नेपाल-तिब्बत में जलप्रलय, 750 से अधिक मौतें
- Ashok kumar Singh

- 5 दिन पहले
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3,000 से ज्यादा लापता; भारत ने राहत सामग्री और विशेषज्ञ सहायता भेजी

भारतार्थ खबर, अशोक कुमार सिंह, Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 30 अगस्त 2026। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने व्यापक तबाही मचा दी है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल और तिब्बत में मृतकों की संख्या 750 से अधिक हो गई है, जबकि 3,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
बचाव अभियान में बड़ी चुनौती
प्रभावित क्षेत्रों में भारी मलबे, क्षतिग्रस्त सड़कों-पुलों और दुर्गम पहाड़ी भूभाग के कारण राहत एवं बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी और बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि कई लोग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।
नेपाल में 2,498 लोगों के लापता होने की सूचना है, जबकि चीन के अधिकारियों के अनुसार तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता हैं। लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
भीषण आपदा के बीच भारत ने नेपाल के लिए राहत और बचाव सहायता बढ़ाई है। भारत की ओर से राहत सामग्री की कई खेप नेपाल भेजी गई हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार चौथी राहत उड़ान करीब 11 टन सामग्री लेकर काठमांडू पहुंची, जबकि भारत से अब तक लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भेजे जाने की जानकारी है। भारत ने विशेषज्ञ और चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई है।
भारत की ओर से भेजी गई सहायता में प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक राहत सामग्री के साथ बचाव कार्य में उपयोगी विशेषज्ञ सहयोग भी शामिल है। भारतीय टीमों ने नेपाल में कठिन इलाकों और सुरंगों में बचाव अभियान में सहयोग शुरू किया है।
फिर बाढ़ का खतरा
नेपाल के कुछ प्रभावित क्षेत्रों में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने नए बाढ़ अलर्ट जारी किए हैं। बचाव दलों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। खराब मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हेलीकॉप्टर से राहत एवं बचाव अभियान भी कई बार प्रभावित हुआ है।
प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लापता लोगों की तलाश, फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, मृतकों की पहचान और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है। साथ ही संभावित नए बाढ़ और भूस्खलन के खतरे पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
हिमालयी क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी
नेपाल-तिब्बत की यह त्रासदी हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी आपदाओं के बढ़ते जोखिम को सामने लाती है। विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में बदलती जलवायु परिस्थितियां ग्लेशियरों और पर्वतीय ढला
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