नशा नाश की जड़’— गुरु महाराज श्री राजाराम जी महाराज की गुरुवाणी से समाज को सात्विक जीवन का संदेश
- धन्नाराम चौधरी

- 27 जुल॰
- 3 मिनट पठन
कलबी समाज सहित सर्व समाज से नशामुक्त भारत का आह्वान, गुरुवाणी को जीवन में अपनाने पर दिया जोर

गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज की प्रेरणादायी गुरुवाणी का संदेश प्रस्तुत करते श्रद्धालु एवं समाजजन।
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु। ‘नशा नाश की जड़ है’— यह केवल एक संदेश नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ, संस्कारित और सात्विक जीवन की ओर ले जाने वाला जीवन-दर्शन है। लगभग एक शताब्दी पूर्व गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज द्वारा दिए गए उपदेश आज भी समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं। गुरुवाणी के माध्यम से उन्होंने न केवल कलबी समाज, बल्कि समस्त मानव समाज को नशे से दूर रहकर धर्म, सदाचार और आत्मसंयम के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। वर्तमान समय में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और उसके दुष्प्रभावों के बीच यह संदेश समाज के लिए नई चेतना और प्रेरणा का आधार बन रहा है।
गुरुवाणी के अनुसार मादक पदार्थों का सेवन व्यक्ति के व्यक्तित्व, परिवार और समाज—तीनों के लिए विनाशकारी सिद्ध होता है। गुरु महाराज ने स्पष्ट कहा कि नशा मनुष्य के विवेक, आत्मसम्मान और नैतिक मूल्यों को कमजोर करता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह स्वयं भी नशे से दूर रहे और दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करे।
प्रचारक किशनाराम पटेल द्वारा साझा किए गए संदेश में बताया गया कि आधुनिक समय में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे कई सामाजिक और मानसिक कारण हैं। इनमें झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा की चाह, आर्थिक तनाव, सांस्कृतिक मूल्यों का ह्रास, गलत संगति, मानसिक असंतुलन और गुरुवाणी के ज्ञान से दूरी प्रमुख कारण माने गए हैं। उन्होंने कहा कि इन कारणों को समझकर ही समाज नशे के विरुद्ध प्रभावी अभियान चला सकता है।
गुरुवाणी में यह भी बताया गया है कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसकी आर्थिक स्थिति, पारिवारिक जीवन और सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी गहरा आघात पहुंचाता है। नशे की लत व्यक्ति को निराशा, आत्मसम्मान की कमी और कई बार अपराध की ओर भी धकेल देती है। यही कारण है कि गुरु महाराज ने नशे को समाज के लिए सबसे बड़ी बुराइयों में से एक बताया।
शिकारपुरा स्थित पावन तीर्थधाम की गुरु-शिष्य परंपरा भी वर्षों से समाज में नशामुक्ति का संदेश देती आ रही है। श्री देवाराम जी महाराज, श्री किशनाराम जी महाराज और वर्तमान गादीपति महंत श्री 108 श्री दयाराम जी महाराज निरंतर गुरुवाणी के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को नशे से दूर रहने की प्रेरणा दे रहे हैं। उनके अनुसार वास्तविक धर्म वही है, जो व्यक्ति को संयम, सदाचार और सात्विक जीवन की ओर ले जाए।
महंत श्री दयाराम जी महाराज ने भी समाज से आह्वान किया है कि सामाजिक प्रतिष्ठा या दिखावे के नाम पर किसी भी प्रकार के नशायुक्त आयोजन—जैसे अफीम अथवा शराब की बैठकों—को बढ़ावा न दिया जाए। उन्होंने इसे गुरु महाराज श्री राजाराम जी महाराज की गुरुवाणी का महत्वपूर्ण संदेश बताते हुए सभी समाजबंधुओं से इसका पालन करने की अपील की।
समाज के प्रबुद्धजनों का मानना है कि यदि युवा पीढ़ी गुरुवाणी के आदर्शों को अपनाए, तो न केवल नशामुक्त समाज का निर्माण होगा, बल्कि परिवारों में संस्कार, सद्भाव और नैतिक मूल्यों का भी संरक्षण होगा। वर्तमान समय में जब युवाओं के सामने अनेक सामाजिक और मानसिक चुनौतियाँ हैं, तब ऐसे आध्यात्मिक संदेश नई दिशा प्रदान करते हैं।
गुरुवाणी प्रचारक किशनाराम पटेल ने देशभर के कलबी समाज से नशे के विरुद्ध व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर समाज स्वस्थ, सशक्त और संस्कारित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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