top of page
भारतार्थ-logo

जयपुर में शामलात अधिवेशन का आगाज़, गौ आश्रय स्थलों की घोषणा

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 16 जून
  • 2 मिनट पठन
Large group on stage holding books at a Hindi book launch event, with a bright banner reading Rashtriya Pustakalay Abhiyan in back

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

जयपुर, 15 अप्रैल। राजस्थान में साझा संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए “राजस्थान शामलात अधिवेशन 2026” का बुधवार को जयपुर स्थित इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान में भव्य शुभारंभ हुआ। “कॉमन्स के साथ हमारी समृद्धि को आकार देना” विषय पर आधारित इस अधिवेशन का उद्घाटन पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने किया।


अधिवेशन को संबोधित करते हुए मंत्री दिलावर ने चारागाह, जल स्रोत, वन एवं वेटलैंड जैसे साझा संसाधनों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संतुलन की रीढ़ बताते हुए इनके संरक्षण एवं सुव्यवस्थित प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि इन संसाधनों का वैज्ञानिक तरीके से विकास किया जाए तो न केवल पर्यावरण संरक्षण संभव है, बल्कि ग्रामीण आजीविका को भी नई दिशा मिल सकती है।


गौ माता आश्रय स्थलों की बड़ी पहल


मंत्री ने राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा करते हुए बताया कि निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए प्रदेश की 457 पंचायत समितियों के अंतर्गत प्रत्येक में एक-एक ग्राम पंचायत स्तर पर “पंडित दीनदयाल उपाध्याय चारागाह विकास आधारित गौ माता आश्रय स्थल” स्थापित किए जाएंगे।


इन आश्रय स्थलों पर जल संरक्षण, पक्की पानी की व्यवस्थाएं, वृक्षारोपण, चारागाह विकास, चारा भंडारण तथा कंपोस्ट खाद उत्पादन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे गौवंश को प्राकृतिक वातावरण में बेहतर जीवन मिल सकेगा, वहीं भूजल स्तर में सुधार और किसानों को जैविक खाद की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।


बीज बैंक से चारागाह विकास को बढ़ावा


मंत्री दिलावर ने बताया कि गोचर एवं औरण भूमि के संरक्षण के लिए प्रदेश में 150 बीज बैंक स्थापित किए जा चुके हैं, जिन्हें बढ़ाकर 300 करने का लक्ष्य रखा गया है। इन बीज बैंकों के माध्यम से देशी घास, चारा और वृक्षों के बीजों का संरक्षण एवं संवर्धन किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल लुप्तप्राय वनस्पतियों को बचाया जा सकेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इसके लिए “बीज गुणी” भी चयनित किए गए हैं, जो इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


पंचायतों की भूमिका पर जोर


संस्थान के महानिदेशक नीरज के. पवन ने अपने संबोधन में कहा कि ग्राम पंचायतें साझा संसाधनों की सबसे प्रभावी संरक्षक बन सकती हैं। यदि पंचायत स्तर पर जनभागीदारी को मजबूत किया जाए, तो चारागाह और अन्य संसाधनों का संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से संभव है।


सम्मान, विमोचन और प्रदर्शनी


कार्यक्रम के दौरान मंत्री दिलावर ने विभिन्न क्षेत्रों से आए समुदायों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया। साथ ही जमीनी लेखकों की कहानियों के संकलन “शामलात की गाथा” का विमोचन किया गया।


अधिवेशन में शामलात संसाधनों के महत्व और उनसे जुड़े उत्पादों पर आधारित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया गया, जिसने प्रतिभागियों को इन संसाधनों की उपयोगिता और संभावनाओं से रूबरू कराया।


इस अधिवेशन के माध्यम से राज्य सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि साझा संसाधनों के संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के जरिए ग्रामीण विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा।

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page