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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • दिल्ली पुलिस बनाम CJP: जंतर-मंतर पर फिर गरमाएगा माहौल, 31 जुलाई को पुलिस महासंघ का धरना

    NEET प्रदर्शन विवाद के बाद नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष SIT जांच के दिए संकेत जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस महासंघ के प्रस्तावित धरने और NEET प्रदर्शन विवाद से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | नई दिल्ली | 28 जुलाई, 2026 नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में NEET पेपर लीक प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नए चरण में पहुंच गया है। 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद अब दिल्ली पुलिस महासंघ ने 31 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना आयोजित करने की अनुमति मांगी है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता जताते हुए विशेष जांच दल (SIT) के गठन के संकेत दिए हैं। दिल्ली पुलिस महासंघ द्वारा पुलिस आयुक्त को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 31 जुलाई को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक प्रस्तावित धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। महासंघ के अनुसार इस कार्यक्रम में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी और कानून का सम्मान करने वाले नागरिक शामिल होंगे। उनका उद्देश्य ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के प्रति समर्थन व्यक्त करना और अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखना है। गौरतलब है कि 20 जुलाई को CJP के "चलो संसद" मार्च के दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गया था। पुलिस के अनुसार इस घटना में दिल्ली पुलिस और RAF के लगभग 130 जवान घायल हुए थे, जबकि प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पुलिस की कार्रवाई में करीब 65 छात्र भी घायल हुए। घटना के बाद पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा, हिंसा और अन्य आरोपों में 15 एफआईआर दर्ज की थीं। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्र प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और हिंसा के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जा सकता है। अदालत का कहना था कि जिसने भी कानून का उल्लंघन किया है, उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिसकर्मियों पर हुए कथित हमलों की भी गंभीर जांच की आवश्यकता बताई। अदालत ने यह जानने की जरूरत बताई कि हिंसा में वास्तविक छात्र शामिल थे या फिर कुछ असामाजिक तत्वों ने स्थिति को बिगाड़ा। सरकार की ओर से पेश पक्ष में यह भी कहा गया कि कुछ वांछित अपराधी भी भीड़ में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इन दावों की निष्पक्ष जांच अभी शेष है। अब 31 जुलाई का प्रस्तावित धरना और संभावित SIT जांच इस पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे सकते हैं। राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और आम नागरिकों की नजरें आगामी घटनाओं पर टिकी हुई हैं।

  • धारावाहिक उपन्यास | मौन दान (भाग–07)

    मोहरबंद बक्सा ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह नोट: "मौन दान" एक मौलिक काल्पनिक धारावाहिक उपन्यास है। इसके पात्र, घटनाएँ और स्थान साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। मोहरबंद बक्सा खुला, सामने आई एक डायरी... और कहानी ने लिया सबसे बड़ा मोड़ पंचायत भवन की पुरानी दीवार पर लगी घड़ी ने दोपहर के बारह बजाए। लेकिन वहाँ मौजूद किसी व्यक्ति का ध्यान समय पर नहीं था। सभी की निगाहें दयानाथ त्रिपाठी के हाथों में पकड़े उस छोटे-से मोहरबंद बक्से पर टिकी थीं। सागौन की लकड़ी से बना वह पुराना बक्सा वर्षों की यादों को अपने भीतर समेटे हुए था। किनारों पर पीतल की पट्टियाँ और बीच में लाल मोम की टूटी हुई सील। सील पर उभरे दो अक्षर— "म. ग." दयानाथ ने बक्से पर हाथ फेरा और धीमे स्वर में कहा— "इस बक्से को खोलने की अनुमति मुझे बहुत पहले मिल गई थी..." "लेकिन शिवनारायण ने कहा था— जब तक लोग मेरे कर्मों को सुनने न लगें, मेरे दर्द को मत खोलना।" कमरे में बैठे सभी लोग मौन हो गए। सरपंच ने विनम्र स्वर में पूछा— "क्या अब समय आ गया है?" दयानाथ ने गहरी साँस ली। "हाँ... अब शायद गाँव सच सुनने के लिए तैयार है।" उन्होंने सावधानी से मोम हटाई। बक्से का ढक्कन धीरे-धीरे खुला। अंदर केवल तीन चीज़ें थीं— एक पुरानी जेब घड़ी, एक सूखा हुआ गुलाब, और भूरे रंग की चमड़े की जिल्द वाली डायरी। दयानाथ ने डायरी उठाई। पहले पन्ने पर बड़े अक्षरों में लिखा था— "यह मेरी नहीं... मेरी अंतरात्मा की गवाही है।" उन्होंने पहला पन्ना खोला। स्याही धुंधली पड़ चुकी थी, लेकिन शब्द अब भी स्पष्ट थे। उन्होंने पढ़ना शुरू किया— "यदि यह डायरी पढ़ी जा रही है, तो समझिए कि मेरा मौन समाप्त हो चुका है। अब मेरे सच को छिपाने का कोई कारण नहीं बचा।" उन्होंने अगला पन्ना पलटा। उसमें लिखा था— "आज से तीस वर्ष पहले मैं भी इस गाँव के हर युवक की तरह सपने देखता था। मेरे पास धन नहीं था, लेकिन उम्मीद बहुत थी। मुझे लगता था कि मेहनत करने वाला कभी हारता नहीं।" कुछ क्षण रुककर उन्होंने आगे पढ़ा— "फिर एक दिन मुझे समझ आया कि इंसान गरीबी से नहीं... अकेलेपन से टूटता है।" इतना पढ़ते ही दयानाथ ने डायरी बंद कर दी। भीड़ में बेचैनी फैल गई। कई आवाज़ें एक साथ उठीं— "आगे पढ़िए..." "आख़िर हुआ क्या था?" दयानाथ ने शांत स्वर में कहा— "नहीं... अभी नहीं।" "पहले आपको एक ऐसे व्यक्ति से मिलना होगा, जिसके बिना यह कहानी अधूरी है।" उसी समय पंचायत भवन के बाहर एक पुरानी मोटरसाइकिल आकर रुकी। लगभग साठ वर्ष का एक साधारण व्यक्ति धीरे-धीरे भीतर आया। सादा कुर्ता... धूल से सने जूते... और चेहरे पर वर्षों का बोझ। दयानाथ उसे देखते ही खड़े हो गए। "तुम आ गए... रघुवीर?" पूरा पंचायत भवन आश्चर्य से भर उठा। रघुवीर ने शिवनारायण की अर्थी के सामने सिर झुका दिया। कुछ क्षण तक वह बोल नहीं पाया। फिर भर्राई आवाज़ में कहा— "मैं... इस गाँव का सबसे बड़ा अपराधी हूँ।" पूरा हॉल सन्नाटे में डूब गया। रघुवीर ने काँपते हुए आगे कहा— "शिवनारायण ने मेरी एक ऐसी गलती छिपाई थी..." "...जिसके कारण मुझे पूरी उम्र जेल में भी रहना पड़ सकता था।" सरपंच ने तुरंत पूछा— "कौन-सी गलती?" रघुवीर ने आँखें बंद कर लीं। "आज से अट्ठाईस साल पहले..." "नदी किनारे एक दुर्घटना हुई थी..." "और उसी एक घटना ने शिवनारायण की पूरी ज़िंदगी बदल दी।" यह सुनते ही दयानाथ ने डायरी का अगला पन्ना खोला। उस पर केवल एक पंक्ति लिखी थी— "जिस दिन रघुवीर सच बोल देगा, उसी दिन लोग समझेंगे कि मौन दान केवल धन का नहीं... जीवन का भी हो सकता है।" रघुवीर की आँखों से आँसू बह निकले। वह शिवनारायण की अर्थी के पास घुटनों के बल बैठ गया। धीरे से बोला— "भाई... अब मैं और चुप नहीं रह सकता।" "आज मैं सब बता दूँगा..." "...उस दिन नदी किनारे वास्तव में क्या हुआ था।" पंचायत भवन में बैठे हर व्यक्ति की धड़कन तेज़ हो चुकी थी। जिस रहस्य की परछाईं अब तक केवल महसूस हो रही थी... वह अब शब्दों में सामने आने वाली थी। क्रमशः... अगले भाग में पढ़िए — "नदी किनारे का सच" जहाँ पहली बार उस घटना का खुलासा होगा जिसने शिवनारायण का जीवन हमेशा के लिए बदल दिया। केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित धारावाहिक उपन्यास — मौन दान। सन्देश ; - अगर आपने इस धारावाहिक उपन्यास के पिछले भाग को नहीं पढ़ा है तो पढ़ें, भाग 01, भाग 02, भाग 03, भाग 4, भाग 5 भाग 6 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • खंडेलवाल युवा चैप्टर की फैमिली पिकनिक बनी यादगार, समाजसेवा का भी दिया संदेश

    बागलूर जैन फार्म रिज़ॉर्ट में परिवारों ने बिताए खुशनुमा पल, रक्तदान अभियान से जुड़ने का किया आह्वान खंडेलवाल युवा चैप्टर के सदस्य एवं परिवारजन बागलूर स्थित जैन फार्म रिज़ॉर्ट में आयोजित पारिवारिक पिकनिक के दौरान। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 27 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। खंडेलवाल युवा चैप्टर (KYC) पारिवारिक पिकनिक ने इस बार केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक मूल्यों और समाजसेवा का प्रेरणादायी संदेश भी दिया। रविवार को बागलूर स्थित जैन फार्म रिज़ॉर्ट में आयोजित एक दिवसीय फैमिली पिकनिक में बड़ी संख्या में चैप्टर के सदस्यों और उनके परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे दिन हंसी, उल्लास, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक संवाद का ऐसा माहौल बना, जिसने सभी के लिए इस आयोजन को यादगार बना दिया। सुबह सभी सदस्य बस के माध्यम से सामूहिक रूप से रवाना हुए। यात्रा के दौरान भी सदस्यों ने आपसी परिचय, गीत-संगीत और हल्की-फुल्की गतिविधियों के साथ सफर का आनंद लिया। संगठन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि परिवारों के बीच आत्मीयता बढ़ाना, नई पीढ़ी को सामाजिक संस्कारों से जोड़ना तथा समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करना भी रहा। रिज़ॉर्ट पहुंचने के बाद बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग-अलग मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित किए गए। जादू का शो, कठपुतली (Puppet) शो, बैलगाड़ी की सवारी, रेन डांस, स्विमिंग पूल, समूह खेल और पारिवारिक प्रतियोगितियों ने सभी का भरपूर मनोरंजन किया। बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला, वहीं वरिष्ठ सदस्यों ने भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रमों में भाग लेकर आयोजन की गरिमा बढ़ाई। सुहावने मौसम और प्राकृतिक वातावरण के बीच परिवारों ने एक-दूसरे के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताया। कई सदस्यों ने इसे तनावपूर्ण जीवनशैली के बीच एक सुखद और ऊर्जावान अनुभव बताया। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि सामाजिक संगठनों के ऐसे कार्यक्रम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होते, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने और सामाजिक समरसता को बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनते हैं। इस अवसर पर संगठन से जुड़े कई नए परिवारों ने पहली बार भागीदारी की। उन्हें चैप्टर की विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी दी गई और भविष्य के कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। इससे संगठन का दायरा और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई गई। कार्यक्रम के दौरान आगामी रक्तदान अभियान की भी विस्तृत जानकारी साझा की गई। पदाधिकारियों ने सभी सदस्यों से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान शिविर में भाग लेकर मानव सेवा के इस महत्त्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि रक्तदान सबसे बड़ा महादान है और समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति को इस अभियान से जुड़ना चाहिए। आयोजन की सफलता में खंडेलवाल युवा चैप्टर की कोर टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अध्यक्ष मितेश खंडेलवाल, उपाध्यक्ष भुवनेश खंडेलवाल, सचिव शुभम खंडेलवाल तथा सांस्कृतिक समिति की सदस्य एकता, मीना ताम्बी, रति एवं रामबाबू खंडेलवाल ने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया। उनके सामूहिक प्रयासों की सभी सदस्यों ने मुक्तकंठ से सराहना की। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सदस्यों ने भविष्य में भी ऐसे पारिवारिक, सांस्कृतिक और समाजसेवी आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने का सुझाव दिया। सभी ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजन समाज में भाईचारे, सहयोग और सेवा की भावना को और अधिक मजबूत करेंगे।

  • भीतरी सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कीजिए’ — मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज का प्रेरक संदेश

    प्रवचन में बताया— मानसिक स्वास्थ्य, आत्मपरिवर्तन और संतुलित जीवन ही वास्तविक सफलता का आधार ज्ञानोदय परिसर, तुबरहल्ली में ‘Psychology of Transformation’ विषय पर प्रवचन देते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 27 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। ‘Psychology of Transformation’ विषय पर आयोजित प्रेरणादायी प्रवचन में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने कहा कि आज के तकनीकी युग में सबसे बड़ी आवश्यकता अपने ‘भीतरी सॉफ्टवेयर’ अर्थात मन, विचार और भावनाओं को अपग्रेड करने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक जीवन में वास्तविक सफलता केवल ऊँचे वेतन, प्रतिष्ठित पद या भौतिक सुविधाओं से नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, आत्मानुशासन और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। तुबरहल्ली स्थित ज्ञानोदय परिसर में आयोजित इस विशेष प्रवचन में आईटी प्रोफेशनल्स, कॉर्पोरेट अधिकारी, उद्यमी, विद्यार्थी और विभिन्न समाजों के श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। मुनि श्री ने बेंगलुरु को देश की तकनीकी राजधानी बताते हुए कहा कि आज का व्यक्ति नई-नई तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर और आधुनिक उपकरणों को सीखने में वर्षों लगा देता है, लेकिन अपने मन और व्यक्तित्व के विकास पर उतना ध्यान नहीं देता। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने भीतर के विचारों, भावनाओं और संस्कारों को सकारात्मक दिशा दे दे, तो उसका संपूर्ण जीवन बदल सकता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास और आधुनिक सुविधाओं के बावजूद समाज मानसिक तनाव, असुरक्षा, अवसाद और भावनात्मक असंतुलन जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऊँची आय और सुविधाएँ केवल क्षणिक सुख देती हैं, जबकि स्थायी शांति एक स्वस्थ और अनुशासित मन से ही प्राप्त होती है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अपने विचारों को सरल भाषा में समझाते हुए मुनि श्री ने कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जैसे किसी कंप्यूटर की गति और कार्यक्षमता उसके सॉफ्टवेयर पर निर्भर करती है, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन की गुणवत्ता उसके विचारों, विश्वासों और मानसिक संरचना पर निर्भर करती है। यदि मन सकारात्मक, शांत और अनुशासित हो, तो सफलता, स्वास्थ्य और संतोष स्वतः जीवन का हिस्सा बन जाते हैं। उन्होंने वृत्त (Circle) का उदाहरण देते हुए बताया कि अधिकांश लोग तुलना, प्रतिस्पर्धा और बाहरी उपलब्धियों के चक्र में ही घूमते रहते हैं। वास्तविक परिवर्तन तब शुरू होता है जब व्यक्ति स्वयं को समझने, आत्मचिंतन करने और अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ता है। यही आत्मपरिवर्तन जीवन को नई ऊँचाइयों तक ले जाता है। श्रद्धा और आत्मविश्वास की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए मुनि श्री ने भारतीय संस्कृति के प्रेरणादायी प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास साधारण व्यक्ति को भी असाधारण उपलब्धियाँ दिला सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं, आईटी प्रोफेशनल्स और कॉर्पोरेट जगत से जुड़े लोगों से आह्वान किया कि वे केवल वेतन और पद को सफलता का पैमाना न मानें, बल्कि उद्देश्यपूर्ण जीवन, करुणा, आत्मानुशासन और आंतरिक संतोष को भी समान महत्व दें। बेंगलुरु की बहुसांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भाषा, क्षेत्र, जाति और धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी मनुष्यों की मूल भावनाएँ समान हैं। वास्तविक धर्म बाहरी पहचान में नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी शांत, संवेदनशील और करुणामय बने रहने की क्षमता में निहित है। यह प्रवचन पावन चातुर्मास की आध्यात्मिक श्रृंखला का शुभारम्भ भी है, जो आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद में आयोजित किया जा रहा है। आगामी दिनों में आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी स्थापना, गुरु पूर्णिमा महोत्सव तथा अन्य अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। प्रतिदिन प्रातः आयोजित ‘Psychology of Transformation’ प्रवचन श्रृंखला में बड़ी संख्या में आईटी प्रोफेशनल्स, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, विद्यार्थी और विभिन्न वर्गों के नागरिक नियमित रूप से भाग ले रहे हैं। इन प्रवचनों के माध्यम से प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान को आधुनिक जीवन, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास से जोड़ते हुए सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। सभी समाजों एवं समुदायों के नागरिकों को ज्ञानोदय परिसर, तुबरहल्ली में आयोजित इन प्रवचनों में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया है।

  • कारगिल विजय दिवस: भोजपुरी समाज सेवा समिति ने वीर शहीदों को किया नमन

    राष्ट्रीय सैन्य स्मारक, बेंगलुरु में पुष्पांजलि अर्पित कर दिया राष्ट्रभक्ति, सम्मान और एकता का संदेश राष्ट्रीय सैन्य स्मारक, बेंगलुरु में कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते भोजपुरी समाज सेवा समिति (रजि) बंगलोर के पदाधिकारी। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 27 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भोजपुरी समाज सेवा समिति (रजि) बंगलोर ने राष्ट्रीय सैन्य स्मारक पहुंचकर कारगिल युद्ध के अमर वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं चेयरमैन संजय सिंह उज्जैन के नेतृत्व में आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम ने राष्ट्रभक्ति, वीर जवानों के प्रति सम्मान और सामाजिक एकता का प्रेरक संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने शहीदों के अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति को नमन करते हुए उनके अमूल्य योगदान को याद किया। राष्ट्रीय सैन्य स्मारक, बेंगलुरु के प्रांगण में आयोजित इस गरिमामय समारोह में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, राज्य सरकार के मंत्री प्रियंक खरगे, बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह, भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न क्षेत्रों के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। भोजपुरी समाज सेवा समिति की ओर से संस्थापक अध्यक्ष एवं चेयरमैन संजय सिंह उज्जैन ने कहा कि कारगिल के वीर शहीदों का सर्वोच्च बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सैनिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। ऐसे अवसर नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और सेवा-भाव की भावना को मजबूत करते हैं। इस अवसर पर समिति की वरिष्ठ सदस्य श्रीमती रामावती देवी, जिन्हें समिति की सबसे वरिष्ठ महिला सदस्य के रूप में सम्मान प्राप्त है, ने भी श्रद्धापूर्वक पुष्पांजलि अर्पित की। उनके साथ समिति की महामंत्री श्रीमती सुनीता पांडेय, महासचिव ललितेश्वर प्रसाद सिंह तथा मुख्य संयोजक राजेश सिंह सिकरवार ने भी शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर वीर सैनिकों के बलिदान को नमन किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कारगिल युद्ध के वीर योद्धाओं की शौर्यगाथाओं को स्मरण करते हुए कहा कि भारतीय सेना का पराक्रम देश की सुरक्षा और अखंडता का सबसे बड़ा आधार है। वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाएं। भोजपुरी समाज सेवा समिति (रजि) बंगलोर लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रहित से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करती रही है। समिति द्वारा राष्ट्रीय पर्वों और स्मृति दिवसों पर आयोजित कार्यक्रम समाज में राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कारगिल विजय दिवस का यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम केवल शहीदों को नमन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उपस्थित सभी नागरिकों के लिए राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और एकजुटता का प्रेरक संदेश भी बन गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने वीर सैनिकों के सम्मान में मौन रखकर देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

  • नशा नाश की जड़’— गुरु महाराज श्री राजाराम जी महाराज की गुरुवाणी से समाज को सात्विक जीवन का संदेश

    कलबी समाज सहित सर्व समाज से नशामुक्त भारत का आह्वान, गुरुवाणी को जीवन में अपनाने पर दिया जोर गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज की प्रेरणादायी गुरुवाणी का संदेश प्रस्तुत करते श्रद्धालु एवं समाजजन। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु। ‘नशा नाश की जड़ है’— यह केवल एक संदेश नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ, संस्कारित और सात्विक जीवन की ओर ले जाने वाला जीवन-दर्शन है। लगभग एक शताब्दी पूर्व गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज द्वारा दिए गए उपदेश आज भी समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं। गुरुवाणी के माध्यम से उन्होंने न केवल कलबी समाज, बल्कि समस्त मानव समाज को नशे से दूर रहकर धर्म, सदाचार और आत्मसंयम के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। वर्तमान समय में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और उसके दुष्प्रभावों के बीच यह संदेश समाज के लिए नई चेतना और प्रेरणा का आधार बन रहा है। गुरुवाणी के अनुसार मादक पदार्थों का सेवन व्यक्ति के व्यक्तित्व, परिवार और समाज—तीनों के लिए विनाशकारी सिद्ध होता है। गुरु महाराज ने स्पष्ट कहा कि नशा मनुष्य के विवेक, आत्मसम्मान और नैतिक मूल्यों को कमजोर करता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह स्वयं भी नशे से दूर रहे और दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करे। प्रचारक किशनाराम पटेल द्वारा साझा किए गए संदेश में बताया गया कि आधुनिक समय में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे कई सामाजिक और मानसिक कारण हैं। इनमें झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा की चाह, आर्थिक तनाव, सांस्कृतिक मूल्यों का ह्रास, गलत संगति, मानसिक असंतुलन और गुरुवाणी के ज्ञान से दूरी प्रमुख कारण माने गए हैं। उन्होंने कहा कि इन कारणों को समझकर ही समाज नशे के विरुद्ध प्रभावी अभियान चला सकता है। गुरुवाणी में यह भी बताया गया है कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसकी आर्थिक स्थिति, पारिवारिक जीवन और सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी गहरा आघात पहुंचाता है। नशे की लत व्यक्ति को निराशा, आत्मसम्मान की कमी और कई बार अपराध की ओर भी धकेल देती है। यही कारण है कि गुरु महाराज ने नशे को समाज के लिए सबसे बड़ी बुराइयों में से एक बताया। शिकारपुरा स्थित पावन तीर्थधाम की गुरु-शिष्य परंपरा भी वर्षों से समाज में नशामुक्ति का संदेश देती आ रही है। श्री देवाराम जी महाराज, श्री किशनाराम जी महाराज और वर्तमान गादीपति महंत श्री 108 श्री दयाराम जी महाराज निरंतर गुरुवाणी के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को नशे से दूर रहने की प्रेरणा दे रहे हैं। उनके अनुसार वास्तविक धर्म वही है, जो व्यक्ति को संयम, सदाचार और सात्विक जीवन की ओर ले जाए। महंत श्री दयाराम जी महाराज ने भी समाज से आह्वान किया है कि सामाजिक प्रतिष्ठा या दिखावे के नाम पर किसी भी प्रकार के नशायुक्त आयोजन—जैसे अफीम अथवा शराब की बैठकों—को बढ़ावा न दिया जाए। उन्होंने इसे गुरु महाराज श्री राजाराम जी महाराज की गुरुवाणी का महत्वपूर्ण संदेश बताते हुए सभी समाजबंधुओं से इसका पालन करने की अपील की। समाज के प्रबुद्धजनों का मानना है कि यदि युवा पीढ़ी गुरुवाणी के आदर्शों को अपनाए, तो न केवल नशामुक्त समाज का निर्माण होगा, बल्कि परिवारों में संस्कार, सद्भाव और नैतिक मूल्यों का भी संरक्षण होगा। वर्तमान समय में जब युवाओं के सामने अनेक सामाजिक और मानसिक चुनौतियाँ हैं, तब ऐसे आध्यात्मिक संदेश नई दिशा प्रदान करते हैं। गुरुवाणी प्रचारक किशनाराम पटेल ने देशभर के कलबी समाज से नशे के विरुद्ध व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर समाज स्वस्थ, सशक्त और संस्कारित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • KPSC भर्ती विवाद: BJP ने CBI जांच की मांग तेज की

    वेटेरिनरी ऑफिसर भर्ती में रिश्वत के आरोपों पर स्वतंत्र जांच की मांग, युवाओं के भरोसे का मुद्दा बना केंद्र KPSC कार्यालय में ज्ञापन सौंपते भाजपा प्रतिनिधिमंडल के नेता। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 27 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। KPSC भर्ती घोटाला एक बार फिर कर्नाटक की राजनीति और भर्ती प्रक्रिया के केंद्र में आ गया है। वेटेरिनरी ऑफिसर भर्ती में कथित तौर पर ₹80 लाख तक की रिश्वत लेने के आरोपों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मामले की CBI जांच अथवा कर्नाटक हाई कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह केवल एक भर्ती प्रक्रिया का मामला नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य, विश्वास और मेहनत से जुड़ा गंभीर विषय है। भाजपा द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि KPSC पर लगे गंभीर आरोपों की जांच स्वयं KPSC द्वारा कराना निष्पक्षता के सिद्धांतों के विपरीत है। पार्टी का तर्क है कि यदि आयोग स्वयं अपने खिलाफ लगे आरोपों की जांच करेगा तो इससे न तो पूरी सच्चाई सामने आएगी और न ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का विश्वास बहाल हो सकेगा। इसी मुद्दे को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चलवाड़ी नारायणस्वामी तथा वरिष्ठ विधायक एस. सुरेश कुमार ने KPSC सचिव से मुलाकात कर अपना ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि आयोग द्वारा प्रस्तावित आंतरिक जांच को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और पूरे मामले को CBI अथवा उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र न्यायिक जांच समिति को सौंपा जाए। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लाखों युवा वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं। यदि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो केवल चयन प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच ही जनता तथा अभ्यर्थियों का विश्वास पुनः स्थापित कर सकती है। पार्टी नेताओं के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होना लोकतांत्रिक व्यवस्था और सुशासन के लिए आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, और यदि आरोप निराधार हैं तो स्वतंत्र जांच से आयोग की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। चलवाड़ी नारायणस्वामी और एस. सुरेश कुमार ने कहा कि भाजपा नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के अधिकारों और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे। हालांकि, इस मामले में संबंधित एजेंसियों की जांच प्रक्रिया और आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार किया जाना अभी बाकी है। आरोपों की पुष्टि या अंतिम निर्णय संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • प्रतिभा को मिला सम्मान: जैन विद्यार्थियों का हुआ भव्य अभिनंदन

    टीम BJS शिवमोग्गा ने शिक्षा और खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को ‘प्रतिभा पुरस्कार 2025–26’ से किया सम्मानित टीम BJS, शिवमोग्गा द्वारा आयोजित ‘प्रतिभा पुरस्कार 2025–26’ समारोह में सम्मानित होते जैन विद्यार्थी। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिवमोग्गा | 27 जुलाई, 2026 शिवमोग्गा। प्रतिभा पुरस्कार 2025–26 समारोह में शिक्षा और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जैन विद्यार्थियों का सम्मान कर टीम BJS, शिवमोग्गा ने प्रतिभा, परिश्रम और समर्पण का उत्सव मनाया। रविवार को श्री महावीर जैन भवन, बीबी स्ट्रीट में आयोजित इस प्रेरणादायी कार्यक्रम में विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सम्मानित करते हुए उन्हें भविष्य में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया गया। समारोह ने यह संदेश दिया कि समाज की उन्नति का सबसे मजबूत आधार उसकी प्रतिभाशाली युवा पीढ़ी होती है। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इसके बाद शिक्षा, खेल और विभिन्न प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले जैन विद्यार्थियों को ‘प्रतिभा पुरस्कार 2025–26’ से सम्मानित किया गया। पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था, वहीं अभिभावकों ने भी इस सम्मान को अपने बच्चों के लिए प्रेरणादायी बताया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि प्रतिभा तभी सार्थक होती है जब उसे सही समय पर पहचान और प्रोत्साहन मिले। समाज का दायित्व है कि वह अपने होनहार विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करे। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान समारोह केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं होते, बल्कि युवा पीढ़ी में आत्मविश्वास, प्रतिस्पर्धा की भावना और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भी विकास करते हैं। कार्यक्रम में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि खेल, नेतृत्व, अनुशासन और नैतिक मूल्यों में भी आगे बढ़ना चाहिए। शिक्षा और खेल का संतुलन ही व्यक्तित्व के समग्र विकास का आधार है। समारोह में विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावक, समाज के वरिष्ठजन और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उपस्थित अभिभावकों ने टीम BJS के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों को और अधिक मेहनत करने तथा बड़े लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम के आयोजकों ने कहा कि टीम BJS का उद्देश्य केवल सम्मान समारोह आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पहचान देना, उन्हें प्रोत्साहित करना और नई पीढ़ी में शिक्षा एवं खेल के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करना है। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल सके। समारोह के समापन पर सभी अतिथियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए हाई-टी एवं जलपान की व्यवस्था की गई। पूरे आयोजन के दौरान आत्मीयता, अनुशासन और उत्साह का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन टीम BJS, शिवमोग्गा के अध्यक्ष एवं सभी सदस्यों के सहयोग से संपन्न हुआ। यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि जब समाज अपने होनहार विद्यार्थियों का सम्मान करता है, तो वह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज के उज्ज्वल भविष्य का सम्मान करता है।

  • गौ सम्मान अभियान में उमड़ा जनसैलाब, कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

    बेंगलुरु में गौभक्तों और सनातन प्रेमियों ने गौ संरक्षण के समर्थन में बुलंद की आवाज, अगले हस्ताक्षर अभियान का भी लिया संकल्प फ्रीडम पार्क से जिला कलेक्टर कार्यालय तक गौ सम्मान आह्वान अभियान में शामिल गौभक्त एवं सनातन धर्म प्रेमी। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 27 जुलाई, 2026। गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत सोमवार को राजधानी बेंगलुरु में गौभक्तों, सनातन धर्म प्रेमियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। फ्रीडम पार्क से शुरू हुए इस अभियान में बड़ी संख्या में नागरिकों ने शांतिपूर्ण तरीके से भाग लेते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय तक मार्च किया और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर गौ संरक्षण, गौ संवर्धन और गौ सम्मान से संबंधित मांगों को प्रमुखता से उठाया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 8:30 बजे सामूहिक रूप से "श्री राम जय जय जय रामा, राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की" विजय मंत्र के जाप के साथ हुआ। आध्यात्मिक वातावरण के बीच उपस्थित श्रद्धालुओं ने गौ माता के सम्मान और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संकल्प दोहराया। इसके पश्चात सभी प्रतिभागी अनुशासित और शांतिपूर्ण ढंग से फ्रीडम पार्क से जिला कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचे, जहां संवैधानिक पदाधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया। अभियान के आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में गौ संरक्षण, गौ संवर्धन और गौ सम्मान के प्रति व्यापक जनजागरण करना है। उनका कहना था कि गौ सेवा भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और परंपराओं का महत्वपूर्ण आधार रही है। इसलिए समाज के सभी वर्गों को इस विषय पर सकारात्मक संवाद और रचनात्मक सहभागिता के लिए आगे आना चाहिए। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि गौ संरक्षण केवल एक धार्मिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा व्यापक विषय है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखते हुए समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करें। अभियान के दौरान प्रतिभागियों के लिए अल्पाहार की भी व्यवस्था की गई। पूरे आयोजन में अनुशासन, शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने इस अभियान को और अधिक प्रभावशाली बनाया। कार्यक्रम के समापन पर गौ माता की मंगल आरती एवं पूजन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने गौ माता का आशीर्वाद प्राप्त कर समाज में सेवा, संस्कार और सद्भाव के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर आयोजकों ने घोषणा की कि 27 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित अगले हस्ताक्षर अभियान की तैयारियां आज से ही प्रारंभ कर दी गई हैं। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों को इस जनजागरण अभियान से जोड़ने का आह्वान किया ताकि गौ संरक्षण और गौ सम्मान के विषय पर समाज में व्यापक जागरूकता का वातावरण तैयार किया जा सके। बेंगलुरु में समय-समय पर सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर आयोजित होने वाले जागरूकता अभियानों की श्रृंखला में यह आयोजन भी उल्लेखनीय रहा। प्रतिभागियों ने विश्वास व्यक्त किया कि लोकतांत्रिक माध्यम से अपनी बात रखने वाले ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संवाद और जनसहभागिता को नई दिशा प्रदान करेंगे।

  • धारावाहिक उपन्यास | मौन दान (भाग–06)

    अजनबी की वापसी ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह नोट: "मौन दान" एक मौलिक काल्पनिक धारावाहिक उपन्यास है। इसके पात्र, घटनाएँ और स्थान साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। एक अजनबी की वापसी ने खोला शिवनारायण के जीवन का नया अध्याय बरामदे में बैठे लोगों की निगाहें अब उसी अधेड़ व्यक्ति पर टिक गई थीं, जो धीरे-धीरे शिवनारायण के घर की ओर बढ़ रहा था। उसकी उम्र लगभग साठ वर्ष रही होगी। धूप से तपा चेहरा, सफ़ेद होते बाल और हाथ में वर्षों पुराना चमड़े का बैग। वह आँगन में पहुँचा। कुछ क्षण तक चुपचाप शिवनारायण की अर्थी के सामने खड़ा रहा। फिर सिर झुकाकर मौन श्रद्धांजलि दी। बरामदे में गहरा सन्नाटा छा गया। दयानाथ त्रिपाठी आगे बढ़े। "आप...?" अजनबी ने अपनी जेब से एक पुराना पहचान-पत्र निकाला। "मेरा नाम रमेश पाठक है।" "मैं पहले जिला अस्पताल में कम्पाउंडर था।" "और शायद... इस गाँव में मुझे कोई नहीं पहचानता।" दयानाथ ने गौर से उनका चेहरा देखा। अचानक उनके चेहरे पर पहचान की झलक उभरी। "रमेश...! क्या तुम वही हो?" रमेश ने हल्की मुस्कान के साथ सिर झुका दिया। "हाँ, दयानाथ जी... बहुत वर्षों बाद लौट पाया हूँ।" गाँव वाले उत्सुक हो उठे। सरपंच ने पूछा— "आपका शिवनारायण जी से क्या संबंध था?" रमेश ने गहरी साँस ली। "रिश्ता खून का नहीं था..." "...लेकिन मैं उनका सबसे बड़ा कर्ज़दार हूँ।" यह सुनकर बरामदे में बैठे लोग एक-दूसरे की ओर देखने लगे। रमेश ने अपना पुराना चमड़े का बैग खोला। उसमें से एक पुरानी डायरी निकाली, जिसके पन्ने समय के साथ पीले पड़ चुके थे। उन्होंने वह डायरी दयानाथ को सौंपते हुए कहा— "यह मुझे शिवनारायण जी ने पंद्रह वर्ष पहले दी थी।" "उन्होंने कहा था— यदि मैं कभी अपने गाँव लौट न सकूँ, तो इसे मेरी मृत्यु के बाद ही खोलना।" दयानाथ ने सावधानी से डायरी खोली। पहले पन्ने पर केवल एक वाक्य लिखा था— "हर इंसान का एक ऐसा सच होता है, जिसे वह दुनिया से नहीं, स्वयं से छिपाता है।" उन्होंने अगला पन्ना पलटा। वहाँ एक अस्पताल का बिल रखा था। मरीज़ का नाम— रमेश पाठक। जमा करने वाले का नाम— रिक्त। लेकिन अस्पताल की मुहर के पास दयानाथ की अपनी लिखावट थी— "राशि प्राप्त।" रमेश की आँखें भर आईं। उन्होंने भर्राए स्वर में कहा— "पंद्रह साल पहले मेरे दिल का ऑपरेशन होना था।" "मेरे पास पैसे नहीं थे।" "मैंने इलाज छोड़ने का निर्णय कर लिया था।" "लेकिन अगले दिन डॉक्टर ने कहा— तुम्हारा पूरा खर्च जमा हो चुका है।" "मैंने बहुत पूछा कि किसने मदद की..." "लेकिन किसी ने नाम नहीं बताया।" उन्होंने शिवनारायण की अर्थी की ओर देखा। "दो साल बाद मुझे पता चला..." "...वह इंसान शिवनारायण थे।" बरामदे में बैठे कई लोगों ने अनायास अपने सिर झुका लिए। रामदीन की आवाज़ भर्रा गई। "हमने जिनके लिए कभी एक अच्छा शब्द नहीं कहा..." "...वे चुपचाप सबके लिए जीते रहे।" उसी समय दयानाथ की नज़र डायरी के अंतिम पन्ने पर गई। वहाँ गाँव के बाहर स्थित पुराने आम के बाग़ का एक हाथ से बना नक्शा था। नक्शे के नीचे केवल एक पंक्ति लिखी थी— "यदि कभी सच अधूरा लगे, तो उस बरगद के पास आना... जहाँ मैंने पहली बार 'मौन दान' का संकल्प लिया था।" दयानाथ ने नक्शा सबके सामने रखा। जमुना दादी की आँखें फैल गईं। "वह बरगद..." "वहाँ तो वर्षों से कोई नहीं गया।" दयानाथ ने दृढ़ स्वर में कहा— "कल सुबह हम सब वहीं चलेंगे।" "मुझे विश्वास है कि शिवनारायण ने अपनी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय वहीं हमारे लिए छोड़ रखा है।" बरामदे में बैठे लोगों के चेहरों पर पहली बार केवल जिज्ञासा नहीं, सम्मान भी दिखाई दे रहा था। अब वे किसी संदूक का रहस्य नहीं... एक इंसान के पूरे जीवन का सच जानना चाहते थे। और शायद... यही शिवनारायण की सबसे बड़ी जीत थी। क्रमशः... अगले भाग में पढ़िए — "बरगद के नीचे" जहाँ पहली बार सामने आएगा "मौन दान" के संकल्प का वास्तविक कारण और शिवनारायण के जीवन का सबसे बड़ा रहस्य। केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित धारावाहिक उपन्यास — मौन दान । सन्देश ; - अगर आपने इस धारावाहिक उपन्यास के पिछले भाग को नहीं पढ़ा है तो पढ़ें, भाग 01, भाग 02, भाग 03, भाग 4, भाग 5 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • रामदेव एकता साइकिल यात्रा रवाना, जयकारों से गूंजा बेंगलुरु

    20वीं धार्मिक यात्रा का भव्य शुभारंभ; एक माह में रामदेवरा पहुंचेगी, समाज में एकता और श्रद्धा का संदेश अलसूर गेट पुलिस स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना होती 20वीं रामदेव एकता साइकिल यात्रा। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 26 जुलाई, 2026 बेंगलुरु: रामदेव एकता साइकिल यात्रा का 20वां संस्करण रविवार को अलसूर गेट पुलिस स्टेशन से धार्मिक उल्लास, भक्ति और उत्साह के बीच भव्य रूप से रवाना हुआ। लोकदेवता बाबा रामदेवजी के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। परम भक्त थानाराम ने हरी झंडी दिखाकर यात्रा का शुभारंभ किया। यात्रा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं ने बाबा रामदेवजी के समक्ष सुख-शांति, समाज की समृद्धि और यात्रियों की सुरक्षित यात्रा की प्रार्थना की। यात्रा नगरथपेट, चिकपेट, बलेपेट, अक्कीपेट स्थित रामदेवजी मंदिर तथा राणासिंहपेट स्थित चामुंडा माताजी मंदिर सहित बेंगलुरु के प्रमुख मार्गों से होकर आगे बढ़ी। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर और जयकारों के साथ साइकिल यात्रियों का स्वागत किया। राजस्थानी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में मनमोहक लोकनृत्य प्रस्तुत कर धार्मिक आयोजन की भव्यता को और बढ़ाया। श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्ति ने यात्रा को यादगार बना दिया। आयोजकों के अनुसार यह रामदेव एकता साइकिल यात्रा लगभग एक माह में राजस्थान के पावन तीर्थ रामदेवरा पहुंचेगी। यात्रा का मार्ग तुमकुर, सिरा, दावणगेरे, हुबली, कोल्हापुर, पुणे, सूरत और अहमदाबाद से होकर गुजरेगा। इसके बाद श्रद्धालु सुंधा माताजी एवं मोदरान आशापुरा माताजी मंदिर में दर्शन करते हुए बाबा रामदेवजी के समाधि स्थल रामदेवरा पहुंचेंगे। यात्रा के विशेष सहयोगी रघुवीरसिंह दासपा, साइकिल सहयोगी जबराराम माली, अध्यक्ष रतनसिंह सोढ़ा, मालमसिंह सोढ़ा, दलपतसिंह भायल, पिंटूसिंह, कैलाशसिंह सोढ़ा, मांगीलाल देवासी, रमेश सिरवी, विक्रमसिंह भाटी सहित बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने यात्रियों का उत्साहवर्धन करते हुए यात्रा की सफलता की कामना की। आयोजकों ने बताया कि यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और एकता का भी संदेश है। पिछले दो दशकों से लगातार आयोजित हो रही यह यात्रा राजस्थान और कर्नाटक के बीच सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंधों को मजबूत कर रही है। यात्रा के दौरान विभिन्न शहरों और कस्बों में समाजबंधु श्रद्धालुओं का स्वागत करेंगे और सेवा कार्यों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। लोकदेवता बाबा रामदेवजी को सामाजिक समानता, मानव सेवा और सर्वधर्म समभाव का प्रतीक माना जाता है। देशभर से लाखों श्रद्धालु हर वर्ष पैदल, साइकिल और अन्य साधनों से रामदेवरा पहुंचकर दर्शन करते हैं। बेंगलुरु से निकली यह यात्रा भी उसी अटूट आस्था, सेवा और भक्ति की परंपरा का सशक्त उदाहरण है। श्रद्धालुओं ने बाबा रामदेवजी से समाज में सुख, शांति, भाईचारे और सभी के कल्याण की प्रार्थना की।

  • Subconscious Mind का रहस्य: मुनि श्री वीरसागर जी ने बताया स्थायी परिवर्तन का अचूक मंत्र

    चातुर्मास प्रवचन में आत्मनिरीक्षण, सकारात्मक संस्कार और अवचेतन मन की शक्ति पर दिया प्रेरक संदेश; श्रद्धालुओं ने लिया आत्मविकास का संकल्प मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज चातुर्मास प्रवचन देते हुए एवं उपस्थित श्रद्धालु। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 25 जुलाई, 2026। Subconscious Mind अर्थात अवचेतन मन की शक्ति को समझे बिना जीवन में स्थायी परिवर्तन संभव नहीं है। यही प्रेरक संदेश निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने ज्ञानोदय परिसर, तुबरहल्ली में आयोजित चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला में दिया। "अपने Subconscious Mind की फितरत को जानो" विषय पर दिए गए उनके ओजस्वी प्रवचन ने बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन की नई दिशा प्रदान की। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य का अधिकांश व्यवहार, निर्णय, आदतें और प्रतिक्रियाएँ उसके चेतन (Conscious) मन से नहीं, बल्कि अवचेतन (Subconscious) मन से संचालित होती हैं। यही कारण है कि लोग नए वर्ष, जन्मदिन या किसी विशेष अवसर पर बड़े-बड़े संकल्प तो लेते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद वे संकल्प टूट जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल इच्छाशक्ति से नहीं, बल्कि अवचेतन मन में बसे संस्कारों को बदलने से ही वास्तविक और स्थायी परिवर्तन संभव होता है। अपने प्रवचन को सरल और प्रभावी बनाने के लिए मुनि श्री ने हींग और केसर के पात्र का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जिस डिब्बे में वर्षों तक हींग रखी गई हो, उसमें बाद में केसर रखने पर भी हींग की गंध बनी रहती है। उसी प्रकार मन में वर्षों से संचित नकारात्मक संस्कार, क्रोध, भय, ईर्ष्या और बुरी आदतें केवल नए संकल्प लेने से समाप्त नहीं होतीं। इनके परिवर्तन के लिए नियमित साधना, तप, स्वाध्याय, ध्यान और सकारात्मक संस्कारों का निरंतर अभ्यास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जैसे शरीर को प्रतिदिन स्नान और घर को नियमित सफाई की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मन की भी प्रतिदिन सफाई जरूरी है। यदि मन को नकारात्मक विचारों और विकारों से मुक्त नहीं किया जाएगा तो मानसिक अशांति बनी रहेगी। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन आत्मचिंतन, ध्यान और आध्यात्मिक अध्ययन के माध्यम से अपने मन को निर्मल बनाने का प्रयास करना चाहिए। मुनि श्री ने आत्मनिरीक्षण को आत्मपरिवर्तन का पहला चरण बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हर समय यह देखना चाहिए कि उसकी आँखें क्या देख रही हैं, कान क्या सुन रहे हैं और मन में किस प्रकार के विचार जन्म ले रहे हैं। जब मनुष्य स्वयं को निष्पक्ष भाव से देखने लगता है, तभी उसके भीतर वास्तविक परिवर्तन का आरंभ होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता, मानसिक शांति और आत्मविकास बाहरी परिस्थितियों को बदलने से नहीं, बल्कि अपने भीतर के संस्कारों को सकारात्मक दिशा देने से प्राप्त होते हैं। चातुर्मास प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के प्रेरक विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया और आध्यात्मिक साधना के महत्व को समझा।

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