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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

22अक्टूबर /2026 /गुरुवार

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

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  • पद्मश्री आचार्य विजय नित्यानंद सूरिश्वरजी का JITO हॉस्टल में मंगल आगमन

    परम पूज्य आचार्य भगवंत पद्मश्री श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरिश्वरजी महाराज साहेब के स्वागत के दौरान JITO गर्ल्स हॉस्टल एवं एजुकेशन सेंटर का दृश्य। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हुबली | 17 जून, 2026 हुबली स्थित JITO गर्ल्स हॉस्टल और एजुकेशन सेंटर बुधवार सुबह उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति से सराबोर हो गया, जब परम पूज्य गच्छाधिपति आचार्य भगवंत पद्मश्री श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरिश्वरजी महाराज साहेब का मंगल आगमन हुआ। आचार्य भगवंत के पावन आगमन से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में बदल गया और JITO हुबली चैप्टर फाउंडेशन के सदस्यों, छात्रों और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। आचार्य भगवंत के स्वागत के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में JITO सदस्य, ट्रस्टी, छात्र-छात्राएं और समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का जयघोष और पुष्पवर्षा के साथ भव्य अभिनंदन किया। इस दौरान पूरे परिसर में आध्यात्मिक उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा। पद्मश्री सम्मान से अलंकृत आचार्य भगवंत देशभर में शिक्षा, नैतिकता और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में अपने असाधारण योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके मार्गदर्शन में संचालित 200 से अधिक शिक्षण संस्थान हजारों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्कार प्रदान कर रहे हैं। यही कारण है कि उनका यह दौरा छात्रों और समाज के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया। अपने संबोधन में आचार्य भगवंत ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण और अनुशासन का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता केवल डिग्री से नहीं बल्कि संस्कार, करुणा और नैतिक मूल्यों से मिलती है। गुरुदेव ने युवाओं को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सेवा भाव अपनाने की प्रेरणा दी। JITO गर्ल्स हॉस्टल एवं एजुकेशन सेंटर के प्रबंधन ने आचार्य भगवंत की दिव्य उपस्थिति को संस्थान के लिए सौभाग्य बताया। प्रबंधन समिति ने कहा कि गुरुदेव का आशीर्वाद छात्रों के उज्ज्वल भविष्य और संस्थान के मिशन को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। कार्यक्रम के समापन पर मंगल पाठ और आशीर्वचन हुए, जिससे उपस्थित सभी श्रद्धालु आध्यात्मिक रूप से भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर भंवरलाल सी. जैन (चेयरमैन), प्रकाशजी कोठारी, पूरणजी नाहटा, शरद मोमाया, महेंद्र पालगोटा, गौतम ओसवाल, अमृतलाल जैन, भरत भंडारी, प्रवेश कोठारी, सोहन टाटेड, भरत गुलेचा, नीरव मोमाया सहित कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

  • नासिक टीसीएस केस: एचआर पर आरोप, धर्मांतरण व उत्पीड़न की परतें खुलीं

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)नासिक। नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में कथित धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के मामले में जांच तेज होते ही चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपित कर्मचारी महिलाओं को निशाना बनाने के लिए संगठित तरीके से काम कर रहे थे। अब तक इस प्रकरण में नौ अलग-अलग मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें सात पुरुषों और एक महिला को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य महिला आरोपी फरार बताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी आठ महिला कर्मचारियों की शिकायतों की पड़ताल कर रही है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि उनके वरिष्ठ सहकर्मियों ने मानसिक दबाव के साथ-साथ यौन उत्पीड़न किया और जब उन्होंने इसकी शिकायत की, तो कंपनी के मानव संसाधन (एचआर) विभाग ने इसे नजरअंदाज कर दिया। “ऐसी बातें होती रहती हैं” कहकर टाली शिकायतें नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कार्णिक के अनुसार, जांच में सामने आया है कि यूनिट की ऑपरेशंस और एचआर हेड ने एक पीड़िता को शिकायत दर्ज कराने से रोकने की कोशिश की। आरोप है कि पीड़िताओं को यह कहकर चुप कराया गया—“ऐसी बातें होती रहती हैं।” इससे स्पष्ट होता है कि प्रबंधन स्तर पर भी लापरवाही या मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऑपरेशंस मैनेजर न्यायिक हिरासत में प्रकरण में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत नासिक की अदालत ने महिला ऑपरेशंस मैनेजर को 28 अप्रैल 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं, मामले में किसी चरमपंथी संगठन से संबंध या विदेशी फंडिंग की अटकलों पर पुलिस ने कहा है कि अभी जांच जारी है। इस संबंध में एसआईटी, एटीएस और एनआईए को भी पत्र भेजकर सहयोग मांगा गया है। पुरुष कर्मचारी ने भी दर्ज कराई शिकायत जांच के दौरान एक पुरुष कर्मचारी की शिकायत भी सामने आई है, जिसमें उसने आरोप लगाया है कि कार्यस्थल पर उसके धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और धार्मिक आधार पर उसे परेशान किया गया। इससे यह मामला केवल महिलाओं तक सीमित न रहकर व्यापक कार्यस्थल उत्पीड़न का रूप लेता दिख रहा है। आठ कर्मचारी गिरफ्तार, नाम उजागर पुलिस ने इस मामले में टीसीएस के आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसारी और शाहरुख शेख के नाम शामिल हैं, जबकि एक महिला ऑपरेशंस मैनेजर भी गिरफ्त में है। कंपनी प्रबंधन ने जताई चिंता एन. चंद्रशेखरन, चेयरमैन, टाटा संस ने इस पूरे घटनाक्रम को “बेहद चिंताजनक और दुखद” करार दिया है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए टीसीएस की मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) आरती सुब्रमण्यम की देखरेख में विस्तृत जांच कराई जा रही है, ताकि दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जांच जारी, कई सवाल बाकी फिलहाल पुलिस हर पहलू की गहन जांच कर रही है। कार्यस्थल की सुरक्षा, महिला कर्मचारियों के अधिकारों और कॉर्पोरेट जिम्मेदारी को लेकर यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेंगे।

  • गोविंदराज नगर में हर्षोल्लास से मनाया गया अंबेडकर जयंती समारोह

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। गोविंदराज नगर में भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की 135वीं जयंती बड़े हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन भारत रत्न डॉक्टर बी.आर. अंबेडकर दलित हित्तरक्षण समिति द्वारा किया गया, जिसमें समाज के अनेक गणमान्य लोग एवं क्षेत्रीय नागरिक उत्साहपूर्वक शामिल हुए। समारोह के मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने बाबासाहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने ही देश के प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार प्रदान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें अपने संविधान पर गर्व होना चाहिए और उसका सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बाबासाहेब के सामाजिक न्याय, शिक्षा और समानता के विचारों को आज भी प्रासंगिक बताते हुए उन्हें अपनाने का आह्वान किया। समिति के सदस्यों ने मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने बाबासाहेब के आदर्शों पर चलने और समाज में समरसता एवं समानता स्थापित करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

  • चतरा में मंदिर दीवार विवाद से तनाव, बाजार बंद

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हंटरगंज (चतरा), झारखंड। जिले के वशिष्ठ नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत दंतार गांव में गुरुवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब असामाजिक तत्वों द्वारा पंचमुखी हनुमान मंदिर की दीवार पर आपत्तिजनक शब्द लिखे जाने की घटना सामने आई। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया और देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने दंतार गांव के तिरमुहानी चौक पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया तथा स्वतःस्फूर्त रूप से पूरे बाजार को बंद करा दिया। सैकड़ों की संख्या में लोग मंदिर परिसर और मुख्य चौक पर जुट गए और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजा जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वशिष्ठ नगर थाना प्रभारी अमित कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अंचल अधिकारी रितिक कुमार ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर ग्रामीणों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की। घटना की सूचना मिलते ही जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत कराया गया। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार अग्रवाल और डीएसपी से फोन पर संपर्क कर त्वरित कार्रवाई की मांग की। प्रशासन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सतर्कता बढ़ा दी है। पुलिस ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है तथा स्थानीय स्तर पर मुखबिरों की मदद से आरोपियों की पहचान करने का प्रयास जारी है। साथ ही, लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की गई है। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं, जिससे प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है।

  • बंगाल में तबादलों पर सुप्रीम रोक नहीं, ममता सरकार को झटका

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच राज्य सरकार को उस समय बड़ा कानूनी झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर प्रशासनिक तबादलों में हस्तक्षेप से साफ इनकार कर दिया। ममता बनर्जी सरकार की ओर से दायर याचिका को शीर्ष अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में ही खारिज कर दिया, जिससे राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। तीन जजों की विशेष पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान अधिकारियों के तबादले चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और यह एक स्थापित संवैधानिक प्रक्रिया है। चुनाव आयोग की कार्रवाई को मिली न्यायिक मजबूती अदालत ने अपने फैसले में कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए प्रशासनिक फेरबदल करना आयोग का वैधानिक अधिकार है, जिसमें न्यायालय का हस्तक्षेप अत्यंत सीमित है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि ऐसी याचिकाओं में ठोस संवैधानिक आधार होना आवश्यक है, जो इस मामले में नहीं पाया गया। गौरतलब है कि चुनाव कार्यक्रम लागू होने के बाद आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया था। इस कदम को राज्य सरकार ने ‘अलोकतांत्रिक’ और ‘पक्षपाती’ बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सियासत गरम, आरोप-प्रत्यारोप तेज याचिका खारिज होते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे “संविधान और संस्थाओं की जीत” करार दिया, वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है। अन्य राज्यों के लिए भी नजीर कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। अदालत के रुख से स्पष्ट है कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक नियंत्रण के मामलों में आयोग की स्वायत्तता सर्वोपरि रहेगी। अब आगे क्या? सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद चुनाव आयोग द्वारा की गई नई नियुक्तियां यथावत रहेंगी। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और आदर्श आचार संहिता हटने तक इन तबादलों को चुनौती देना राज्य सरकार के लिए बेहद कठिन माना जा रहा है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनाव के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की व्यापक शक्तियां प्राप्त हैं। शीर्ष अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर इन शक्तियों की पुष्टि करते हुए चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता की प्राथमिकता को रेखांकित किया है।

  • नोएडा हिंसा: 13 मुकदमे, 62 गिरफ्तारियां; साजिश में विदेशी कनेक्शन के संकेत

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नोएडा। तीन दिनों तक चले उग्र प्रदर्शन और हिंसा के बाद नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में हालात अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। फेस-2 के सेक्टर 63, 57 समेत कई औद्योगिक इलाकों में फैक्ट्रियां फिर से खुल गई हैं और श्रमिक अपने काम पर लौटने लगे हैं। हालांकि स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती जारी है और संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी की जा रही है। पुलिस जांच में इस हिंसा को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार, हिंसा के दौरान 13 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और अब तक 62 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। खास बात यह है कि गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोग श्रमिक नहीं हैं, बल्कि बाहरी तत्व बताए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि हिंसा में शामिल असली मजदूरों को गिरफ्तार नहीं किया गया है। जांच के दौरान सोशल मीडिया की भूमिका सबसे अहम पाई गई है। पुलिस के मुताबिक, महज तीन दिनों में 80 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए, जिनका उद्देश्य मजदूरों को भड़काना और भीड़ जुटाना था। इनमें से लगभग 50 ग्रुप की जानकारी पुलिस के पास है, जबकि 17 ग्रुप का सत्यापन किया जा चुका है। इन ग्रुप्स में मजदूरों की समस्याओं से ज्यादा उकसावे और हिंसा से जुड़े संदेश साझा किए जा रहे थे। पुलिस ने यह भी दावा किया है कि हिंसा को भड़काने में विदेशी कनेक्शन सामने आया है। 13 तारीख को दो सोशल मीडिया हैंडल के जरिए भ्रामक जानकारी फैलाई गई, जिन्हें पाकिस्तान से संचालित बताया जा रहा है। इन हैंडल्स के माध्यम से क्यूआर कोड के जरिए लोगों को जोड़ा गया और उन्हें भड़काने की कोशिश की गई। जांच में तीन संगठनों की भूमिका भी सामने आई है, जिन पर मजदूरों को उकसाने का आरोप है। इनमें एक संगठन के प्रमुख रूपेश राय को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 18 अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, इन संगठनों के तार हरियाणा के मानेसर में हुई पूर्व औद्योगिक हिंसा से भी जुड़े पाए गए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क विभिन्न राज्यों में सक्रिय हो सकता है। घटना के बाद पुलिस ने फेस-2, सेक्टर 63, सेक्टर 57 और ईकोटेक-3 जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी है। ड्रोन और सीसीटीवी के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है, वहीं फ्लैग मार्च के जरिए लोगों में सुरक्षा का भरोसा बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह आंदोलन वास्तव में मजदूरों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया था या फिर इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश काम कर रही थी। जिस तरह से अचानक बड़ी संख्या में सोशल मीडिया ग्रुप बनाए गए, भड़काऊ संदेश फैलाए गए और विभिन्न स्थानों पर एक साथ हिंसा हुई, उसने इस मामले को महज विरोध प्रदर्शन से कहीं अधिक गंभीर बना दिया है। फिलहाल नोएडा में शांति बहाल है, लेकिन पुलिस और प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि भविष्य में माहौल बिगाड़ने की किसी भी कोशिश पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • लखनऊ में सिलेंडर ब्लास्ट से भीषण आग, सैकड़ों परिवार बेघर

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) लखनऊ। राजधानी लखनऊ के विकास नगर क्षेत्र में बुधवार शाम एक भयावह अग्निकांड ने पूरे इलाके को दहला दिया। सीतापुर बाईपास के समीप स्थित मजदूरों की बस्ती में लगी मामूली आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। बस्ती में रखे 100 से अधिक गैस सिलेंडरों में एक के बाद एक हुए धमाकों से पूरा आसमान लाल हो उठा और लपटें करीब 30 फीट ऊंचाई तक पहुंच गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम करीब 4 बजे एक झोपड़ी में लगी छोटी सी चिंगारी ने कुछ ही मिनटों में सैकड़ों झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। झुग्गियों में रखे घरेलू सामान, कपड़े और ज्वलनशील वस्तुओं ने आग को और भड़काने का काम किया। सिलेंडरों के लगातार विस्फोट से आसपास की कॉलोनियों में दहशत फैल गई और लोग अपने घरों से निकलकर सड़कों पर आ गए। हालात इतने भयावह थे कि स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर करीब 50 सिलेंडरों को बाहर निकालकर पास के नाले में फेंक दिया, जिससे संभावित बड़े हादसे को टाला जा सका। हालांकि, तब तक आग बेकाबू हो चुकी थी और धुएं का काला गुबार कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा था। घटना के दौरान अपनों को बचाने की कोशिश में जुटे लोगों और पुलिस के बीच तीखी झड़प भी हुई। सुरक्षा कारणों से पुलिस द्वारा बस्ती में प्रवेश रोकने पर आक्रोशित भीड़ ने पथराव कर दिया, जिसमें पुलिसकर्मियों और सिविल डिफेंस के जवानों सहित 8 से 10 लोग घायल हो गए। दमकल विभाग के लिए यह अभियान किसी युद्ध से कम नहीं था। बार-बार हो रहे सिलेंडर ब्लास्ट के बीच आग बुझाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था। दर्जनों दमकल गाड़ियों और करीब 8 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद देर रात आग पर काबू पाया जा सका। दमकल कर्मियों की तत्परता से आग पास के पक्के मकानों तक फैलने से रोक ली गई, जिससे एक बड़ी त्रासदी टल गई। इस भीषण अग्निकांड में भारी नुकसान हुआ है। सैकड़ों झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं और कई परिवार बेघर हो गए। राहत की बात यह रही कि किसी मानव हानि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन करीब 50 से अधिक मवेशियों की जलकर मौत हो गई। फिलहाल प्रशासन ने राहत और पुनर्वास कार्य शुरू कर दिया है। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। स्थानीय लोगों को अस्थायी आश्रय और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

  • यात्री हितों को लेकर रेल महाप्रबंधक से सार्थक संवाद

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हुबली। दक्षिण पश्चिम रेलवे के मुख्यालय में आज यात्री सुविधाओं और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर यात्री हितार्थ संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने महाप्रबंधक पी. अनंत से शिष्टाचार भेंट की। लगभग एक घंटे तक चली इस बैठक में रेल यात्रियों की समस्याओं, सुविधाओं के विस्तार और सेवाओं के सुधार पर गंभीरता से चर्चा हुई। समिति के संयोजक सुभाष सिंह जमादार एवं उत्तम ओ. साठिया ने विभिन्न मुद्दों को सुव्यवस्थित और प्रभावशाली ढंग से महाप्रबंधक के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने विशेष रूप से राजस्थानी समाज के यात्रियों को हो रही कठिनाइयों, ट्रेन संचालन, ठहराव, आरक्षण तथा बुनियादी सुविधाओं से संबंधित समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। बैठक के दौरान महाप्रबंधक पी. अनंत ने विषयों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर संवाद किया और आवश्यक निर्देश जारी किए। उन्होंने आश्वासन दिया कि यात्रियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाएगा तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर प्राथमिकता के साथ कार्रवाई होगी। इस अवसर पर दुदाराम चौधरी, पर्वत सिंह खींची, सतीश माली, अमृत भाई जैन, बाबूलाल सिरवी, बाबूलाल जैन, महेंद्र पालगोता, धर्मेन्द्र माली, त्रिवेंद्रम खत्री, ईश्वर शर्मा एवं अभिषेक मेहता सहित अन्य गणमान्य समिति के कई प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने बैठक को सफल और परिणामदायी बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। बैठक का माहौल सकारात्मक और समाधान केंद्रित रहा, जिससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। समिति ने महाप्रबंधक का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के संवाद से रेलवे प्रशासन और यात्रियों के बीच समन्वय मजबूत होता है तथा जनहित के कार्यों को गति मिलती है।

  • पैचवर्क सड़कों की पोल: खुदाई के बाद भी बदहाल हालात

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। शहर की सड़कों पर बार-बार किए जा रहे पैचवर्क की हकीकत एक बार फिर उजागर हो गई है। हाल ही में सामने आई तस्वीरों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि मरम्मत के नाम पर बनाई गई सड़क को कुछ ही समय बाद फिर से खोद दिया गया, जिससे आमजन को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। घटना बेंगलूरु शहर के चिकपेट- मामूली पेट रोड एक व्यस्त बाजार क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां सड़क निर्माण के बाद पाइपलाइन या अन्य भूमिगत कार्यों के लिए जेसीबी मशीन से गहरी खुदाई की जा रही है। तस्वीरों में मजदूर संकरी खाई में काम करते नजर आ रहे हैं, जबकि आसपास दुकानदार और राहगीर इस अव्यवस्था से परेशान दिखाई देते हैं। खुदाई के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया है और लोगों को आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले सड़क बनाई जाती है और कुछ ही दिनों में उसे दोबारा खोद दिया जाता है। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी होती है, बल्कि धूल, कीचड़ और जाम जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। दुकानदारों ने बताया कि ऐसे हालात में उनका व्यापार भी प्रभावित होता है, क्योंकि ग्राहक रास्ता खराब होने के कारण दुकान तक नहीं पहुंच पाते। विशेषज्ञों का मानना है कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी इस समस्या का मुख्य कारण है। यदि सड़क निर्माण से पहले ही सभी आवश्यक भूमिगत कार्यों की योजना बना ली जाए, तो बार-बार खुदाई की नौबत नहीं आएगी। नगर निगम और संबंधित विभागों से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें और निर्माण कार्यों में बेहतर समन्वय स्थापित करें, ताकि आमजन को राहत मिल सके और शहर की सड़कों की गुणवत्ता में सुधार हो।

  • जयपुर में शामलात अधिवेशन का आगाज़, गौ आश्रय स्थलों की घोषणा

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) जयपुर, 15 अप्रैल। राजस्थान में साझा संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए “राजस्थान शामलात अधिवेशन 2026” का बुधवार को जयपुर स्थित इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान में भव्य शुभारंभ हुआ। “कॉमन्स के साथ हमारी समृद्धि को आकार देना” विषय पर आधारित इस अधिवेशन का उद्घाटन पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने किया। अधिवेशन को संबोधित करते हुए मंत्री दिलावर ने चारागाह, जल स्रोत, वन एवं वेटलैंड जैसे साझा संसाधनों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संतुलन की रीढ़ बताते हुए इनके संरक्षण एवं सुव्यवस्थित प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि इन संसाधनों का वैज्ञानिक तरीके से विकास किया जाए तो न केवल पर्यावरण संरक्षण संभव है, बल्कि ग्रामीण आजीविका को भी नई दिशा मिल सकती है। गौ माता आश्रय स्थलों की बड़ी पहल मंत्री ने राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा करते हुए बताया कि निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए प्रदेश की 457 पंचायत समितियों के अंतर्गत प्रत्येक में एक-एक ग्राम पंचायत स्तर पर “पंडित दीनदयाल उपाध्याय चारागाह विकास आधारित गौ माता आश्रय स्थल” स्थापित किए जाएंगे। इन आश्रय स्थलों पर जल संरक्षण, पक्की पानी की व्यवस्थाएं, वृक्षारोपण, चारागाह विकास, चारा भंडारण तथा कंपोस्ट खाद उत्पादन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे गौवंश को प्राकृतिक वातावरण में बेहतर जीवन मिल सकेगा, वहीं भूजल स्तर में सुधार और किसानों को जैविक खाद की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी। बीज बैंक से चारागाह विकास को बढ़ावा मंत्री दिलावर ने बताया कि गोचर एवं औरण भूमि के संरक्षण के लिए प्रदेश में 150 बीज बैंक स्थापित किए जा चुके हैं, जिन्हें बढ़ाकर 300 करने का लक्ष्य रखा गया है। इन बीज बैंकों के माध्यम से देशी घास, चारा और वृक्षों के बीजों का संरक्षण एवं संवर्धन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल लुप्तप्राय वनस्पतियों को बचाया जा सकेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इसके लिए “बीज गुणी” भी चयनित किए गए हैं, जो इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पंचायतों की भूमिका पर जोर संस्थान के महानिदेशक नीरज के. पवन ने अपने संबोधन में कहा कि ग्राम पंचायतें साझा संसाधनों की सबसे प्रभावी संरक्षक बन सकती हैं। यदि पंचायत स्तर पर जनभागीदारी को मजबूत किया जाए, तो चारागाह और अन्य संसाधनों का संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से संभव है। सम्मान, विमोचन और प्रदर्शनी कार्यक्रम के दौरान मंत्री दिलावर ने विभिन्न क्षेत्रों से आए समुदायों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया। साथ ही जमीनी लेखकों की कहानियों के संकलन “शामलात की गाथा” का विमोचन किया गया। अधिवेशन में शामलात संसाधनों के महत्व और उनसे जुड़े उत्पादों पर आधारित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया गया, जिसने प्रतिभागियों को इन संसाधनों की उपयोगिता और संभावनाओं से रूबरू कराया। इस अधिवेशन के माध्यम से राज्य सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि साझा संसाधनों के संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के जरिए ग्रामीण विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा।

  • लोकसभा परिसीमन बिल 2026: 815 सीटों वाला मोदी सरकार का सबसे बड़ा दांव!

    50% सीटें बढ़ाने की तैयारी! संसद का पूरा गणित बदलने जा रही केंद्र सरकार लोकसभा सीटों में 50% बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार की बड़ी तैयारी भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 13 जून, 2026| मोदी सरकार देश की राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करने की तैयारी में दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार जल्द ही संसद में ‘परिसीमन विधेयक 2026’ पेश कर सकती है, जिसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 815 तक की जा सकती है। इस खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि सरकार संविधान संशोधन के जरिए संसद की सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का प्लान तैयार कर रही है। इसके लिए सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने पर भी विचार कर रही है। यदि यह बिल पास होता है तो स्वतंत्र भारत के इतिहास में संसद की संरचना में यह सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव का उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व को और मजबूत बनाना है। सरकार ‘समानुपातिक विस्तार मॉडल’ पर काम कर रही है, ताकि किसी भी राज्य की मौजूदा हिस्सेदारी प्रभावित न हो। यानी सभी राज्यों की सीटें आनुपातिक रूप से बढ़ाई जाएंगी। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पूरी तरह गलत हैं। सरकार का कहना है कि दक्षिण भारत या छोटे राज्यों के प्रतिनिधित्व में किसी प्रकार की कटौती नहीं होगी। बल्कि सभी राज्यों को जनसंख्या और मौजूदा अनुपात के आधार पर लाभ मिलेगा। हालांकि इस बिल को पास कराना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। संविधान संशोधन के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत यानी कम से कम 360 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा, जबकि वर्तमान में एनडीए के पास लगभग 293 सांसद हैं। ऐसे में सरकार को कई क्षेत्रीय दलों और विपक्षी पार्टियों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह बिल पारित होता है तो आने वाले वर्षों में देश का पूरा चुनावी गणित बदल सकता है। लोकसभा के साथ-साथ राज्यों की राजनीति पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिलेगा। Fact Box - वर्तमान लोकसभा सीटें: 543 - प्रस्तावित सीटें: लगभग 815 - संभावित वृद्धि: 50% - प्रस्तावित बिल: परिसीमन विधेयक 2026 - आवश्यक बहुमत: 360 सांसद - NDA की वर्तमान ताकत: 293 सांसद FAQ Section सवाल 1: परिसीमन विधेयक 2026 क्या है? यह एक प्रस्तावित संविधान संशोधन बिल है जिसके जरिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। सवाल 2: लोकसभा सीटें कितनी बढ़ सकती हैं? सूत्रों के मुताबिक सीटें 543 से बढ़कर लगभग 815 तक हो सकती हैं। सवाल 3: क्या दक्षिण भारत की सीटें कम होंगी? सरकार का दावा है कि सभी राज्यों की सीटें आनुपातिक रूप से बढ़ेंगी और किसी की हिस्सेदारी कम नहीं होगी। सवाल 4: बिल पास होने के लिए कितने सांसदों का समर्थन चाहिए? संविधान संशोधन के लिए लोकसभा में कम से कम 360 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा। सवाल 5: क्या संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है? सूत्रों के अनुसार सरकार विशेष सत्र बुलाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। निष्कर्ष: परिसीमन विधेयक 2026 भारतीय राजनीति का गेमचेंजर साबित हो सकता है। यदि यह बिल संसद से पास हो जाता है तो देश की चुनावी राजनीति, राज्यों का प्रतिनिधित्व और सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार की अगली रणनीति और विपक्ष के रुख पर टिकी हुई है। News Source: राजनीतिक सूत्र, संसदीय चर्चाएं एवं मीडिया रिपोर्ट्स अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है। राष्ट्र निर्माण में बनें भागीदार। सही, सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए भारतार्थ खबर से जुड़े रहें और दूसरों को भी जोड़ें। Support करें – Like | Share | Follow। ताकि हर जरूरी खबर आप तक सबसे पहले पहुंचे। ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

  • PM मोदी के सामने CM विजय की बड़ी डिमांड! NEET से AIIMS तक रखीं कई शर्तें

    नीति आयोग की बैठक में तमिलनाडु CM विजय ने केंद्र से मांगे ज्यादा अधिकार, फंड और दूसरा AIIMS नीति आयोग बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के सामने अपनी मांगें रखते तमिलनाडु CM सी. जोसेफ विजय भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 13 जून, 2026| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार के सामने कई बड़ी मांगें रखकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। बैठक में विजय ने राज्यों को ज्यादा अधिकार, अतिरिक्त वित्तीय सहायता और सहकारी संघवाद को मजबूत करने की जोरदार पैरवी की। सीएम विजय ने साफ शब्दों में कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब राज्यों को मजबूत बनाया जाएगा और विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगा। उन्होंने तमिलनाडु को देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा कि राज्य 2036 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर “यूथ स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट मिशन” शुरू करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि हर जिले में आधुनिक तकनीक आधारित स्किल सेंटर खोले जाएं, जहां युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, डीप टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेमीकंडक्टर जैसे हाई-टेक सेक्टर में ट्रेनिंग दी जा सके। सबसे ज्यादा चर्चा विजय की उस मांग को लेकर हो रही है, जिसमें उन्होंने तमिलनाडु के कोयंबटूर में दूसरे AIIMS की स्थापना की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इसके लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराने को तैयार है और केंद्र को जल्द मंजूरी देनी चाहिए। शिक्षा के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने मेडिकल और डेंटल एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली NEET परीक्षा का एक बार फिर विरोध करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को नुकसान हो रहा है। विजय ने मांग की कि राज्य को MBBS, BDS और AYUSH सीटों में स्टेट कोटा केवल 12वीं के अंकों के आधार पर भरने की अनुमति दी जाए। महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार को लेकर भी तमिलनाडु मॉडल को उन्होंने बैठक में प्रमुखता से रखा। विजय ने बताया कि देश की फैक्ट्रियों में काम करने वाली कुल महिलाओं में से 42 प्रतिशत महिलाएं अकेले तमिलनाडु में कार्यरत हैं। उन्होंने “सिंगा पेन सिरप्पु अथिरदी पडाई” नामक महिला विशेष एक्शन फोर्स का भी जिक्र किया। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए 2,045 करोड़ रुपये की सहकारी फसल ऋण माफी योजना, मछुआरों की सुरक्षा, श्रीलंका और पाकिस्तान में बंद भारतीय मछुआरों की रिहाई, आपदा प्रबंधन, भारतनेट परियोजना और स्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब जैसे मुद्दों पर भी केंद्र से सहयोग की मांग की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय का यह आक्रामक रुख आगामी चुनावी राजनीति में बड़ा संदेश दे सकता है। खासकर NEET, AIIMS और राज्यों के अधिकार जैसे मुद्दे दक्षिण भारत की राजनीति में बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। Fact Box - बैठक: नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल - अध्यक्षता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - मुख्य मांग: कोयंबटूर में दूसरा AIIMS - NEET पर रुख: परीक्षा का विरोध - लक्ष्य: 2036 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था - युवाओं के लिए प्रस्ताव: यूथ स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट मिशन FAQ Section सवाल 1: CM विजय ने PM मोदी से क्या बड़ी मांग रखी? उन्होंने तमिलनाडु के कोयंबटूर में दूसरा AIIMS स्थापित करने की मांग की। सवाल 2: विजय ने NEET पर क्या कहा? उन्होंने NEET परीक्षा का विरोध करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण और गरीब छात्रों को नुकसान हो रहा है। सवाल 3: यूथ स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट मिशन क्या है? यह युवाओं को AI, साइबर सिक्योरिटी और अन्य आधुनिक तकनीकों में ट्रेनिंग देने का प्रस्तावित मिशन है। सवाल 4: तमिलनाडु का आर्थिक लक्ष्य क्या है? राज्य 2036 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखता है। सवाल 5: बैठक में और कौन-कौन से मुद्दे उठाए गए? किसान कर्ज माफी, मछुआरों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे उठाए गए। निष्कर्ष: नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का आक्रामक और मांगों से भरा रुख केंद्र और राज्यों के रिश्तों को लेकर नई राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है। NEET से लेकर AIIMS और राज्यों के अधिकार तक, विजय ने कई ऐसे मुद्दे उठाए हैं जो आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकते हैं। News Source: नीति आयोग बैठक, सरकारी बयान एवं मीडिया रिपोर्ट्स अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है। राष्ट्र निर्माण में बनें भागीदार। सही, सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए भारतार्थ खबर से जुड़े रहें और दूसरों को भी जोड़ें। Support करें – Like | Share | Follow। ताकि हर जरूरी खबर आप तक सबसे पहले पहुंचे। ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

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