दिल्ली पुलिस बनाम CJP: जंतर-मंतर पर फिर गरमाएगा माहौल, 31 जुलाई को पुलिस महासंघ का धरना
- धन्ना राम चौधरी

- 28 जुल॰
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NEET प्रदर्शन विवाद के बाद नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष SIT जांच के दिए संकेत

जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस महासंघ के प्रस्तावित धरने और NEET प्रदर्शन विवाद से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर।
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | नई दिल्ली | 28 जुलाई, 2026 नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में NEET पेपर लीक प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नए चरण में पहुंच गया है। 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद अब दिल्ली पुलिस महासंघ ने 31 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना आयोजित करने की अनुमति मांगी है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता जताते हुए विशेष जांच दल (SIT) के गठन के संकेत दिए हैं।
दिल्ली पुलिस महासंघ द्वारा पुलिस आयुक्त को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 31 जुलाई को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक प्रस्तावित धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। महासंघ के अनुसार इस कार्यक्रम में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी और कानून का सम्मान करने वाले नागरिक शामिल होंगे। उनका उद्देश्य ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के प्रति समर्थन व्यक्त करना और अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखना है।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को CJP के "चलो संसद" मार्च के दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गया था। पुलिस के अनुसार इस घटना में दिल्ली पुलिस और RAF के लगभग 130 जवान घायल हुए थे, जबकि प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पुलिस की कार्रवाई में करीब 65 छात्र भी घायल हुए। घटना के बाद पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा, हिंसा और अन्य आरोपों में 15 एफआईआर दर्ज की थीं।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्र प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और हिंसा के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जा सकता है। अदालत का कहना था कि जिसने भी कानून का उल्लंघन किया है, उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिसकर्मियों पर हुए कथित हमलों की भी गंभीर जांच की आवश्यकता बताई। अदालत ने यह जानने की जरूरत बताई कि हिंसा में वास्तविक छात्र शामिल थे या फिर कुछ असामाजिक तत्वों ने स्थिति को बिगाड़ा। सरकार की ओर से पेश पक्ष में यह भी कहा गया कि कुछ वांछित अपराधी भी भीड़ में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इन दावों की निष्पक्ष जांच अभी शेष है।
अब 31 जुलाई का प्रस्तावित धरना और संभावित SIT जांच इस पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे सकते हैं। राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और आम नागरिकों की नजरें आगामी घटनाओं पर टिकी हुई हैं।
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