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नेपाल बॉर्डर घुसपैठ साजिश नाकाम: 'वारिस पंजाब दे' का मोस्ट वांटेड आरोपी गिरफ्तार

  • Writer: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 59 minutes ago
  • 2 min read

भारत-नेपाल सीमा पर संयुक्त अभियान में बड़ी सफलता, संदिग्ध नेटवर्क के कई सहयोगी भी पुलिस की गिरफ्त में

Two veiled men in turbans are escorted by police officers in a building corridor, one in purple robes and one in white, tense mood.

भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बहराइच (उत्तर प्रदेश) | 24 जुलाई, 2026। नेपाल बॉर्डर घुसपैठ की एक बड़ी साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते विफल कर दिया। उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित रूपईडीहा भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी और स्थानीय पुलिस के संयुक्त अभियान में प्रतिबंधित संगठन 'वारिस पंजाब दे' से जुड़े मोस्ट वांटेड आरोपी विक्रमजीत सिंह को एक विदेशी नागरिक के साथ अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते हुए गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान सीमा पार कराने वाले कथित स्थानीय नेटवर्क का भी खुलासा हुआ। सुरक्षा एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हैं और पंजाब पुलिस के साथ समन्वय कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक महत्वपूर्ण संयुक्त अभियान चलाकर कथित अवैध घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। बहराइच जिले के रूपईडीहा बॉर्डर पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई में प्रतिबंधित संगठन 'वारिस पंजाब दे' से जुड़े बताए जा रहे मोस्ट वांटेड आरोपी विक्रमजीत सिंह को एक विदेशी नागरिक मंजीत सिंह के साथ गिरफ्तार किया गया।


प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों संदिग्ध नेपाल की ओर से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों को पहले से प्राप्त खुफिया सूचना के आधार पर संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें दोनों को सीमा क्षेत्र से हिरासत में ले लिया गया।


जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों को सीमा पार कराने के लिए स्थानीय स्तर पर कथित सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में सुरेश पाठक, दिलीप उपाध्याय और चालक राहुल कुमार को भी गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने सीमा पार कराने और परिवहन की व्यवस्था करने में भूमिका निभाई।


मामले की जांच के दौरान वर्ष 2023 के चर्चित अजनाला थाना प्रकरण का भी उल्लेख सामने आया है। उस घटना में अमृतसर जिले के अजनाला थाने पर बड़ी संख्या में समर्थकों ने अपने एक साथी को छुड़ाने के लिए प्रदर्शन किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, विक्रमजीत सिंह उस मामले में भी वांछित आरोपियों में शामिल था और बाद में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के सहारे नेपाल में छिपा हुआ था।


सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल अवैध घुसपैठ तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की भी गहन जांच आवश्यक है। इसी उद्देश्य से एसएसबी, स्थानीय पुलिस, खुफिया विभाग, इमीग्रेशन अधिकारियों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीमें आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं।


बहराइच के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी पंजाब पुलिस को उपलब्ध करा दी गई है। अब विभिन्न राज्यों की एजेंसियां मिलकर नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही हैं, ताकि यदि किसी व्यापक अवैध गतिविधि का संबंध सामने आता है तो उसके विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके।


सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि खुली सीमाओं वाले क्षेत्रों में खुफिया समन्वय, तकनीकी निगरानी और स्थानीय स्तर पर सतर्कता राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस कार्रवाई को सीमा सुरक्षा के लिहाज से एक अहम सफलता माना जा रहा है।

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