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बेंगलूरु में पासपोर्ट मॉडल पर ‘सेवा केंद्र’ लाएगा जीबीए

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 13 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु। नागरिक सेवाओं को तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की दिशा में ग्रेटर बेंगलूरु अथॉरिटी (जीबीए) ने बड़ा कदम उठाया है। अथॉरिटी अब पासपोर्ट सेवा केंद्र की तर्ज पर शहर में आधुनिक “सेवा केंद्र” स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को एक ही छत के नीचे दर्जनों सेवाएं त्वरित और व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहरभर में लगभग 10 सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां प्रत्येक नगर निगम क्षेत्र में दो केंद्र संचालित होंगे। इन केंद्रों में करीब 27 प्रकार की नागरिक सेवाएं प्रदान की जाएंगी। इनका उद्देश्य मौजूदा ‘बैंगलोर वन’ केंद्रों के विकल्प के रूप में अधिक कुशल, समयबद्ध और पारदर्शी सेवा व्यवस्था तैयार करना है। अधिकारियों का कहना है कि इन सेवा केंद्रों में आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह सरल और त्वरित बनाया जाएगा, जिससे नागरिकों को लंबी प्रतीक्षा, फाइलों के इधर-उधर घूमने और अनावश्यक देरी से राहत मिलेगी। हालांकि, इन सेवाओं के लिए निर्धारित शुल्क सरकारी शुल्क से कुछ अधिक होगा, लेकिन यह बिचौलियों के माध्यम से वसूले जाने वाले भारी-भरकम खर्च की तुलना में काफी कम रहेगा। जीबीए के विशेष आयुक्त मुनीश मौदगिल के अनुसार, “इन केंद्रों पर पूरी प्रक्रिया एक ही स्थान पर पूरी की जाएगी। इससे आवेदनों के निस्तारण में तेजी आएगी और नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।”


नए सेवा केंद्रों में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, व्यापार लाइसेंस, भवन निर्माण योजना स्वीकृति, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जैसे ई-खाता, ए-खाता और बी-खाता आवंटन व रूपांतरण जैसी प्रमुख सेवाएं उपलब्ध होंगी। उदाहरण के तौर पर, ई-खाता सेवा के लिए लगभग ₹1,000, बी-खाता को ए-खाता में बदलने के लिए ₹2,500 तथा अपार्टमेंट से संबंधित खाता सेवाओं के लिए प्रति फ्लैट करीब ₹1,500 शुल्क प्रस्तावित है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान व्यवस्था में ई-खाता का सरकारी शुल्क मात्र ₹125 है, लेकिन प्रक्रियागत देरी और जटिलताओं के कारण नागरिकों को बिचौलियों के जरिए ₹3,000 से लेकर ₹60,000 तक खर्च करना पड़ता है। नई प्रणाली से इस समस्या पर अंकुश लगने की उम्मीद है।


यह परियोजना फिलहाल निविदा प्रक्रिया में है, जिसमें निजी एजेंसियों को संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। हालांकि, केंद्रों पर जीबीए के अधिकारी भी तैनात रहेंगे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और आवेदनों का निस्तारण मौके पर ही किया जा सके। बताया जा रहा है कि ये सेवा केंद्र जून या जुलाई तक शुरू हो सकते हैं। शहर में चल रहे लगभग 22 लाख संपत्ति अभिलेखों के डिजिटलीकरण कार्य को भी इससे गति मिलेगी। कुल मिलाकर, जीबीए की यह पहल न केवल नागरिक सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है, बल्कि इससे भ्रष्टाचार और देरी जैसी समस्याओं में भी कमी आने की उम्मीद है।

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