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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • CJP पर वांगचुक का बड़ा बयान, बोले -राजनीति में आना गलत नहीं

    भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026। सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने कॉकroach जनता पार्टी (CJP) से जुड़े युवाओं और उसके प्रमुख संस्थापकों की राजनीतिक संभावनाओं को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि उनके आकलन के अनुसार CJP से जुड़े कुछ संस्थापकों में भविष्य में राजनीति में आने की महत्वाकांक्षा हो सकती है। हालांकि, वांगचुक ने इसे किसी तरह की नकारात्मक बात नहीं बताया। वांगचुक ने यह टिप्पणी एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान की। उन्होंने स्पष्ट किया कि CJP के संस्थापकों ने स्वयं उनके सामने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की घोषणा नहीं की थी। यह उनके साथ काम करने के दौरान बना व्यक्तिगत आकलन है। इसलिए इसे CJP संस्थापकों की घोषित राजनीतिक योजना के रूप में देखना उचित नहीं होगा। ‘राजनीति में आने की इच्छा गलत नहीं’ वांगचुक के अनुसार युवाओं का राजनीति में आने की इच्छा रखना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि युवा यदि आगे चलकर राजनीतिक दल में शामिल होना चाहते हैं या अपना राजनीतिक संगठन बनाना चाहते हैं, तो इसमें अपने आप में कुछ गलत नहीं है। उनका जोर इस बात पर रहा कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा और किसी मौजूदा छात्र आंदोलन की भूमिका को अलग-अलग रखा जाना चाहिए। छात्र आंदोलन को गैर-दलीय रखने पर जोर वांगचुक ने कहा कि जिस छात्र आंदोलन से CJP के नेता जुड़े रहे, उसकी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उसे राजनीतिक दलगत हितों से अलग रखना जरूरी है। उन्होंने आंदोलन के दौरान CJP से जुड़े नेताओं को भी यही सलाह दी थी कि यदि भविष्य में वे राजनीति में जाना चाहते हैं तो ऐसा कर सकते हैं, लेकिन छात्र मंच की पहचान और उद्देश्य को राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से प्रभावित नहीं होने देना चाहिए। ‘वे संत नहीं हैं’ टिप्पणी का संदर्भ CJP संस्थापकों के संदर्भ में वांगचुक ने कहा कि वे ऐसे लोग नहीं हैं जिनसे किसी भी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा की अपेक्षा न की जाए। उनके इस बयान का आशय यह था कि आंदोलन से जुड़े युवा भी सामान्य सामाजिक और राजनीतिक आकांक्षाएं रखने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने साथ ही युवा नेतृत्व के राजनीति में आने को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा बताया। राजनीतिक भविष्य पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं वांगचुक की टिप्पणी के बावजूद उपलब्ध रिपोर्टों में CJP संस्थापकों की ओर से भविष्य में चुनाव लड़ने या औपचारिक राजनीतिक दल के रूप में आगे बढ़ने की कोई ऐसी घोषणा सामने नहीं आती, जिसे उनकी निश्चित राजनीतिक योजना माना जा सके। इसलिए वांगचुक के बयान को फिलहाल उनके व्यक्तिगत आकलन और राजनीतिक दृष्टिकोण के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आंदोलन और राजनीति के बीच संतुलन का सवाल वांगचुक की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब CJP से जुड़े छात्र आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। आंदोलन के दौरान वांगचुक ने भी CJP नेताओं के साथ मंच साझा किया था। उनके ताजा बयान का मुख्य संदेश यही है कि युवाओं का राजनीति में प्रवेश लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा हो सकता है, लेकिन किसी छात्र या सामाजिक आंदोलन की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उसके घोषित उद्देश्य और राजनीतिक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए।

  • मॉनसून फिर तेज: ओडिशा-छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट

    भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026। देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार पूर्वी, मध्य और उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी तथा अत्यंत भारी बारिश की स्थिति बनने की संभावना है। मौसम में सक्रियता की प्रमुख वजह उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तथा उससे सटे पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा तट के ऊपर बना अच्छी तरह से चिह्नित कम दबाव का क्षेत्र है। इसके प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में विशेष सतर्कता IMD के अनुसार 30 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान ओडिशा और छत्तीसगढ़ में व्यापक बारिश की संभावना है। ओडिशा में 30 और 31 अगस्त को कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश हो सकती है, जबकि छत्तीसगढ़ में 31 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश की आशंका जताई गई है। ओडिशा में 31 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे मौसम में निचले इलाकों में जलभराव तथा स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा बढ़ सकता है। झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी बारिश का असर IMD के अनुसार गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल और झारखंड में 30 और 31 अगस्त को कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। लगातार बारिश वाले क्षेत्रों में लोगों को नदी, नाले और जलभराव वाले स्थानों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश में भी सक्रिय रहेगा मौसम IMD के 31 अगस्त के पूर्वानुमान के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में 31 अगस्त को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 31 अगस्त से 5 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 31 अगस्त से 5 सितंबर के दौरान बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। बारिश के साथ कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी रह सकता है। ऐसे में मौसम विभाग के स्थानीय अलर्ट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उत्तराखंड और हिमाचल में सावधानी जरूरी पहाड़ी राज्यों में भी मौसम को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत है। IMD ने उत्तराखंड में 31 अगस्त और 1 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। हिमाचल प्रदेश में 31 अगस्त से 3 सितंबर के दौरान भारी बारिश का अनुमान है। तेज बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, अचानक जलभराव और सड़क संपर्क प्रभावित होने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। यात्रियों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार ही यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी जाती है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी बारिश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सहित आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में भी मौसम सक्रिय रह सकता है। IMD ने 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। मध्य भारत में भी बारिश का दौर छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में 31 अगस्त से 5 सितंबर के बीच बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी 31 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान बारिश हो सकती है, जबकि 2 से 5 सितंबर के बीच वहां बारिश का दायरा बढ़ने का अनुमान है। दिल्ली-NCR में कब बढ़ेगी बारिश? राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 31 अगस्त से 5 सितंबर तक हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। IMD के अनुसार बारिश का दौर अगले कुछ दिनों में जारी रह सकता है। सितंबर की शुरुआत में भी सक्रिय रहेगा मानसून IMD के पूर्वानुमान से स्पष्ट है कि बारिश का दौर केवल 31 अगस्त तक सीमित नहीं रहने वाला है। पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में सितंबर के शुरुआती दिनों में भी बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। विशेष रूप से ओडिशा, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में मौसम पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। लोग क्या सावधानी बरतें? - भारी बारिश के दौरान निचले और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। - गरज-चमक के समय खुले मैदान, ऊंचे पेड़ और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखें। - पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा से पहले स्थानीय मौसम और सड़क स्थिति की जानकारी लें। - नदी, नाले और तेज बहाव वाले पानी के पास जाने से बचें। - मौसम विभाग तथा स्थानीय प्रशासन के ताजा अलर्ट पर लगातार नजर रखें। - अत्यधिक बारिश की स्थिति में अनावश्यक यात्रा से बचना अधिक सुरक्षित है। मौसम विभाग की चेतावनी का सार मॉनसून की सक्रियता के बीच देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। हालांकि हर जिले में बारिश की तीव्रता समान नहीं होगी। इसलिए सामान्य पूर्वानुमान के बजाय संबंधित जिले के स्थानीय IMD अलर्ट को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का बड़ा संदेश: विविधता में एकता भारत की शक्ति, दुनिया को साथ चलने का संदेश

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com)न्यूयॉर्क | 30 अगस्त 2026 न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित Universal Oneness Celebration कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने विविधता, सामाजिक सद्भाव और मानवता की एकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक परंपरा को विविधताओं के बीच एकता का उदाहरण बताते हुए इसे दुनिया के सामने सकारात्मक दृष्टिकोण के रूप में प्रस्तुत किया। विविधता भारत की पहचान मोहन भागवत ने कहा कि भारत में अलग-अलग धर्म, भाषाएं, परंपराएं और जीवन पद्धतियां होने के बावजूद लोगों के बीच एकता की भावना कायम रही है। उन्होंने विविधता को चुनौती के बजाय समाज की ताकत के रूप में देखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके संदेश का केंद्र यह रहा कि अलग-अलग विचारों और मान्यताओं के बीच भी आपसी सम्मान तथा सहयोग के साथ आगे बढ़ा जा सकता है। दुनिया के लिए भारत के अनुभव का महत्व भागवत ने भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि दुनिया में शांति और सहयोग के लिए अलग-अलग समुदायों के बीच संवाद आवश्यक है। उन्होंने भारत की उस परंपरा का उल्लेख किया जिसमें विभिन्न विचारों और आस्थाओं के लोगों के साथ रहने की भावना दिखाई देती है। उनके अनुसार इसी सोच को व्यापक स्तर पर अपनाकर समाजों के बीच दूरी कम की जा सकती है। धार्मिक सद्भाव पर जोर कार्यक्रम के दौरान धार्मिक विविधता और आपसी सम्मान का विषय भी प्रमुख रहा। भागवत ने समावेशी सोच और सह-अस्तित्व की भावना को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भारत में विभिन्न समुदायों के साथ मिलकर रहने की परंपरा को रेखांकित करते हुए सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संदेश न्यूयॉर्क में मौजूद भारतीय मूल के लोगों से भी भागवत ने अपनी बात साझा की। उन्होंने विदेशों में रहने वाले भारतीयों से वहां के समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने तथा सकारात्मक योगदान देने की बात कही। उन्होंने भारतीय संस्कृति से जुड़े मूल्यों को अपने जीवन में बनाए रखने के साथ-साथ वर्तमान समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया। सेवा और समाज के प्रति जिम्मेदारी भागवत के संबोधन में सामाजिक सेवा और मानवता के प्रति जिम्मेदारी का विषय भी सामने आया। उन्होंने समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए लोगों की व्यक्तिगत भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उनके संदेश में यह विचार प्रमुख रहा कि समाज की मजबूती केवल संस्थाओं या सरकारों से नहीं, बल्कि आम लोगों के सहयोग और जिम्मेदारी से भी बढ़ती है। न्यूयॉर्क कार्यक्रम का महत्व मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग शामिल हुए। इस आयोजन के माध्यम से एकता, संवाद और विभिन्न समुदायों के बीच सहयोग का संदेश सामने आया। भारतार्थ खबर का अर्थ मोहन भागवत के न्यूयॉर्क संबोधन का मूल संदेश विविधता का सम्मान करते हुए एकता, सद्भाव और मानवता को मजबूत करना रहा। अलग-अलग पहचान और विचारों के बावजूद एक-दूसरे का सम्मान करते हुए साथ आगे बढ़ना आज के वैश्विक समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश माना जा सकता है। भारतार्थ खबर — खबर नहीं, उसका अर्थ।

  • ‘मन की बात’ में मोदी का नशामुक्त युवा पर जोर

    महिला उद्यमिता, स्वच्छता, विज्ञान, खेती और ‘वोकल फॉर लोकल’ का भी संदेश भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 30 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 137वें संस्करण में देशवासियों से सामाजिक बदलाव में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने नशामुक्त युवा, महिला उद्यमिता, स्वच्छता, विज्ञान एवं अंतरिक्ष, कृषि में विविधता, भारतीय इतिहास और स्वदेशी उत्पादों सहित विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। नशामुक्त युवा अभियान पर जोर प्रधानमंत्री ने ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान का उल्लेख करते हुए युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जनभागीदारी बढ़ाने की अपील की। उन्होंने युवाओं, विद्यार्थियों, कलाकारों और सामग्री निर्माताओं से नशामुक्ति का संदेश विभिन्न माध्यमों और भाषाओं में लोगों तक पहुंचाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नशे की समस्या का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार और समाज भी इससे प्रभावित होते हैं। उन्होंने नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और इससे जूझ रहे लोगों की मदद करने वालों के प्रयासों की सराहना की। महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने छोटे कारोबार से जुड़ी महिलाओं के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने आर्थिक अवसरों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न महिला लाभार्थियों के उदाहरण देते हुए बताया कि आर्थिक सहयोग मिलने से छोटे कारोबार को आगे बढ़ाने और परिवार की आय में योगदान देने के अवसर बढ़ सकते हैं। स्वच्छता में जनभागीदारी का संदेश प्रधानमंत्री ने स्थानीय स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाने वाले युवाओं और नागरिकों के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने और प्लास्टिक कचरे को कम करने में सामूहिक भागीदारी की आवश्यकता बताई। श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान स्वच्छता से जुड़े प्रयासों का भी उन्होंने उल्लेख किया और श्रद्धालुओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। बेटियों की विज्ञान और अंतरिक्ष में भागीदारी प्रधानमंत्री ने विज्ञान एवं अंतरिक्ष के क्षेत्र में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने वाली पहल ‘Mission ShaktiSAT’ का उल्लेख किया। उन्होंने इसे बेटियों को विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों से जोड़ने वाली पहल के रूप में सामने रखा। कृषि में नई फसलों से आय के अवसर प्रधानमंत्री ने किसानों द्वारा पारंपरिक फसलों के साथ नई कृषि संभावनाएं तलाशने के उदाहरण भी साझा किए। उन्होंने आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ किसानों द्वारा एवोकाडो की खेती अपनाए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने वैज्ञानिक सलाह, बाजार की जरूरतों की समझ और फसल विविधीकरण को किसानों की आय के नए अवसरों से जोड़ते हुए ऐसे प्रयोगों को प्रोत्साहित किया। तकनीक से इतिहास को समझने की पहल प्रधानमंत्री ने मुंबई के कृष्णा शेषाद्रि की ओर से तैयार की गई BharatRajya वेबसाइट का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि डिजिटल माध्यम के जरिए भारतीय इतिहास और विभिन्न कालखंडों में अलग-अलग क्षेत्रों पर शासन करने वाले राजवंशों को समझने की कोशिश की गई है। ‘हर घर तिरंगा’ और स्वदेशी उत्पादों का आह्वान प्रधानमंत्री ने देश में दिखाई देने वाली देशभक्ति की भावना का उल्लेख करते हुए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की चर्चा की। साथ ही उन्होंने आगामी त्योहारों के दौरान भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को आगे बढ़ाने की अपील की। सामाजिक भागीदारी को बताया बदलाव की ताकत 137वीं ‘मन की बात’ का प्रमुख संदेश नागरिक भागीदारी और व्यक्तिगत प्रयासों को देश के व्यापक विकास से जोड़ने का रहा। प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे नागरिकों और समूहों के उदाहरणों के माध्यम से यह संदेश दिया कि सामाजिक बदलाव में सरकार के साथ आम नागरिकों की सक्रिय भूमिका भी महत्वपूर्ण है। मन की बात 137वां एपिसोड

  • नेपाल-तिब्बत में जलप्रलय, 750 से अधिक मौतें

    3,000 से ज्यादा लापता; भारत ने राहत सामग्री और विशेषज्ञ सहायता भेजी भारतार्थ खबर, अशोक कुमार सिंह, Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 30 अगस्त 2026। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने व्यापक तबाही मचा दी है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल और तिब्बत में मृतकों की संख्या 750 से अधिक हो गई है, जबकि 3,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव अभियान में बड़ी चुनौती प्रभावित क्षेत्रों में भारी मलबे, क्षतिग्रस्त सड़कों-पुलों और दुर्गम पहाड़ी भूभाग के कारण राहत एवं बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी और बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि कई लोग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। नेपाल में 2,498 लोगों के लापता होने की सूचना है, जबकि चीन के अधिकारियों के अनुसार तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता हैं। लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ भीषण आपदा के बीच भारत ने नेपाल के लिए राहत और बचाव सहायता बढ़ाई है। भारत की ओर से राहत सामग्री की कई खेप नेपाल भेजी गई हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार चौथी राहत उड़ान करीब 11 टन सामग्री लेकर काठमांडू पहुंची, जबकि भारत से अब तक लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भेजे जाने की जानकारी है। भारत ने विशेषज्ञ और चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई है। भारत की ओर से भेजी गई सहायता में प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक राहत सामग्री के साथ बचाव कार्य में उपयोगी विशेषज्ञ सहयोग भी शामिल है। भारतीय टीमों ने नेपाल में कठिन इलाकों और सुरंगों में बचाव अभियान में सहयोग शुरू किया है। फिर बाढ़ का खतरा नेपाल के कुछ प्रभावित क्षेत्रों में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने नए बाढ़ अलर्ट जारी किए हैं। बचाव दलों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। खराब मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हेलीकॉप्टर से राहत एवं बचाव अभियान भी कई बार प्रभावित हुआ है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लापता लोगों की तलाश, फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, मृतकों की पहचान और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है। साथ ही संभावित नए बाढ़ और भूस्खलन के खतरे पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। हिमालयी क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी नेपाल-तिब्बत की यह त्रासदी हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी आपदाओं के बढ़ते जोखिम को सामने लाती है। विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में बदलती जलवायु परिस्थितियां ग्लेशियरों और पर्वतीय ढला

  • मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान, रिश्तों को नई उड़ान

    यूरेनियम, डिजिटल तकनीक, एआई और GIFT City पर सहयोग; 2030 तक 5 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com ताशकंद, 30 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक ले जाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच ताशकंद में हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, यूरेनियम, डिजिटल तकनीक, एआई, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और अंतरिक्ष सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इसी दौरान राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ओलीय दरजाली दोस्तलिक’ से सम्मानित किया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान के लिए दिया गया। दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति पर सहमति भारत और उज्बेकिस्तान ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता के दौरान इस पहल की जानकारी दी। दोनों देशों के संयुक्त बयान में परमाणु ऊर्जा, खनन और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दर्ज की गई है। एआई, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और UPI पर जोर वार्ता में सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और UPI को भी प्रमुखता दी गई। दोनों देशों ने डिजिटल परिवर्तन, आईटी, एआई, अंतरिक्ष और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को व्यापक बनाने पर सहमति जताई। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच UPI से जुड़े वाणिज्यिक सहयोग की दिशा में भी कदम बढ़ाया गया है। इसके तहत भारतीय UPI ऐप के माध्यम से उज्बेकिस्तान में व्यापारियों को भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में समझौता हुआ है। GIFT City और ‘न्यू ताशकंद’ पर सहयोग शहरी विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भारत के गुजरात स्थित GIFT City और उज्बेकिस्तान के ‘न्यू ताशकंद’ विकास मॉडल पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने शहरी विकास और आधुनिक शहरों से जुड़े अनुभवों को साझा करने की संभावनाओं पर जोर दिया। उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल के भारत आकर ऐसे विकास मॉडलों का अध्ययन करने की संभावना भी सामने आई। 2030 तक 5 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। व्यापार और निवेश के अलावा महत्वपूर्ण खनिज, खनन, रक्षा, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, शिक्षा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। विदेश मंत्री स्तर की समन्वय व्यवस्था व्यापक रणनीतिक साझेदारी को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने विदेश मंत्री स्तर पर एक समन्वय तंत्र स्थापित करने पर सहमति जताई है। इसके माध्यम से द्विपक्षीय समझौतों और प्राथमिक परियोजनाओं की निगरानी एवं क्रियान्वयन को गति देने का प्रयास किया जाएगा। संयुक्त आयोग को भी उच्च स्तर पर ले जाने और कारोबारी सहयोग बढ़ाने के लिए बिजनेस समिट आयोजित करने की दिशा में सहमति बनी है। शिक्षा, संस्कृति और बौद्ध विरासत पर भी सहयोग यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान ने संस्कृति, उच्च शिक्षा, शोध, पर्यटन और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में कई समझौतों और पहलों को आगे बढ़ाया। उज्बेकिस्तान में प्राचीन बौद्ध स्थलों फयाज टेपा और कारा टेपा के संरक्षण एवं पुनरुद्धार के लिए भी सहयोग की दिशा में समझ बनी है। भारत ने अरल सागर क्षेत्र के पर्यावरणीय पुनर्वास के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर के अनुदान की घोषणा भी की है। प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान की स्वतंत्रता की 35वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव और वहां की जनता को शुभकामनाएं दीं। दोनों देशों के नेताओं ने भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को नए स्तर पर ले जाने और आने वाले वर्षों में ठोस लक्ष्यों के साथ सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

  • ताशकंद में गूंजा भारत का अपनापन

    भारतीय समुदाय ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से किया स्वागत, मोदी बोले—‘अभिभूत हूं’ भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com ताशकंद, 30 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे के दौरान राजधानी ताशकंद में भारतीय समुदाय ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए भारतीय समुदाय के लोग एक होटल में एकत्र हुए। इस दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय समुदाय के इस आत्मीय स्वागत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि वह ताशकंद में भारतीय समुदाय के स्नेह और गर्मजोशी से अभिभूत हैं। उन्होंने प्रवासी भारतीयों को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच मित्रता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण सेतु बताया। सांस्कृतिक रंगों से सजा स्वागत समारोह स्वागत कार्यक्रम में भारतीय समुदाय की ओर से कथक सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। उज्बेकिस्तान के स्थानीय कलाकारों और बच्चों ने भी भारतीय गीतों पर प्रस्तुति देकर भारत के प्रति अपने लगाव का परिचय दिया। इससे कार्यक्रम में भारत और उज्बेकिस्तान की सांस्कृतिक निकटता की झलक देखने को मिली। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने की अगवानी प्रधानमंत्री मोदी के ताशकंद पहुंचने पर उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने ताशकंद-हुमो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी की। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर 29-30 अगस्त के राजकीय दौरे पर उज्बेकिस्तान पहुंचे हैं। उनके सम्मान में दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित किए गए और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक तथा सभ्यतागत संबंधों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल संपर्क, ऊर्जा और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा प्रस्तावित है। प्रवासी भारतीय बने दोस्ती की कड़ी ताशकंद में भारतीय समुदाय का स्वागत केवल प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान का प्रदर्शन नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर मौजूद सांस्कृतिक संबंधों की भी झलक रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने भी प्रवासी भारतीयों की भूमिका को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंधों को मजबूत करने वाला ‘जीवंत सेतु’ बताया। प्रधानमंत्री की उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद उनका मध्य एशिया दौरा आगे बढ़ेगा। 31 अगस्त से 1 सितंबर तक वह किर्गिज गणराज्य में होने वाले 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।

  • मोदी उज्बेकिस्तान रवाना, SCO में आतंकवाद पर रहेगा फोकस

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को मध्य एशिया के दौरे पर उज्बेकिस्तान के लिए रवाना हुए। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वह 29 से 30 अगस्त तक उज्बेकिस्तान में रहेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 30 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। भारत से रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह SCO के प्रति भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने और आतंकवाद, अलगाववाद तथा उग्रवाद से मुक्त क्षेत्र के निर्माण के लिए सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति से करेंगे वार्ता प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर ताशकंद पहुंचेंगे। दोनों नेताओं के बीच व्यापार एवं निवेश, डिजिटल संपर्क, रक्षा और ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी यात्रा मध्य एशिया के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी तथा दोनों पक्षों के सभ्यतागत और लोगों के बीच संबंधों को गहरा करने में मदद करेगी। शांति और स्थिरता पर जोर प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा को शांति, स्थिरता और समृद्धि के साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि भारत 2017 से SCO का सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है। मोदी ने सुरक्षा, संपर्क और अवसर पर आधारित क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद को क्षेत्रीय तथा वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए लगातार चुनौती बताया। बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन ताशकंद के बाद प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक जाएंगे। वहां वह 26वें SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री सम्मेलन में सुरक्षा, संपर्क और अवसर से जुड़ी भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित कर सकते हैं। सम्मेलन से इतर उनके SCO सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें करने की भी संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी बिश्केक में छठे ‘वर्ल्ड नोमैड गेम्स’ के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। इसके अलावा ताशकंद में वह शास्त्री स्मारक और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरियंटल स्टडीज स्थित महात्मा गांधी केंद्र का दौरा करेंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से भारत और मध्य एशिया के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को भी रेखांकित किया जाएगा।

  • नागेंद्र को चुनौती, 2028 में जहां लड़ेंगे, मैं भी लड़ूंगा: श्रीरामुलु

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 29 अगस्त 2026। भाजपा के पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु ने मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके बी. नागेंद्र को आगामी विधानसभा चुनाव में उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि 2028 में नागेंद्र जिस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे, वह भी वहीं से चुनाव मैदान में उतरेंगे। श्रीरामुलु ने यह बात भाजपा के राज्य कार्यालय जगन्नाथ भवन में पार्टी के प्रस्तावित मार्च का लोगो जारी करते हुए कही। नौ विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेगा भाजपा का मार्च श्रीरामुलु के अनुसार भाजपा का मार्च 1 सितंबर को लिंगसागुर से शुरू होगा और 10 सितंबर को बेल्लारी में समाप्त होगा। मार्च की शुरुआत लिंगसागुर में एक बड़े सम्मेलन से होगी। इसमें केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, एच.डी. कुमारस्वामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र, विपक्ष के नेता आर. अशोक, चलवाड़ी नारायणस्वामी सहित अन्य नेताओं के शामिल होने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि मार्च मास्की, सिंधनूर, कराटागी, गंगावती, काम्पली, संदूर और बेल्लारी ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों से होकर बेल्लारी शहर पहुंचेगा। वाल्मीकि निगम मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना श्रीरामुलु ने वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित अनियमितता मामले को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में मंत्री नागेंद्र को इस्तीफा देना पड़ा और विपक्ष ने इस मुद्दे को विधानसभा तथा विधान परिषद में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र सहित विपक्षी नेताओं और विधान परिषद सदस्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर सदन में लगातार आवाज उठाई। श्रीरामुलु ने कहा कि भाजपा ने यह लड़ाई राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के हित और भविष्य के लिए लड़ी। मुख्यमंत्री शिवकुमार के फैसले पर भी टिप्पणी श्रीरामुलु ने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार चाहते तो नागेंद्र का बचाव कर सकते थे, लेकिन उन्होंने इस्तीफे का रास्ता स्वीकार किया। नागेंद्र के इस्तीफे के समय भावुक होने का जिक्र करते हुए श्रीरामुलु ने कहा कि इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित घोटाले के दौरान बड़ी राशि का दुरुपयोग हुआ। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया को भी महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। 2028 के चुनाव को लेकर सीधी चुनौती श्रीरामुलु ने नागेंद्र के चुनाव लड़ने की चुनौती का जवाब देते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में जनता ही अंतिम फैसला करेगी। उन्होंने नागेंद्र से अपनी कथित गलतियों को स्वीकार करने की बात भी कही। उन्होंने कांग्रेस पर दलित और आदिवासी समुदायों के हितों की अनदेखी करने तथा एससीपी/टीएसपी निधियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया। श्रीरामुलु ने कांग्रेस पर राजनीतिक रूप से तीखे आरोप लगाते हुए दावा किया कि आने वाले समय में जनता इसका जवाब देगी। कांग्रेस सरकार पर तीखे राजनीतिक आरोप श्रीरामुलु ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि नागेंद्र को मंत्री पद से हटाया जाना सरकार की राजनीतिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व और राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए तथा कहा कि आगामी चुनाव में भाजपा जनता के बीच इन मुद्दों को लेकर जाएगी। उन्होंने दावा किया कि 2028 के चुनाव में नागेंद्र जहां से भी चुनाव लड़ेंगे, वह उनके खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने राज्य में सरकार को बर्खास्त कर नए सिरे से जनादेश लेने की मांग भी उठाई। श्रीरामुलु के बयान पर कांग्रेस और बी. नागेंद्र की ओर से प्रतिक्रिया सामने आने के बाद राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, उनके बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की ओर से तेज किए जा रहे राजनीतिक अभियान के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

  • नागेंद्र का इस्तीफा, कर्नाटक में सियासी घमासान

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 29 अगस्त 2026।कर्नाटक की राजनीति में शुक्रवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले के बीच मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस और सरकार को किसी भी तरह की असहज स्थिति से बचाने के लिए स्वेच्छा से पद छोड़ने का निर्णय लिया है। वह दोबारा मंत्री बनने के करीब 25 दिन बाद ही पद से हटे हैं। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नागेंद्र से मुलाकात के बाद कहा कि मंत्री आरोपों से बेहद आहत हैं और स्वयं को निर्दोष बता रहे हैं। शिवकुमार के अनुसार, उन्होंने मामले से संबंधित रिपोर्टों और उपलब्ध जानकारी को देखा है तथा उनके अनुसार नागेंद्र का कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंध नहीं है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस्तीफे पर अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान से चर्चा के बाद लिया जाएगा। दूसरी बार छोड़ा मंत्री पद बी. नागेंद्र के लिए यह इस्तीफा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वाल्मीकि निगम विवाद के संदर्भ में वह दूसरी बार मंत्रिपद से हटे हैं। वर्ष 2024 में भी उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। बाद में जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था और वह जमानत पर बाहर आए। अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री पद पर डी.के. शिवकुमार के आने के बाद नागेंद्र को मंत्रिमंडल में फिर शामिल किया गया था। इस बार नागेंद्र ने आरोपों में अपनी भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने अपने इस्तीफे को सरकार और पार्टी को असहज स्थिति से बचाने के लिए उठाया गया कदम बताया। भाजपा ने बताया सरकार का ‘पहला विकेट’ नागेंद्र के इस्तीफे के बाद विपक्षी भाजपा ने इसे अपनी राजनीतिक मुहिम की सफलता बताया। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इसे मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार का “पहला विकेट” बताया और कहा कि पार्टी का आंदोलन केवल मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। भाजपा कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए दावा किया कि नागेंद्र इस पूरे मामले में केवल “छोटी मछली” हैं और असली जिम्मेदार लोगों का अभी सामने आना बाकी है। हालांकि ये भाजपा के राजनीतिक आरोप हैं और मामले में अंतिम जिम्मेदारी जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी। मामला क्या है? विवाद कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित धन हस्तांतरण और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद यह मामला कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया। रिपोर्टों के अनुसार निगम से जुड़े करीब 89.63 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन ने विवाद को और गंभीर बनाया। नागेंद्र ने लगातार अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। इसलिए इस पूरे मामले में आरोप, जांच और दोषसिद्धि—तीनों को अलग-अलग रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति को केवल आरोपों या राजनीतिक बयानों के आधार पर दोषी मानना पत्रकारिता की दृष्टि से उचित नहीं होगा। सरकार के सामने राजनीतिक चुनौती नागेंद्र के इस्तीफे से फिलहाल कांग्रेस सरकार पर विपक्षी दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। भाजपा पहले से ही इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रही है और इस्तीफे के बाद उसने जांच तथा जवाबदेही की मांग और तेज कर दी है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री शिवकुमार का नागेंद्र के बचाव में सामने आना बताता है कि सरकार इस मामले को राजनीतिक दबाव के बजाय कानूनी और जांच प्रक्रिया के आधार पर देखने का संदेश देना चाहती है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नागेंद्र का इस्तीफा सरकार और कांग्रेस के लिए राजनीतिक दबाव कम करता है या विपक्ष को इस मुद्दे को और व्यापक बनाने का अवसर देता है। साथ ही जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और अदालतों में मामले की स्थिति भी इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।

  • बाढ़ के सैलाब में इंसान के पास पहुंचा हाथी, वायरल वीडियो ने खींचा लोगों का ध्यान

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 28 अगस्त 2026 सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से चर्चा में है, जिसमें तेज बहाव वाले बाढ़ के पानी के बीच एक हाथी एक व्यक्ति के बेहद करीब पहुंचता दिखाई दे रहा है। वीडियो में व्यक्ति पानी के तेज बहाव के बीच संघर्ष करता नजर आता है, जबकि हाथी उसके पास पहुंचकर उसे सहारा देता हुआ दिखाई देता है। वीडियो में बाढ़ का पानी बेहद तेज नजर आ रहा है। इसी दौरान हाथी व्यक्ति की ओर बढ़ता है और वह व्यक्ति हाथी को पकड़ने की कोशिश करता दिखाई देता है। इस दृश्य ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वीडियो के साथ सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि हाथी ने बाढ़ में फंसे व्यक्ति की जान बचाने में मदद की। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर घटना का सटीक स्थान, तारीख और वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इसे किसी विशेष स्थान या हाल की किसी बाढ़ की घटना से जोड़कर निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा। वीडियो में दिखाई देने वाला दृश्य जरूर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कई यूजर्स इसे इंसान और जानवर के बीच संवेदना और मदद की मिसाल बता रहे हैं, जबकि तथ्य-जांच के लिहाज से वीडियो के मूल स्रोत और घटना के वास्तविक स्थान की पुष्टि अभी जरूरी है। भारतार्थ खबर की अपील: सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो को पूरी तरह सत्य मानने से पहले उसके स्रोत, तारीख और स्थान की पुष्टि जरूर करें। वायरल वीडियो को संदर्भ से हटाकर साझा करने से गलत जानकारी फैल सकती है। भारतार्थ खबर — खबर नहीं, उसका अर्थ।

  • 100 गांवों के विकास को ₹225 करोड़ की सौगात

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता: अशोक कुमार सिंह बालाघाट, 29 अगस्त 2026। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और जनविश्वास को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जन-विश्वास अभियान के तहत ग्राम बोंदारी पहुंचकर जनजातीय परिवारों से संवाद किया। इस दौरान जिले के 100 गांवों के समग्र विकास के लिए करीब ₹225 करोड़ के विकास कार्यों की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ पशुपालन को बढ़ावा दिया जाए। आवास, पोषण, चिकित्सा और शिक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं का लाभ पात्र परिवारों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। बैगा समाज के विकास पर जोर मुख्यमंत्री ने बैगा समाज के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। साथ ही पारंपरिक कला, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की दिशा में प्रयास करने की बात कही। सड़क, बिजली और रोजगार पर फोकस प्रस्तावित विकास कार्यों के तहत सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर रहेगा। इसके साथ ही युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त हुए क्षेत्रों में विकास का लाभ समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार की इस पहल को बालाघाट में सुरक्षित वातावरण के साथ विकास की गति तेज करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

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