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नागेंद्र का इस्तीफा, कर्नाटक में सियासी घमासान

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 6 दिन पहले
  • 3 मिनट पठन
नीले वेस्ट और सफेद शर्ट में गंभीर पुरुष हाथ में माइक लिए बोलते हुए, पीछे सादा हल्का बैकग्राउंड

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 29 अगस्त 2026।कर्नाटक की राजनीति में शुक्रवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले के बीच मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस और सरकार को किसी भी तरह की असहज स्थिति से बचाने के लिए स्वेच्छा से पद छोड़ने का निर्णय लिया है। वह दोबारा मंत्री बनने के करीब 25 दिन बाद ही पद से हटे हैं।


मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नागेंद्र से मुलाकात के बाद कहा कि मंत्री आरोपों से बेहद आहत हैं और स्वयं को निर्दोष बता रहे हैं। शिवकुमार के अनुसार, उन्होंने मामले से संबंधित रिपोर्टों और उपलब्ध जानकारी को देखा है तथा उनके अनुसार नागेंद्र का कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंध नहीं है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस्तीफे पर अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान से चर्चा के बाद लिया जाएगा।


दूसरी बार छोड़ा मंत्री पद


बी. नागेंद्र के लिए यह इस्तीफा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वाल्मीकि निगम विवाद के संदर्भ में वह दूसरी बार मंत्रिपद से हटे हैं। वर्ष 2024 में भी उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। बाद में जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था और वह जमानत पर बाहर आए। अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री पद पर डी.के. शिवकुमार के आने के बाद नागेंद्र को मंत्रिमंडल में फिर शामिल किया गया था।


इस बार नागेंद्र ने आरोपों में अपनी भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने अपने इस्तीफे को सरकार और पार्टी को असहज स्थिति से बचाने के लिए उठाया गया कदम बताया।


भाजपा ने बताया सरकार का ‘पहला विकेट’


नागेंद्र के इस्तीफे के बाद विपक्षी भाजपा ने इसे अपनी राजनीतिक मुहिम की सफलता बताया। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इसे मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार का “पहला विकेट” बताया और कहा कि पार्टी का आंदोलन केवल मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। भाजपा कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है।


भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए दावा किया कि नागेंद्र इस पूरे मामले में केवल “छोटी मछली” हैं और असली जिम्मेदार लोगों का अभी सामने आना बाकी है। हालांकि ये भाजपा के राजनीतिक आरोप हैं और मामले में अंतिम जिम्मेदारी जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।


मामला क्या है?


विवाद कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित धन हस्तांतरण और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद यह मामला कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया। रिपोर्टों के अनुसार निगम से जुड़े करीब 89.63 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन ने विवाद को और गंभीर बनाया।


नागेंद्र ने लगातार अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। इसलिए इस पूरे मामले में आरोप, जांच और दोषसिद्धि—तीनों को अलग-अलग रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति को केवल आरोपों या राजनीतिक बयानों के आधार पर दोषी मानना पत्रकारिता की दृष्टि से उचित नहीं होगा।


सरकार के सामने राजनीतिक चुनौती


नागेंद्र के इस्तीफे से फिलहाल कांग्रेस सरकार पर विपक्षी दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। भाजपा पहले से ही इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रही है और इस्तीफे के बाद उसने जांच तथा जवाबदेही की मांग और तेज कर दी है।


दूसरी ओर मुख्यमंत्री शिवकुमार का नागेंद्र के बचाव में सामने आना बताता है कि सरकार इस मामले को राजनीतिक दबाव के बजाय कानूनी और जांच प्रक्रिया के आधार पर देखने का संदेश देना चाहती है।


अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नागेंद्र का इस्तीफा सरकार और कांग्रेस के लिए राजनीतिक दबाव कम करता है या विपक्ष को इस मुद्दे को और व्यापक बनाने का अवसर देता है। साथ ही जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और अदालतों में मामले की स्थिति भी इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।



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