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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • अहंकार छोड़िए, शांति पाइए: मुनि श्री वीर सागर ने बताए 3 सूत्र

    सम्राट अशोक के प्रसंग से समझाया अहंकार का सच; श्रेष्ठ संगति, विनम्रता और तुलना छोड़कर प्रेरणा लेने का दिया प्रभावी संदेश मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज प्रवचन करते हुए भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 09 अगस्त 2026 बेंगलुरु। अहंकार मनुष्य की आत्मिक शांति और आत्मविकास का सबसे बड़ा अवरोध बन सकता है। निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज ने रविवार को प्रेरणादायी प्रवचन में अहंकार से मुक्ति का सरल और व्यावहारिक मार्ग बताते हुए कहा कि शरीर, पद, प्रतिष्ठा और संपत्ति को ही अपना वास्तविक स्वरूप मान लेना मनुष्य की बड़ी भूल है। इसी मिथ्या पहचान से ‘मैं’ और ‘मेरा’ का भाव जन्म लेता है और धीरे-धीरे अहंकार व्यक्ति के विचार, व्यवहार और संबंधों को प्रभावित करने लगता है। मुनि श्री ने कहा कि अहंकार दिखाई नहीं देता, लेकिन उसका प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र में नजर आ सकता है। परिवार हो, कार्यस्थल हो या सामाजिक जीवन—जब व्यक्ति अपनी प्रतिष्ठा और अधिकार के प्रति अत्यधिक आसक्त हो जाता है, तो वह दूसरों से लगातार सम्मान, स्वीकृति और वर्चस्व की अपेक्षा करने लगता है। यही अपेक्षाएं आगे चलकर तनाव, असंतोष और मानसिक अशांति का कारण बनती हैं। सम्राट अशोक की खोपड़ी के प्रसंग से समझाया अहंकार का मूल्य अहंकार की निरर्थकता समझाने के लिए मुनि श्री वीर सागर महाराज ने सम्राट अशोक से जुड़ा प्रेरक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि कलिंग युद्ध के बाद भारी जनहानि से व्यथित सम्राट अशोक एक मुनिराज के चरणों में विनम्रतापूर्वक झुके। यह देखकर उनके प्रधानमंत्री ने प्रश्न किया कि इतना शक्तिशाली सम्राट एक साधु के सामने क्यों झुक रहा है। इसके बाद सम्राट अशोक ने पशुओं के सिर और एक मानव खोपड़ी लेकर बाजार में बेचने का निर्देश दिया। पशुओं के सिर के बदले मूल्य मिला, लेकिन मानव खोपड़ी को कोई खरीदने के लिए तैयार नहीं हुआ। मुनि श्री ने इस प्रसंग के माध्यम से समझाया कि जिस शरीर और पहचान को लेकर मनुष्य जीवनभर पद, प्रतिष्ठा और अहंकार खड़ा करता है, मृत्यु के बाद उसी शरीर का कोई स्थायी मूल्य नहीं रह जाता। इसलिए क्षणभंगुर शरीर और प्रतिष्ठा के लिए जीवनभर अहंकार पालना वास्तविक बुद्धिमत्ता नहीं है। अहंकार से मुक्ति के 3 प्रभावी सूत्र अहंकार को मानसिक बोझ समझकर त्यागें मुनि श्री ने कहा कि अहंकार से मुक्ति की पहली सीढ़ी अपनी मानसिकता बदलना है। जिस प्रकार घर का कचरा बाहर निकालने के बाद मनुष्य स्वयं को हल्का और स्वच्छ महसूस करता है, उसी प्रकार अहंकार को जीवन से निकालने पर मन में हल्कापन और शांति आती है। अहंकार को अपनी वास्तविक पहचान मानने के बजाय अनावश्यक मानसिक बोझ समझना जरूरी है। जब व्यक्ति यह समझने लगता है कि पद, प्रतिष्ठा, संपत्ति और शरीर स्थायी नहीं हैं, तब ‘मैं’ और ‘मेरा’ का आग्रह धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। गुणाधिक संगति अपनाएं मुनि श्री वीर सागर महाराज ने दूसरे चरण के रूप में गुणाधिक संगति को महत्वपूर्ण बताया। आचार्य कुंदकुंद के प्रवचनसार का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने से अधिक गुणवान, विनम्र, सदाचारी और श्रेष्ठ संस्कारों वाले लोगों की संगति करनी चाहिए। मन जिस वातावरण में रहता है, वहां के विचार और संस्कार उस पर प्रभाव डालते हैं। इसलिए श्रेष्ठ व्यक्तियों का साथ व्यक्ति के भीतर भी श्रेष्ठ गुणों, विनम्रता और सदाचार के विकास का माध्यम बन सकता है। तुलना नहीं, प्रेरणा लें अहंकार से मुक्ति का तीसरा महत्वपूर्ण सूत्र बताते हुए मुनि श्री ने कहा कि दूसरों से होने वाली नकारात्मक तुलना को समाप्त करना चाहिए। किसी व्यक्ति को देखकर स्वयं को श्रेष्ठ समझना भी अहंकार है और स्वयं को हीन समझना भी उचित नहीं है। दूसरों के गुणों को देखकर उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। तुलना का उद्देश्य किसी को छोटा और स्वयं को बड़ा साबित करना नहीं, बल्कि स्वयं में सुधार लाना होना चाहिए। कार्यस्थल और नेतृत्व में भी खतरनाक है अहंकार मुनि श्री ने कार्यस्थल और नेतृत्व में अहंकार के प्रभावों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अहंकार से प्रभावित व्यक्ति अपने निर्णयों पर सवाल या सुझाव सहजता से स्वीकार नहीं कर पाता। इससे टीम में मतभेद, तनाव और निर्णय लेने में कठिनाई पैदा हो सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी वरिष्ठ या अधिकार संपन्न व्यक्ति के सामने सुधारात्मक सुझाव रखते समय सीधे उसकी गलती बताने के बजाय विभिन्न विकल्पों के लाभ और सीमाएं सामने रखनी चाहिए। इससे सामने वाले व्यक्ति को अपनी गरिमा बनाए रखते हुए बेहतर निर्णय लेने का अवसर मिलता है। श्रेष्ठता नहीं, करुणा है वास्तविक आध्यात्मिकता मुनि श्री ने करुणा और श्रेष्ठता-बोध के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि आध्यात्मिक परिपक्वता का अर्थ स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ समझना नहीं है। जिन लोगों में कम गुण, कम संसाधन या कम क्षमताएं दिखाई देती हैं, उनके प्रति तिरस्कार के बजाय करुणा का भाव रखना चाहिए। वास्तविक श्रेष्ठता दूसरों को छोटा समझने में नहीं, बल्कि अपने भीतर विनम्रता, करुणा और सद्गुणों को विकसित करने में है। उन्होंने कहा कि अहंकार बढ़ने के साथ व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप से दूर होता जाता है। इसके विपरीत शरीर, पद और प्रतिष्ठा के प्रति आसक्ति कम करने, श्रेष्ठ संगति अपनाने और दूसरों से तुलना के बजाय प्रेरणा लेने से व्यक्ति के भीतर शांति, विनम्रता और आत्मबोध का विकास होता है। मुनि श्री का संदेश स्पष्ट रहा—अहंकार को छोड़ना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति की पहचान है। जब ‘मैं’ का बोझ कम होता है, तब मनुष्य के भीतर शांति और आत्मिक स्वतंत्रता का मार्ग खुलता है।

  • आषाढ़ में धारवाड़ में गूंजा अग्निहोत्र का संदेश, पतंजलि ने शुरू किया जन-अभियान

    भवर लाल आर्य बोले—योग की तरह अग्निहोत्र भी हर घर तक पहुंचे; कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और पतंजलि परिवार की मौजूदगी भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) डेटलाइन | धारवाड़, कर्नाटक | 9 अगस्त 2026 धारवाड़। आषाढ़ के पवित्र अवसर पर धारवाड़ में अग्निहोत्र को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश गूंजा। पतंजलि योग पीठ, कर्नाटक की ओर से हेब्बल्ली रोड स्थित गाली ओनी के प्रसिद्ध मुडी मारुति मंदिर के कम्युनिटी हॉल योग सेंटर में विशेष अग्निहोत्र कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय योग गुरु एवं पतंजलि योग पीठ कर्नाटक के स्टेट इन-चार्ज हेड श्री भवर लाल आर्य ने किया। कार्यक्रम में अग्निहोत्र की पारंपरिक विधि, इसके उद्देश्य और इसे दैनिक जीवन में अपनाने को लेकर प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। इस अवसर पर श्री भवर लाल आर्य ने कहा कि जिस प्रकार योग कभी सीमित लोगों तक माना जाता था और आज विश्वभर में अपनाया जा रहा है, उसी प्रकार अग्निहोत्र को भी सरल रूप में हर घर तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि आषाढ़ के इस अवसर को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए अग्निहोत्र को भारतीय परंपरा और जीवन-पद्धति के रूप में समझने तथा इसके बारे में सही जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया जाए। हर घर तक अग्निहोत्र पहुंचाने का संकल्प भवर लाल आर्य ने कहा कि पतंजलि योग पीठ, कर्नाटक की ओर से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को अग्निहोत्र की जानकारी और प्रशिक्षण देने का अभियान चलाया जा रहा है। उनके अनुसार, हजारों लोगों को अब तक इसकी प्रक्रिया सिखाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास को किसी जाति, धर्म, पंथ या संप्रदाय तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनका उद्देश्य इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है, ताकि इच्छुक लोग इसकी पारंपरिक विधि और महत्व को समझ सकें। उन्होंने अग्निहोत्र को भारतीय परंपरा में वर्णित यज्ञ पद्धति से जोड़ते हुए कहा कि इसके विभिन्न रूपों में अलग-अलग सामग्री और विधियों का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरल रूप में इसे पारंपरिक रूप से गाय के घी और सूखे गोबर के उपलों के माध्यम से किया जाता है। स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर किए गए दावों पर जोर कार्यक्रम में भवर लाल आर्य ने अग्निहोत्र के स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी लाभों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अग्निहोत्र से वातावरण की शुद्धता, मानसिक शांति और सकारात्मकता में मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक रूप से औषधीय जड़ी-बूटियों का उपयोग यज्ञीय अनुष्ठानों में किया जाता रहा है। हालांकि, इन स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर उन्होंने अपने विचार और अनुभव साझा किए। किसी बीमारी के इलाज या संक्रमण से बचाव के लिए अग्निहोत्र को चिकित्सकीय उपचार का विकल्प मानने से पहले योग्य चिकित्सक एवं वैज्ञानिक प्रमाणों की सलाह लेना आवश्यक है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने अग्निहोत्र की राख यानी भस्म के पारंपरिक उपयोग का भी उल्लेख किया। कृषि क्षेत्र में इसके उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े पारंपरिक विचारों पर चर्चा की गई। योग के साथ भारतीय परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर भवर लाल आर्य ने कहा कि योग, आयुर्वेद और अन्य भारतीय परंपराओं की तरह अग्निहोत्र की जानकारी भी सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी पारंपरिक अभ्यास को अपनाने से पहले उसकी विधि, उद्देश्य और सीमाओं को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अभियान का लक्ष्य लोगों को जागरूक करना और इच्छुक लोगों को पारंपरिक अग्निहोत्र की विधि से परिचित कराना है। जनप्रतिनिधियों और पतंजलि परिवार की मौजूदगी विशेष कार्यक्रम में हुबली-धारवाड़ नगर निगम की डिप्टी मेयर श्रीमती रत्नाबाई नाज़रे और नगर निगम सदस्य श्रीमती दीपा नीरलकट्टी की मौजूदगी रही। मुडी मारुति मंदिर समिति की ओर से रवि एलिगर, वासु एलिगर, मंगेश महेंद्रकर और वसंतराव लक्कुंडे सहित कई सदस्य कार्यक्रम में उपस्थित रहे। पतंजलि परिवार की ओर से विजयलक्ष्मी नवले, उमा अगाड़ी, रमेश सुलाखे, लीलावती संब्रानी, शैलजा मदिकरा, वस्त्रमठ, सविता शिंदे, सुवर्णा करिंदी, चव्हाण, बसवराज मुम्मिगट्टी, प्रेमा मुम्मिगट्टी, नीलकंठ होराडी, उमेश कुलकर्णी, भाग्यश्री बडिगर, पुष्पा यारेशिमी, विजयलक्ष्मी करिंदी, वंदना ओमकार, पवादशेट्टी और वीरेश समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे। परंपरा से जन-जागरूकता तक धारवाड़ में आयोजित यह अग्निहोत्र कार्यक्रम धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जन-जागरूकता से जोड़ने का प्रयास रहा। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों को अग्निहोत्र की पारंपरिक पृष्ठभूमि और विधि के बारे में जानकारी दी गई। आयोजकों ने कहा कि आने वाले समय में कर्नाटक के विभिन्न क्षेत्रों में अग्निहोत्र प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रहेगा। धारवाड़ में आषाढ़ के पवित्र अवसर पर पतंजलि योग पीठ, कर्नाटक की ओर से विशेष अग्निहोत्र कार्यक्रम आयोजित किया गया। हेब्बल्ली रोड स्थित गाली ओनी के मुडी मारुति मंदिर कम्युनिटी हॉल योग सेंटर में हुए इस आयोजन में अंतरराष्ट्रीय योग गुरु एवं पतंजलि योग पीठ कर्नाटक के स्टेट इन-चार्ज हेड श्री भवर लाल आर्य ने अग्निहोत्र की पारंपरिक विधि और महत्व पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह योग विश्वभर में लोकप्रिय हुआ है, उसी तरह अग्निहोत्र की पारंपरिक जानकारी भी हर घर तक पहुंचनी चाहिए। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, मंदिर समिति सदस्यों और पतंजलि परिवार के अनेक सदस्यों ने भाग लिया।

  • भोजपुरी समाज सेवा समिति का सम्मान समारोह: पूर्व सैनिक और समाजसेवी हुए सम्मानित

    मासिक मिलन में तिरंगा यात्रा पर मुहर, स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 09 अगस्त 2026 बेंगलुरु। इंदिरानगर स्थित प्रधान कार्यालय में भोजपुरी समाज सेवा समिति (रजि.) बंगलोर का अगस्त माह का मासिक मिलन समारोह उत्साह, भाईचारे और सामाजिक प्रतिबद्धता के संदेश के साथ आयोजित हुआ। समारोह में पूर्व सैनिक एवं समाजसेवी को सम्मानित करने के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह और तिरंगा यात्रा को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कार्यक्रम में समाजहित, राष्ट्रभक्ति और सेवा भावना को केंद्र में रखते हुए आगामी गतिविधियों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई। मासिक मिलन समारोह में समिति के सदस्यों ने एक-दूसरे से आत्मीय संवाद किया और सामाजिक गतिविधियों को और प्रभावी बनाने पर विचार साझा किए। समारोह में सम्मानित सदस्यों ने अपने अनुभव एवं विचार रखते हुए समाज की एकता, अनुशासन और सेवा भावना को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। तिरंगा यात्रा को सर्वसम्मति से मिली मंजूरी समारोह के दौरान मुख्य संयोजक राजेश सिंह सिकरवार एवं संयुक्त सचिव ललित झा ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा यात्रा निकालने का प्रस्ताव रखा। सदस्यों ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि तिरंगा यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सम्मान, एकता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का माध्यम बनेगी। यात्रा के माध्यम से समाज के लोगों को राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकजुटता का संदेश देने की योजना है। स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित समिति के सचिव गिरीश चन्द्र पाण्डेय एवं महासचिव ललितेश्वर प्रसाद सिंह ने संस्थापक अध्यक्ष एवं चेयरमैन संजय सिंह उज्जैन से स्वतंत्रता दिवस समारोह के सफल आयोजन के लिए एक विशेष टीम गठित करने का अनुरोध किया। अनुरोध पर समिति अध्यक्ष ने पांच सदस्यीय आयोजन टीम का गठन किया। इसमें श्रीमती सुनीता देवी को अध्यक्ष, श्रीमती ज्ञानवती भारती को उपाध्यक्ष, श्री संजय भारती को प्रबंधक तथा डी.के. साव और जे.पी. सिंह को सह-प्रबंधक मनोनीत किया गया। वहीं राजेश सिंह सिकरवार और ललित झा को तिरंगा यात्रा की जिम्मेदारी सौंपी गई। स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए 12 अगस्त को विशेष बैठक आयोजित करने की घोषणा भी की गई। पूर्व वायु सैनिक और समाजसेवी का विशेष सम्मान समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण उस समय आया, जब समिति की ओर से पूर्व वायु सैनिक अखिलेश्वर झा तथा समाजसेवी सरदार राजेन्द्र सिंह को सम्मानित किया गया। दोनों ने समिति की आजीवन सदस्यता ग्रहण करते हुए समाज सेवा के प्रति अपना संकल्प व्यक्त किया। समिति पदाधिकारियों ने उन्हें अंगवस्त्र, माला, समिति का मोमेंटो, टोपी और बैज पहनाकर सम्मानित किया। सम्मान समारोह के माध्यम से समिति ने समाज और राष्ट्र की सेवा में योगदान देने वाले लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। पूर्व सैनिकों की देश सेवा और समाजसेवियों के सामाजिक योगदान को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी बताया गया। जन्मदिन समारोह ने बढ़ाई आत्मीयता कार्यक्रम के दौरान मेजर आशीष सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती मेघा का जन्मदिन भी समिति की ओर से उत्साहपूर्वक मनाया गया। केक काटकर उन्हें शुभकामनाएं दी गईं और उपस्थित सदस्यों ने उनके स्वस्थ, सुखी एवं मंगलमय जीवन की कामना की। इस अवसर पर समारोह का माहौल और अधिक आत्मीय एवं पारिवारिक हो गया। सदस्यों ने आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ जन्मदिन की खुशियां साझा कीं। भोजन व्यवस्था की भी रही सराहना मासिक मिलन समारोह में स्वादिष्ट नाश्ते एवं रात्रि भोजन की व्यवस्था का दायित्व श्रीमती ज्ञानवती भारती एवं संजय भारती ने संभाला। भोजन व्यवस्था और आतिथ्य की उपस्थित सदस्यों ने सराहना की। कोषाध्यक्ष जे.बी. सिंह एवं संयोजक जे.पी. सिंह सहित समिति के अन्य पदाधिकारियों ने स्वादिष्ट भोजन और बेहतर व्यवस्था के लिए भारती परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समारोह में यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि सामाजिक संगठन केवल बैठकों और आयोजनों तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज के लोगों को जोड़ने, प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, पूर्व सैनिकों का सम्मान करने और राष्ट्रहित की गतिविधियों को आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। भोजपुरी समाज सेवा समिति बंगलोर के इस मासिक मिलन समारोह ने सामाजिक एकता, राष्ट्रभक्ति और सेवा भावना को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया। आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह और तिरंगा यात्रा को लेकर सदस्यों में उत्साह दिखाई दिया। अब 12 अगस्त की विशेष बैठक में आयोजन की विस्तृत रूपरेखा तय होने की उम्मीद है।

  • रिश्तों की महक आख़िरी रोटी (भाग–3)

    दिल को छू लेने वाली मौलिक कहानियाँ लेखक: अशोक कुमार सिंह जब पूरा परिवार एक साथ बैठा... लेकिन एक थाली अब भी खाली थी। बरईपुर गाँव का वह छोटा-सा घर वर्षों बाद फिर से चहल-पहल से भर गया था। आँगन में बच्चों की खिलखिलाहट गूँज रही थी। बहुएँ सामान समेट रही थीं और तीनों बेटे बरामदे में बैठकर शहर की बातें कर रहे थे। उधर रसोई में अम्मा अकेली थीं। मिट्टी के चूल्हे में जलती लकड़ियों की आँच तेज़ हो चुकी थी। तवे पर पहली रोटी फूली तो अम्मा के चेहरे पर मुस्कान भी खिल उठी। उन्होंने धीरे से कहा— "आज फिर मेरा घर, घर जैसा लग रहा है।" रसोई की चौखट पर खड़ी छोटी गौरी सब कुछ बड़े ध्यान से देख रही थी। "दादी..." "हाँ बिटिया।" "इतनी सारी रोटियाँ अकेले कैसे बना लेती हो?" अम्मा हँस दीं। "जिसके हाथों में अपनों का प्यार हो, उसके लिए काम कभी बोझ नहीं बनता।" गौरी ने मासूमियत से पूछा— "क्या पापा भी बचपन में यहीं बैठकर खाते थे?" अम्मा की आँखें चमक उठीं। उन्होंने तवे से रोटी उतारते हुए कहा— "यहीं... इसी चूल्हे के पास। तीनों भाई एक-दूसरे से पहले रोटी लेने के लिए झगड़ते थे। कभी-कभी तो मुझे अपनी थाली की रोटी भी उन्हें देनी पड़ती थी।" गौरी ने भोलेपन से पूछा— "फिर आप क्या खाती थीं?" अम्मा कुछ क्षण चुप रहीं। फिर मुस्कुराकर बोलीं— "माँ का पेट बच्चों को खाते देखकर ही भर जाता है।" रसोई के बाहर खड़ा सुरेश यह बात सुन चुका था। उसने पहली बार महसूस किया कि माँ ने यह बात हँसते हुए कही ज़रूर है, लेकिन उसके पीछे वर्षों का त्याग छिपा है। थोड़ी देर बाद आँगन में दरी बिछा दी गई। पीतल की थालियाँ एक-एक करके सजने लगीं। अम्मा ने सबसे पहले बाबूजी की तस्वीर के सामने एक रोटी रखी और हाथ जोड़कर बोलीं— "आज देखिए जी... आपका पूरा परिवार फिर एक साथ बैठा है।" फिर उन्होंने सबकी थालियों में गर्म-गर्म रोटियाँ परोसनी शुरू कर दीं। राघव मोबाइल पर किसी अधिकारी से बात कर रहा था। मोहन बीच-बीच में अपने व्यापार की चर्चा कर रहा था। सुरेश बच्चों को खाना परोस रहा था। लेकिन... किसी ने यह नहीं देखा कि रसोई और आँगन के बीच दौड़ती अम्मा ने अभी तक अपने लिए थाली भी नहीं लगाई थी। गौरी की नज़र बार-बार दादी पर जा रही थी। उसे लगा... दादी सबको खिला रही हैं... पर दादी खुद कब खाएँगी? उधर तवे पर रोटियाँ सिकती रहीं। एक... दो... तीन... और फिर... टोकरी में केवल एक आख़िरी रोटी बची। अम्मा ने उसे बड़े प्यार से उठाया... उनकी नज़र पूरे परिवार पर गई... और होंठों पर वही पुरानी मुस्कान आ गई... क्रमशः... अगले भाग में पढ़िए... "जब एक मासूम बच्ची ने पूछा—'दादी... आपकी थाली कहाँ है?' और पूरे परिवार की आँखें झुक गईं..." अन्य कहानी , मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी ज़रूर पढ़िए https://www.bhaarataarth.com/post/रिश्तों-की-महक-आख-िरी-रोटी-भाग-1 https://www.bhaarataarth.com/post/रिश्तों-की-महक-आख-िरी-रोटी-भाग-2 https://www.bhaarataarth.com/post/माँ-की-आख-िरी-गुल्लक https://www.bhaarataarth.com/post/रिश्तों-की-सबसे-बड-ी-द-लत केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित मौलिक धारावाहिक एउपन्यास — मौन दान। एक दिल दहलाने वाली कहानी धारावाहिक उपन्यास जरूर पढ़ि भाग 01 भाग 02 भाग 03 भाग 4 भाग 5 भाग 6 भाग 7 भाग 8 भाग 9 भाग 10 भाग 11 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • MSME Bill 2026: छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत, 6 महीने बाद 50% भुगतान का रास्ता साफ

    लोकसभा से बिना चर्चा पारित हुआ MSME संशोधन विधेयक; लंबित मामले में अदालत दे सकती है सप्लायर को कम से कम 50% रकम भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 08 अगस्त, 2026 MSME Bill 2026 छोटे कारोबारियों और उद्यमियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिल चुकी है। लोकसभा ने शुक्रवार, 7 अगस्त को विपक्ष के हंगामे के बीच विधेयक को बिना चर्चा के पारित कर दिया। इससे पहले 3 अगस्त को राज्यसभा भी इसे मंजूरी दे चुकी थी। विधेयक का सबसे अहम प्रावधान उन MSME सप्लायर्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनका भुगतान विवाद या कानूनी प्रक्रिया में लंबे समय तक अटका रहता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि किसी अदालत में किसी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहती है, तो अदालत संबंधित एमएसएमई आपूर्तिकर्ता को निर्धारित रकम का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दे सकती है। यह प्रावधान छोटे कारोबारियों की सबसे बड़ी समस्या—कैश फ्लो और समय पर भुगतान—को राहत देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। छोटे कारोबारियों के लिए बिक्री होने के बावजूद भुगतान लंबे समय तक अटक जाना कारोबार की कार्यशील पूंजी को प्रभावित करता है। ऐसे में लंबित भुगतान का एक हिस्सा मिलने से कारोबार को जारी रखने, कर्मचारियों का वेतन देने और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। भुगतान विवादों के निपटारे पर जोर MSME Bill 2026 में भुगतान से जुड़े विवादों को निर्धारित समय सीमा में निपटाने और समझौते के तहत तय रकम की वसूली को अधिक प्रभावी बनाने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य छोटे उद्यमों को लंबे विवादों और भुगतान की अनिश्चितता से राहत दिलाना है। MSME क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे छोटे कारोबारी शामिल हैं जो बड़े खरीदारों, कंपनियों और संस्थानों को माल या सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। भुगतान में देरी होने पर इन कारोबारियों की कार्यशील पूंजी फंस जाती है। इससे नए ऑर्डर पूरे करने, कच्चा माल खरीदने और कर्मचारियों को भुगतान करने में परेशानी हो सकती है। विधेयक में विवाद निपटारे की प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रयास इसी चुनौती को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था में MSME की अहम भूमिका देश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार MSME क्षेत्र का भारत की GDP में करीब 31 प्रतिशत, विनिर्माण उत्पादन में लगभग 36 प्रतिशत और कुल निर्यात में करीब 41 प्रतिशत योगदान बताया गया है। यही कारण है कि MSME सेक्टर को मजबूत करना केवल छोटे कारोबारियों के लिए ही नहीं, बल्कि रोजगार, उत्पादन, निर्यात और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। समय पर भुगतान मिलने से छोटे कारोबारियों की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है। इससे कारोबार में निवेश बढ़ाने और नए रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता भी बढ़ सकती है। MSME को मिलने वाला कर्ज भी बढ़ा MSME मंत्री जीतन राम मांझी ने राज्यसभा में क्षेत्र को मिलने वाले कर्ज में हुई वृद्धि का उल्लेख किया। उनके अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 में MSME क्षेत्र को करीब 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया था, जो अब बढ़कर 38.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। सरकार के अनुसार, यह वृद्धि MSME क्षेत्र में बैंकिंग और संस्थागत ऋण की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है। हालांकि कारोबार के लिए केवल कर्ज उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है; समय पर ग्राहकों से भुगतान मिलना भी उतना ही जरूरी है। इसी वजह से MSME Bill 2026 में भुगतान विवादों के समाधान को प्रमुखता दी गई है। लोकसभा में 16 मिनट में पारित हुआ विधेयक लोकसभा में शुक्रवार को विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित रही। पहली स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। इसके बाद MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को करीब 16 मिनट के भीतर पारित कर दिया गया। विधेयक के पारित होने के बाद भी सदन में हंगामा जारी रहा और लोकसभा की कार्यवाही सोमवार, 10 अगस्त तक स्थगित कर दी गई। इससे पहले 3 अगस्त को राज्यसभा से विधेयक पारित हो चुका था। दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक ने संसदीय प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण पूरा कर लिया है। छोटे कारोबारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव? छोटे कारोबारियों के लिए भुगतान में देरी अक्सर केवल एक बिल के अटकने की समस्या नहीं होती। इसका सीधा असर पूरे कारोबार के नकदी प्रवाह पर पड़ सकता है। यदि किसी MSME को सामान या सेवा देने के बाद समय पर भुगतान नहीं मिलता, तो उसे अपने कर्मचारियों, सप्लायर्स और अन्य खर्चों का भुगतान करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में छह महीने से अधिक लंबित कानूनी चुनौती के दौरान कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान का रास्ता खुलना कारोबारियों को तत्काल वित्तीय सहारा दे सकता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 50 प्रतिशत भुगतान स्वतः नहीं मिलेगा। उपलब्ध प्रावधान के अनुसार ऐसी स्थिति में अदालत भुगतान का आदेश दे सकती है। इसलिए प्रत्येक मामले का परिणाम उसके तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। MSME Bill 2026 का व्यापक उद्देश्य भुगतान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, विवादों के समाधान में तेजी लाना और छोटे कारोबारियों की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करना है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो लाखों छोटे उद्यमों को अपने कारोबार में नकदी संकट से निपटने में मदद मिल सकती है।

  • गौ माता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग तेज, सरकार से निर्णायक पहल की अपील

    पोस्टर के जरिए भारतीय हिंदू युवा सेना मेवाड़ का अभियान—गौ संरक्षण को संस्कृति, पर्यावरण, किसान और अर्थव्यवस्था से जोड़ने का संदेश अभियान पोस्टर — “गौ माता राष्ट्रमाता घोषित करें सरकार” भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) 08 अगस्त 2026 उदयपुर/मेवाड़। गौ संरक्षण और गौ माता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर एक अभियान का पोस्टर इन दिनों चर्चा में है। पोस्टर में भारतीय हिंदू युवा सेना मेवाड़ की ओर से सरकार से गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग उठाई गई है। अभियान के माध्यम से गौ संरक्षण को भारतीय संस्कृति, आस्था, किसान, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए व्यापक जनजागरण का संदेश दिया गया है। पोस्टर पर प्रमुख रूप से “गौ माता की रक्षा—राष्ट्र की सुरक्षा” और “जिस देश की माँ सुरक्षित, उस देश का भविष्य सुरक्षित” जैसे संदेश अंकित हैं। साथ ही “गौ माता राष्ट्रमाता घोषित करें सरकार” का आह्वान प्रमुखता से किया गया है। अभियान का उद्देश्य गौ संरक्षण के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाना और सरकार से इस विषय पर नीतिगत स्तर पर विचार करने की मांग को सामने रखना बताया गया है। पोस्टर में गौ माता को भारतीय संस्कृति, आस्था, पहचान और अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कई पहलुओं को रेखांकित किया गया है। इसमें पर्यावरण संरक्षण, किसान की समृद्धि, स्वास्थ्य, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे विषयों को गौ संरक्षण से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। अभियान से जुड़े संदेश में यह भी कहा गया है कि गौ माता की सेवा को केवल धार्मिक विषय के रूप में नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन और भारतीय परंपरा से जुड़े व्यापक विषय के रूप में देखा जाना चाहिए। समर्थकों का मानना है कि गौवंश संरक्षण के लिए प्रभावी नीतियां, पशु चिकित्सा सुविधाएं, गौशालाओं की व्यवस्था, आवारा पशुओं की समस्या का समाधान और किसानों को व्यावहारिक सहायता जैसे कदम महत्वपूर्ण हो सकते हैं। गौ संरक्षण पर बहस को नीति से जोड़ने की कोशिश गौ माता राष्ट्रमाता अभियान के माध्यम से उठाई गई मांग धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ सामाजिक और नीतिगत चर्चा को भी सामने लाती है। भारत में गौवंश संरक्षण लंबे समय से सार्वजनिक विमर्श का विषय रहा है। अलग-अलग राज्यों में गौ संरक्षण, पशुपालन, गोशालाओं और गौवंश से संबंधित अलग-अलग कानून एवं नीतियां लागू हैं। ऐसे में ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही संभव होगा। प्रस्तुत पोस्टर एक अभियान और मांग को दर्शाता है; इसे केंद्र या राज्य सरकार द्वारा लिया गया आधिकारिक निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। अभियान के समर्थकों का कहना है कि गौ संरक्षण को केवल भावनात्मक मुद्दे तक सीमित रखने के बजाय इसे किसानों की आय, जैविक खेती, प्राकृतिक कृषि, ग्रामीण रोजगार और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों से जोड़कर देखा जाना चाहिए। वहीं, इस विषय पर व्यापक सामाजिक सहमति और संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नीति निर्माण की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण है। किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर पोस्टर में “गौ माता से किसान समृद्ध” और “गौ माता से अर्थव्यवस्था सुदृढ़” जैसे संदेशों के जरिए पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया गया है। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अभियान का संदेश इसी पारंपरिक व्यवस्था को संरक्षण और प्रोत्साहन देने पर केंद्रित दिखाई देता है। इसके अलावा पोस्टर में गौ माता को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए “गौ माता से पर्यावरण सुरक्षित” का संदेश भी दिया गया है। प्राकृतिक एवं जैविक कृषि को बढ़ावा देने की चर्चाओं में पशुपालन से प्राप्त जैविक संसाधनों के उपयोग का विषय भी सामने आता रहा है। सड़क से सरकार तक पहुंचाने का आह्वान पोस्टर के अंतिम हिस्से में लोगों से एकजुट होकर संकल्प लेने की अपील की गई है। अभियान का संदेश है कि गौ माता के सम्मान और संरक्षण के लिए सामाजिक भागीदारी बढ़ाई जाए। भारतीय हिंदू युवा सेना मेवाड़ के नाम से जारी इस पोस्टर में “गौ माता की रक्षा के लिए हम सदैव तत्पर हैं” का संदेश भी दिया गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की यह मांग आगे किस रूप में राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत चर्चा का हिस्सा बनती है। इस मुद्दे पर सरकार, सामाजिक संगठनों, पशुपालकों, किसानों और आम नागरिकों के विचार महत्वपूर्ण होंगे। भारतार्थ खबर का मानना है कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर जनभावनाओं के साथ-साथ तथ्य, कानून, संविधान और व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर स्वस्थ एवं शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संवाद आवश्यक है। महत्वपूर्ण: यह समाचार उपलब्ध अभियान पोस्टर और उसमें व्यक्त मांग पर आधारित है। “गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने” की मांग को सरकारी घोषणा अथवा वर्तमान कानूनी स्थिति के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।

  • अवचेतन मन की शक्ति से आत्मपरिवर्तन संभव: मुनि वीरसागर

    “विज़ुअलाइज़ेशन शेखचिल्ली बनना नहीं”, वर्तमान में जीने और ज्ञाता-द्रष्टा भाव से बदलेगा जीवन भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 08 अगस्त, 2026 बेंगलुरु, 8 अगस्त 2026। मन की शक्ति, अवचेतन मन की कार्यप्रणाली और आत्मपरिवर्तन की आध्यात्मिक प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से समझाते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने “क्या विज़ुअलाइज़ेशन करना शेखचिल्ली बनना है?” विषय पर प्रेरक प्रवचन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कल्पनाओं में खो जाना और किसी श्रेष्ठ लक्ष्य को विश्वास, संकल्प, पुरुषार्थ तथा निरंतर साधना के साथ अपने जीवन में उतारना एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में केवल जाग्रत चेतना ही सक्रिय नहीं रहती, बल्कि अवचेतन मन के स्तर पर भी अनुभव, संस्कार, विचार और प्रतिक्रियाएं लगातार अपना प्रभाव डालते रहते हैं। यदि व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं और जागरूकता के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करना सीख ले, तो आत्मनिरीक्षण और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ सकता है। कल्पना और संकल्प में समझें अंतर प्रवचन का प्रमुख केंद्र विज़ुअलाइज़ेशन, सकारात्मक चिंतन और संकल्प रहा। मुनि श्री ने शेखचिल्ली के उदाहरण के माध्यम से समझाया कि केवल बड़े-बड़े सपने देखना और उनके लिए कोई वास्तविक प्रयास नहीं करना कल्पना मात्र है। उन्होंने कहा कि वास्तविक संकल्प वह है जिसमें व्यक्ति अपने श्रेष्ठ लक्ष्य को केवल सोचता नहीं, बल्कि उसके प्रति आंतरिक विश्वास विकसित करता है और फिर उसी दिशा में निरंतर पुरुषार्थ करता है। सकारात्मक चिंतन का अर्थ वास्तविकता से भागना नहीं, बल्कि अपनी चेतना को सकारात्मक दिशा देकर कर्म और आचरण में उसका प्रभाव दिखाई देना है। “भूत सपना, वर्तमान अपना, भावी कल्पना” मुनि श्री वीरसागर जी महाराज ने वर्तमान क्षण के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रसिद्ध पंक्ति “भूत सपना, वर्तमान अपना, भावी कल्पना” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीता हुआ समय वापस नहीं आता और भविष्य अभी हमारे सामने उपस्थित नहीं है। इसके बावजूद मनुष्य अक्सर अतीत के पश्चाताप और भविष्य की चिंता में अपना वर्तमान गंवा देता है। मुनि श्री ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत वर्तमान क्षण में जागरूक होकर जीने से होती है। व्यक्ति के पास जो समय और अवसर अभी उपलब्ध है, उसका विवेकपूर्ण उपयोग ही जीवन को सार्थक दिशा दे सकता है। “मैं क्रोधित हूं” नहीं, “मेरे भीतर क्रोध उत्पन्न हो रहा है” प्रवचन में ज्ञाता-द्रष्टा भाव को आत्मपरिवर्तन की महत्वपूर्ण कुंजी के रूप में समझाया गया। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य को अपने क्रोध, भय, चिंता और अन्य भावनाओं का दास बनने के बजाय उनका साक्षी बनने का अभ्यास करना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “मैं क्रोधित हूं” और “मेरे भीतर क्रोध का भाव उत्पन्न हो रहा है”—इन दोनों वाक्यों में दृष्टिकोण का बड़ा अंतर है। दूसरे भाव में व्यक्ति अपने भीतर उठ रहे विचार या भावना को देखने वाला बनता है। इससे तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय सजग होकर स्थिति को समझने की संभावना बढ़ती है। मुनि श्री ने कहा कि जब व्यक्ति अपने भावों को पहचानना और उन्हें बिना तत्काल प्रतिक्रिया के देखना सीखता है, तो वह धीरे-धीरे प्रतिक्रियाशीलता से आत्मनिरीक्षण और आत्मसंयम की ओर बढ़ सकता है। “शुद्धोऽहम्” और “आनंदस्वरूपोऽहम्” के भाव का अभ्यास मुनि श्री ने जैन आध्यात्मिक परंपरा में आत्मबोध से जुड़े “शुद्धोऽहम्” और “आनंदस्वरूपोऽहम्” जैसे भावों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल शब्दों का उच्चारण करना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने समझाया कि साधना का वास्तविक उद्देश्य इन भावों को अपने अंतर्मन में अनुभव करने का प्रयास करना है। जब कोई व्यक्ति किसी श्रेष्ठ भाव को बार-बार जागरूकता के साथ धारण करता है और उसके अनुरूप अपने व्यवहार को दिशा देने का प्रयास करता है, तो उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की प्रक्रिया विकसित हो सकती है। मुनि श्री के अनुसार, विचारों और भावनाओं के प्रति सजगता व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व को समझने तथा अपने आचरण में आवश्यक सुधार करने का अवसर देती है। अवचेतन मन को समझने पर जोर प्रवचन के दौरान अवचेतन मन की शक्ति को समझाते हुए मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य के भीतर अनेक पुराने अनुभव, संस्कार और प्रतिक्रियाएं अपना प्रभाव छोड़ते हैं। कई बार व्यक्ति बिना पूरी जागरूकता के भी किसी परिस्थिति पर प्रतिक्रिया कर देता है। ऐसे में आत्मनिरीक्षण का अभ्यास व्यक्ति को यह पहचानने में मदद कर सकता है कि उसके भीतर कौन-से विचार और भाव सक्रिय हैं। मुनि श्री ने चेतना को जागृत करने और अपने मन को देखने की प्रक्रिया को आत्मपरिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि मन को दबाने के बजाय उसे समझना और उसके प्रति सजग होना आवश्यक है। जब व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को देखने वाला बनता है, तब वह अपने व्यवहार में अधिक विवेक और संयम लाने का प्रयास कर सकता है। सामूहिक जाप और निर्देशित ध्यान से साधना प्रवचन के अंतिम चरण में मुनि श्री वीरसागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को निर्देशित ध्यान और सामूहिक जाप का अभ्यास कराया। इस दौरान साधकों को मन को शांत करने तथा अपने भीतर पवित्रता, शांति और आत्मबोध के भाव जागृत करने की प्रेरणा दी गई। “शुद्धोऽहम्” के भाव के साथ श्रद्धालुओं को अपने वास्तविक आत्मस्वरूप की ओर ध्यान केंद्रित करने का अभ्यास कराया गया। इससे प्रवचन का वातावरण आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन से भर उठा। संकल्प के साथ शुरू होता है परिवर्तन प्रवचन के दौरान मुनि श्री वीरसागर जी महाराज ने संदेश दिया कि परिवर्तन किसी दूर के भविष्य में नहीं, बल्कि वर्तमान क्षण में जागरूकता के साथ शुरू होता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक भाव को विश्वास और संकल्प के साथ धारण करता है तथा उसे अपने पुरुषार्थ और आचरण से जोड़ता है, तो उसके विचार और व्यवहार भी उसी दिशा में विकसित होने लगते हैं। मुनि श्री के इस संदेश ने श्रद्धालुओं को यह समझने की प्रेरणा दी कि सकारात्मक चिंतन केवल कल्पना नहीं, बल्कि जागरूकता, संकल्प, साधना और पुरुषार्थ से जुड़ी जीवन प्रक्रिया है।

  • स्वस्थ शरीर से ही धर्माराधना संभव: साध्वी प्रियश्रद्धांजना श्री जी ने बताए निरोगी काया के सूत्र

    बसवनगुडी में चातुर्मास प्रवचन के दौरान संतुलित-सात्विक आहार, संयम और स्वास्थ्य को बताया धर्म साधना का आधार भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु, कर्नाटक | 08 अगस्त, 2026 स्वस्थ शरीर से ही धर्माराधना संभव है।” बेंगलुरु के बसवनगुडी स्थित श्री जिन कुशल सूरी जैन दादावाड़ी ट्रस्ट के तत्वावधान में चातुर्मास के अवसर पर आयोजित विशेष प्रवचन में प. पू. साध्वी श्री प्रियश्रद्धांजना श्री जी म. सा. ने श्रद्धालुओं को निरोगी काया, संयमित आहार और संतुलित जीवनशैली का महत्व समझाया। “पहला सुख निरोगी काया” विषय पर आयोजित प्रवचन में साध्वीश्री ने कहा कि शरीर स्वस्थ रहेगा तो व्यक्ति सहजता से धर्माराधना, सेवा और आध्यात्मिक साधना कर सकेगा। उन्होंने कहा कि शरीर में किसी प्रकार की व्याधि या अस्वस्थता होने पर व्यक्ति के दैनिक जीवन के साथ-साथ उसकी धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं। साध्वीश्री ने निरोगी शरीर को मनुष्य की महत्वपूर्ण संपदा बताते हुए कहा कि संसार की अनेक भौतिक वस्तुएं धन खर्च करके प्राप्त की जा सकती हैं, लेकिन अच्छी सेहत को केवल धन के बल पर खरीदा नहीं जा सकता। उन्होंने इसे पुण्य और सदाचरण से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया। आहार और पानी को बताया जीवन का आधार प्रवचन के दौरान साध्वी श्री प्रियश्रद्धांजना श्री जी ने आहार और पानी को जीवन का मूल आधार बताते हुए संयमित एवं संतुलित भोजन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भोजन ऐसा होना चाहिए जो शरीर के लिए हितकारी हो और जीवन में सात्विकता को बढ़ावा दे। उन्होंने श्रद्धालुओं को भोजन के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि स्वाद के आकर्षण में आवश्यकता से अधिक या अनुचित भोजन करने के बजाय शरीर की आवश्यकता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। उनके अनुसार, भोजन केवल स्वाद की पूर्ति का माध्यम नहीं, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने का महत्वपूर्ण आधार है। साध्वीश्री ने भोजन और पानी ग्रहण करने की आदतों को लेकर भी कई पारंपरिक सुझाव साझा किए। उन्होंने कहा कि भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाना, पानी को धीरे-धीरे पीना और आहार में संयम रखना दैनिक जीवन के लिए उपयोगी अनुशासन हो सकता है। ‘प्रियकारी’ नहीं, ‘श्रेयकारी’ आहार पर जोर प्रवचन में साध्वीश्री ने प्रियकारी और श्रेयकारी आहार के बीच अंतर को समझाया। उन्होंने कहा कि जो भोजन केवल जीभ को अच्छा लगे, वह जरूरी नहीं कि शरीर के लिए भी हितकारी हो। इसलिए व्यक्ति को स्वाद के बजाय स्वास्थ्य और संयम को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने भोजन में संतुलन और सात्विकता बनाए रखने की प्रेरणा दी तथा कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आहार संबंधी अनुशासन आवश्यक है। विशेष रूप से रात के भोजन, विभिन्न खाद्य पदार्थों के संयोजन और खाली पेट कुछ चीजों के सेवन से जुड़े पारंपरिक नियमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं को सजग रहने का संदेश दिया। वात, पित्त और कफ के संतुलन का उल्लेख साध्वीश्री ने भारतीय पारंपरिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए वात, पित्त और कफ के संतुलन को महत्वपूर्ण माना गया है। उन्होंने जीवन में अनुशासन, उचित आहार और संयम को स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक बताया। उन्होंने प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा और आचार्य वाघभट्ट से जुड़े ग्रंथों का उल्लेख करते हुए भोजन और दैनिक जीवन से संबंधित कई पारंपरिक नियमों की जानकारी दी। इनमें सुबह पानी पीने, भोजन को अच्छी तरह चबाने और भोजन-पानी की आदतों में संयम रखने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इन बातों को साध्वीश्री ने धार्मिक एवं पारंपरिक जीवनशैली के संदर्भ में श्रद्धालुओं के सामने रखा और नियमित जीवन में अनुशासन अपनाने का संदेश दिया। प्रतिक्रमण को बताया अनुशासन और साधना का माध्यम प्रवचन के दौरान जैन धर्म की प्रतिक्रमण परंपरा का उल्लेख करते हुए साध्वीश्री ने कहा कि विधिपूर्वक प्रतिक्रमण करना व्यक्ति के धार्मिक अनुशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने इसे शरीर और मन दोनों को साधना से जोड़ने वाली प्रक्रिया के रूप में समझाया। उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्माराधना के साथ-साथ अपने दैनिक व्यवहार, आहार और जीवनचर्या पर भी ध्यान देने का आह्वान किया। साध्वीश्री के अनुसार, आध्यात्मिक जीवन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि संयमित और जागरूक जीवन जीना भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। रविवार को होगा विशेष आयोजन कार्यक्रम में बताया गया कि रविवार को विशेष कार्यक्रम के दौरान पुण्यशाली शालीभद्र की “99 पेटियां उतारने” से जुड़े प्रसंग का विस्तृत विवेचन किया जाएगा। इस प्रसंग को जीवंत नाटिका के माध्यम से भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को धार्मिक कथा और उसके संदेश को सहज रूप से समझने का अवसर मिलेगा। आयोजकों के अनुसार, इस विशेष प्रस्तुति का उद्देश्य धार्मिक प्रसंग के माध्यम से त्याग, पुण्य, संयम और आध्यात्मिक मूल्यों को जनमानस तक पहुंचाना है। चातुर्मास के दौरान आयोजित यह प्रवचन श्रृंखला श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन के साथ जीवन को अनुशासित और संतुलित बनाने का संदेश भी दे रही है। “पहला सुख निरोगी काया” के माध्यम से साध्वीश्री ने यह संदेश दिया कि स्वस्थ शरीर को केवल भौतिक सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि धर्म, सेवा और आत्मिक उन्नति के लिए उपयोगी साधन के रूप में देखना चाहिए।

  • FCRA Bill 2026: मानसून सत्र के आखिरी हफ्ते में बढ़ी सियासी हलचल, कांग्रेस का तीन दिन का व्हिप

    10 से 12 अगस्त तक सांसदों की मौजूदगी अनिवार्य; FCRA संशोधन विधेयक को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने, 13 अगस्त को खत्म होगा मानसून सत्र भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 08 अगस्त, 2026 FCRA Bill 2026 को लेकर संसद के मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह में सियासी हलचल तेज हो गई है। सरकार और विपक्ष के बीच पहले से जारी टकराव के बीच कांग्रेस ने लोकसभा और राज्यसभा के अपने सभी सांसदों के लिए 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। इस तीन दिवसीय व्हिप को संसद के आखिरी सप्ताह में महत्वपूर्ण विधायी कार्यवाही की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। संसद का मौजूदा मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और 13 अगस्त 2026 को समाप्त होना निर्धारित है। इस बीच विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है। हालांकि, उपलब्ध सरकारी संभावित कार्यसूची में फिलहाल FCRA संशोधन विधेयक का आधिकारिक उल्लेख नहीं होने की बात सामने आई है। इसलिए इसके पेश होने और पारित होने को लेकर अंतिम स्थिति सदन की कार्यवाही के दौरान ही स्पष्ट होगी। कांग्रेस ने जारी किया तीन दिन का व्हिप कांग्रेस ने अपने सांसदों को 10 से 12 अगस्त तक संसद में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। पार्टी ने विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों से भी अपने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। कांग्रेस की ओर से FCRA संशोधन को लेकर कड़ा विरोध जताया गया है। पार्टी का तर्क है कि विदेशी अंशदान से संबंधित नियमों में बदलाव का असर गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न संगठनों की गतिविधियों पर पड़ सकता है। कांग्रेस नेताओं ने ऐसे संवेदनशील विधेयक पर पर्याप्त चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया है। दूसरी ओर, सरकार का पक्ष विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय सुरक्षा से जुड़ा बताया जा रहा है। सरकार के अनुसार, वैश्विक वित्तीय नेटवर्क, डिजिटल लेनदेन और सीमा-पार धन के प्रवाह के बदलते स्वरूप को देखते हुए विदेशी योगदान के नियमन की व्यवस्था को मजबूत रखना जरूरी है। बीजेपी ने भी सांसदों को सदन में रहने को कहा संसद के अंतिम सप्ताह को देखते हुए सत्तारूढ़ भाजपा ने भी अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण विधायी और राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, किसी भी विधेयक के पेश होने और पारित होने की अंतिम स्थिति सदन की आधिकारिक कार्यसूची तथा उस समय की कार्यवाही पर निर्भर करेगी। ऐसे में FCRA Bill 2026 को लेकर राजनीतिक अटकलों के बीच आधिकारिक घोषणा का इंतजार महत्वपूर्ण होगा। गृह मंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के बीच मुलाकात संसद में जारी हंगामे के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके कार्यालय में मुलाकात की। बताया गया कि दोनों के बीच करीब एक घंटे तक चर्चा हुई। संसद में विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर से जुड़े दान संबंधी आरोपों सहित कई मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा है। इन मुद्दों के कारण सदन की कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई है। परिसीमन को लेकर भी बातचीत जारी संसद के मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक को लेकर भी राजनीतिक संवाद जारी है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच इस मुद्दे पर कई दौर की बातचीत होने की जानकारी सामने आई है। परिसीमन और FCRA जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में संसद के भीतर राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की NDA सांसदों के साथ बैठक इस राजनीतिक माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने आवास पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों के साथ बैठक की। बैठक का उद्देश्य सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर समन्वय मजबूत करना और संसद के कामकाज में सांसदों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना बताया गया। बैठक में विभिन्न सहयोगी दलों के सांसदों की मौजूदगी रही। प्रधानमंत्री ने सांसदों को विपक्ष के साथ संवाद और बेहतर संसदीय संबंध बनाए रखने पर भी जोर देने की सलाह दी। आखिर FCRA क्या है? FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act भारत में विदेशी अंशदान प्राप्त करने और उसके उपयोग को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है। इसका प्रशासन केंद्रीय गृह मंत्रालय के माध्यम से किया जाता है। FCRA के तहत पात्र संस्थाओं, संगठनों और अन्य अनुमत इकाइयों को विदेश से मिलने वाले योगदान के संबंध में निर्धारित नियमों का पालन करना होता है। विदेशी धन की प्राप्ति, उसका उपयोग, लेखा-जोखा और रिपोर्टिंग इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं। कानून का व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी योगदान का इस्तेमाल भारतीय कानूनों के अनुरूप हो तथा देश की संप्रभुता, सुरक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन न हो। सरकार और विपक्ष के बीच मूल मतभेद क्या है? FCRA संशोधन को लेकर सरकार और विपक्ष के दृष्टिकोण में मुख्य अंतर नियमन बनाम नागरिक एवं संस्थागत स्वतंत्रता के सवाल पर दिखाई देता है। सरकार का पक्ष विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा पर केंद्रित है, जबकि विपक्ष का कहना है कि नियमों में अत्यधिक कठोरता से सामाजिक संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों के कामकाज पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि संसद के अंतिम सप्ताह में FCRA Bill 2026 को लेकर राजनीतिक बहस महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, विधेयक की वास्तविक स्थिति, उसके प्रावधान और संसद में उसकी प्रक्रिया के बारे में अंतिम जानकारी आधिकारिक संसदीय दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी। क्या वर्षों बाद लौटे बेटे अब भी वही थे, जिन्हें कभी माँ अपने हाथों से कौर खिलाकर बड़ा करती थी? बरईपुर गाँव की उस सुबह में जैसे वर्षों बाद फिर से उत्सव उतर आया था। सरस्वती देवी, जिन्हें पूरा गाँव "अम्मा" कहकर पुकारता था, सूरज निकलने से पहले ही जाग गई थीं। आज उनके तीनों बेटे अपने-अपने परिवार के साथ घर आने वाले थे।

  • एक हादसा, एक मौत और कई सवाल—क्या हम इससे कोई सबक लेंगे?

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) प्रयागराज, उत्तर प्रदेश 08 अगस्त, 2026 झांसी में सड़क हादसे में अवान अहमद की मौत की खबर ने एक बार फिर उस परिवार को चर्चा में ला दिया है, जिसका नाम लंबे समय से अपराध, राजनीति और कानून से जुड़े विवादों के कारण सुर्खियों में रहा है। लेकिन इस घटना को केवल एक चर्चित परिवार के सदस्य की मौत के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे मानवीय संवेदना, कानून व्यवस्था, अपराध की सामाजिक छाया और सड़क सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण प्रश्न जुड़े हुए हैं। नाम नहीं, व्यक्ति के कर्म से तय हो दोष किसी व्यक्ति का जन्म किसी परिवार में होना उसके अपराधी होने का प्रमाण नहीं हो सकता। कानून की नजर में किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध दोष तभी माना जाना चाहिए, जब जांच और न्यायिक प्रक्रिया में उसके खिलाफ आरोप सिद्ध हों। इसीलिए किसी मृत व्यक्ति को केवल उसके परिवार के अतीत के आधार पर अपराधी घोषित करना न्याय और पत्रकारिता—दोनों की कसौटी पर उचित नहीं है। अपराध का असर केवल अपराधी तक सीमित नहीं रहता अपराध की दुनिया का सबसे भयावह पहलू यह है कि उसकी कीमत कई बार परिवार और आने वाली पीढ़ियां भी चुकाती हैं। जब किसी परिवार का नाम लगातार हिंसा और आपराधिक विवादों से जुड़ता है तो उसका सामाजिक प्रभाव बच्चों और रिश्तेदारों के जीवन पर भी पड़ सकता है। यह समाज के लिए गंभीर चिंतन का विषय है कि हम आने वाली पीढ़ी को किस प्रकार का वातावरण दे रहे हैं। मौत पर राजनीति नहीं, संवेदना जरूरी किसी की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की टिप्पणियां शुरू हो जाती हैं। समर्थक और विरोधी अपने-अपने नजरिये से घटना को देखने लगते हैं। लेकिन किसी व्यक्ति की मृत्यु को उपहास, बदले या राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनाना समाज को संवेदनहीन बनाता है। मृत्यु के बाद भी तथ्य और कानून का सम्मान होना चाहिए। अपराध की आलोचना जरूरी है, लेकिन मृत्यु का मजाक बनाना किसी सभ्य समाज की पहचान नहीं हो सकती। सड़क हादसे की जांच भी जरूरी इस घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू सड़क सुरक्षा भी है। यदि सड़क दुर्घटना में किसी व्यक्ति की जान जाती है तो जांच सिर्फ दुर्घटना होने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वाहन की गति, सड़क की स्थिति, चालक की स्थिति, यातायात व्यवस्था और दुर्घटना के वास्तविक कारणों की भी जांच होनी चाहिए। देश में सड़क दुर्घटनाओं में लगातार लोगों की जान जाती है। हर हादसा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है कि सड़क सुरक्षा को केवल नियमों तक सीमित न रखकर व्यवहार में भी उतारा जाए। संपादकीय टिप्पणी अवान अहमद की मौत को लेकर खबर लिखते समय न तो अनावश्यक सनसनी होनी चाहिए और न ही किसी अपुष्ट आरोप को तथ्य बनाकर प्रस्तुत किया जाना चाहिए। अतीत के विवाद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी व्यक्ति के संबंध में निष्कर्ष तथ्य, जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। इस घटना को समाज के लिए एक और चेतावनी के रूप में देखना चाहिए- अपराध का रास्ता अंततः विनाश की ओर ले जाता है, जबकि कानून का रास्ता ही न्याय और व्यवस्था की गारंटी देता है। एक मौत को केवल खबर बनाकर भूल जाना आसान है। कठिन काम है उससे सामाजिक सबक लेना। भारतार्थ खबर — खबर नहीं, उसका अर्थ।

  • E20 पर राहुल गांधी के वीडियो को लेकर चर्चा, फ्यूल कैप पर दिखी मार्किंग ने खड़े किए सवाल

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली,08 अगस्त, 2026 दिल्ली E20 पेट्रोल को लेकर देश में जारी बहस के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में राहुल गांधी एक कार के फ्यूल टैंक का ढक्कन खोलते नजर आते हैं। इसी दौरान फ्यूल कैप के अंदर E20 की मार्किंग दिखाई देती है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। E20 को लेकर राहुल गांधी का सवाल राहुल गांधी ने E20 पेट्रोल को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि E20 ईंधन के कारण वाहन मालिकों पर आर्थिक असर पड़ सकता है और इस विषय को सार्वजनिक चर्चा में गंभीरता से लिया जाना चाहिए। कार पर E20 मार्किंग से बढ़ी चर्चा वीडियो में दिखाई दे रही कार के फ्यूल भरने वाले हिस्से के पास E20 से जुड़ी मार्किंग नजर आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। लोगों का सवाल है कि यदि संबंधित वाहन E20 ईंधन के अनुकूल है, तो उसे E20 से जुड़ी समस्या के उदाहरण के रूप में किस संदर्भ में दिखाया गया। हालांकि, सिर्फ फ्यूल कैप पर E20 लिखा होने से यह साबित नहीं होता कि वाहन में कोई खराबी नहीं हो सकती। इसी तरह केवल वीडियो देखकर वाहन में आई किसी खराबी का कारण E20 को मान लेना भी तकनीकी प्रमाण के बिना उचित नहीं होगा। E20 पर तथ्य जानना जरूरी E20 पेट्रोल में पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण होता है। किसी वाहन पर इसका प्रभाव उसके मॉडल, निर्माण वर्ष और निर्माता की ओर से निर्धारित ईंधन अनुकूलता पर निर्भर कर सकता है। ऐसे में वाहन मालिकों के लिए जरूरी है कि वे अपने वाहन के मैनुअल और निर्माता की आधिकारिक जानकारी के आधार पर यह पता करें कि उनका वाहन E20 के लिए अनुकूल है या नहीं। सोशल मीडिया के दावे से सावधान E20 को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में किसी वायरल वीडियो या पोस्ट को देखकर तुरंत निष्कर्ष निकालने के बजाय उसके मूल वीडियो, वाहन का मॉडल, निर्माता की जानकारी और तकनीकी प्रमाण की जांच करना जरूरी है। भारतार्थ खबर का निष्कर्ष: राहुल गांधी के E20 संबंधी वीडियो में फ्यूल कैप पर दिखाई दे रही मार्किंग ने बहस जरूर छेड़ दी है, लेकिन इस एक तस्वीर के आधार पर E20 को वाहन खराब होने का प्रमाण या वाहन के पूरी तरह सुरक्षित होने का प्रमाण मानना सही नहीं होगा। भारतार्थ खबर — खबर नहीं, उसका अर्थ।Bhaarataarth.com | YouTube: @bhaarataarthlive

  • रिश्तों की महक, 'आख़िरी रोटी" (भाग–1)

    दिल को छू लेने वाली मौलिक कहानियाँ लेखक: अशोक कुमार सिंह जब माँ अपने हिस्से की रोटी भी बच्चों के लिए छोड़ देती है, तब घर केवल मकान नहीं रहता—वह ममता का मंदिर बन जाता है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में बसे एक छोटे-से गाँव बरईपुर की सुबह आज भी पक्षियों की चहचहाहट और मंदिर की घंटियों से जागती थी। गाँव के बीचों-बीच खड़ा बूढ़ा नीम का पेड़ न जाने कितनी पीढ़ियों का साक्षी था। उसी पेड़ से कुछ दूर मिट्टी और ईंटों से बना एक छोटा-सा घर था, जहाँ रहती थीं सरस्वती देवी, जिन्हें पूरा गाँव प्यार से "अम्मा" कहता था। उम्र पचहत्तर वर्ष के पार पहुँच चुकी थी। कमर झुक गई थी, हाथ काँपने लगे थे, लेकिन चेहरे की ममता आज भी वैसी ही थी जैसी बरसों पहले थी। उनकी आँखों की रोशनी भले कम हो गई थी, पर अपने बच्चों के कदमों की आहट वे आज भी पहचान लेती थीं। अम्मा के तीन बेटे थे—राघव, मोहन और सुरेश। तीनों पढ़-लिखकर शहरों में बस चुके थे। किसी के पास बड़ा बंगला था, किसी के पास कारोबार और किसी के पास ऊँची नौकरी। लेकिन जिस घर ने उन्हें चलना सिखाया था, वहाँ अब केवल अम्मा और उनकी यादें रह गई थीं। गाँव वाले अक्सर कहते— "अम्मा, अब शहर चली जाइए। वहाँ आराम रहेगा।" अम्मा हर बार मुस्कुरा देतीं। "जिस आँगन में मेरे बच्चों ने पहला कदम रखा, उसी आँगन में मेरी आख़िरी साँस भी निकले, इससे बड़ा सुख क्या होगा?" यह कहते हुए उनकी नज़र बरामदे में पड़े उस पुराने लकड़ी के झूले पर टिक जाती, जिसे उनके स्वर्गीय पति रामनाथ ने अपने हाथों से बनाया था। उस दिन दोपहर में डाकिया एक चिट्ठी देकर गया। काँपते हाथों से अम्मा ने लिफ़ाफ़ा खोला। चिट्ठी बड़े बेटे राघव की थी— "अम्मा, इस रविवार हम तीनों भाई अपने-अपने परिवार के साथ गाँव आ रहे हैं। बहुत दिन हो गए, आपके हाथ की रोटी खाए।" बस इतना पढ़ना था कि अम्मा की आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े। उन्होंने उसी समय घर की सफ़ाई शुरू कर दी। आँगन लीपा, पुराने पीतल के बर्तन चमकाए और बरसों बाद मिट्टी के चूल्हे को फिर से सजाया। उन्हें क्या पता था... कि इसी चूल्हे पर सिकने वाली एक आख़िरी रोटी आने वाले कुछ घंटों में पूरे परिवार को आईना दिखाने वाली थी। क्रमशः… कल पढ़िए: क्या वर्षों बाद एक साथ बैठा परिवार सचमुच पहले जैसा था, या रिश्तों की गर्माहट कहीं खो चुकी थी? ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह , प्रकाशक: भारतार्थ ख़बर . प्रेरक कथा, पारिवारिक कहानी, जीवन दर्शन, इंसानियत, रिश्ते, समाज, प्रेरणा, भावनात्मक कहानी, सकारात्मक सोच, भारतार्थ ख़बर केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित मौलिक धारावाहिक एउपन्यास — मौन दान। एक दिल दहलाने वाली कहानी धारावाहिक उपन्यास जरूर पढ़ि अगर आपने इस धारावाहिक उपन्यास के पिछले भाग को नहीं पढ़ा है तो पढ़ें, भाग 01 भाग 02 भाग 03 भाग 4 भाग 5 भाग 6 भाग 7 भाग 8 भाग 9 भाग 10 भाग 11 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

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