राथमिकता देना प्रशासन का कहना है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए फैल रही भ्रामक सूचनाओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

  • बिहार में सत्ता बदलाव की आहट तेज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पटना। बिहार की सियासत में इन दिनों तेजी से बदलते घटनाक्रमों ने सत्ता परिवर्तन की अटकलों को और हवा दे दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे की चर्चाओं के बीच राजधानी पटना में राजनीतिक हलचल चरम पर पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार, 14 अप्रैल मंगलवार को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री पद से उनके इस्तीफा देने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास पर दिनभर उच्चस्तरीय बैठकों का दौर जारी रहा। इस बैठक में जदयू और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिससे सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं को और बल मिला है। खास बात यह रही कि राज्यपाल के सचिव भी सम्राट चौधरी के आवास पहुंचे और वहां से आवश्यक दस्तावेज लेकर राजभवन लौटे। इसे आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार के गठन को लेकर मंत्रियों की संभावित सूची भी तैयार कर ली गई है और इसे राजभवन तक पहुंचा दिया गया है। इससे संकेत मिलते हैं कि सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उधर, भारतीय जनता पार्टी ने 14 अप्रैल को पटना में विधायक दल की अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। यह बैठक नए मुख्यमंत्री के चयन में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। वहीं, जदयू विधायक दल की बैठक भी उसी दिन प्रस्तावित है, जिससे दोनों दलों के बीच अंतिम सहमति बनने की उम्मीद जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन बैठकों के बाद बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। हालांकि, अभी तक किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन सियासी गलियारों में संभावित चेहरों को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें 14 अप्रैल पर टिकी हैं, जब बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • बेंगलूरु में राजपूताना सेवा संगठन का स्थापना दिवस धूमधाम से संपन्न

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। भारतीय राजपूताना सेवा संगठन का स्थापना दिवस समारोह शहर में अत्यंत उत्साह, गरिमा और सामाजिक एकजुटता के संदेश के साथ भव्य रूप से आयोजित किया गया। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजन, मातृशक्ति, युवा वर्ग एवं संगठन के विभिन्न पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिससे पूरे वातावरण में सांस्कृतिक गरिमा और उत्साह का संचार हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कर्नाटक पुलिस के पूर्व सहायक पुलिस आयुक्त टी. जी. संग्राम सिंह तथा कन्नड़ सिनेमा के प्रख्यात फिल्म निर्देशक राजेंद्र सिंह बाबू विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सिंह सिकरवार ने की। मंच पर राष्ट्रीय सचिव वीरेंद्र सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुधांशु सिंह, बेंगलूरु अध्यक्ष सुनील सिंह, आर.टी. नगर अध्यक्ष चितरंजन सिंह तथा व्हाइटफील्ड अध्यक्ष आशुतोष सिंह सहित अनेक गणमान्य पदाधिकारी मौजूद रहे। अपने प्रेरणादायक संबोधन में मुख्य अतिथि टी. जी. संग्राम सिंह ने समाज की एकता को सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए युवाओं से समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। वहीं राजेंद्र सिंह बाबू ने समाज को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, मूल्यों और गौरवशाली विरासत से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। समारोह के दौरान प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत कविता पाठ, नृत्य एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा और दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की। इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में अनिल सिंह सिकरवार ने कहा कि भारतीय राजपूताना सेवा संगठन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि समाज की एकता, स्वाभिमान और सेवा का सशक्त मंच है। उन्होंने बताया कि संगठन वर्तमान में देश के 16 राज्यों में सक्रिय रूप से कार्यरत है और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से समाज को संगठित करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को समाज के उत्थान में लगाने तथा अपनी संस्कृति और इतिहास पर गर्व करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान संगठन के सक्रिय पदाधिकारियों संजय सिंह, आशुतोष सिंह, अनिरुद्ध सिंह, रोहिणी सिंह एवं संगीता सिंह को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया, जिससे कार्यकर्ताओं का उत्साह और बढ़ा। समारोह के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने संगठन को और सशक्त बनाने तथा समाज सेवा के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

  • बंगाल चुनाव में वोटिंग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू (SIR) के दौरान जिन लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें फिलहाल वोट डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस फैसले से राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। दरअसल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे। इसके खिलाफ प्रभावित लोगों ने भारी संख्या में अपीलें दाखिल कीं। अदालत में पेश आंकड़ों के अनुसार, 11 अप्रैल तक लगभग 34 लाख से अधिक अपीलें दायर की जा चुकी हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई थी कि इन अपीलों के निपटारे तक संबंधित लोगों को मतदान का अधिकार दिया जाए, खासकर तब जब 23 अप्रैल 2026 को मतदान प्रस्तावित है। सुनवाई के दौरान पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने साफ कहा कि इस तरह की अनुमति देना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने टिप्पणी की कि यदि अपील लंबित रहने के बावजूद मतदान की छूट दी जाती है, तो इससे अपीलीय ट्रिब्यूनलों पर असामान्य दबाव पड़ेगा और पूरी चुनावी प्रक्रिया अव्यवस्थित हो सकती है। मामले में राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि सूची से हटाए गए कई लोग वास्तविक मतदाता हैं और उनके अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जिनकी अपीलें 22 अप्रैल तक स्वीकार हो जाएं, उन्हें कम से कम मतदान का अवसर दिया जाए। हालांकि, अदालत ने इस प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया और कहा कि इससे व्यवस्था में और जटिलता उत्पन्न हो सकती है। इस बीच कलकत्ता उच्च न्यायालय से भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि बड़ी संख्या में दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है, लेकिन तकनीकी कारणों से कुछ मामले अभी लंबित हैं। इन मामलों के शीघ्र समाधान के लिए तीन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक समिति गठित की गई है, जो पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का कार्य करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष और व्यवस्थित चुनाव प्रक्रिया सर्वोच्च प्राथमिकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का सीधा असर लाखों मतदाताओं पर पड़ेगा और यह मुद्दा चुनावी बहस के केंद्र में रह सकता है। अब सबकी नजरें अपीलों के त्वरित निपटारे और चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

  • “बिहार की सत्ता पर ‘बाहरी नियंत्रण’ का आरोप, तेजस्वी का एनडीए पर तीखा हमला”

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पटना। बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। तेजस्वी यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार के पद छोड़ने के बाद राज्य की सरकार का संचालन बिहार से नहीं, बल्कि गुजरात से होगा और मुख्यमंत्री चयन का फैसला “जनता नहीं, बल्कि दो लोग” मिलकर करेंगे। पत्रकारों से बातचीत में तेजस्वी यादव ने कहा कि यह स्थिति लोकतांत्रिक जनादेश का अपमान है। उनके अनुसार, एनडीए ने जिस चेहरे के नाम पर जनता से वोट मांगे थे, अब उसी को हटाकर सत्ता समीकरण बदले जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नई सरकार भले ही बिहार में बने, लेकिन उसका वास्तविक नियंत्रण राज्य से बाहर रहेगा। तेजस्वी ने बिना नाम लिए नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की ओर इशारा करते हुए कहा कि सत्ता का निर्णय कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित हो गया है, जिससे लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर हो रही है। “20 साल में भी पिछड़ा बिहार” एनडीए सरकार के दो दशक के शासन पर निशाना साधते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि इतने लंबे समय के बावजूद बिहार आज भी देश के सबसे गरीब राज्यों में शुमार है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रति व्यक्ति आय, निवेश, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम क्षेत्रों में राज्य लगातार पिछड़ता जा रहा है। उनका कहना था कि उद्योग और रोजगार के अवसरों की कमी ने युवाओं को पलायन के लिए मजबूर कर दिया है। खजाना खाली करने का आरोप राज्य की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि निवर्तमान सरकार जाते-जाते खजाना खाली कर रही है। उन्होंने दावा किया कि हालात ऐसे हैं कि विधायकों के वेतन तक के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचे हैं। साथ ही विकास कार्यों के भुगतान में देरी और बढ़ते भ्रष्टाचार व अपराध को भी उन्होंने सरकार की विफलता बताया। “कुर्सी के खेल में उलझी एनडीए” तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि एनडीए जनता के मुद्दों से भटककर केवल सत्ता बचाने और समीकरण साधने में लगी है। उन्होंने कहा कि जनता दल (यूनाइटेड) अब स्वतंत्र राजनीतिक दल नहीं रह गया है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव में काम कर रहा है। छात्र संगठन का पुनर्गठन इस बीच तेजस्वी यादव ने राष्ट्रीय जनता दल के छात्र संगठन में बड़े बदलाव की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि ‘छात्र आरजेडी’ को भंग कर दिया गया है और इसका नया नाम ‘सोशलिस्ट स्टूडेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भारत का सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप लिया गया है। नया संगठन छात्रों के अधिकार, शिक्षा में समानता और जागरूकता अभियानों पर केंद्रित रहेगा। राजनीतिक माहौल गर्म बिहार में संभावित सत्ता परिवर्तन को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर जहां विपक्ष सत्तारूढ़ गठबंधन पर लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता करने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर एनडीए की ओर से इन आरोपों पर अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

  • ओवैसी का आरोप: मोदी-ममता में ‘गुप्त समझौता’, बंगाल की राजनीति गरमाई

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता/मुर्शिदाबाद। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज होते ही सियासी बयानबाज़ी भी चरम पर पहुंच गई है। इसी क्रम में असदुद्दीन ओवैसी के एक तीखे बयान ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर “गुप्त समझौते” का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों नेता “एक ही सिक्के के दो पहलू” हैं। मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भाजपा के बीच अंदरूनी तालमेल है, जिसका खामियाजा राज्य के मुसलमानों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में उन्हें पूरा नहीं किया जाता। ओवैसी ने विशेष रूप से वक्फ अधिनियम को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने इसे लागू न करने का वादा किया था, लेकिन यह सिर्फ वोट हासिल करने की रणनीति थी। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में मुसलमानों के साथ “गंभीर अन्याय” हुआ है और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है। इस पूरे विवाद को उस समय और बल मिला जब टीएमसी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक कथित ‘स्टिंग वीडियो’ का जिक्र सामने आया। इस वीडियो में एक क्षेत्रीय नेता द्वारा कथित तौर पर बड़ी रकम के सौदे की बात कही गई है, जिसे लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। एआईएमआईएम ने इसे मुस्लिम समाज की गरिमा से जुड़ा मुद्दा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। ओवैसी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए यह भी कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में भी पश्चिम बंगाल में हजारों मुसलमानों को नोटिस देकर बेदखल किया गया था, जो आज भी समुदाय के बीच असुरक्षा की भावना को दर्शाता है। इसके साथ ही उन्होंने बीड़ी उद्योग से जुड़ी महिलाओं के लिए न्यूनतम मजदूरी लागू करने का वादा किया और कहा कि एआईएमआईएम सत्ता में आने पर श्रमिक वर्ग के हितों को प्राथमिकता देगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में विकास केवल कोलकाता तक सीमित है, जबकि मुर्शिदाबाद जैसे जिलों की अनदेखी की जा रही है। ओवैसी ने चेतावनी देते हुए कहा कि मुर्शिदाबाद के “न्याय” के लिए कोलकाता में ‘चक्का जाम’ किया जाएगा, जिससे राज्य सरकार पर दबाव बनाया जा सके। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ओवैसी का यह बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य मुस्लिम वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करना है। वहीं, टीएमसी और भाजपा दोनों ही इन आरोपों को सिरे से खारिज कर चुके हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने के आसार हैं।

  • तमिलनाडु में 3 दिन ‘ड्राई डे’, चुनाव से पहले सख्ती तेज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाते हुए राज्यभर में शराब बिक्री पर तीन दिनों का पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। 21 अप्रैल 2026 सुबह 10 बजे से 23 अप्रैल 2026 आधी रात तक टीएएसएमएसी की सभी शराब दुकानें बंद रहेंगी। इस फैसले के बाद जहां प्रशासन पूरी तरह सतर्क है, वहीं आम लोगों में शराब का स्टॉक करने की होड़ मच गई है। चुनाव आयोग का सख्त निर्देश चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की शराब की बिक्री, वितरण या अवैध भंडारण पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आयोग ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान शराब के दुरुपयोग को रोकना निष्पक्ष मतदान के लिए बेहद जरूरी है। दुकानों पर उमड़ी भीड़ ड्राई डे की घोषणा के बाद राज्य के कई हिस्सों में टीएएसएमएसी दुकानों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग पहले से ही शराब खरीदकर रखने में जुट गए हैं, जिससे कई स्थानों पर भारी भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बनती नजर आई। 20 हजार उपद्रवियों पर पुलिस की नजर चुनाव के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियों ने भी कमर कस ली है। तमिलनाडु पुलिस ने राज्यभर में करीब 20,000 हिस्ट्रीशीटर और आदतन अपराधियों को चिन्हित कर उनकी निगरानी शुरू कर दी है। इन्हें A+, A, B और C श्रेणियों में बांटा गया है। अकेले चेन्नई में ही करीब 4,000 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनमें कई फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस को आशंका है कि ये तत्व चुनाव के दौरान माहौल बिगाड़ने या मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। 234 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल 2026 को मतदान होना है। इस बार कुल 4,023 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। मतदाताओं की सुविधा के लिए 75,097 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें अतिरिक्त बूथ भी शामिल हैं। भीषण गर्मी के बावजूद राजनीतिक दलों ने प्रचार अभियान में पूरी ताकत झोंक दी है। रैलियां, रोड शो और जनसंपर्क अभियान तेज हो चुके हैं। चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था राज्यभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और विशेष निगरानी टीमें तैनात की गई हैं। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। शराब प्रतिबंध के साथ-साथ अन्य चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। निष्पक्ष मतदान पर फोकस प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि किसी भी कीमत पर चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता से समझौता नहीं किया जाएगा। सख्ती के बीच यह देखना अहम होगा कि मतदाता कितनी बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं।

  • महिला आरक्षण से सशक्त होगा भारत: विजयेंद्र

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि महिला आरक्षण का निर्णय देश के लोकतांत्रिक इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को शिक्षा, अर्थव्यवस्था, रक्षा और अब राजनीति में भी व्यापक अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। शहर के पुट्टन्ना चेट्टी टाउन हॉल में आयोजित “नारी शक्ति वंदन एक्ट-2026” विषयक महिला टाउन हॉल कार्यक्रम में बोलते हुए करंदलाजे ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और देश के विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी सौंपने का सशक्त माध्यम भी है। कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना समय की मांग है। “महिलाओं का सदियों पुराना सपना अब साकार होने जा रहा है,” उन्होंने कहा। विजयेंद्र ने पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर आरक्षण, ‘भाग्य लक्ष्मी’ जैसी योजनाएं और छात्राओं के लिए साइकिल योजना जैसे कदमों ने ग्रामीण महिलाओं और बालिकाओं के आत्मसम्मान को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं प्रशासन, खेल, साहित्य और सामाजिक सेवा सहित हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों ने भी अपने विचार साझा किए। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अश्विनी नचप्पा, लेखिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता सीनू जोसेफ, अधिवक्ता एवं अभिनेत्री मालविका अविनाश सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने महिला आरक्षण के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि “नारी शक्ति वंदन एक्ट” केवल सीटों का आरक्षण नहीं, बल्कि देश की प्रगति में महिलाओं की सक्रिय और निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में महिलाएं न केवल नेतृत्व करेंगी, बल्कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएंगी।

  • बेंगलूरु में पासपोर्ट मॉडल पर ‘सेवा केंद्र’ लाएगा जीबीए

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। नागरिक सेवाओं को तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की दिशा में ग्रेटर बेंगलूरु अथॉरिटी (जीबीए) ने बड़ा कदम उठाया है। अथॉरिटी अब पासपोर्ट सेवा केंद्र की तर्ज पर शहर में आधुनिक “सेवा केंद्र” स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को एक ही छत के नीचे दर्जनों सेवाएं त्वरित और व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहरभर में लगभग 10 सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां प्रत्येक नगर निगम क्षेत्र में दो केंद्र संचालित होंगे। इन केंद्रों में करीब 27 प्रकार की नागरिक सेवाएं प्रदान की जाएंगी। इनका उद्देश्य मौजूदा ‘बैंगलोर वन’ केंद्रों के विकल्प के रूप में अधिक कुशल, समयबद्ध और पारदर्शी सेवा व्यवस्था तैयार करना है। अधिकारियों का कहना है कि इन सेवा केंद्रों में आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह सरल और त्वरित बनाया जाएगा, जिससे नागरिकों को लंबी प्रतीक्षा, फाइलों के इधर-उधर घूमने और अनावश्यक देरी से राहत मिलेगी। हालांकि, इन सेवाओं के लिए निर्धारित शुल्क सरकारी शुल्क से कुछ अधिक होगा, लेकिन यह बिचौलियों के माध्यम से वसूले जाने वाले भारी-भरकम खर्च की तुलना में काफी कम रहेगा। जीबीए के विशेष आयुक्त मुनीश मौदगिल के अनुसार, “इन केंद्रों पर पूरी प्रक्रिया एक ही स्थान पर पूरी की जाएगी। इससे आवेदनों के निस्तारण में तेजी आएगी और नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।” नए सेवा केंद्रों में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, व्यापार लाइसेंस, भवन निर्माण योजना स्वीकृति, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जैसे ई-खाता, ए-खाता और बी-खाता आवंटन व रूपांतरण जैसी प्रमुख सेवाएं उपलब्ध होंगी। उदाहरण के तौर पर, ई-खाता सेवा के लिए लगभग ₹1,000, बी-खाता को ए-खाता में बदलने के लिए ₹2,500 तथा अपार्टमेंट से संबंधित खाता सेवाओं के लिए प्रति फ्लैट करीब ₹1,500 शुल्क प्रस्तावित है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान व्यवस्था में ई-खाता का सरकारी शुल्क मात्र ₹125 है, लेकिन प्रक्रियागत देरी और जटिलताओं के कारण नागरिकों को बिचौलियों के जरिए ₹3,000 से लेकर ₹60,000 तक खर्च करना पड़ता है। नई प्रणाली से इस समस्या पर अंकुश लगने की उम्मीद है। यह परियोजना फिलहाल निविदा प्रक्रिया में है, जिसमें निजी एजेंसियों को संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। हालांकि, केंद्रों पर जीबीए के अधिकारी भी तैनात रहेंगे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और आवेदनों का निस्तारण मौके पर ही किया जा सके। बताया जा रहा है कि ये सेवा केंद्र जून या जुलाई तक शुरू हो सकते हैं। शहर में चल रहे लगभग 22 लाख संपत्ति अभिलेखों के डिजिटलीकरण कार्य को भी इससे गति मिलेगी। कुल मिलाकर, जीबीए की यह पहल न केवल नागरिक सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है, बल्कि इससे भ्रष्टाचार और देरी जैसी समस्याओं में भी कमी आने की उम्मीद है।

  • बिहार में सत्ता परिवर्तन की आहट, कैबिनेट बैठक कल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पटना। बिहार की राजनीति एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतिश कुमार की अध्यक्षता में 14 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक को मौजूदा सरकार की अंतिम बैठक माना जा रहा है। इसके साथ ही राज्य में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। बैठक से पहले बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि “मुख्यमंत्री जो भी निर्णय लेंगे, सभी मंत्री और विधायक उसका पालन करेंगे।” उनके इस बयान को सत्तारूढ़ गठबंधन में पूर्ण सहमति का संकेत माना जा रहा है। अंतिम कैबिनेट बैठक में भावुक माहौल के आसार सूत्रों के अनुसार, सचिवालय में सुबह 11 बजे होने वाली इस बैठक में मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल के सहयोग के लिए आभार व्यक्त कर सकते हैं। साथ ही, कैबिनेट के सदस्य भी उनके लंबे कार्यकाल और नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्हें बधाई संदेश दे सकते हैं। इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री के इस्तीफे की संभावना जताई जा रही है। 14 अप्रैल: पटना में सियासी हलचल चरम पर डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद राजभवन जाकर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने की संभावना है। दिनभर राजधानी पटना में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहेंगी। कैबिनेट बैठक के बाद भाजपा, जदयू, लोजपा (राम विलास), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक दलों की अलग-अलग बैठकें होंगी। इसके पश्चात एनडीए विधायक दल की संयुक्त बैठक में नए नेता का चयन किया जाएगा, जो राज्य के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। पर्यवेक्षक के रूप में शिवराज सिंह चौहान की भूमिका अहम भाजपा नेतृत्व ने केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। वे 14-15 अप्रैल 2026 को पटना में रहकर विधायक दल की बैठक और नेता चयन प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। उनके मार्गदर्शन में अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है। सीएम आवास पर मंथन जारी इस बीच 1, अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर लगातार बैठकों का दौर जारी है। जदयू और सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेता नई सरकार के गठन, मंत्रालयों के बंटवारे और आगे की रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, सत्ता हस्तांतरण की पूरी रूपरेखा लगभग तैयार हो चुकी है। सत्ता परिवर्तन की उलटी गिनती शुरू बिहार में बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता परिवर्तन अब केवल औपचारिकता भर रह गया है। आने वाले 24 घंटे राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे और नई सरकार के गठन के साथ एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।

  • बेंगलूरु स्वच्छता रैंकिंग सुधारने की दौड़ में

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। देश के प्रमुख महानगरों में शुमार बेंगलूरु ने इस वर्ष स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी छवि सुधारने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान छेड़ दिया है। पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में पांचवें सबसे प्रदूषित शहर के रूप में सामने आने के बाद प्रशासन ने कमर कसते हुए शहर के पांचों नगर निगमों में बड़े पैमाने पर सफाई कार्य शुरू कर दिए हैं। नगर निगमों की टीमें इन दिनों फ्लाईओवर, अंडरपास, बरसाती जल निकासी नालियों, प्रमुख चौराहों और अन्य उपेक्षित स्थानों की साफ-सफाई में जुटी हुई हैं। इसके साथ ही शहर के विभिन्न “ब्लैक स्पॉट” चिन्हित कर उन्हें सौंदर्यीकरण के माध्यम से स्वच्छ और आकर्षक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के तात्कालिक और दिखावटी प्रयास स्वच्छ सर्वेक्षण में अपेक्षित परिणाम नहीं दिला पाएंगे। विशेषज्ञ वी. राम प्रसाद का कहना है कि पिछले एक दशक से यह सर्वेक्षण आयोजित हो रहा है, फिर भी अधिकारियों को मूल्यांकन प्रक्रिया की स्पष्ट समझ नहीं है। उन्होंने इसे बोर्ड परीक्षा से तुलना करते हुए कहा कि कुल 12,500 अंकों के इस सर्वेक्षण में 10,500 अंकों का विस्तृत वितरण विभिन्न मापदंडों पर आधारित है, लेकिन इन पर व्यवस्थित कार्य की कमी है। प्रसाद के अनुसार, दृश्य स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जन-जागरूकता अभियानों के लिए 1,500 अंक निर्धारित हैं, जबकि पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ीकरण, नागरिक प्रतिक्रिया, शिकायत निवारण, कचरा पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन और अपशिष्ट जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं के लिए 1,000 अंक तय किए गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल “प्लॉगिंग” या कुछ दिनों की सफाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि निरंतर और व्यवस्थित प्रयास आवश्यक हैं। इधर, बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (बीएसडब्ल्यूएमएल) का दावा है कि पिछले वर्ष की तुलना में कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, कचरा पृथक्करण की दर 60 प्रतिशत तक पहुंचाई गई है, “कासा कियोस्क” की स्थापना की गई है, ब्लैक स्पॉट्स को साफ किया गया है और स्कूलों व सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं। इसके बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों की भागीदारी और शिकायत निवारण व्यवस्था को अभी और मजबूत करने की आवश्यकता है, क्योंकि नए स्वच्छ सर्वेक्षण में इन पहलुओं को विशेष महत्व दिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर भी इस दिशा में सक्रियता देखी जा रही है। ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए) के मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव ने सभी पांचों नगर निगमों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे शहर की स्वच्छता बनाए रखने और रैंकिंग सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएं। गौरतलब है कि नए दिशानिर्देशों के तहत वर्तमान सर्वेक्षण (2025-26) में बेंगलुरु एक इकाई के रूप में भाग ले सकता है, जबकि भविष्य में इसके पांचों नगर निगम अलग-अलग भागीदारी कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन के ये प्रयास केवल सर्वेक्षण तक सीमित रहते हैं या बेंगलुरु को स्थायी रूप से स्वच्छ और सुव्यवस्थित शहर बनाने में सफल साबित होते हैं। फिलहाल, शहर को इस वर्ष स्वच्छता रैंकिंग में शीर्ष दस में स्थान पाने की उम्मीद है।

  • बेंगलूरु में व्हाइट टॉपिंग कार्य तेज

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। शहर के सड़क बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से चल रही ‘BSMILE’ (बीस्माइल) पहल के तहत व्हाइट टॉपिंग (पीक्यूसी) कार्य तेजी से प्रगति पर है। इस अभियान के अंतर्गत प्रमुख सड़कों पर उच्च गुणवत्ता वाली कंक्रीट परत बिछाकर लंबे समय तक चलने वाली सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में व्हाइट टॉपिंग का कार्य शहर के व्यस्त मार्गों—डॉ. राजकुमार रोड (राजाजीनगर) और मेजर अक्षय गिरीश कुमार रोड (येलहंका)—पर जारी है। इन सड़कों पर पीक्यूसी (पेवमेंट क्वालिटी कंक्रीट)) बिछाने का कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है, जिससे यातायात के दबाव को सहन करने वाली मजबूत सतह तैयार हो सके। अधिकारियों के अनुसार, यह पहल शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और बार-बार होने वाले सड़क मरम्मत कार्यों की समस्या का स्थायी समाधान प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़कें न केवल अधिक टिकाऊ होती हैं, बल्कि रखरखाव की लागत भी कम करती हैं और बारिश के मौसम में गड्ढों की समस्या से राहत दिलाती हैं। इस परियोजना के माध्यम से ग्रेटर बेंगलूरु अथॉरिटी शहर के विभिन्न हिस्सों में आधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाली सड़कें विकसित करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। इस पहल को राज्य सरकार का भी पूरा समर्थन प्राप्त है, जिसमें उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की विशेष रुचि बताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यातायात सुगम होगा और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि निर्माण कार्य के दौरान अस्थायी असुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सहयोग करें, ताकि शहर को बेहतर और सुरक्षित सड़कें जल्द मिल सकें।

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