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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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बेंगलुरु में मुनि श्री वीर सागर महाराज का भव्य चातुर्मास प्रारम्भ, उमड़ा श्रद्धा का सागर

लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
धन्नाराम चौधरी
28 जुल॰
2 मिनट पठन
Shirtless bearded man speaks into a microphone against a soft blue backdrop, appearing calm and focused.

श्री ज्ञानोदय परिसर में चातुर्मास स्थापना सम्पन्न, चार माह तक धर्म, तप, स्वाध्याय और आत्मपरिवर्तन का मिलेगा दिव्य मार्गदर्शन

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 28 जुलाई, 2026 बेंगलुरु: मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज चातुर्मास के शुभारम्भ के साथ मंगलवार को तुबरहल्ली स्थित श्री ज्ञानोदय परिसर आध्यात्मिक आस्था और भक्ति का केंद्र बन गया। निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीर सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में चातुर्मास स्थापना समारोह अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर बेंगलुरु सहित कर्नाटक और देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गुरुचरणों में वंदना कर धर्म, संयम और आत्मपरिवर्तन का संकल्प लिया।


कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण, नवकार मंत्र एवं भक्तिमय स्तवनों के साथ हुआ। इसके पश्चात विधिवत चातुर्मास स्थापना सम्पन्न हुई, जिसके साथ वर्षा ऋतु के चार पावन महीनों के लिए मुनि श्री वीर सागर महाराज ससंघ का बेंगलुरु में स्थिर निवास प्रारम्भ हुआ। पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला।


अपने विशेष प्रवचन में मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी चुनौती बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि स्वयं का मन है। यदि विचार, संस्कार और दृष्टिकोण बदल जाएँ तो जीवन स्वतः बदल जाता है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण, आत्मसंयम और आत्मपरिष्कार का श्रेष्ठ अवसर है।


मुनि श्री ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे इन चार महीनों में केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहें, बल्कि अपने व्यवहार, विचार और जीवनशैली में भी सकारात्मक परिवर्तन लाएँ। उन्होंने करुणा, सत्य, क्षमा, अहिंसा और संयम को मानव जीवन की सबसे बड़ी शक्तियाँ बताते हुए कहा कि इन्हीं मूल्यों से व्यक्ति, परिवार और समाज का वास्तविक विकास संभव है।


उन्होंने आधुनिक जीवन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की भागदौड़, डिजिटल व्यस्तता, तनाव और भौतिकता के बीच मानसिक शांति बनाए रखना सबसे बड़ी आवश्यकता है। जैन दर्शन केवल मोक्ष का मार्ग नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, नैतिक और आत्मविश्वासपूर्ण बनाने की व्यावहारिक जीवनशैली भी प्रदान करता है।


पूरे समारोह के दौरान भक्तिमय स्तवन, सामूहिक प्रार्थना और गुरु वंदना से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। श्रद्धालुओं ने आगामी चार महीनों तक नियमित रूप से प्रवचन, स्वाध्याय, ध्यान, तप और धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता का संकल्प व्यक्त किया।


जैन परम्परा के अनुसार वर्षा ऋतु में दिगम्बर मुनिराज विहार का विराम लेकर एक ही स्थान पर निवास करते हैं, जिससे सूक्ष्म जीवों की रक्षा हो सके और साधना का विशेष अवसर प्राप्त हो। यही कारण है कि चातुर्मास को जैन धर्म में वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक काल माना जाता है।


आयोजकों के अनुसार आगामी चार महीनों तक श्री ज्ञानोदय परिसर, तुबरहल्ली प्रतिदिन प्रवचन, स्वाध्याय, ध्यान, धार्मिक अनुष्ठान, युवा एवं परिवार-केंद्रित प्रेरक सत्रों तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन का प्रमुख केंद्र रहेगा। इससे न केवल बेंगलुरु बल्कि देशभर से आने वाले हजारों श्रद्धालु लाभान्वित होंगे।

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