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बेंगलूरु स्वच्छता रैंकिंग सुधारने की दौड़ में

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 13
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु। देश के प्रमुख महानगरों में शुमार बेंगलूरु ने इस वर्ष स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी छवि सुधारने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान छेड़ दिया है। पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में पांचवें सबसे प्रदूषित शहर के रूप में सामने आने के बाद प्रशासन ने कमर कसते हुए शहर के पांचों नगर निगमों में बड़े पैमाने पर सफाई कार्य शुरू कर दिए हैं। नगर निगमों की टीमें इन दिनों फ्लाईओवर, अंडरपास, बरसाती जल निकासी नालियों, प्रमुख चौराहों और अन्य उपेक्षित स्थानों की साफ-सफाई में जुटी हुई हैं। इसके साथ ही शहर के विभिन्न “ब्लैक स्पॉट” चिन्हित कर उन्हें सौंदर्यीकरण के माध्यम से स्वच्छ और आकर्षक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।


हालांकि, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के तात्कालिक और दिखावटी प्रयास स्वच्छ सर्वेक्षण में अपेक्षित परिणाम नहीं दिला पाएंगे। विशेषज्ञ वी. राम प्रसाद का कहना है कि पिछले एक दशक से यह सर्वेक्षण आयोजित हो रहा है, फिर भी अधिकारियों को मूल्यांकन प्रक्रिया की स्पष्ट समझ नहीं है। उन्होंने इसे बोर्ड परीक्षा से तुलना करते हुए कहा कि कुल 12,500 अंकों के इस सर्वेक्षण में 10,500 अंकों का विस्तृत वितरण विभिन्न मापदंडों पर आधारित है, लेकिन इन पर व्यवस्थित कार्य की कमी है। प्रसाद के अनुसार, दृश्य स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जन-जागरूकता अभियानों के लिए 1,500 अंक निर्धारित हैं, जबकि पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ीकरण, नागरिक प्रतिक्रिया, शिकायत निवारण, कचरा पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन और अपशिष्ट जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं के लिए 1,000 अंक तय किए गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल “प्लॉगिंग” या कुछ दिनों की सफाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि निरंतर और व्यवस्थित प्रयास आवश्यक हैं।


इधर, बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (बीएसडब्ल्यूएमएल) का दावा है कि पिछले वर्ष की तुलना में कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, कचरा पृथक्करण की दर 60 प्रतिशत तक पहुंचाई गई है, “कासा कियोस्क” की स्थापना की गई है, ब्लैक स्पॉट्स को साफ किया गया है और स्कूलों व सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं। इसके बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों की भागीदारी और शिकायत निवारण व्यवस्था को अभी और मजबूत करने की आवश्यकता है, क्योंकि नए स्वच्छ सर्वेक्षण में इन पहलुओं को विशेष महत्व दिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर भी इस दिशा में सक्रियता देखी जा रही है। ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए) के मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव ने सभी पांचों नगर निगमों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे शहर की स्वच्छता बनाए रखने और रैंकिंग सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएं। गौरतलब है कि नए दिशानिर्देशों के तहत वर्तमान सर्वेक्षण (2025-26) में बेंगलुरु एक इकाई के रूप में भाग ले सकता है, जबकि भविष्य में इसके पांचों नगर निगम अलग-अलग भागीदारी कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन के ये प्रयास केवल सर्वेक्षण तक सीमित रहते हैं या बेंगलुरु को स्थायी रूप से स्वच्छ और सुव्यवस्थित शहर बनाने में सफल साबित होते हैं। फिलहाल, शहर को इस वर्ष स्वच्छता रैंकिंग में शीर्ष दस में स्थान पाने की उम्मीद है।

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