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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

22अक्टूबर /2026 /गुरुवार

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

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  • दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच 18 स्टेशन सील, CJP की सरकार को दोटूक चेतावनी

    प्रदर्शन तेज होने के संकेत, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा संगठन; सुरक्षा के बीच DMRC का बड़ा फैसला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, बंद मेट्रो स्टेशन और सुरक्षा व्यवस्था का प्रतिनिधि चित्र। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 25 जुलाई, 2026 दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद होने और जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन ने शनिवार को राजधानी की रफ्तार पर बड़ा असर डाला। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 25 जुलाई की सुबह 7:30 बजे से 18 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखने का निर्णय लिया है। दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हुईं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। इस घटनाक्रम के चलते राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। DMRC के अनुसार लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग, शिवाजी स्टेडियम, झंडेवालान और नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन फिलहाल यात्रियों के लिए बंद रहेंगे। हालांकि राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट पर इंटरचेंज सुविधा उपलब्ध रहेगी ताकि यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो। एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर भी सेवाओं में बदलाव किया गया है और ट्रेनें सीमित रूट पर संचालित की जा रही हैं। सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में मुआवजे और कानूनी मामलों पर कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने दावा किया कि सरकार ने कुछ मांगों पर सिद्धांततः सहमति जताई है, लेकिन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उनका कहना है कि यदि इस मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। CJP का आरोप है कि केवल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। संगठन का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री की है, इसलिए उन्हें पद छोड़ना चाहिए। इसी मांग को लेकर प्रदर्शनकारी लगातार जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। इस बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि यह आंदोलन अब केवल एक संगठन का नहीं बल्कि देशभर के युवाओं की आवाज बन चुका है। विभिन्न राज्यों से आए छात्र, सामाजिक संगठन, किसान संगठन और अधिवक्ताओं के समूह भी इस प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में स्पष्ट किया कि उन्होंने सरकार के साथ कोई समझौता नहीं किया है। उन्होंने कहा कि 26 दिन तक छात्रों के समर्थन में अनशन करने के बाद स्वास्थ्य खराब होने और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिखित आश्वासन मिलने पर उन्होंने अनशन समाप्त किया। उनके अनुसार आंदोलन जारी रहेगा और वे अपनी मांगों पर कायम हैं। राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले DMRC की आधिकारिक सूचना अवश्य जांच लें तथा वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की सलाह दी है।

  • देशभर में भारी बारिश का अलर्ट: दिल्ली, बिहार, राजस्थान समेत कई राज्यों में IMD की चेतावनी

    अगले कुछ दिनों तक मूसलाधार बारिश के आसार, गुजरात, असम और महाराष्ट्र में बढ़ा बाढ़ का खतरा देश के विभिन्न राज्यों में बारिश, जलभराव, बाढ़ और मौसम विभाग की चेतावनी से संबंधित प्रतिनिधि चित्र। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 25 जुलाई, 2026 देशभर में भारी बारिश का अलर्ट एक बार फिर लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार को नया Monsoon Heavy Rain Alert जारी करते हुए दिल्ली, बिहार, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, असम, नागालैंड, मेघालय सहित कई राज्यों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है। लगातार सक्रिय दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण कई इलाकों में जलभराव, बाढ़, बिजली गिरने और भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग के अनुसार गुजरात इस समय सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है। अहमदाबाद सहित कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। दक्षिण गुजरात के वलसाड और नवसारी जिलों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। लगातार बारिश के कारण निचले क्षेत्रों में जलभराव, सड़क संपर्क बाधित होने और बाढ़ जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका है। राज्य में हालिया बारिश और बाढ़ से कई लोगों की जान जा चुकी है, जिससे प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में शनिवार को हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली चमकने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 27 जुलाई से वर्षा की तीव्रता और बढ़ सकती है तथा कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। लगातार बादल छाए रहने से उमस बनी रहेगी, जबकि तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है। राजस्थान के पूर्वी जिलों, विशेषकर जयपुर संभाग में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। कई स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ा दी है। महाराष्ट्र के मुंबई, कोंकण और तटीय क्षेत्रों में भी लगातार बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। भारी वर्षा के कारण ट्रैफिक जाम, जलभराव और दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है। नागरिकों से समुद्र तटों और जलभराव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। पूर्वोत्तर भारत में असम और मेघालय सहित कई राज्यों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और कई जिलों में राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं। वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में भी व्यापक वर्षा होने की संभावना है। मौसम विभाग ने कुछ स्थानों पर 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के बीच नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए, मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखनी चाहिए तथा आपदा की स्थिति में प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

  • कारगिल रन 2026: शहीदों के सम्मान में दौड़ेगा बेंगलुरु, महेंद्र मुणोत होंगे मुख्य अतिथि

    कारगिल विजय उत्सव पर 5 किमी मैराथन का आयोजन, युवाओं में देशभक्ति और फिटनेस का संदेश भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 25 जुलाई, 2026 कारगिल रन 2026 के माध्यम से कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने और युवाओं में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अनूठा प्रयास शनिवार, 25 जुलाई को बेंगलुरु में किया जा रहा है। अखिल कर्नाटक पूर्व सैनिक संघ एवं प्रिय कृष्णा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह भव्य 5 किलोमीटर मैराथन विजयनगर स्थित बाल गंगाधर नाथ स्वामी खेल मैदान से प्रारंभ होगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, युवा, छात्र-छात्राएं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा नागरिक भाग लेंगे। आयोजन का उद्देश्य केवल दौड़ आयोजित करना नहीं, बल्कि कारगिल के अमर वीरों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। इस अवसर पर समाजसेवी महेंद्र मुणोत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। संघ के अध्यक्ष शिवाणा एवं अन्य पदाधिकारियों ने उन्हें औपचारिक रूप से आमंत्रण देकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन देशभक्ति, सामाजिक एकता और फिट इंडिया अभियान की भावना को मजबूत करेगा। कारगिल रन 2026 में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को राष्ट्रसेवा का संदेश देने के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान कारगिल युद्ध में वीरगति प्राप्त सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी तथा पूर्व सैनिकों का सम्मान भी किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक स्मृति नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय के लिए राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों से समाज में देश के प्रति समर्पण, अनुशासन और सेवा की भावना को नई ऊर्जा मिलती है।

  • KPSC वेटनरी ऑफिसर भर्ती विवाद: चलवाड़ी नारायणस्वामी ने भर्ती रोकने की मांग, रिश्वत और भाई-भतीजावाद के लगाए गंभीर आरोप

    विपक्ष के नेता ने सरकार से चयन सूची पर तत्काल रोक और निष्पक्ष जांच की मांग की, KPSC भर्ती प्रक्रिया पर उठाए कई सवाल भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 24 जुलाई 2026 बेंगलुरु। KPSC वेटनरी ऑफिसर भर्ती विवाद ने कर्नाटक की राजनीति में नया मोड़ ले लिया है। विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाड़ी नारायणस्वामी ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) द्वारा वेटनरी ऑफिसर भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं, नियमों के कथित उल्लंघन, भाई-भतीजावाद और रिश्वतखोरी के आरोप लगाते हुए सरकार से चयन सूची पर तत्काल रोक लगाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विधान सौधा में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में KPSC द्वारा जारी 400 वेटनरी ऑफिसर पदों की भर्ती अधिसूचना के तहत सामान्य एवं बैकलॉग पदों की भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। उनके अनुसार 342 सामान्य पदों और 58 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के बैकलॉग पदों के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी, लेकिन कथित तौर पर बैकलॉग पदों के लिए भी प्रतिस्पर्धी परीक्षा आयोजित कर नियमों का उल्लंघन किया गया। उन्होंने दावा किया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगे हैं और चयन प्रक्रिया को लेकर 80 लाख रुपये तक की रिश्वत मांगने के आरोप भी सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे आरोप लगे हैं तो सरकार का दायित्व है कि वह उनकी स्वतंत्र जांच कराए और जांच पूरी होने तक चयन सूची जारी न करे। चलवाड़ी नारायणस्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद हुआ तथा मेधावी अभ्यर्थियों की अनदेखी कर कम अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को चयनित किया गया। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी उम्मीदवार के चयन में रिश्तेदारी या प्रभाव का इस्तेमाल हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के बैकलॉग पदों की भर्ती निर्धारित सरकारी आदेशों के अनुरूप होनी चाहिए और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो पूरी प्रक्रिया की कानूनी समीक्षा की जानी चाहिए। विपक्ष के नेता ने कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) द्वारा कृषि अधिकारी (AO) एवं सहायक कृषि अधिकारी (AAO) की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वहां भी नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर अभ्यर्थी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के कुछ राजनीतिक मुद्दों, छात्र आंदोलनों तथा विभिन्न दलों की भूमिका पर भी अपनी राजनीतिक टिप्पणियां कीं। उन्होंने NEET परीक्षा से जुड़े विरोध प्रदर्शनों, राजनीतिक दलों की भूमिका तथा कांग्रेस नेतृत्व पर भी तीखी आलोचना की। इन बयानों में उन्होंने कई आरोप और राजनीतिक टिप्पणियां कीं, जिन पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आई थी। गौरतलब है कि प्रेस वार्ता में लगाए गए रिश्वत, भाई-भतीजावाद और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं संबंधी सभी आरोप विपक्ष के नेता चलवाड़ी नारायणस्वामी द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित सरकारी एजेंसियों अथवा KPSC की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हुई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन आरोपों की आधिकारिक जांच होती है तो यह मामला आने वाले दिनों में कर्नाटक की प्रशासनिक और राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।

  • श्री हीराबाग जैन स्थानक चातुर्मास प्रवेश 2026: गुरुदेव श्री ज्ञान मुनिजी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश, श्रद्धा से उमड़ा जनसैलाब

    बेंगलुरु में धर्म, संस्कार और साधना का अनुपम संगम; चातुर्मास के महत्व पर गुरुदेव ने दिया प्रेरक संदेश भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 24 जुलाई 2026 बेंगलुरु। धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर वातावरण के बीच श्री हीराबाग जैन स्थानक चातुर्मास प्रवेश 2026 का भव्य आयोजन शुक्रवार को संपन्न हुआ। प्रातःकाल भारती नगर जैन स्थानक से निकली भव्य शोभायात्रा के साथ पूज्य गुरुदेव श्री ज्ञान मुनिजी महाराज एवं पूज्य श्री लोकेश मुनिजी महाराज का श्री हीराबाग जैन स्थानक में मंगलमय चातुर्मास प्रवेश हुआ। हजारों श्रद्धालुओं, विभिन्न जैन संघों के पदाधिकारियों, युवाओं एवं महिलाओं की उपस्थिति ने इस धार्मिक आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। जयघोष, मंगल गीत, धर्मध्वज और श्रद्धा से भरे वातावरण में श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का भावपूर्ण स्वागत किया। कार्यक्रम में स्थानकवासी एवं मूर्तिपूजक दोनों परंपराओं के अनेक जैन संघों की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली, जिसने समाज की एकता और समरसता का संदेश दिया। चातुर्मास प्रवेश समारोह में प.पू. मुनिराज श्री कुशलकीर्तिविजयजी महाराज एवं प.पू. मुनिराज श्री कल्याणजितविजयजी महाराज (कैंटोनमेंट) सहित अनेक संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बेंगलुरु के विभिन्न जैन संघों के अध्यक्ष, सचिव, पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। प्रवचन के दौरान पूज्य गुरुदेव श्री ज्ञान मुनिजी महाराज ने कहा कि हीराबाग जैन स्थानक साधना और सेवा का श्रेष्ठ केंद्र है। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में चातुर्मास केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संस्कार निर्माण और सामाजिक जागरण का अवसर है। गुरुदेव ने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में जैन संस्कारों के विकास पर बल देते हुए कहा कि परिवार और समाज की सुदृढ़ नींव अच्छे संस्कारों से ही तैयार होती है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान प्रवचन, सामायिक, तप, स्वाध्याय, धर्म आराधना, संस्कार शिविर और विभिन्न धार्मिक आयोजनों से प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने हीराबाग स्थानक के श्रावक-श्राविकाओं की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि यहां का समर्पण अनुकरणीय है। इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष डॉ. भीकमचंद साकलेचा, उपाध्यक्ष श्री नन्दकिशोर समदरिया, सचिव श्री अशोक बंटिया, कोषाध्यक्ष श्री धनराज सोनी, श्री गौतमचंद नाहर, श्री जयचंद लूणावत सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह के अंत में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ (एम.एस.) ने आयोजन की सफलता के लिए परमात्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सभी संघों, स्वयंसेवकों, दानदाताओं एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। संघ ने कहा कि सभी के सहयोग, समर्पण और सेवा भावना से यह आयोजन अविस्मरणीय एवं ऐतिहासिक बन सका। धार्मिक जानकारों के अनुसार चातुर्मास का काल आत्मसंयम, तपस्या, सदाचार और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। ऐसे आयोजनों से समाज में नैतिक मूल्यों का विकास होता है तथा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और जैन दर्शन से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

  • CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: बिहार में सड़क-नदी बिना बने करोड़ों के पुल, सरकारी धन पर सवाल

    ग्रामीण कार्य विभाग की परियोजनाओं पर CAG की गंभीर टिप्पणी, अधूरे निर्माण और दूषित पेयजल व्यवस्था भी जांच के घेरे में भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पटना | 24 जुलाई, 2026। CAG रिपोर्ट बिहार ने राज्य की ग्रामीण विकास परियोजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी चंपारण और अररिया में संपर्क सड़क व आवश्यक भूमि उपलब्ध कराए बिना करोड़ों रुपये की लागत से पुलों का निर्माण कर दिया गया, जो वर्षों बाद भी उपयोग में नहीं आ सके। रिपोर्ट में बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं, तटबंध निर्माण और 'हर घर नल का जल' योजना में भी गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। इससे सरकारी धन के उपयोग और परियोजना प्रबंधन पर बहस तेज हो गई है। बिहार विधानसभा में प्रस्तुत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के ग्रामीण कार्य विभाग और अन्य विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कई परियोजनाओं में योजना निर्माण, भूमि उपलब्धता और कार्यान्वयन के बीच समन्वय की कमी के कारण करोड़ों रुपये का सार्वजनिक धन प्रभावी उपयोग में नहीं आ सका। रिपोर्ट में पूर्वी चंपारण जिले के बेतौना गांव और अररिया जिले के थापकोल गांव का उल्लेख किया गया है। यहां पुलों का निर्माण तो कराया गया, लेकिन संपर्क सड़क और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने के कारण ये पुल वर्षों बाद भी उपयोग में नहीं आ सके। CAG के अनुसार, पूर्वी चंपारण के बेतौना गांव में वर्ष 2018 में पुल का निर्माण पूरा हो गया था। परियोजना के तहत पुल के दोनों ओर संपर्क सड़क भी प्रस्तावित थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण का विरोध होने से सड़क नहीं बन सकी। परिणामस्वरूप पुल उपयोग से बाहर है। इसी प्रकार अररिया जिले के जोकीहाट प्रखंड के थापकोल गांव में भी पुल का निर्माण लगभग पूरा कर लिया गया, किंतु आवश्यक भूमि उपलब्ध न होने के कारण संपर्क मार्ग पूरी तरह विकसित नहीं हो सका। रिपोर्ट के अनुसार यह परियोजना भी निर्धारित उद्देश्य पूरा नहीं कर सकी। CAG ने इन मामलों में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता बताई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि परियोजना शुरू करने से पहले भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने संबंधी निर्धारित प्रक्रियाओं का समुचित पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट केवल पुल निर्माण तक सीमित नहीं है। इसमें बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं पर भी गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। बागमती-अधवारा, कमला-बलान और महानंदा नदी क्षेत्र की तटबंध परियोजनाओं में पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराए बिना निविदाएं जारी करने का उल्लेख किया गया है। इसके कारण कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं और सार्वजनिक धन का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। जल संसाधन विभाग ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भविष्य में तटबंध निर्माण के लिए निविदा जारी करने से पहले आवश्यक भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा 'हर घर नल का जल' योजना की समीक्षा में भी रिपोर्ट ने चिंता जताई है। जांच किए गए कुछ क्षेत्रों में आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पेयजल की आपूर्ति का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार जिन क्षेत्रों में यह समस्या पाई गई, वहां शुद्धिकरण की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी, जिससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक परियोजनाओं की सफलता केवल निर्माण कार्य पूरा होने से नहीं, बल्कि उनके वास्तविक उपयोग और लाभार्थियों तक समय पर पहुंचने से तय होती है। ऐसे में CAG की रिपोर्ट भविष्य की परियोजनाओं के लिए बेहतर योजना, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।

  • वांगचुक ने तोड़ा अनशन, फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन: NEET पेपर लीक विवाद में सरकार के बड़े फैसले

    34वें दिन आंदोलन ने लिया नया मोड़, सरकार ने बातचीत और सख्ती दोनों के संकेत दिए भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 24 जुलाई, 2026। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर चल रहे आंदोलन ने 34वें दिन नया मोड़ ले लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा की। इसके बाद देर रात संबंधित अधिसूचना भी जारी की गई। केंद्रीय मंत्रियों की मुलाकात के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। हालांकि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है। सरकार ने एक ओर छात्रों के हितों की रक्षा का भरोसा दिया, वहीं सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए इंटरनेट सेवाओं और कई मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध भी लागू रखा। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन ने शुक्रवार को नया राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया। आंदोलन के 34वें दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा की। इसके कुछ समय बाद दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप विशेष अदालत के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो संदेश में कहा कि देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी तथा मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। घोषणा के बाद देर रात संबंधित अधिसूचना जारी की गई, जिसके तहत सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के अंतर्गत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत बनाई गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन मामलों को शीघ्र सुनवाई के लिए नई अदालत में स्थानांतरित किया जाएगा। इस घटनाक्रम के बीच मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुलाकात की। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देने के बाद उन्होंने वांगचुक से अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार करते हुए वांगचुक ने सूप पीकर अपना अनशन समाप्त कर दिया। हालांकि अनशन समाप्त होने के बावजूद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी संगठन ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े अपने अन्य मुद्दों पर आंदोलन जारी रखने की बात कही है। उधर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली प्रशासन ने जंतर-मंतर क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध तथा 17 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास सीमित रखने जैसे कदम भी उठाए गए हैं। दिल्ली मेट्रो ने यात्रियों से वैकल्पिक यात्रा योजना बनाने की अपील की है। सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के लिए भी औपचारिक प्रस्ताव भेजने की बात कही है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार किसी भी उपयुक्त समय और स्थान पर चर्चा के लिए तैयार है तथा छात्रों की चिंताओं का समाधान संवाद के माध्यम से निकालना चाहती है। दूसरी ओर प्रदर्शनकारी संगठन ने कहा है कि यदि औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त होता है तो वह किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत के लिए तैयार रहेगा। इस बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी आंदोलन स्थल का दौरा कर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर त्वरित न्यायिक प्रक्रिया और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय भविष्य में छात्रों का विश्वास मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • नेपाल बॉर्डर घुसपैठ साजिश नाकाम: 'वारिस पंजाब दे' का मोस्ट वांटेड आरोपी गिरफ्तार

    भारत-नेपाल सीमा पर संयुक्त अभियान में बड़ी सफलता, संदिग्ध नेटवर्क के कई सहयोगी भी पुलिस की गिरफ्त में भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बहराइच (उत्तर प्रदेश) | 24 जुलाई, 2026। नेपाल बॉर्डर घुसपैठ की एक बड़ी साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते विफल कर दिया। उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित रूपईडीहा भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी और स्थानीय पुलिस के संयुक्त अभियान में प्रतिबंधित संगठन 'वारिस पंजाब दे' से जुड़े मोस्ट वांटेड आरोपी विक्रमजीत सिंह को एक विदेशी नागरिक के साथ अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते हुए गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान सीमा पार कराने वाले कथित स्थानीय नेटवर्क का भी खुलासा हुआ। सुरक्षा एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हैं और पंजाब पुलिस के साथ समन्वय कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक महत्वपूर्ण संयुक्त अभियान चलाकर कथित अवैध घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। बहराइच जिले के रूपईडीहा बॉर्डर पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई में प्रतिबंधित संगठन 'वारिस पंजाब दे' से जुड़े बताए जा रहे मोस्ट वांटेड आरोपी विक्रमजीत सिंह को एक विदेशी नागरिक मंजीत सिंह के साथ गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों संदिग्ध नेपाल की ओर से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों को पहले से प्राप्त खुफिया सूचना के आधार पर संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें दोनों को सीमा क्षेत्र से हिरासत में ले लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों को सीमा पार कराने के लिए स्थानीय स्तर पर कथित सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में सुरेश पाठक, दिलीप उपाध्याय और चालक राहुल कुमार को भी गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने सीमा पार कराने और परिवहन की व्यवस्था करने में भूमिका निभाई। मामले की जांच के दौरान वर्ष 2023 के चर्चित अजनाला थाना प्रकरण का भी उल्लेख सामने आया है। उस घटना में अमृतसर जिले के अजनाला थाने पर बड़ी संख्या में समर्थकों ने अपने एक साथी को छुड़ाने के लिए प्रदर्शन किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, विक्रमजीत सिंह उस मामले में भी वांछित आरोपियों में शामिल था और बाद में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के सहारे नेपाल में छिपा हुआ था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल अवैध घुसपैठ तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की भी गहन जांच आवश्यक है। इसी उद्देश्य से एसएसबी, स्थानीय पुलिस, खुफिया विभाग, इमीग्रेशन अधिकारियों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीमें आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं। बहराइच के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी पंजाब पुलिस को उपलब्ध करा दी गई है। अब विभिन्न राज्यों की एजेंसियां मिलकर नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही हैं, ताकि यदि किसी व्यापक अवैध गतिविधि का संबंध सामने आता है तो उसके विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि खुली सीमाओं वाले क्षेत्रों में खुफिया समन्वय, तकनीकी निगरानी और स्थानीय स्तर पर सतर्कता राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस कार्रवाई को सीमा सुरक्षा के लिहाज से एक अहम सफलता माना जा रहा है।

  • गुरुवाणी से सामाजिक चेतना का जागरण: युवा शक्ति बनी बदलाव की नई पहचान

    संत श्री राजाराम जी युवा जागृति मंच समाज सुधार, संस्कार और संगठनात्मक एकता का बना प्रेरक अभियान भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिकारपुरा (राजस्थान) | 24 जुलाई, 2026। गुरुवाणी से सामाजिक चेतना का संदेश आज पूरे कलबी समाज में नई ऊर्जा भर रहा है। गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज की प्रेरणा से वर्ष 2018 में गठित संत श्री राजाराम जी युवा जागृति मंच, शिकारपुरा (राजस्थान) समाज में शिक्षा, संस्कार, नशामुक्ति, सामाजिक एकता और कुरीतियों के उन्मूलन के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। मंच का उद्देश्य बिना दिखावे, बिना पद-लालसा और बिना प्रचार के गुरुवाणी को जन-जन तक पहुंचाकर समाज को शिक्षित, अनुशासित, संगठित और संस्कारित बनाना है। संगठन की यह सेवा भावना आज अनेक युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज की दिव्य प्रेरणा से वर्ष 2018 में स्थापित संत श्री राजाराम जी युवा जागृति मंच, शिकारपुरा (राजस्थान) आज कलबी समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। संगठन का मूल उद्देश्य गुरुवाणी के संदेशों को व्यवहारिक जीवन में उतारते हुए समाज को शिक्षा, संस्कार, अनुशासन और सेवा के मार्ग पर अग्रसर करना है। मंच के कार्यकर्ता बिना किसी पद, प्रतिष्ठा या व्यक्तिगत स्वार्थ की भावना के समाज हित में कार्य कर रहे हैं। शिक्षा का प्रसार, सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन, नशामुक्ति अभियान, पारंपरिक संस्कारों का संरक्षण तथा संगठनात्मक एकता को मजबूत करना इनके प्रमुख उद्देश्य हैं। संगठन का मानना है कि आधुनिक जीवन की चकाचौंध के बीच समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गुरुवाणी के आदर्शों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी सोच के साथ युवा शक्ति समाज के प्रत्येक वर्ग तक जागरूकता का संदेश पहुंचा रही है। सामाजिक चिंतकों का कहना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति गुरुवाणी के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाए तो समाज में नैतिकता, अनुशासन, सद्भाव और सेवा की भावना स्वतः विकसित होगी। यही विचार संगठन की गतिविधियों का आधार बना हुआ है। युवा जागृति मंच ने समाज के वरिष्ठजनों, विद्वानों और समाजसेवियों से भी आह्वान किया है कि वे इस जागरूक युवा शक्ति का मनोबल बढ़ाएं तथा समाजहित के कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। संगठन का विश्वास है कि सामूहिक प्रयासों से ही समाज को शिक्षित, सुरक्षित, विकसित और संस्कारित बनाया जा सकता है। संगठन ने देशभर के कलबी समाज के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सदस्यों से गुरुवाणी को जीवन का आधार बनाकर सामाजिक सेवा में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उनका संदेश है कि सेवा, संस्कार और संगठन ही समाज की वास्तविक शक्ति हैं और इन्हीं मूल्यों के माध्यम से भविष्य की मजबूत सामाजिक व्यवस्था का निर्माण संभव है।

  • धारावाहिक उपन्यास | मौन दान (भाग–04)

    तस्वीर में मुस्कुराती स्त्री ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह नोट: "मौन दान" एक मौलिक काल्पनिक धारावाहिक उपन्यास है। इसके पात्र, घटनाएँ और स्थान साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। एक तस्वीर... जिसने शिवनारायण की पूरी कहानी बदल दी बरामदे में फैला सन्नाटा अब भी वैसा ही था। जमुना दादी की उँगलियाँ उस पुरानी तस्वीर को थामे हुए थीं। उनकी आँखें तस्वीर पर थीं... लेकिन मन जैसे पैंतीस वर्ष पीछे लौट चुका था। दयानाथ ने धीरे से पूछा— "पहचान लिया आपने?" जमुना दादी ने गहरी साँस ली। फिर तस्वीर में मुस्कुराती स्त्री की ओर इशारा करते हुए बोलीं— "यह गौरी है... शिवनारायण की पत्नी।" भीड़ में खड़े कई युवाओं ने पहली बार यह नाम सुना। उन्हें तो बस इतना पता था कि शिवनारायण हमेशा अकेले रहते थे। जमुना दादी ने मुस्कुराते हुए कहा— "जब गौरी इस गाँव में बहू बनकर आई थी, तब पूरे गाँव में उससे ज़्यादा हँसमुख लड़की कोई नहीं थी।" किसी ने पूछा— "और शिवनारायण?" दादी मुस्कुराईं। "वह तब भी कम बोलता था... लेकिन गौरी उसकी हर चुप्पी समझ लेती थी।" फिर उन्होंने एक पुरानी घटना सुनाई। सूखे का साल था। कई घरों में चूल्हा तक नहीं जलता था। एक शाम गौरी ने देखा कि शिवनारायण गेहूँ की बोरी लेकर घर से निकल रहे हैं। उसने पूछा— "कहाँ जा रहे हो?" शिवनारायण ने शांत स्वर में उत्तर दिया— "जहाँ इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।" गौरी ने फिर पूछा— "लेकिन लोग जानेंगे कैसे कि मदद तुमने की है?" शिवनारायण मुस्कुरा दिए। "जिस भूखे के घर रोटी पहुँचेगी... उसे नाम नहीं, भोजन याद रहेगा।" गौरी ने जाते-जाते बस इतना कहा— "एक बात हमेशा याद रखना... दान कभी किसी का सिर झुकाकर मत देना।" वह एक वाक्य शिवनारायण के जीवन का सिद्धांत बन गया। वर्तमान में लौटते हुए जमुना दादी की आँखें भर आईं। "गौरी चली गई... लेकिन उसके शब्द शिवा के साथ हमेशा रहे।" दयानाथ ने संदूक से एक छोटा कपड़े का थैला निकाला। उसमें एक पुरानी चाँदी की पायल और एक तह किया हुआ कागज़ था। उन्होंने पढ़ा— "यह गौरी की आख़िरी निशानी है। इसे बेचने का मन कई बार हुआ, लेकिन हर बार लगा कि यह मुझे याद दिलाती रहे कि दान में केवल धन नहीं, सम्मान भी दिया जाता है।" जमुना दादी अब अपने आँसू नहीं रोक सकीं। "शिवा ने गौरी को कभी भुलाया ही नहीं..." तभी आँगन से एक बालक दौड़ता हुआ आया। "सरपंच जी... डाकिया आया है!" डाकिए के हाथ में शहर से आया एक पंजीकृत लिफ़ाफ़ा था। उस पर लिखा था— "अधिवक्ता दयानाथ त्रिपाठी के लिए — अत्यंत आवश्यक।" दयानाथ ने पत्र खोला। सरकारी मुहर लगी हुई थी। पत्र पढ़ते ही उनके चेहरे का रंग बदल गया। सरपंच ने घबराकर पूछा— "क्या हुआ?" दयानाथ ने पत्र मोड़ते हुए धीमे स्वर में कहा— "जिस सच को हम वर्षों पुराना समझ रहे थे..." "...वह शायद आज भी अधूरा है।" बरामदे में फिर एक बार सन्नाटा उतर आया। और कहानी ने एक नया मोड़ ले लिया। क्रमशः...अगले भाग में पढ़िए: "सरकारी पत्र" केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित धारावाहिक उपन्यास — मौन दान। अगर आप इस कहानी में कोई भाग नहीं पड़े हैं तो पढ़ें भाग 01 भाग 02 भाग 03 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • मन पर विजय से बनें सच्चे लीडर, जन्मजात नेतृत्व क्षमता जगाने का मंत्र — मुनि श्री वीरसागर महाराज

    चातुर्मास प्रवचन में आत्मनिरीक्षण, सकारात्मक सोच और नेतृत्व विकास का दिया प्रभावशाली संदेश ज्ञानोदय परिसर, तूबरहल्ली में श्रद्धालुओं को संबोधित करते निर्यापक श्रमण पूज्य मुनि श्री 108 वीरसागर महाराज। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 24 जुलाई, 2026 मन पर विजय ही वास्तविक नेतृत्व की पहली पहचान है। यदि व्यक्ति अपने मन, विचारों और इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित कर ले, तो वह न केवल अपने जीवन का सफल नेतृत्व कर सकता है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। यही प्रेरणादायी संदेश निर्यापक श्रमण पूज्य मुनि श्री 108 वीरसागर महाराज ने बेंगलुरु के तूबरहल्ली स्थित ज्ञानोदय परिसर में आयोजित चातुर्मास प्रवचनमाला में दिया। 'लीडरशिप क्वालिटी पैदा करने का अचूक उपाय' विषय पर आयोजित प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य जन्म से ही नेतृत्व क्षमता लेकर आता है। करोड़ों संभावनाओं में विजेता बनकर जन्म लेना स्वयं इस बात का प्रमाण है कि नेतृत्व मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। आवश्यकता केवल उस जन्मजात क्षमता को पहचानने, उसे जागृत करने और सही दिशा देने की है। उन्होंने कहा कि मनुष्य परिस्थितियों का नहीं, बल्कि अपने विचारों, संस्कारों और निर्णयों का निर्माता होता है। जब व्यक्ति अपने भीतर छिपी शक्तियों को पहचान लेता है और मन पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तभी वह अपने जीवन का वास्तविक नेतृत्व कर पाता है। मुनि श्री ने कहा कि आज अधिकांश लोग अपनी वास्तविक क्षमता इसलिए नहीं पहचान पाते क्योंकि वे स्वयं को दूसरों की नजर से देखने लगते हैं। गलत संगति, नकारात्मक सोच, आत्मविश्वास की कमी और निरंतर नकारात्मक मानसिक आहार धीरे-धीरे व्यक्ति की नेतृत्व क्षमता को दबा देते हैं। परिणामस्वरूप वह स्वयं निर्णय लेने के बजाय दूसरों का अनुसरण करने लगता है। प्रवचन के दौरान उन्होंने 'बाज और मुर्गियों' की प्रसिद्ध प्रेरक कथा सुनाते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को बार-बार उसकी सीमाएँ बताई जाएँ तो वह अपनी वास्तविक शक्ति को कभी पहचान नहीं पाता। बाज में आकाश की असीम ऊँचाइयों तक उड़ने की क्षमता होती है, लेकिन यदि उसका पालन-पोषण मुर्गियों के बीच हो तो वह स्वयं को भी मुर्गी समझने लगता है। ठीक इसी प्रकार मनुष्य की सबसे बड़ी बाधा बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि स्वयं के प्रति बनी सीमित और नकारात्मक धारणाएँ होती हैं। मुनि श्री ने वर्षा की एक बूंद का उदाहरण देकर समझाया कि वही निर्मल जल धूल में गिरकर कीचड़, नीम पर गिरकर कड़वाहट, सर्प के मुख में विष और सीप में पहुँचकर मोती बन जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि वातावरण और संगति का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर अत्यंत गहरा पड़ता है। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ जीवन के लिए श्रेष्ठ विचार, श्रेष्ठ साहित्य, श्रेष्ठ संगति और सकारात्मक मानसिक आहार का चयन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज केवल 'माइंडफुलनेस' की चर्चा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने मन के प्रति निरंतर सजग रहना अधिक आवश्यक है। आत्मनिरीक्षण ही जीवन परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन अपनी छह इंद्रियों—आंख, कान, नाक, जीभ, स्पर्श और मन का परीक्षण करने की प्रेरणा दी। मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति को प्रतिदिन स्वयं से छह प्रश्न अवश्य पूछने चाहिए—क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे और कितना? यदि इन प्रश्नों के माध्यम से वह यह जांचने लगे कि वह क्या देख रहा है, क्या सुन रहा है, क्या बोल रहा है, क्या सोच रहा है और अपने मन को किस प्रकार का आहार दे रहा है, तो उसका जीवन स्वतः अनुशासित और सफल बनने लगेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे अपनी असफलताओं के लिए भाग्य, परिस्थितियों या कर्मों को दोष देने के बजाय अपने विचारों और कर्मों का निष्पक्ष आत्ममूल्यांकन करें। वास्तविक परिवर्तन उसी दिन से प्रारंभ होता है जब व्यक्ति अपने मन की दिशा बदलने का निर्णय लेता है। प्रवचन के समापन पर मुनि श्री ने कहा कि नेतृत्व केवल किसी संस्था, संगठन या समाज का नेतृत्व करना नहीं है। सबसे बड़ा नेतृत्व स्वयं के मन, इच्छाओं और प्रतिक्रियाओं पर विजय प्राप्त करना है। जो स्वयं का नेतृत्व करना सीख जाता है, वही समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है। ज्ञानोदय परिसर में आयोजित इस प्रेरणादायी प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। आध्यात्मिक दर्शन और व्यवहारिक जीवन के सुंदर समन्वय से परिपूर्ण इस प्रवचन ने आत्मजागरण, सकारात्मक चिंतन, आत्मानुशासन और सतत आत्मनिरीक्षण के माध्यम से सफल एवं संतुलित जीवन का सशक्त संदेश दिया।

  • धारावाहिक उपन्यास | मौन दान (भाग–03)

    पहला नाम एक नाम जिसने वर्षों पुरानी यादों के दरवाज़े खोल दिए... नोट: "मौन दान" एक मौलिक काल्पनिक धारावाहिक उपन्यास है। इसके पात्र, घटनाएँ और स्थान साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। रामदीन के शब्द देर तक हवा में गूँजते रहे— "सबसे पहले गलती मेरी थी..." बरामदे में खड़े लोगों ने पहली बार किसी को शिवनारायण के लिए खुले मन से क्षमा माँगते देखा था। दयानाथ त्रिपाठी ने संदूक का ढक्कन पूरी तरह बंद नहीं किया। उसे आधा खुला छोड़ते हुए उन्होंने कहा— "सच कभी एक साथ सामने नहीं आता। उसकी भी अपनी गति होती है।" उन्होंने लाल कपड़े की पोटली से एक पुरानी कॉपी निकाली। यह डायरी नहीं थी। उसके पहले पन्ने पर केवल एक शब्द लिखा था— "विश्वास" न कोई नाम... न कोई तारीख़... सिर्फ़ एक वाक्य— "जिस दिन किसी की मदद के बदले धन्यवाद सुनने की इच्छा मर जाती है, उसी दिन दान जन्म लेता है।" पूरा बरामदा फिर शांत हो गया। दयानाथ ने अगला पन्ना खोला। इस बार वहाँ केवल एक नाम लिखा था— रामविलास मास्टर रामविलास स्तब्ध रह गए। "मैं...?" दयानाथ ने धीरे से पूछा— "क्या आपको 1989 की वह बरसात याद है?" क्षण भर में रामविलास का मन पैंतीस वर्ष पीछे लौट गया। लगातार बारिश... बीमार पिता... घर में अनाज नहीं... और स्कूल की फीस जमा न होने के कारण पढ़ाई छूटने का डर। उस रात उन्होंने अपनी माँ को पहली बार चुपचाप रोते देखा था। लेकिन अगली सुबह घर के दरवाज़े पर एक पुराना लिफाफा मिला। उसमें पूरी फीस रखी थी। कोई नाम नहीं। कोई परिचय नहीं। सिर्फ़ एक पंक्ति— "पढ़ाई मत छोड़ना। किसी दिन किसी और बच्चे को पढ़ा देना।" वर्तमान में लौटते ही रामविलास की आँखें भर आईं। उन्होंने काँपती आवाज़ में कहा— "अगर उस दिन वह लिफाफा नहीं मिलता... तो मैं कभी शिक्षक नहीं बन पाता।" दयानाथ ने कॉपी बंद करते हुए कहा— "एक छोटी-सी मदद कई पीढ़ियों का भविष्य बदल सकती है।" उसी समय तेज़ हवा का झोंका आया। बरामदे के कोने में रखी एक पुरानी तस्वीर ज़मीन पर गिर पड़ी। जमुना दादी ने तस्वीर उठाई। कुछ पल उसे देखती रहीं... फिर उनके होंठ काँप उठे— "अरे... यह तो..." दयानाथ उनकी ओर देखकर बोले— "हाँ दादी... अब समय आ गया है कि गाँव उस परिवार को भी जाने, जिसे उसने कभी जानने की कोशिश ही नहीं की।" बरामदे में फिर सन्नाटा छा गया। लेकिन इस बार वह सन्नाटा आरोपों का नहीं... एक नए सच की प्रतीक्षा का था। आपने अगर इस पहले की कहानी नहीं पढ़ी तो पढ़ें भाग 01, भाग 02 क्रमशः... अगले भाग में पढ़िए: "तस्वीर में मुस्कुराती स्त्री"केवल भारतार्थ ख़बर पर।

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