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बंगाल में तबादलों पर सुप्रीम रोक नहीं, ममता सरकार को झटका

  • Writer: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 22 hours ago
  • 2 min read
Woman speaking into a microphone points upward beside a suited man, with a blue map backdrop and serious mood.

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच राज्य सरकार को उस समय बड़ा कानूनी झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर प्रशासनिक तबादलों में हस्तक्षेप से साफ इनकार कर दिया। ममता बनर्जी सरकार की ओर से दायर याचिका को शीर्ष अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में ही खारिज कर दिया, जिससे राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है।


तीन जजों की विशेष पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान अधिकारियों के तबादले चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और यह एक स्थापित संवैधानिक प्रक्रिया है।


चुनाव आयोग की कार्रवाई को मिली न्यायिक मजबूती


अदालत ने अपने फैसले में कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए प्रशासनिक फेरबदल करना आयोग का वैधानिक अधिकार है, जिसमें न्यायालय का हस्तक्षेप अत्यंत सीमित है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि ऐसी याचिकाओं में ठोस संवैधानिक आधार होना आवश्यक है, जो इस मामले में नहीं पाया गया।


गौरतलब है कि चुनाव कार्यक्रम लागू होने के बाद आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया था। इस कदम को राज्य सरकार ने ‘अलोकतांत्रिक’ और ‘पक्षपाती’ बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।


सियासत गरम, आरोप-प्रत्यारोप तेज


याचिका खारिज होते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे “संविधान और संस्थाओं की जीत” करार दिया, वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है।


अन्य राज्यों के लिए भी नजीर


कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। अदालत के रुख से स्पष्ट है कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक नियंत्रण के मामलों में आयोग की स्वायत्तता सर्वोपरि रहेगी।


अब आगे क्या?


सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद चुनाव आयोग द्वारा की गई नई नियुक्तियां यथावत रहेंगी। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और आदर्श आचार संहिता हटने तक इन तबादलों को चुनौती देना राज्य सरकार के लिए बेहद कठिन माना जा रहा है।


संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनाव के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की व्यापक शक्तियां प्राप्त हैं। शीर्ष अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर इन शक्तियों की पुष्टि करते हुए चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता की प्राथमिकता को रेखांकित किया है।

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