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भीतरी सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कीजिए’ — मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज का प्रेरक संदेश

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 28 जुल॰
  • 3 मिनट पठन

प्रवचन में बताया— मानसिक स्वास्थ्य, आत्मपरिवर्तन और संतुलित जीवन ही वास्तविक सफलता का आधार


Shirtless bald bearded man smiles at a microphone before a painted temple backdrop, with small unreadable text in the corner.

ज्ञानोदय परिसर, तुबरहल्ली में ‘Psychology of Transformation’ विषय पर प्रवचन देते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज।

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 27 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। ‘Psychology of Transformation’ विषय पर आयोजित प्रेरणादायी प्रवचन में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने कहा कि आज के तकनीकी युग में सबसे बड़ी आवश्यकता अपने ‘भीतरी सॉफ्टवेयर’ अर्थात मन, विचार और भावनाओं को अपग्रेड करने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक जीवन में वास्तविक सफलता केवल ऊँचे वेतन, प्रतिष्ठित पद या भौतिक सुविधाओं से नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, आत्मानुशासन और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। तुबरहल्ली स्थित ज्ञानोदय परिसर में आयोजित इस विशेष प्रवचन में आईटी प्रोफेशनल्स, कॉर्पोरेट अधिकारी, उद्यमी, विद्यार्थी और विभिन्न समाजों के श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।


मुनि श्री ने बेंगलुरु को देश की तकनीकी राजधानी बताते हुए कहा कि आज का व्यक्ति नई-नई तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर और आधुनिक उपकरणों को सीखने में वर्षों लगा देता है, लेकिन अपने मन और व्यक्तित्व के विकास पर उतना ध्यान नहीं देता। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने भीतर के विचारों, भावनाओं और संस्कारों को सकारात्मक दिशा दे दे, तो उसका संपूर्ण जीवन बदल सकता है।


उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास और आधुनिक सुविधाओं के बावजूद समाज मानसिक तनाव, असुरक्षा, अवसाद और भावनात्मक असंतुलन जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऊँची आय और सुविधाएँ केवल क्षणिक सुख देती हैं, जबकि स्थायी शांति एक स्वस्थ और अनुशासित मन से ही प्राप्त होती है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


Bare-chested monks address a huge seated crowd in a decorated hall; Hindi text reads फाइल फोटो.

अपने विचारों को सरल भाषा में समझाते हुए मुनि श्री ने कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जैसे किसी कंप्यूटर की गति और कार्यक्षमता उसके सॉफ्टवेयर पर निर्भर करती है, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन की गुणवत्ता उसके विचारों, विश्वासों और मानसिक संरचना पर निर्भर करती है। यदि मन सकारात्मक, शांत और अनुशासित हो, तो सफलता, स्वास्थ्य और संतोष स्वतः जीवन का हिस्सा बन जाते हैं।


उन्होंने वृत्त (Circle) का उदाहरण देते हुए बताया कि अधिकांश लोग तुलना, प्रतिस्पर्धा और बाहरी उपलब्धियों के चक्र में ही घूमते रहते हैं। वास्तविक परिवर्तन तब शुरू होता है जब व्यक्ति स्वयं को समझने, आत्मचिंतन करने और अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ता है। यही आत्मपरिवर्तन जीवन को नई ऊँचाइयों तक ले जाता है।


श्रद्धा और आत्मविश्वास की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए मुनि श्री ने भारतीय संस्कृति के प्रेरणादायी प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास साधारण व्यक्ति को भी असाधारण उपलब्धियाँ दिला सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं, आईटी प्रोफेशनल्स और कॉर्पोरेट जगत से जुड़े लोगों से आह्वान किया कि वे केवल वेतन और पद को सफलता का पैमाना न मानें, बल्कि उद्देश्यपूर्ण जीवन, करुणा, आत्मानुशासन और आंतरिक संतोष को भी समान महत्व दें।


बेंगलुरु की बहुसांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भाषा, क्षेत्र, जाति और धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी मनुष्यों की मूल भावनाएँ समान हैं। वास्तविक धर्म बाहरी पहचान में नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी शांत, संवेदनशील और करुणामय बने रहने की क्षमता में निहित है।


यह प्रवचन पावन चातुर्मास की आध्यात्मिक श्रृंखला का शुभारम्भ भी है, जो आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद में आयोजित किया जा रहा है। आगामी दिनों में आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी स्थापना, गुरु पूर्णिमा महोत्सव तथा अन्य अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।


प्रतिदिन प्रातः आयोजित ‘Psychology of Transformation’ प्रवचन श्रृंखला में बड़ी संख्या में आईटी प्रोफेशनल्स, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, विद्यार्थी और विभिन्न वर्गों के नागरिक नियमित रूप से भाग ले रहे हैं। इन प्रवचनों के माध्यम से प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान को आधुनिक जीवन, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास से जोड़ते हुए सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। सभी समाजों एवं समुदायों के नागरिकों को ज्ञानोदय परिसर, तुबरहल्ली में आयोजित इन प्रवचनों में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया है।

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