नोएडा हिंसा: 13 मुकदमे, 62 गिरफ्तारियां; साजिश में विदेशी कनेक्शन के संकेत
- धन्नाराम चौधरी

- 16 जून
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
नोएडा। तीन दिनों तक चले उग्र प्रदर्शन और हिंसा के बाद नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में हालात अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। फेस-2 के सेक्टर 63, 57 समेत कई औद्योगिक इलाकों में फैक्ट्रियां फिर से खुल गई हैं और श्रमिक अपने काम पर लौटने लगे हैं। हालांकि स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती जारी है और संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी की जा रही है।
पुलिस जांच में इस हिंसा को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार, हिंसा के दौरान 13 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और अब तक 62 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। खास बात यह है कि गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोग श्रमिक नहीं हैं, बल्कि बाहरी तत्व बताए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि हिंसा में शामिल असली मजदूरों को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
जांच के दौरान सोशल मीडिया की भूमिका सबसे अहम पाई गई है। पुलिस के मुताबिक, महज तीन दिनों में 80 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए, जिनका उद्देश्य मजदूरों को भड़काना और भीड़ जुटाना था। इनमें से लगभग 50 ग्रुप की जानकारी पुलिस के पास है, जबकि 17 ग्रुप का सत्यापन किया जा चुका है। इन ग्रुप्स में मजदूरों की समस्याओं से ज्यादा उकसावे और हिंसा से जुड़े संदेश साझा किए जा रहे थे।
पुलिस ने यह भी दावा किया है कि हिंसा को भड़काने में विदेशी कनेक्शन सामने आया है। 13 तारीख को दो सोशल मीडिया हैंडल के जरिए भ्रामक जानकारी फैलाई गई, जिन्हें पाकिस्तान से संचालित बताया जा रहा है। इन हैंडल्स के माध्यम से क्यूआर कोड के जरिए लोगों को जोड़ा गया और उन्हें भड़काने की कोशिश की गई।
जांच में तीन संगठनों की भूमिका भी सामने आई है, जिन पर मजदूरों को उकसाने का आरोप है। इनमें एक संगठन के प्रमुख रूपेश राय को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 18 अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, इन संगठनों के तार हरियाणा के मानेसर में हुई पूर्व औद्योगिक हिंसा से भी जुड़े पाए गए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क विभिन्न राज्यों में सक्रिय हो सकता है।
घटना के बाद पुलिस ने फेस-2, सेक्टर 63, सेक्टर 57 और ईकोटेक-3 जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी है। ड्रोन और सीसीटीवी के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है, वहीं फ्लैग मार्च के जरिए लोगों में सुरक्षा का भरोसा बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह आंदोलन वास्तव में मजदूरों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया था या फिर इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश काम कर रही थी। जिस तरह से अचानक बड़ी संख्या में सोशल मीडिया ग्रुप बनाए गए, भड़काऊ संदेश फैलाए गए और विभिन्न स्थानों पर एक साथ हिंसा हुई, उसने इस मामले को महज विरोध प्रदर्शन से कहीं अधिक गंभीर बना दिया है।
फिलहाल नोएडा में शांति बहाल है, लेकिन पुलिस और प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि भविष्य में माहौल बिगाड़ने की किसी भी कोशिश पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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