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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • धारावाहिक उपन्यास | मौन दान (भाग–09)

    क्या एक बैंक लॉकर में केवल धन छिपा था, या जीवनभर की सबसे बड़ी विरासत? पढ़िए "मौन दान" का नौवाँ भाग। बैंक का लॉकर ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह विशेष नोट: "मौन दान" एक मौलिक काल्पनिक धारावाहिक उपन्यास है। इसके पात्र, घटनाएँ और स्थान साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। शहर के पुराने बैंक में खुला वर्षों पुराना लॉकर, सामने आई विश्वास की सबसे अनमोल विरासत अगली सुबह सूरज की पहली किरणों के साथ ही दयानाथ त्रिपाठी, रमेश पाठक, सरपंच, रामदीन और मोहन शहर के लिए रवाना हुए। पूरे रास्ते जीप में सन्नाटा पसरा रहा। धान के खेत पीछे छूटते जा रहे थे, लेकिन सबके मन में केवल एक ही सवाल था— आख़िर शिवनारायण के बैंक लॉकर में क्या छिपा है? करीब दो घंटे बाद वे जनकल्याण सहकारी बैंक पहुँचे। पुरानी इमारत की दीवारें मानो वर्षों का इतिहास अपने भीतर समेटे खड़ी थीं। बैंक प्रबंधक ने दयानाथ का स्वागत करते हुए कहा— "हम पिछले बीस वर्षों से इस दिन का इंतज़ार कर रहे थे।" रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने के बाद सभी लोग बैंक की भूमिगत तिजोरी तक पहुँचे। मोटा लोहे का दरवाज़ा खुला। सामने दर्जनों लॉकरों की कतार थी। बैंक कर्मचारी एक छोटे-से लॉकर के सामने रुका। उस पर पीतल की पट्टी लगी थी— लॉकर संख्या – 108 दयानाथ ने काँपते हाथों से चाबी ताले में डाली। एक हल्की-सी आवाज़ हुई... और वर्षों से बंद लॉकर खुल गया। भीतर मखमली कपड़े में लिपटी केवल तीन वस्तुएँ थीं— एक पुरानी जेब-घड़ी, एक कपड़े की थैली, और भूरे रंग की मोटी डायरी। सरपंच ने कपड़े की थैली खोली। उसमें कुछ पुराने सिक्के, गौरी की दूसरी चाँदी की पायल और एक छोटी-सी लकड़ी की बाँसुरी रखी थी। रामदीन ने आश्चर्य से पूछा— "बस... इतनी ही विरासत?" दयानाथ ने मुस्कुराकर कहा— "जिसने जीवन भर साधारण रहकर असाधारण काम किए हों, उसकी विरासत भी साधारण दिखाई देती है।" उन्होंने डायरी खोली। पहले पन्ने पर लिखा था— "यदि यह डायरी खुल गई है, तो समझो मेरा गाँव अब सच सुनने के लिए तैयार है।" कुछ पन्ने आगे बढ़ते ही एक और पंक्ति सामने आई— "लोग समझते रहे कि मैंने धन इकट्ठा किया। सच यह है कि मैंने केवल विश्वास जमा किया। धन खर्च होता है, विश्वास बढ़ता है।" मोहन ध्यान से हर शब्द सुन रहा था। उसने पूछा— "क्या हर मदद का पूरा हिसाब इसमें लिखा है?" दयानाथ ने मुस्कुराकर उत्तर दिया— "नहीं। शिवनारायण मदद का हिसाब नहीं रखते थे।" अगले पन्ने पर केवल एक सूची थी— 27 छात्र 14 विधवाएँ 9 किसान 5 अनाथ बच्चे 3 छोटे व्यापारी लेकिन किसी का नाम नहीं था। सिर्फ़ कुछ छोटे-छोटे वाक्य— "अब अपने पैरों पर खड़ा है।" "अब मुस्कुराती है।" "कर्ज़ से मुक्त।" "पहली नौकरी मिली।" रमेश पाठक की आँखें नम हो गईं। उन्होंने भावुक होकर कहा— "उन्होंने कभी यह नहीं लिखा कि कितना धन दिया..." "उन्होंने केवल यह लिखा कि किसी की ज़िंदगी कहाँ बदल गई।" उसी समय डायरी से एक मोड़ा हुआ कागज़ नीचे गिरा। दयानाथ ने उसे उठाया। उस पर लिखा था— "यदि कभी गाँव मेरी याद में कुछ बनाना चाहे, तो पुस्तकालय बनाना... क्योंकि भूख एक समय की होती है, लेकिन अज्ञान कई पीढ़ियों की।" पूरा कमरा कुछ पल के लिए मौन हो गया। तभी मोहन ने दृढ़ स्वर में कहा— "मैं शिक्षक बनूँगा... और उस पुस्तकालय में बच्चों को निःशुल्क पढ़ाऊँगा।" दयानाथ ने उसकी ओर देखा। उन्हें लगा... शायद शिवनारायण की सबसे बड़ी विरासत अब किसी भवन में नहीं, बल्कि एक नई पीढ़ी के संकल्प में जन्म ले चुकी है। इसी बीच बैंक प्रबंधक ने एक सीलबंद लिफ़ाफ़ा दयानाथ के हाथ में दिया। उस पर स्पष्ट शब्दों में लिखा था— "इसे केवल माधव के सामने खोला जाए।" दयानाथ कुछ क्षण तक उस लिफ़ाफ़े को देखते रहे। फिर उसे सावधानी से अपने बैग में रख लिया। उन्हें समझ आ गया था— कहानी अभी समाप्त नहीं हुई थी। सबसे कठिन सच अब भी उसी सीलबंद लिफ़ाफ़े के भीतर उनका इंतज़ार कर रहा था। क्रमशः... अगले भाग में पढ़िए — "माधव के नाम अंतिम पत्र" क्या उस सीलबंद लिफ़ाफ़े में शिवनारायण का अंतिम संदेश छिपा है? क्या माधव ही उनकी विरासत का असली उत्तराधिकारी बनेगा? केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित मौलिक धारावाहिक उपन्यास — मौन दान। सन्देश ; - अगर आपने इस धारावाहिक उपन्यास के पिछले भाग को नहीं पढ़ा है तो पढ़ें, भाग 01, भाग 02, भाग 03, भाग 4, भाग 5 भाग 6 भाग 7 भाग 8 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • OBC पंचायतीराज प्रतिनिधित्व: शालादर्पण-यूडाईस डेटा के आधार पर आरक्षण की मांग तेज

    जालौर में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी भैराराम चौधरी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, मुख्यमंत्री और आयोग अध्यक्ष से वैज्ञानिक व प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) जालौर | 29 जुलाई, 2026 जालौर: OBC पंचायतीराज प्रतिनिधित्व को लेकर राजस्थान में नई बहस तेज हो गई है। जालौर में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी भैराराम चौधरी के नेतृत्व में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रमुख नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग (पंचायतीराज में जनप्रतिनिधित्व) के अध्यक्ष को ज्ञापन भेजकर शिक्षा विभाग के शालादर्पण, पीएसपी पोर्टल एवं भारत सरकार के यूडाईस (UDISE+) डेटा के आधार पर पंचायत राज संस्थाओं में OBC को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि वर्तमान में OBC सर्वे के लिए जनआधार कार्ड को आधार बनाए जाने से वास्तविक आबादी का सही आकलन संभव नहीं है। अनेक परिवारों के जनआधार कार्ड आज भी अधूरे हैं, कई परिवारों के नए सदस्यों के नाम वर्षों से अपडेट नहीं हुए हैं, जबकि ग्रामीण राजस्थान में संयुक्त परिवारों की संख्या अधिक होने के कारण एक परिवार में 10 से 15 सदस्य तक रहते हैं। ऐसे में केवल जनआधार आधारित गणना से OBC की वास्तविक जनसंख्या सामने नहीं आ सकेगी। ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2014 में भामाशाह कार्ड तथा वर्ष 2018 में जनआधार कार्ड लागू किए गए थे, लेकिन समय पर अद्यतन नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में परिवारों के सदस्य अब भी दर्ज नहीं हैं। वहीं, कई ग्रामीण और शहरी परिवार ऐसे भी हैं जिनके जनआधार कार्ड अभी तक नहीं बने हैं। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आशंका जताई कि ग्रामीण क्षेत्रों की ढाणियों में रहने वाले अनेक किसान परिवार सर्वे से वंचित रह सकते हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि केवल OBC परिवारों का सर्वे कर उनकी जनसंख्या का प्रतिशत निर्धारित करना वैज्ञानिक नहीं माना जा सकता। जब तक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामान्य एवं अन्य सभी वर्गों की समान रूप से गणना नहीं होगी, तब तक किसी भी वर्ग का वास्तविक प्रतिशत निर्धारित नहीं किया जा सकता। प्रतिनिधिमंडल ने अपने पक्ष को मजबूत करते हुए शिक्षा विभाग के अधिकृत आंकड़ों का हवाला दिया। ज्ञापन के अनुसार वर्ष 2002-03 से संचालित सर्व शिक्षा अभियान तथा वर्ष 2009-10 से लागू शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के कारण राज्य के लगभग प्रत्येक बच्चे का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित हुआ है। वर्तमान में सरकारी विद्यालयों का संपूर्ण रिकॉर्ड शालादर्पण, निजी विद्यालयों का डेटा पीएसपी पोर्टल तथा कक्षा 3 से 12 तक का प्रमाणित वर्गवार डेटा यूडाईस (UDISE+) पोर्टल पर उपलब्ध है। ज्ञापन में कहा गया कि यह डेटा राज्य, जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर तक उपलब्ध होने के कारण इसे सबसे अधिक प्रमाणिक एवं वैज्ञानिक आधार माना जा सकता है। उदाहरण के रूप में जालौर जिले के यूडाईस आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि वर्ष 2024-25 में OBC विद्यार्थियों का नामांकन 52.23 प्रतिशत तथा 2025-26 में 51.64 प्रतिशत दर्ज किया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि शिक्षा विभाग के सचिव से अधिकृत रूप से शालादर्पण, पीएसपी और यूडाईस का वर्गवार डेटा प्राप्त कर उसी के आधार पर पंचायत राज संस्थाओं में वर्गवार आरक्षण का प्रस्ताव तैयार किया जाए, ताकि अन्य पिछड़ा वर्ग को वास्तविक जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिल सके। ज्ञापन सौंपने वालों में एसबीआई के पूर्व प्रबंधक उम्मेद सुथार, दलपत सिंह आर्य, अंबालाल माली, एडवोकेट ओमप्रकाश चौधरी, एडवोकेट मुकेश कुमार तंवर, जीतू सिंह केशवाना तथा भीमाराम माली सहित अन्य प्रमुख नागरिक शामिल रहे। कारण इसे सबसे अधिक प्रमाणिक एवं वैज्ञानिक आधार माना जा सकता है। उदाहरण के रूप में जालौर जिले के यूडाईस आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि वर्ष 2024-25 में OBC विद्यार्थियों का नामांकन 52.23 प्रतिशत तथा 2025-26 में 51.64 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

  • गुरु पूर्णिमा महोत्सव: बेंगलुरु में गुरुनी माँ मृदुला बेन जाडेजा के सान्निध्य में उमड़ा आस्था का सैलाब

    जय अम्बे मंडल चैरिटेबल ट्रस्ट के संतोषी माँ मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच भव्य आयोजन संपन्न भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 29 जुलाई, 2026 बेंगलुरु गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के अद्भुत संगम के साथ बुधवार को संतोषी माँ मंदिर, बिन्नी मिल रोड में भव्य रूप से संपन्न हुआ। जय अम्बे मंडल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस पावन महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति अपनी गहरी आस्था और समर्पण का परिचय दिया। पूरे मंदिर परिसर में भजन, पूजा-अर्चना और गुरु वंदना के बीच भक्तिमय वातावरण बना रहा, जिससे प्रत्येक श्रद्धालु आध्यात्मिक आनंद से सराबोर दिखाई दिया। गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान का सर्वोच्च पर्व माना जाता है। इसी पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुनी माँ श्रीमती मृदुला बेन जाडेजा के पावन सान्निध्य में आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरुनी माँ ने अपने प्रेरणादायी आशीर्वचनों में कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा, संस्कार, सदाचार और मानवता के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान गुरु पूजन, भक्ति संगीत, सामूहिक प्रार्थना तथा आध्यात्मिक प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया। भक्तों ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ कार्यक्रम में भाग लेकर गुरु के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की। जय अम्बे मंडल चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने आयोजन की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके समर्पण और सेवा भावना के कारण पूरा महोत्सव शांतिपूर्ण, अनुशासित और प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ। धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों का प्रसार होता है। गुरु पूर्णिमा जैसे पर्व भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा को जीवंत रखते हैं, जिसमें गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन मूल्यों का आधार माना गया है। बेंगलुरु में आयोजित यह महोत्सव भी इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में सफल रहा।

  • पतंजलि में विशेष अग्निहोत्र के साथ गुरु पूर्णिमा महोत्सव, गुरु परंपरा का दिया प्रेरक संदेश

    भवरलाल आर्य बोले— गुरु के मार्गदर्शन से ही जीवन को मिलती है सही दिशा, युवाओं से भारतीय संस्कृति और गुरु वंदना अपनाने का आह्वान। पतंजलि योग पीठ, कर्नाटक द्वारा हुबली में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं विशेष अग्निहोत्र का दृश्य। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हुबली | 29 जुलाई, 2026 गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन अवसर पर पतंजलि योग पीठ, कर्नाटक द्वारा हुबली के केशवपुर स्थित पतंजलि स्टेट ऑफिस में वैदिक परंपरा के अनुसार विशेष अग्निहोत्र एवं गुरु वंदना महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इंटरनेशनल योग गुरु एवं पतंजलि योग पीठ, कर्नाटक के सीनियर स्टेट इंचार्ज श्री भवरलाल आर्य के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक ऊर्जा, वैदिक मंत्रोच्चार और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का प्रेरणादायी संदेश देखने को मिला। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए अग्निहोत्र में सहभागिता निभाई और समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। अग्निहोत्र संस्कार सम्पन्न होने के बाद श्री भवरलाल आर्य ने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन को सफल, सार्थक और उद्देश्यपूर्ण बनाना चाहता है तो उसे किसी श्रेष्ठ गुरु के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि माता-पिता हमारे प्रथम गुरु हैं और जीवन में आगे चलकर सद्गुरु हमें सत्य, सेवा, संस्कार और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाते हैं। गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता, आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का पावन अवसर है। उन्होंने कहा कि गुरु में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। गुरु समस्त मानवता को समान दृष्टि से देखता है और समाज को सही दिशा देने का कार्य करता है। गुरु पूर्णिमा हमें अपनी कमजोरियों और बुराइयों को त्यागकर सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणा देती है। यही भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है। भवरलाल आर्य ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव में अपनी सनातन परंपराओं और गुरु-शिष्य संस्कृति से दूर होती जा रही है। गुरु के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कारों में विश्वास कम होना समाज के लिए चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार और समाज गुरु पूर्णिमा जैसे पर्वों को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाएंगे तो बच्चे और युवा भी अपने माता-पिता एवं गुरुओं का सम्मान करना सीखेंगे और भारतीय संस्कृति की अमूल्य विरासत सुरक्षित रहेगी। Bअनुशासन, सेवा, संयम और संस्कारों को अपनाने का संकल्प लें। यही गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और समाज को सकारात्मक दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में किरण गुरुजी, बाबूलाल, मनोज साहू, मंजुला, संगीता, दिव्या, गीता, सविता, भारती, बसवराज, वीरेश, अक्षय, रूपा सहित बड़ी संख्या में योग साधक, कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने वैदिक परंपरा के अनुरूप अग्निहोत्र में भाग लेकर विश्व शांति, स्वस्थ समाज और भारतीय संस्कृति के संरक्षण की कामना की।

  • बेंगलुरु में संत श्री लिखमी दासजी महाराज का 276वां जन्मोत्सव आज, भव्य स्नेह मिलन में होगा मेधावियों का सम्मान

    गोलराहट्टी स्थित अक्षया कन्वेंशन हॉल में आयोजित होगा भव्य समारोह, समाज सेवक महेंद्र मुणोत मुख्य अतिथि के रूप में रहेंगे शामिल। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 30 जुलाई, 2026 माली सैनी समाज 31 खेड़ा बेंगलुरु के लिए गुरुवार, 30 जुलाई 2026 का दिन उत्साह, श्रद्धा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनने जा रहा है। माली सैनी समाज 31 खेड़ा बेंगलुरु, माली सैनी समाज 31 खेड़ा नवयुवक मंडल तथा माली सैनी समाज 31 खेड़ा महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर संत श्री लिखमी दासजी महाराज का 276वां जन्मोत्सव एवं 14वां वार्षिक स्नेह मिलन समारोह गोलराहट्टी स्थित अक्षया कन्वेंशन हॉल में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और प्रतिभा सम्मान से सजे इस आयोजन को लेकर समाज में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत गुरु वंदना एवं संत श्री लिखमी दासजी महाराज के पूजन-अर्चन से होगी। इसके बाद स्वागत समारोह आयोजित कर समाज के विशिष्ट अतिथियों, सहयोगियों एवं समाजसेवियों का सम्मान किया जाएगा। समारोह का प्रमुख आकर्षण समाज के मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान एवं पुरस्कार वितरण रहेगा, जिससे नई पीढ़ी को शिक्षा और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिलेगी। कार्यक्रम में महिलाओं एवं बच्चों के लिए विभिन्न सांस्कृतिक और मनोरंजक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया है। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य समाज में पारिवारिक सहभागिता, सांस्कृतिक चेतना और आपसी भाईचारे को मजबूत करना है। आयोजकों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम सामाजिक एकता को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं और युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ते हैं। समाज के उपाध्यक्ष मदनलाल टाक, सह सचिव श्रवण राम चौहान, गिरधारी राम टाक, डूंगर राम गहलोत एवं रामप्रकाश सांखला ने समाजसेवी महेंद्र मुणोत को मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में पधारने का सादर आमंत्रण दिया है। उनके आगमन से कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। आयोजन समिति ने समाज के सभी परिवारों, युवाओं, महिलाओं एवं बच्चों से समय पर कार्यक्रम में उपस्थित होकर गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर को सफल बनाने का आग्रह किया है। आयोजकों का कहना है कि यह समारोह केवल जन्मोत्सव नहीं बल्कि समाज की एकता, संस्कार, शिक्षा और सेवा भाव को आगे बढ़ाने का सशक्त मंच है

  • गुरु पूर्णिमा पर मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज का प्रेरक संदेश, आत्मजागरण और संयम का दिखाया मार्ग

    आत्म-सिलिकॉन वर्षायोग (चातुर्मास) 2026 में गुरु-शिष्य परंपरा, स्वाध्याय, आत्मचिंतन और जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों पर दिया प्रेरणादायी मंगल प्रवचन। ज्ञानोदय परिसर, तुबरहल्ली, बेंगलुरु में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज का मंगल प्रवचन। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 29 जुलाई, 2026 गुरु पूर्णिमा पर मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज के प्रेरणादायी संदेश ने बेंगलुरु में आयोजित आत्म-सिलिकॉन वर्षायोग (चातुर्मास) 2026 को आध्यात्मिक चेतना का विराट मंच बना दिया। ज्ञानोदय परिसर, तुबरहल्ली स्थित इनर रिफ्लेक्शन सेंटर में आयोजित मंगल प्रवचन में संतों, विद्वानों तथा हजारों श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। अपने ओजस्वी एवं व्यावहारिक उद्बोधन में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने गुरु-शिष्य परंपरा, आत्मजागरण, स्वाध्याय, संयम और आधुनिक जीवन में आध्यात्मिक अनुशासन की आवश्यकता पर गहन विचार व्यक्त किए। मुनि श्री ने कहा कि गुरु केवल पूजनीय व्यक्तित्व नहीं, बल्कि आत्मा में सुप्त चेतना को जागृत करने वाले दिव्य प्रेरणा-स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची गुरु भक्ति केवल पूजा, वंदना या अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में आत्मपरिवर्तन, चरित्र निर्माण और सदाचार का विकास होना चाहिए। उन्होंने वर्तमान सूचना-प्रधान युग का उल्लेख करते हुए कहा कि आज ज्ञान के अनेक स्रोत उपलब्ध हैं, लेकिन जीवन में शांति, संतुलन और आत्मिक स्थिरता का अभाव दिखाई देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शास्त्रों का अध्ययन तभी सार्थक है, जब वह गुरु के मार्गदर्शन और नियमित स्वाध्याय के माध्यम से व्यवहारिक जीवन में उतरकर व्यक्ति के विचार, व्यवहार और चरित्र को श्रेष्ठ बनाए। प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने अहिंसा, सत्य, अचौर्य और अपरिग्रह जैसे जैन धर्म के मूल सिद्धांतों को आधुनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिवार, समाज, व्यवसाय और व्यक्तिगत जीवन में संयमित आचरण, मर्यादित उपभोग, मधुर वाणी तथा आत्मसंयम ही स्थायी मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन का आधार हैं। गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि आत्मपरीक्षण और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ अवसर है। प्रत्येक व्यक्ति को बीते वर्ष के अपने आचरण का निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए तथा क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों का त्याग कर सेवा, करुणा, स्वाध्याय और आत्मसाधना को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि गुरु के उपदेशों को केवल सुनें नहीं, बल्कि उन्हें व्यवहार में उतारें। जीवन में अनुशासन, विनम्रता और आत्मचिंतन अपनाकर ही सच्चे अर्थों में आध्यात्मिक प्रगति संभव है। गुरु का सम्मान तभी सार्थक है जब उनका संदेश हमारे विचारों और आचरण में दिखाई दे। ज्ञानोदय परिसर में आयोजित चार माह के आत्म-सिलिकॉन वर्षायोग (चातुर्मास) 2026 के दौरान प्रतिदिन मंगल प्रवचन, प्रैक्टिकल समाधान, ध्यान, स्वाध्याय, शंका समाधान, युवा प्रेरणा शिविर तथा जैन आगमों पर विशेष अध्ययन सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विद्यार्थी एवं युवा सहभागिता कर रहे हैं। निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज, आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की आध्यात्मिक परंपरा के वरिष्ठ संत हैं। अपने तार्किक चिंतन, सरल अभिव्यक्ति और व्यावहारिक दृष्टिकोण के माध्यम से वे जैन दर्शन को समकालीन जीवन से जोड़ते हुए समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान कर रहे हैं। उनकी 'प्रैक्टिकल समाधान' तथा 'Psychology of Transformation' जैसी प्रवचन श्रृंखलाएँ विशेष रूप से युवाओं और बुद्धिजीवियों के बीच लोकप्रिय हैं।

  • बेंगलुरु में गुरु पूर्णिमा महोत्सव: गुरु भक्ति, गौसेवा और सनातन संस्कृति का भव्य संगम

    स्वामी श्री पुष्कर दासजी महाराज के सान्निध्य में दो दिवसीय महोत्सव सम्पन्न, हजारों श्रद्धालुओं ने हवन, नौ चंडी पाठ, भजन संध्या और महाप्रसादी में लिया भाग; गौशाला अग्निकांड के बाद सेवा एवं सहयोग का दिया प्रेरक संदेश। बेंगलुरु में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान हवन, गुरु वंदना एवं विशाल भजन संध्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 29 जुलाई, 2026 गुरु पूर्णिमा महोत्सव बेंगलुरु इस वर्ष श्रद्धा, भक्ति, सेवा और सनातन संस्कृति के अद्भुत संगम के रूप में इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। श्री मातेश्वरी भक्त मंडल ट्रस्ट (रजि.), बेंगलुरु एवं श्री कृष्ण गौ सेवा आश्रम गौशाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय भव्य धार्मिक महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर गुरु वंदना, वैदिक हवन, नौ चंडी पाठ, विशाल भजन संध्या, प्रवचन और महाप्रसादी का पुण्य लाभ प्राप्त किया। स्वामी श्री पुष्कर दासजी महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न इस आयोजन ने गुरु परंपरा, गौसेवा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का सशक्त संदेश दिया। गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति श्रद्धा, ज्ञान, सेवा और आत्मिक उन्नति का महापर्व माना जाता है। इसी भावना को साकार करते हुए आयोजित इस महोत्सव में सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। परिवारों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर गुरु कृपा प्राप्त की और धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता निभाई। पहले दिन भक्ति से सराबोर रही विशाल भजन संध्या महोत्सव के पहले दिन 28 जुलाई को शाम 7:15 बजे महाप्रसादी के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद 8:15 बजे विशाल भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें भक्ति संगीत की मधुर प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। प्रसिद्ध भजन गायक डॉ. रमेश माली (पाली), राजू भाई कुमावत (मैसूर) तथा कैलाश पंवार (गागुड़ा) ने गुरु महिमा, गौसेवा और भक्ति पर आधारित भजनों की शानदार प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरा परिसर "जय गुरुदेव" और भक्ति गीतों से गूंज उठा। श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन मोहन सीरवी, बेंगलुरु ने किया। दूसरे दिन हवन, नौ चंडी पाठ और प्रवचनों का आयोजन महोत्सव के दूसरे दिन 29 जुलाई को प्रातः 5:15 बजे वैदिक हवन एवं नौ चंडी पाठ के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ की दिव्य सुगंध से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। इसके पश्चात 10:15 बजे प्रवचन एवं भजन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें स्वामी श्री पुष्कर दासजी महाराज ने गुरु की महिमा, सेवा, संस्कार, आत्मज्ञान, गौ संरक्षण और समाज में नैतिक मूल्यों के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु ही वह शक्ति है जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाती है। गुरु का सम्मान करना भारतीय संस्कृति की सबसे महान परंपराओं में से एक है। गुरु पूर्णिमा हमें अपने जीवन में सेवा, त्याग, अनुशासन और सदाचार को अपनाने की प्रेरणा देती है। दोपहर 12:15 बजे महाप्रसादी के साथ दो दिवसीय महोत्सव का समापन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर गुरु आशीर्वाद प्राप्त किया। गौसेवा और समाज सेवा का दिया प्रेरक संदेश कार्यक्रम के दौरान आयोजन समिति ने हाल ही में श्री कृष्ण गौ सेवा आश्रम गौशाला में हुए अग्निकांड का उल्लेख करते हुए समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा मिले सहयोग के लिए सभी दानदाताओं, स्वयंसेवकों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि संकट की इस घड़ी में समाज ने जिस प्रकार गौसेवा के लिए सहयोग दिया, वह भारतीय संस्कृति की सेवा भावना का जीवंत उदाहरण है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से भविष्य में भी गौ संरक्षण, गौसेवा और सामाजिक सेवा के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। गुरु परंपरा और भारतीय संस्कृति का संदेश स्वामी श्री पुष्कर दासजी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि गुरु केवल व्यक्ति नहीं बल्कि जीवन को दिशा देने वाली दिव्य चेतना हैं। गुरु पूर्णिमा हमें यह स्मरण कराती है कि जीवन में सफलता, संस्कार और आत्मिक उन्नति गुरु के मार्गदर्शन से ही संभव है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और गौसेवा के महत्व को समझे तथा आधुनिक जीवनशैली के साथ अपने सांस्कृतिक मूल्यों को भी अपनाए। यही भारत की आध्यात्मिक पहचान और सामाजिक शक्ति है। श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह मित्तगनहल्ली मेन रोड, बिदराहल्ली होबली, होसुरु भड़े, कन्नूर पोस्ट, बेंगलुरु स्थित आयोजन स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रमों में भाग लिया। श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक सोच, भाईचारा, सेवा भावना और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देते हैं। गुरु पूर्णिमा महोत्सव ने सभी को गुरु के प्रति श्रद्धा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।

  • धारावाहिक उपन्यास | मौन दान (भाग–08)

    वसीयत से बड़ा उत्तराधिकार ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह नोट: "मौन दान" एक मौलिक काल्पनिक धारावाहिक उपन्यास है। इसके पात्र, घटनाएँ और स्थान साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। शिवनारायण की वसीयत ने बदली विरासत की परिभाषा, सामने आया सेवा का असली उत्तराधिकार बरगद से लौटते समय पूरे गाँव में एक अजीब-सी खामोशी थी। अब कोई भी शिवनारायण को "कंजूस" नहीं कह रहा था। लेकिन हर मन में एक ही प्रश्न था— "बीस साल पहले बनाया गया वह ट्रस्ट आखिर है क्या?" जब सभी लोग पंचायत भवन पहुँचे, तब तक वहाँ एक सफ़ेद जीप आकर रुक चुकी थी। जीप के पास दो लोग महत्वपूर्ण फाइलें सँभाले खड़े थे। उनमें से एक आगे बढ़ा और बोला— "मेरा नाम अनिल सक्सेना है। मैं जनकल्याण सहकारी बैंक से आया हूँ।" उन्होंने दयानाथ त्रिपाठी को एक मोटी फाइल सौंपते हुए कहा— "शिवनारायण जी के निधन की सूचना मिलते ही हमें यह फाइल खोलने का निर्देश था।" दयानाथ ने सावधानी से फाइल खोली। सबसे ऊपर शिवनारायण के हस्ताक्षर थे। उनके नीचे लिखा था— "यह संपत्ति किसी व्यक्ति की नहीं... एक विचार की है।" सरपंच ने उत्सुकता से पूछा— "क्या इसमें उनकी ज़मीन-जायदाद का बँटवारा लिखा है?" अनिल सक्सेना हल्का मुस्कुराए। "नहीं..." "यह ज़मीन बाँटने की नहीं... ज़िम्मेदारी बाँटने की वसीयत है।" पूरा पंचायत भवन एक बार फिर शांत हो गया। दयानाथ ने दस्तावेज़ पढ़ना शुरू किया— "यदि मेरे बाद कोई पूछे कि मेरा उत्तराधिकारी कौन है, तो उससे कहना— जिसने बिना किसी स्वार्थ के किसी अजनबी का दुःख कम किया हो, वही मेरा वास्तविक उत्तराधिकारी है।" इन शब्दों ने उपस्थित हर व्यक्ति को भीतर तक झकझोर दिया। कई लोगों ने अनायास अपना सिर झुका लिया। कुछ देर बाद अनिल सक्सेना ने फाइल से एक और दस्तावेज़ निकाला। वह गाँव का हाथ से बनाया गया नक्शा था। नक्शे पर पाँच स्थान लाल रंग से चिन्हित थे— प्राथमिक विद्यालय पुराना कुआँ पंचायत भवन स्वास्थ्य केंद्र नदी का घाट मास्टर रामविलास ने पूछा— "इन पाँच स्थानों का क्या महत्व है?" दयानाथ ने दस्तावेज़ पढ़ते हुए कहा— "यहीं सबसे अधिक ज़रूरतमंद लोग आते हैं। यदि मेरी निधि का उपयोग करना, तो सबसे पहले इन्हीं स्थानों से शुरुआत करना।" यह सुनते ही रमेश पाठक की आँखें भर आईं। उन्होंने धीमे स्वर में कहा— "अब समझ में आया..." "उन्होंने कभी इमारतें बनाने की बात क्यों नहीं की।" "वे इंसानों में निवेश करते थे... पत्थरों में नहीं।" उसी समय पीछे बैठे एक युवक ने संकोच से हाथ उठाया। वह था गाँव का स्नातक छात्र मोहन। उसने पूछा— "यदि यह ट्रस्ट सचमुच ज़रूरतमंदों के लिए है..." "...तो क्या मैं भी इसमें सेवा कर सकता हूँ?" दयानाथ पहली बार मुस्कुराए। उन्होंने कहा— "यही तो शिवनारायण चाहते थे।" "यह ट्रस्ट किसी परिवार की विरासत नहीं..." "...हर उस व्यक्ति की विरासत है, जो सेवा को सम्मान से बड़ा मानता है।" इतने में अनिल सक्सेना ने फाइल से एक छोटी-सी पीतल की चाबी निकाली। उस पर एक पट्टी लगी थी— "कक्ष – 3" सरपंच ने आश्चर्य से पूछा— "यह किसकी चाबी है?" अनिल ने उत्तर दिया— "शहर के पुराने बैंक लॉकर की।" "शिवनारायण जी का स्पष्ट निर्देश था कि यह लॉकर तभी खोला जाए, जब गाँव के लोग उनके जीवन का सच जान लें।" दयानाथ ने चाबी अपनी हथेली में ली। उन्हें लगा जैसे शिवनारायण मृत्यु के बाद भी एक अंतिम परीक्षा छोड़ गए हों। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों की ओर देखा और दृढ़ स्वर में कहा— "कल सुबह हम शहर जाएँगे।" "मुझे विश्वास है कि उस लॉकर में धन से कहीं अधिक मूल्यवान कोई सच हमारा इंतज़ार कर रहा है।" बाहर फिर हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी। लेकिन इस बार किसी का ध्यान बारिश पर नहीं था। सभी की निगाहें उस छोटी-सी चाबी पर टिकी थीं... जो शायद शिवनारायण के जीवन का अंतिम बंद दरवाज़ा खोलने वाली थी। क्रमशः... अगले भाग में पढ़िए — "बैंक का लॉकर" क्या बैंक लॉकर में छिपा है शिवनारायण के जीवन का अंतिम रहस्य? क्या उनकी सबसे बड़ी विरासत धन थी, या कोई ऐसा निर्णय जिसने पूरे गाँव का भविष्य बदल दिया? केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित धारावाहिक उपन्यास — मौन दान। सन्देश ; - अगर आपने इस धारावाहिक उपन्यास के पिछले भाग को नहीं पढ़ा है तो पढ़ें, भाग 01, भाग 02, भाग 03, भाग 4, भाग 5 भाग 6 भाग 7 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • निमहांस में व्हीलचेयर दान पहल: जेसीआई बैंगलोर कॉस्मो ने बढ़ाया सेवा का हाथ

    मरीजों और परिजनों की सुविधा बढ़ाने के लिए निमहांस प्रशासन को सौंपा व्हीलचेयर एवं रॉक बेंच दान का प्रस्ताव भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 28 जुलाई, 2026 बेंगलुरु: सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देते हुए जेसीआई बैंगलोर कॉस्मो ने प्रतिष्ठित निमहांस (NIMHANS) में मरीजों, उनके परिजनों एवं आगंतुकों की सुविधा के लिए व्हीलचेयर एवं रॉक बेंच दान करने की महत्वपूर्ण पहल की है। इस संबंध में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने निमहांस के रजिस्ट्रार श्री हर्षा ए.एच. से शिष्टाचार भेंट कर औपचारिक प्रस्ताव सौंपा। यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय कदम मानी जा रही है। अस्पतालों में प्रतिदिन हजारों मरीज और उनके परिजन लंबा समय बिताते हैं। ऐसे में पर्याप्त बैठने की व्यवस्था और जरूरतमंद मरीजों के लिए व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं उनके अनुभव को अधिक सहज और सम्मानजनक बनाती हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जेसीआई बैंगलोर कॉस्मो ने यह सामाजिक सेवा अभियान शुरू किया है। प्रतिनिधिमंडल में जेसी रीना गांधी (सेक्रेटरी), ज़ोन ऑफिसर जेसी मोनिका कुमट तथा जेसी रूपचंद कुमट शामिल रहे। इस पहल को मूर्त रूप देने में जेसी रूपचंद कुमट की विशेष भूमिका रही, जिनके प्रयासों से यह प्रस्ताव निमहांस प्रशासन तक पहुंच सका। बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि अस्पताल में आने वाले मरीजों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों तथा उनके साथ आने वाले परिजनों के लिए व्हीलचेयर और रॉक बेंच जैसी सुविधाएं अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। इससे अस्पताल परिसर में आने वाले लोगों को अधिक आराम, सुविधा और सुलभता प्राप्त होगी। निमहांस के रजिस्ट्रार श्री हर्षा ए.एच. ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया तथा सामाजिक हित से जुड़े इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने जनसेवा से जुड़े ऐसे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समाज और संस्थाओं के सहयोग से स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। जेसीआई बैंगलोर कॉस्मो ने रजिस्ट्रार के समय, सहयोग और सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आभार व्यक्त किया। संगठन ने विश्वास जताया कि यह जनहितकारी पहल शीघ्र ही साकार होगी और अस्पताल आने वाले हजारों लोगों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। सामाजिक संस्थाओं द्वारा स्वास्थ्य संस्थानों के साथ इस प्रकार का सहयोग समाज में सेवा, संवेदनशीलता और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विभिन्न सामाजिक संगठन इसी प्रकार आगे आते रहें तो सार्वजनिक संस्थानों में सुविधाओं का स्तर और बेहतर हो सकता है।

  • पैलेस ग्राउंड में गूंजेगा श्रीराम नाम, तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार

    दिव्य चेतना ट्रस्ट की अहम बैठक संपन्न, श्रीराम कथा को भव्य-दिव्य बनाने का लिया संकल्प भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 28 जुलाई, 2026 बेंगलुरु: राजधानी बेंगलुरु के पैलेस ग्राउंड में प्रस्तावित श्रीराम कथा के भव्य आयोजन की तैयारियां अब तेज़ हो गई हैं। इसी क्रम में दिव्य चेतना ट्रस्ट द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक का सफल आयोजन किया गया, जिसमें कथा को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए आयोजन को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। बैठक में श्री शैलेश मिश्रा, श्री रोहित उपाध्याय, श्री गंगेश मिश्रा, श्री मनोज पांडे, भोजपुरी समाज के अध्यक्ष श्री संजय सिंह सहित अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने आगामी श्रीराम कथा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा का महोत्सव बनाने पर बल दिया। बैठक के दौरान आयोजन की रूपरेखा, मंच व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, सेवा कार्य, स्वयंसेवकों की जिम्मेदारियां, यातायात प्रबंधन, जनसंपर्क अभियान और अधिक से अधिक श्रद्धालुओं की सहभागिता सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उपस्थित सदस्यों ने सुझाव दिया कि कथा के प्रचार-प्रसार के लिए डिजिटल माध्यमों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि अधिकाधिक लोग इस आध्यात्मिक आयोजन से जुड़ सकें। दिव्य चेतना ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कहा कि श्रीराम कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आदर्श जीवन मूल्यों और सामाजिक एकता का संदेश देने का सशक्त माध्यम है। कथा के माध्यम से युवाओं में संस्कार, सेवा और राष्ट्रप्रेम की भावना को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने तन, मन और धन से सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन बेंगलुरु के सबसे प्रेरणादायक आध्यात्मिक आयोजनों में शामिल होगा। आयोजन को सफल बनाने के लिए अलग-अलग समितियों का गठन करने तथा स्वयंसेवकों को जिम्मेदारियां सौंपने पर भी सहमति बनी। सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सांस्कृतिक जागरूकता और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से कथा में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का भी आग्रह किया।

  • सिरा में गूंजे रामदेवजी के जयकारे, एकता साइकिल यात्रा का भव्य स्वागत

    भक्ति, एकता और सेवा का अद्भुत संगम, भजन संध्या व महाप्रसाद में उमड़े हजारों श्रद्धालु भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) सिरा (कर्नाटक) | 28 जुलाई, 2026 सिरा (कर्नाटक): बेंगलुरू रामदेव एकता साइकिल यात्रा के सिरा पहुंचते ही पूरा क्षेत्र 'जय बाबा री', 'जय रामदेवजी' के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं, स्थानीय रामदेव भक्तों और समाजबंधुओं ने यात्रा का पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और उत्साहपूर्ण स्वागत कर धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रेरक संदेश दिया। यह भव्य आयोजन श्रद्धा, सेवा और सामूहिक सहभागिता का अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया। यात्रा के स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाज के वरिष्ठजन, युवा और महिलाएं उपस्थित रहीं। पूरे वातावरण में आध्यात्मिक उल्लास और धार्मिक उत्साह देखने को मिला। स्वागत के दौरान श्रद्धालुओं ने यात्रियों का अभिनंदन करते हुए उनके सेवा और एकता के संदेश की सराहना की। आयोजन स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जिससे कार्यक्रम का धार्मिक वातावरण और अधिक मनमोहक बन गया। रात्रि में आयोजित भक्ति संध्या एवं जागरण कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। प्रसिद्ध भजन गायक हेमन्त जोशी तथा नरपत देवासी एंड पार्टी ने बाबा रामदेवजी के एक से बढ़कर एक मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर देर रात तक भक्तों को भावविभोर रखा। भजनों के दौरान श्रद्धालु जयकारों और भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए। कार्यक्रम की विशेष आकर्षण बालिका अवनी पटेल की मनमोहक नृत्य प्रस्तुति रही। उनकी भावपूर्ण और आकर्षक प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया। कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। भक्ति कार्यक्रम के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की। इस अवसर पर बाबूलाल पटेल, चौथाराम पटेल, अशोक पटेल, प्रकाश पटेल, विरमराम पटेल, तिलोक पटेल सहित अनेक गणमान्य सदस्य, समाज के वरिष्ठजन और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने बेंगलुरू रामदेव एकता साइकिल यात्रा की सफलता की कामना करते हुए समाज में एकता, सद्भाव, सेवा और धार्मिक चेतना के प्रसार का संदेश दिया। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि इस प्रकार की यात्राएं केवल धार्मिक आयोजन नहीं होतीं, बल्कि समाज को जोड़ने, युवाओं में संस्कार विकसित करने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का सशक्त माध्यम भी बनती हैं। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से ऐसे आयोजनों में भाग लेने का आह्वान किया।

  • बेंगलुरु में मुनि श्री वीर सागर महाराज का भव्य चातुर्मास प्रारम्भ, उमड़ा श्रद्धा का सागर

    श्री ज्ञानोदय परिसर में चातुर्मास स्थापना सम्पन्न, चार माह तक धर्म, तप, स्वाध्याय और आत्मपरिवर्तन का मिलेगा दिव्य मार्गदर्शन भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 28 जुलाई, 2026 बेंगलुरु: मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज चातुर्मास के शुभारम्भ के साथ मंगलवार को तुबरहल्ली स्थित श्री ज्ञानोदय परिसर आध्यात्मिक आस्था और भक्ति का केंद्र बन गया। निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीर सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में चातुर्मास स्थापना समारोह अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर बेंगलुरु सहित कर्नाटक और देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गुरुचरणों में वंदना कर धर्म, संयम और आत्मपरिवर्तन का संकल्प लिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण, नवकार मंत्र एवं भक्तिमय स्तवनों के साथ हुआ। इसके पश्चात विधिवत चातुर्मास स्थापना सम्पन्न हुई, जिसके साथ वर्षा ऋतु के चार पावन महीनों के लिए मुनि श्री वीर सागर महाराज ससंघ का बेंगलुरु में स्थिर निवास प्रारम्भ हुआ। पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। अपने विशेष प्रवचन में मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी चुनौती बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि स्वयं का मन है। यदि विचार, संस्कार और दृष्टिकोण बदल जाएँ तो जीवन स्वतः बदल जाता है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण, आत्मसंयम और आत्मपरिष्कार का श्रेष्ठ अवसर है। मुनि श्री ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे इन चार महीनों में केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहें, बल्कि अपने व्यवहार, विचार और जीवनशैली में भी सकारात्मक परिवर्तन लाएँ। उन्होंने करुणा, सत्य, क्षमा, अहिंसा और संयम को मानव जीवन की सबसे बड़ी शक्तियाँ बताते हुए कहा कि इन्हीं मूल्यों से व्यक्ति, परिवार और समाज का वास्तविक विकास संभव है। उन्होंने आधुनिक जीवन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की भागदौड़, डिजिटल व्यस्तता, तनाव और भौतिकता के बीच मानसिक शांति बनाए रखना सबसे बड़ी आवश्यकता है। जैन दर्शन केवल मोक्ष का मार्ग नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, नैतिक और आत्मविश्वासपूर्ण बनाने की व्यावहारिक जीवनशैली भी प्रदान करता है। पूरे समारोह के दौरान भक्तिमय स्तवन, सामूहिक प्रार्थना और गुरु वंदना से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। श्रद्धालुओं ने आगामी चार महीनों तक नियमित रूप से प्रवचन, स्वाध्याय, ध्यान, तप और धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता का संकल्प व्यक्त किया। जैन परम्परा के अनुसार वर्षा ऋतु में दिगम्बर मुनिराज विहार का विराम लेकर एक ही स्थान पर निवास करते हैं, जिससे सूक्ष्म जीवों की रक्षा हो सके और साधना का विशेष अवसर प्राप्त हो। यही कारण है कि चातुर्मास को जैन धर्म में वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक काल माना जाता है। आयोजकों के अनुसार आगामी चार महीनों तक श्री ज्ञानोदय परिसर, तुबरहल्ली प्रतिदिन प्रवचन, स्वाध्याय, ध्यान, धार्मिक अनुष्ठान, युवा एवं परिवार-केंद्रित प्रेरक सत्रों तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन का प्रमुख केंद्र रहेगा। इससे न केवल बेंगलुरु बल्कि देशभर से आने वाले हजारों श्रद्धालु लाभान्वित होंगे।

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