top of page

 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

WhatsApp Video 2026-10-04 at 8.50.36 PM.mp4

CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: बिहार में सड़क-नदी बिना बने करोड़ों के पुल, सरकारी धन पर सवाल

लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
धन्नाराम चौधरी
24 जुल॰
3 मिनट पठन

ग्रामीण कार्य विभाग की परियोजनाओं पर CAG की गंभीर टिप्पणी, अधूरे निर्माण और दूषित पेयजल व्यवस्था भी जांच के घेरे में

Long concrete bridge stretches over a dusty desert plain with mountains in the distance under a hazy sky.

भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पटना | 24 जुलाई, 2026। CAG रिपोर्ट बिहार ने राज्य की ग्रामीण विकास परियोजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी चंपारण और अररिया में संपर्क सड़क व आवश्यक भूमि उपलब्ध कराए बिना करोड़ों रुपये की लागत से पुलों का निर्माण कर दिया गया, जो वर्षों बाद भी उपयोग में नहीं आ सके। रिपोर्ट में बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं, तटबंध निर्माण और 'हर घर नल का जल' योजना में भी गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। इससे सरकारी धन के उपयोग और परियोजना प्रबंधन पर बहस तेज हो गई है।


बिहार विधानसभा में प्रस्तुत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के ग्रामीण कार्य विभाग और अन्य विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कई परियोजनाओं में योजना निर्माण, भूमि उपलब्धता और कार्यान्वयन के बीच समन्वय की कमी के कारण करोड़ों रुपये का सार्वजनिक धन प्रभावी उपयोग में नहीं आ सका।


रिपोर्ट में पूर्वी चंपारण जिले के बेतौना गांव और अररिया जिले के थापकोल गांव का उल्लेख किया गया है। यहां पुलों का निर्माण तो कराया गया, लेकिन संपर्क सड़क और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने के कारण ये पुल वर्षों बाद भी उपयोग में नहीं आ सके।


CAG के अनुसार, पूर्वी चंपारण के बेतौना गांव में वर्ष 2018 में पुल का निर्माण पूरा हो गया था। परियोजना के तहत पुल के दोनों ओर संपर्क सड़क भी प्रस्तावित थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण का विरोध होने से सड़क नहीं बन सकी। परिणामस्वरूप पुल उपयोग से बाहर है।


इसी प्रकार अररिया जिले के जोकीहाट प्रखंड के थापकोल गांव में भी पुल का निर्माण लगभग पूरा कर लिया गया, किंतु आवश्यक भूमि उपलब्ध न होने के कारण संपर्क मार्ग पूरी तरह विकसित नहीं हो सका। रिपोर्ट के अनुसार यह परियोजना भी निर्धारित उद्देश्य पूरा नहीं कर सकी।


CAG ने इन मामलों में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता बताई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि परियोजना शुरू करने से पहले भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने संबंधी निर्धारित प्रक्रियाओं का समुचित पालन नहीं किया गया।


रिपोर्ट केवल पुल निर्माण तक सीमित नहीं है। इसमें बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं पर भी गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। बागमती-अधवारा, कमला-बलान और महानंदा नदी क्षेत्र की तटबंध परियोजनाओं में पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराए बिना निविदाएं जारी करने का उल्लेख किया गया है। इसके कारण कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं और सार्वजनिक धन का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।


जल संसाधन विभाग ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भविष्य में तटबंध निर्माण के लिए निविदा जारी करने से पहले आवश्यक भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है।


इसके अलावा 'हर घर नल का जल' योजना की समीक्षा में भी रिपोर्ट ने चिंता जताई है। जांच किए गए कुछ क्षेत्रों में आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पेयजल की आपूर्ति का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार जिन क्षेत्रों में यह समस्या पाई गई, वहां शुद्धिकरण की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी, जिससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो सकते हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक परियोजनाओं की सफलता केवल निर्माण कार्य पूरा होने से नहीं, बल्कि उनके वास्तविक उपयोग और लाभार्थियों तक समय पर पहुंचने से तय होती है। ऐसे में CAG की रिपोर्ट भविष्य की परियोजनाओं के लिए बेहतर योजना, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page