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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • FCRA संशोधन बिल पर संसद में हंगामा, संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया विधेयक

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली 12 अगस्त, 2026, दिल्ली विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए लाया गया Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 यानी FCRA संशोधन विधेयक संसद में राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। 12 अगस्त 2026 को लोकसभा ने विधेयक को विस्तृत जांच और विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया। इसका अर्थ यह है कि विधेयक अभी कानून नहीं बना है और आगे संसदीय जांच की प्रक्रिया से गुजरेगा। क्या है FCRA संशोधन विधेयक? FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act भारत में विदेशी अंशदान प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाला कानून है। 2026 का संशोधन विधेयक ऐसे संगठनों के विदेशी अंशदान और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन से संबंधित नई व्यवस्था प्रस्तावित करता है, जिनका FCRA प्रमाणपत्र रद्द हो गया हो, संगठन ने उसे वापस कर दिया हो या उसका नवीनीकरण नहीं हुआ हो। विधेयक में ऐसे मामलों के लिए एक Designated Authority बनाने का प्रस्ताव है, जो संबंधित विदेशी अंशदान और उससे जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन तथा निपटान की प्रक्रिया देखेगी। धार्मिक स्थल से जुड़ी संपत्ति के मामले में उसके धार्मिक चरित्र को बनाए रखने की बात भी विधेयक में प्रस्तावित है। विधेयक अभी कानून नहीं बना फैक्ट-चेक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि FCRA संशोधन विधेयक को संसद ने अभी पारित करके कानून का रूप नहीं दिया है। 12 अगस्त को इसे JPC को भेजा गया है। समिति विधेयक के प्रावधानों की जांच करेगी और उसके बाद संसदीय प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसलिए सोशल मीडिया पर यदि यह दावा किया जा रहा है कि “FCRA नया कानून लागू हो गया” तो उसे सही नहीं माना जा सकता। विपक्ष ने जताई आपत्ति विपक्षी दलों ने विधेयक को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित प्रावधानों का असर गैर-सरकारी संगठनों और अल्पसंख्यक संस्थाओं पर पड़ सकता है। सरकार और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है और विधेयक को विदेशी अंशदान से जुड़ी व्यवस्था में पारदर्शिता तथा निगरानी मजबूत करने की दिशा में कदम बताया है। JPC में होगी विस्तृत जांच विधेयक को JPC के पास भेजे जाने का मतलब है कि अब विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। समिति संबंधित पक्षों से राय लेने और विधेयक के प्रभावों की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट संसद के समक्ष रखेगी। इसके बाद विधेयक पर आगे की संसदीय कार्रवाई होगी।

  • राहुल गांधी का अमित शाह पर तीखा हमला, बोले—छात्रों पर कार्रवाई का आदेश किसने दिया, जवाब दें

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली 13 अगस्त, 2026 दिल्ली संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्रों से जुड़े प्रदर्शन और सरकार की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस तथा केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोलते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित तौर पर पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग के आदेश को लेकर जवाब मांगा। राहुल गांधी ने कहा कि यदि ऐसा आदेश गृह मंत्री की ओर से दिया गया था तो उन्हें जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा देना चाहिए और यदि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी तो यह उनकी कार्यक्षमता पर सवाल खड़ा करता है। अमित शाह की संसद में चर्चा की पेशकश पर राहुल का जवाब रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में छात्र आंदोलन सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के लिए सरकार की ओर से तैयारी जताई थी। शाह ने लोकसभा अध्यक्ष से चर्चा के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध कराने की बात कही थी। इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष केवल भाषण या “लेक्चर” सुनने में रुचि नहीं रखता, बल्कि वह सरकार से कार्रवाई और जवाबदेही से जुड़े सवालों का उत्तर चाहता है। राहुल गांधी ने विशेष रूप से यह सवाल उठाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित रूप से पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया। उन्होंने कहा कि यदि गृह मंत्री ने आदेश दिया था तो वह इसके लिए जिम्मेदार हैं और यदि आदेश उनकी जानकारी के बिना हुआ तो यह भी गंभीर सवाल है। “अमित शाह का गुब्बारा फट चुका है” राहुल गांधी ने अमित शाह की राजनीतिक छवि पर भी टिप्पणी की। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कहा कि शाह का “इमेज का गुब्बारा फट चुका है” और विपक्ष उनके सामने लगातार सवाल उठाता रहेगा। यह राहुल गांधी की राजनीतिक टिप्पणी है, जिसे तथ्य के रूप में नहीं बल्कि उनके बयान के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। प्रियंका गांधी ने भी सरकार और मीडिया पर उठाए सवाल इसी घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों के मुद्दे पर सरकार और मीडिया की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने पूछा कि जिस तरह मीडिया चुप बैठता है, क्या विपक्ष भी उसी तरह चुप बैठ जाए। उपलब्ध वीडियो और रिपोर्टों में यह बयान प्रियंका गांधी का है, इसलिए इसे राहुल गांधी का बयान बताना सही नहीं होगा। राहुल गांधी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी राहुल गांधी ने छात्रों के खिलाफ पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग के संबंध में गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को भारतार्थ खबर राहुल गांधी के आरोप/दावे के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा आदेश दिए जाने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध होने तक इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए। पहले भी अमित शाह पर लगा चुके हैं आरोप राहुल गांधी इससे पहले भी छात्र प्रदर्शन के संदर्भ में अमित शाह को सीधे जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। जुलाई में उन्होंने आरोप लगाया था कि छात्रों के खिलाफ पैलेट गन जैसे घातक हथियारों के इस्तेमाल को मंजूरी दी गई। उन्होंने इस मुद्दे को संसद में उठाने की बात कही थी। सियासत में बढ़ा टकराव छात्र प्रदर्शन, संसद में चर्चा और सरकार की जवाबदेही को लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर सरकार संसद में चर्चा के लिए तैयार होने की बात कह रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल चर्चा पर्याप्त नहीं है और कथित कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।. भारतार्थ खबर फैक्ट-चेक निष्कर्ष: राहुल गांधी द्वारा अमित शाह के इस्तीफे की मांग और छात्रों पर कथित बल प्रयोग के आदेश को लेकर सवाल उठाना सही है। लेकिन यह कहना कि अमित शाह ने इस्तीफा दे दिया है या सरकार ने राहुल गांधी के आरोपों को स्वीकार कर लिया है, गलत होगा। भारतार्थ खबर — खबर नहीं, उसका अर्थ।

  • चिंता, भय और क्रोध से मुक्ति का मार्ग: मुनि श्री वीरसागर जी ने बताया ‘वस्तु स्वरूप विचार’ का सूत्र

    बेंगलुरु में जीवन-परिवर्तन प्रवचनमाला; अहंकार और अपेक्षाओं के बजाय समझ, क्षमा व स्वीकारभाव अपनाने का प्रेरक संदेश भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 13 अगस्त, 2026 बेंगलुरु। चिंता, भय, क्रोध और अहंकार से जूझ रहे मनुष्य को वास्तविक शांति बाहर नहीं, बल्कि अपनी दृष्टि और भावनाओं में परिवर्तन से मिल सकती है। जीवन-परिवर्तन एवं आत्मविकास की निरंतर चल रही प्रवचनमाला में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने भावनात्मक अशांति के मूल कारणों पर गहन प्रकाश डालते हुए ‘वस्तु स्वरूप विचार’ को आत्मपरिवर्तन और स्वीकारभाव की दिशा में प्रभावी आध्यात्मिक मार्ग बताया। मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति अक्सर अपनी चिंता, भय, क्रोध और तनाव के लिए बाहरी परिस्थितियों को जिम्मेदार मानता है, जबकि वास्तविक संघर्ष कई बार उसके भीतर मौजूद अहंकार, अपेक्षाओं, आग्रह और परिस्थितियों को अपनी इच्छा के अनुसार बदलने की चाह से पैदा होता है। उनके अनुसार परिस्थिति केवल बाहरी प्रेरक हो सकती है, लेकिन उस परिस्थिति के प्रति हमारी प्रतिक्रिया हमारी मानसिकता और दृष्टिकोण से निर्धारित होती है। प्रवचन में वस्तु स्वरूप विचार के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया कि वस्तु, व्यक्ति और परिस्थिति को उसके वास्तविक स्वरूप में देखने की क्षमता विकसित होने पर मनुष्य का प्रतिरोध धीरे-धीरे स्वीकारभाव में बदलने लगता है। यही भाव मानसिक शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन सकता है। बाहरी परिस्थितियां नहीं, भीतर की प्रतिक्रिया बनती है अशांति का कारण मुनि श्री वीरसागर जी महाराज ने कहा कि एक ही परिस्थिति में अलग-अलग लोग अलग-अलग प्रकार से प्रतिक्रिया करते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल परिस्थिति ही हमारी मानसिक अवस्था का कारण नहीं है। परिस्थिति के प्रति हमारी सोच, अपेक्षा और प्रतिक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि नौकरी की असुरक्षा, पारिवारिक मतभेद, बच्चों का व्यवहार या अन्य सामाजिक परिस्थितियां व्यक्ति के तनाव और क्रोध के कारण के रूप में सामने आती हैं। लेकिन यदि व्यक्ति अपनी प्रतिक्रिया के पीछे छिपी अपेक्षा, आसक्ति या आग्रह को पहचानने का प्रयास करे, तो समस्या को समझने और उससे बाहर निकलने का मार्ग खुल सकता है। मुनि श्री ने संदेश दिया कि परिस्थितियों को दोष देने के बजाय व्यक्ति को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि “इस परिस्थिति से मेरे भीतर कौन-सी अपेक्षा या आग्रह संघर्ष कर रहा है?” आत्मनिरीक्षण का यही भाव व्यक्ति को बाहरी दोषारोपण से हटाकर आत्मपरिवर्तन की ओर ले जा सकता है। ‘जीवन प्रतिध्वनि के समान’—जैसे भाव, वैसी अनुभूति प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने जीवन को प्रतिध्वनि के समान बताते हुए कहा कि व्यक्ति अपने भीतर जिस प्रकार के भावों को धारण करता है, उसी प्रकार की अनुभूतियां उसके जीवन में दिखाई देने लगती हैं। यदि मनुष्य निरंतर दूसरों से सम्मान, प्रशंसा और स्वीकार्यता की अपेक्षा करता रहे तो उसके भीतर असंतोष बढ़ सकता है। इसके विपरीत यदि वह दूसरों को समझने, क्षमा करने और परिस्थितियों को सहजता से स्वीकार करने का अभ्यास करता है तो उसके भीतर शांति और संतुलन विकसित होने लगता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक परिवर्तन दूसरों को बदलने से नहीं, बल्कि स्वयं की दृष्टि और भावों को बदलने से प्रारंभ होता है। चिंता और क्रोध के पीछे छिपे मूल कारणों को समझें मुनि श्री ने चिंता और क्रोध को अंतिम कारण मानने के बजाय उनके पीछे काम करने वाले मानसिक आग्रहों को समझने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि अहंकार, अधूरी अपेक्षाएं, अपनी इच्छा के अनुसार परिस्थितियों को चलाने की चाह और वास्तविकता को स्वीकार न कर पाने का भाव व्यक्ति की भावनात्मक अशांति को बढ़ा सकता है। जब व्यक्ति यह स्वीकार करता है कि प्रत्येक परिस्थिति उसके नियंत्रण में नहीं है, तब उसके भीतर संघर्ष कम होने की संभावना बढ़ती है। इसी प्रकार दूसरे व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार बदलने की अपेक्षा छोड़कर उसके स्वतंत्र अस्तित्व को समझना संबंधों में भी सहजता ला सकता है। ‘वस्तु स्वरूप विचार’ से प्रतिरोध से स्वीकारभाव की ओर जैन दर्शन के ‘वस्तु स्वरूप विचार’ सिद्धांत को समझाते हुए मुनि श्री ने वस्तु, व्यक्ति और परिस्थितियों की वास्तविक प्रकृति पर चिंतन करने की प्रेरणा दी। उन्होंने “वस्तु स्वरूप विचार, खुशी से सब दुःख संकट सहा करे” की भावना को स्पष्ट करते हुए कहा कि संसार की वस्तुएं परिवर्तनशील हैं और प्रत्येक जीव अपने कर्म तथा पुरुषार्थ के अनुसार जीवन जी रहा है। जब व्यक्ति इस वास्तविकता को समझता है तो उसकी अनावश्यक अपेक्षाएं कम होने लगती हैं। मुनि श्री ने कहा कि हम किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार बदल नहीं सकते और न ही हर परिस्थिति को अपने अनुकूल बना सकते हैं। इसलिए शांति के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति अपनी सीमाओं को पहचाने, दूसरों के स्वतंत्र अस्तित्व को स्वीकार करे और स्वयं के भीतर परिवर्तन का प्रयास करे। स्वीकारभाव से संबंधों में भी आ सकता है सकारात्मक बदलाव प्रवचन में यह भी बताया गया कि स्वीकारभाव केवल व्यक्ति के आंतरिक जीवन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। जब व्यक्ति हर बात में अपनी अपेक्षा पूरी होने की मांग छोड़कर सामने वाले को समझने का प्रयास करता है, तब विवाद और तनाव कम हो सकते हैं। क्षमा, समझ और सहज स्वीकारभाव से संबंधों में संवाद और विश्वास का वातावरण मजबूत हो सकता है। मुनि श्री ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में शांति का अर्थ यह नहीं कि परिस्थितियां हमेशा मनुष्य की इच्छा के अनुसार हों। वास्तविक शांति तब आती है, जब व्यक्ति परिस्थितियों के वास्तविक स्वरूप को समझकर उन्हें स्वीकार करने की क्षमता विकसित करता है। आत्मपरिवर्तन से शुरू होती है स्थायी शांति की यात्रा मुनि श्री वीरसागर जी महाराज के संदेश का मूल केंद्र आत्मजागरूकता रहा। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जब अपनी भावनाओं को केवल सही ठहराने के बजाय उन्हें समझने का प्रयास करता है, तब उसके भीतर परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होती है। चिंता, भय और क्रोध को दबाने के बजाय उनके पीछे छिपे अहंकार, अपेक्षा, आसक्ति और आग्रह को पहचानना आत्मपरिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। वस्तु स्वरूप विचार व्यक्ति को इसी आत्मनिरीक्षण की ओर प्रेरित करता है। प्रवचनमाला के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश मिला कि बाहरी दुनिया को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं, लेकिन अपनी दृष्टि, प्रतिक्रिया और भावों पर कार्य किया जा सकता है। यही दृष्टिकोण जीवन में अधिक शांति, संतुलन और स्वीकारभाव विकसित करने की दिशा में सहायक बन सकता है।

  • हुब्बली में 15 अगस्त को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर, BP-शुगर सहित BMI की होगी जांच

    बादामी नगर बालभवन उद्यान में सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक शिविर; पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के अनुभवी वरिष्ठ डॉक्टर देंगे स्वास्थ्य जांच की सुविधा भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हुब्बली | 13 अगस्त, 2026 हुब्बली। 80वें भारतीय स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुब्बली के केश्वापुर स्थित बादामी नगर बालभवन उद्यान में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और आवश्यक प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया जाएगा। पतंजलि योग समिति, हुब्बली, पतंजलि मेगा स्टोर, आर्य एंटरप्राइजेज, केश्वापुर और बादामी नगर बालभवन उद्यान समिति के संयुक्त सहयोग से आयोजित यह निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर 15 अगस्त 2026, शनिवार को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगा। शिविर में पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार के अनुभवी वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा विभिन्न स्वास्थ्य जांच की जाएगी। इसमें मुख्य रूप से बीपी (रक्तचाप), शुगर (मधुमेह) और BMI (बॉडी मास इंडेक्स) जैसी जांच शामिल हैं। आयोजकों ने हुब्बली-धारवाड़ क्षेत्र के नागरिकों से इस अवसर का लाभ उठाने का आह्वान किया है। स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व को सेवा और स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ने वाला यह स्वास्थ्य जांच शिविर आम लोगों के लिए उपयोगी पहल के रूप में आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों का उद्देश्य लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग करना और समय-समय पर आवश्यक स्वास्थ्य मानकों की जांच के लिए प्रेरित करना है। 15 अगस्त को सुबह 9 बजे शुरू होगा शिविर आयोजन के अनुसार निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर 15 अगस्त को सुबह 9:00 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:00 बजे तक चलेगा। शिविर का आयोजन केश्वापुर स्थित बादामी नगर बालभवन उद्यान में किया जाएगा। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि शिविर में स्वास्थ्य जांच के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऐसे में क्षेत्र के नागरिक निर्धारित समय के दौरान आयोजन स्थल पर पहुंचकर उपलब्ध जांच सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। BP, शुगर और BMI की होगी जांच शिविर में स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण प्रारंभिक मानकों की जांच की जाएगी। इनमें रक्तचाप (BP), शुगर और BMI प्रमुख हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच के माध्यम से व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य संबंधी कुछ महत्वपूर्ण संकेतकों की जानकारी मिल सकती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी इस शिविर का प्रमुख आकर्षण रहेगी। आयोजकों के अनुसार पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार से जुड़े अनुभवी वरिष्ठ डॉक्टर शिविर में लोगों की जांच करेंगे। हालांकि, यह स्वास्थ्य जांच शिविर सामान्य जांच और स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। किसी भी गंभीर या लगातार बनी रहने वाली स्वास्थ्य समस्या के लिए व्यक्ति को योग्य चिकित्सक से व्यक्तिगत चिकित्सा परामर्श लेना चाहिए। स्वास्थ्य जागरूकता के साथ सेवा का संदेश स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित यह पहल राष्ट्रीय उत्सव के साथ सामाजिक सेवा की भावना को जोड़ती है। स्वतंत्रता दिवस देश के लिए गौरव और संकल्प का पर्व है। ऐसे अवसर पर स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ा कार्यक्रम नागरिकों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनने का संदेश देता है। आयोजकों के अनुसार लोगों को समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी लेते रहना चाहिए। खासकर रक्तचाप, रक्त शुगर और शरीर के वजन से जुड़े मानकों पर जागरूकता व्यक्ति को अपनी जीवनशैली के प्रति अधिक सजग बनाने में मदद कर सकती है। पतंजलि योग समिति, हुब्बली और सहयोगी संस्थाओं की ओर से आयोजित इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य जांच की सुविधा पहुंचाना है। श्री भंवरलाल आर्य ने किया जनता से आह्वान पतंजलि योग समिति, कर्नाटक के राज्य प्रभारी एवं अंतर्राष्ट्रीय योग गुरु श्री भंवरलाल आर्य ने हुब्बली-धारवाड़ की समस्त जनता से शिविर में उपस्थित होकर उपलब्ध स्वास्थ्य जांच सुविधाओं का लाभ उठाने का हार्दिक आह्वान किया है। उन्होंने लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और इस प्रकार की जनसेवा गतिविधियों में सहभागिता करने के लिए प्रेरित किया। आयोजकों ने भी क्षेत्रवासियों से निर्धारित समय पर बादामी नगर बालभवन उद्यान पहुंचने की अपील की है। हुब्बली-धारवाड़ के लोगों के लिए उपयोगी अवसर स्वास्थ्य जांच के लिए आयोजित यह शिविर स्थानीय नागरिकों के लिए अपने स्वास्थ्य से जुड़े कुछ बुनियादी मानकों की जांच कराने का अवसर प्रदान करेगा। खास बात यह है कि शिविर में जांच की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क रखी गई है। आयोजकों ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और अपने परिवार के सदस्यों को भी स्वास्थ्य जागरूकता के लिए प्रेरित करें। बादामी नगर बालभवन उद्यान में होने वाला यह आयोजन पतंजलि योग समिति और सहयोगी संस्थाओं की सामुदायिक सहभागिता को भी सामने लाता है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य सेवा और जागरूकता से जुड़ी इस पहल को जनहित से जोड़कर देखा जा रहा है। नागरिकों की सुविधा के लिए आयोजकों ने संपर्क नंबर भी जारी किए हैं। शिविर से संबंधित अधिक जानकारी के लिए 9008100886, 9008100896 और 9036200828 पर संपर्क किया जा सकता है। इस प्रकार 15 अगस्त को हुब्बली के केश्वापुर स्थित बादामी नगर बालभवन उद्यान में आयोजित होने वाला निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सेवा का महत्वपूर्ण अवसर बनेगा। आयोजकों ने अधिक से अधिक नागरिकों से समय पर पहुंचकर इस पहल का लाभ उठाने की अपील की है।

  • कावेरी विवाद पर कर्नाटक बंद का मिला-जुला असर, मांड्या में हाईवे जाम

    मांड्या में किसानों का उग्र प्रदर्शन, बेंगलुरु-मैसूरु में जनजीवन सामान्य; कन्नड़ संगठनों के समर्थन वापस लेने से बंद की धार पड़ी कमजोर भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 13 अगस्त, 2026 बेंगलुरु। तमिलनाडु के लिए 12,000 क्यूसेक कावेरी पानी छोड़े जाने के विरोध में कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ता वी. नागराज के नेतृत्व वाले महासंघ की ओर से आहूत कर्नाटक बंद का राज्य में मिला-जुला असर देखने को मिला। कावेरी आंदोलन के प्रमुख केंद्र मांड्या में किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए बेंगलुरु-मैसूरु पुराने राजमार्ग को अवरुद्ध किया, जबकि बेंगलुरु और मैसूरु में जनजीवन अधिकांशतः सामान्य रहा। कई कन्नड़ संगठनों द्वारा बंद से समर्थन वापस लेने के बाद राज्यव्यापी बंद का प्रभाव सीमित दिखाई दिया। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी बताया कि प्रवीण शेट्टी और एस.आर. गोविंदु सहित कुछ कार्यकर्ताओं ने उनसे मुलाकात कर बंद का आह्वान वापस लेने की जानकारी दी। कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की ओर से तमिलनाडु के लिए 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश के विरोध में बंद का आह्वान किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से पानी छोड़ने के फैसले का विरोध करने और कर्नाटक के किसानों तथा पेयजल जरूरतों को प्राथमिकता देने की मांग की। मांड्या में प्रदर्शन तेज, हाईवे पर लगाया जाम कावेरी आंदोलन के केंद्र मांड्या में किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों का विरोध सबसे अधिक प्रभावी नजर आया। संजय सर्कल सहित कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर उतरकर नारेबाजी की और बेंगलुरु-मैसूरु पुराने राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने खाली बर्तनों और कुलथी के साथ विरोध जताया। कुलथी को पानी की कमी के कारण किसानों द्वारा धान के विकल्प के रूप में अपनाई जाने वाली फसल के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया गया। प्रदर्शनकारियों ने “हमारा पानी, हमारा हक” जैसे नारे लगाते हुए सरकार से तमिलनाडु को अतिरिक्त पानी नहीं छोड़ने की मांग की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कावेरी जल छोड़ने के निर्देशों को किसानों के हितों के लिए गंभीर खतरा बताया। कावेरी जल विवाद को लेकर प्रदर्शनकारियों ने पिछली सरकारों की भी आलोचना की। उनका आरोप था कि लंबे समय से कानूनी लड़ाई और भारी खर्च के बावजूद कावेरी विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है। वी. नागराज को प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिया बेंगलुरु में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस ने कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ता वी. नागराज को उनके डॉलर्स कॉलोनी स्थित आवास से एहतियातन हिरासत में लिया। जानकारी के अनुसार नागराज ने प्रस्तावित रैली में शामिल होने से इनकार करते हुए घर के भीतर ही मौन विरोध का तरीका अपनाया। उन्होंने मुंह पर पट्टी बांधकर विरोध जताया और पुलिस से बातचीत नहीं करने की बात कही। नागराज के नेतृत्व में बीएमटीसी-केएसआरटीसी बस अड्डे से टाउन हॉल और फिर फ्रीडम पार्क तक रैली निकालने की योजना बताई गई थी। पुलिस ने संभावित प्रदर्शन को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए। बेंगलुरु में बस, स्कूल और एयरपोर्ट सेवाएं सामान्य राजधानी बेंगलुरु में कर्नाटक बंद का असर सीमित रहा। केम्पेगौड़ा बस अड्डे से बीएमटीसी और केएसआरटीसी की बस सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हुईं। शहर के प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई और संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई। बेंगलुरु के स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय भी सामान्य रूप से खुले रहे। देवनहल्ली स्थित केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी बंद का कोई प्रमुख असर दिखाई नहीं दिया। पुलिस ने बसों को रोकने, यातायात बाधित करने या पथराव जैसी संभावित घटनाओं से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी। मैसूरु में भी जनजीवन सामान्य मैसूरु में बंद का प्रभाव मुख्य रूप से विरोध-प्रदर्शनों तक सीमित रहा। उपनगरीय बस अड्डे से बेंगलुरु, मंगलुरु और राज्य के अन्य हिस्सों के लिए बस सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं। दुकानें, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान सामान्य दिनों की तरह खुले रहे। ऑटो और टैक्सी सेवाएं भी चलती रहीं। हालांकि, उपनगरीय बस अड्डे के पास कुछ कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं ने बसों को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों ने कर्नाटक और तमिलनाडु सरकारों के खिलाफ नारे लगाए और तमिलनाडु को कावेरी का पानी नहीं देने की मांग की। कावेरी मुद्दे पर केंद्र से मध्यस्थता की मांग ‘कर्नाटक सेना’ के जिला अध्यक्ष तेजस लोकेश गौड़ा ने राज्य सरकार से कावेरी मुद्दे पर तमिलनाडु के दबाव में नहीं आने की अपील की। उन्होंने केंद्र सरकार से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच मध्यस्थता करने तथा दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाकर स्थायी समाधान खोजने की मांग की। उन्होंने कम बारिश वाले वर्षों में पानी के बंटवारे के लिए वैज्ञानिक फॉर्मूला तैयार करने की आवश्यकता बताई। साथ ही मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया। कावेरी जल विवाद में पानी की उपलब्धता, किसानों की सिंचाई जरूरत और पेयजल सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कम बारिश वाले वर्षों में पानी के बंटवारे को लेकर ऐसा तंत्र होना चाहिए, जिससे दोनों राज्यों की आवश्यकताओं का संतुलन बनाया जा सके। समर्थन वापस लेने से कमजोर पड़ा बंद कर्नाटक बंद के राज्यव्यापी प्रभाव को लेकर तस्वीर मिश्रित रही। जहां मांड्या में किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों का विरोध तेज रहा, वहीं बेंगलुरु और मैसूरु जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्रों में परिवहन, शिक्षा, बाजार और हवाई यातायात सामान्य रहा। बंद का आह्वान करने वाले समूह के लिए विभिन्न कन्नड़ संगठनों का समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा था। लेकिन कुछ संगठनों द्वारा बाद में बंद से दूरी बनाने के कारण इसका असर पहले की अपेक्षा सीमित रहा। फिलहाल कावेरी जल विवाद एक बार फिर कर्नाटक की राजनीति, किसान संगठनों और कन्नड़ समर्थक समूहों के बीच प्रमुख मुद्दा बन गया है। मांड्या में प्रदर्शन और हाईवे जाम ने जहां विरोध की तीव्रता दिखाई, वहीं बेंगलुरु और मैसूरु में सामान्य जनजीवन ने राज्यव्यापी बंद की सीमित पहुंच को सामने रखा।

  • सैकड़ों मवेशी लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, बोले- “साहब बांध लें या उपाय करें”

    अंबिकापुर के भकुरा गांव में आवारा मवेशियों से परेशान ग्रामीणों का अनोखा प्रदर्शन; फसल बर्बादी और सड़क हादसों का खतरा बताते हुए स्थायी समाधान की मांग भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) अंबिकापुर | 13 अगस्त, 2026 अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में आवारा मवेशियों की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए ऐसा अनोखा प्रदर्शन किया कि कलेक्ट्रेट में मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी हैरान रह गए। भकुरा गांव के ग्रामीण सड़कों और आसपास के इलाकों में घूम रहे सैकड़ों मवेशियों को पकड़कर कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य द्वार तक ले आए। बड़ी संख्या में मवेशियों को कलेक्ट्रेट के सामने देखकर प्रशासनिक अमला भी सकते में नजर आया। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से आवारा मवेशियों की समस्या उनके लिए परेशानी का बड़ा कारण बनी हुई है। ये पशु खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और सड़कों पर घूमने के कारण राहगीरों तथा वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा भी पैदा करते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से दो टूक अंदाज में स्थायी समाधान की मांग करते हुए कहा कि “साहब बांध लें या उपाय करें।” सड़कों से मवेशी पकड़कर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण भकुरा गांव के ग्रामीणों ने पहले सड़कों पर खुले में घूम रहे मवेशियों को इकट्ठा किया और फिर उन्हें लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। देखते ही देखते कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के सामने बड़ी संख्या में मवेशी जमा हो गए। ग्रामीणों के इस कदम का उद्देश्य प्रशासन को यह दिखाना था कि आवारा पशुओं की समस्या केवल शिकायत या कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर किसानों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। कलेक्ट्रेट परिसर के सामने एक साथ इतने मवेशियों को देखकर वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी स्थिति को देखकर हैरान रह गए। फसलों की रखवाली बनी किसानों की मजबूरी ग्रामीणों के अनुसार खुले में घूमने वाले मवेशी अक्सर खेतों में घुस जाते हैं। इससे किसानों की मेहनत और फसल को भारी नुकसान पहुंचता है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए उन्हें दिन-रात निगरानी करनी पड़ती है। किसानों के लिए फसल केवल खेत में खड़ी उपज नहीं, बल्कि पूरे परिवार की मेहनत और आय का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में मवेशियों के झुंड के खेत में प्रवेश करने से फसल बर्बाद होने का खतरा लगातार बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने से परेशानी जस की तस बनी हुई है। सड़क हादसों का भी बढ़ रहा खतरा ग्रामीणों ने आवारा मवेशियों की समस्या को केवल कृषि नुकसान तक सीमित नहीं बताया। उनका कहना है कि पशुपालक अपने मवेशियों को खुले में छोड़ देते हैं, जिसके बाद ये पशु सड़कों पर पहुंच जाते हैं। सड़क पर अचानक मवेशियों के आ जाने से दोपहिया वाहन, कार, बस और अन्य वाहनों के चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ सकता है। इससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक राहगीरों और वाहन चालकों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सड़कों पर खुले में मवेशी छोड़ने वाले पशुपालकों की जिम्मेदारी तय की जाए और नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। “अब प्रशासन ही व्यवस्था करे” ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या कई बार प्रशासन के सामने रखी, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। इस बार ग्रामीणों ने मवेशियों को सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचाकर प्रशासन के सामने समस्या की गंभीरता रखने का फैसला किया। ग्रामीणों का संदेश साफ था कि यदि गांव और आसपास के क्षेत्रों में खुले में घूम रहे मवेशियों की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो किसानों की फसलें लगातार प्रभावित होती रहेंगी और सड़क सुरक्षा पर भी खतरा बना रहेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मवेशियों के लिए उचित और स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि पशुओं को सुरक्षित स्थान मिल सके और किसान भी अपनी फसलों की सुरक्षा कर सकें। स्थायी समाधान की मांग ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें आवारा मवेशियों के लिए उचित आश्रय और व्यवस्था करना, सड़कों पर मवेशियों को खुला छोड़ने की समस्या पर नियंत्रण करना तथा लापरवाह पशुपालकों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल मवेशियों को एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर भेजने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए प्रशासन, स्थानीय निकाय और पशुपालकों के बीच समन्वय के साथ प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। इस अनोखे प्रदर्शन ने एक बार फिर आवारा मवेशियों की समस्या को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब शिकायतों से समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने मवेशियों को कलेक्ट्रेट तक लाकर प्रशासन को वास्तविक स्थिति दिखाने का रास्ता अपनाया। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए मवेशियों के लिए उचित व्यवस्था करेगा और किसानों की फसलों तथा आम लोगों की सड़क सुरक्षा को लेकर प्रभावी कदम उठाएगा।

  • जेल में मोबाइल फोन के साथ दिखे प्रज्वल रेवन्ना, वीडियो से मचा हड़कंप

    परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में 5G स्मार्टफोन मिलने के बाद सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल; जेल अधिकारी निलंबित, अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 13 अगस्त, 2026 बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी में स्थित परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना का जेल की कोठरी के भीतर मोबाइल फोन पर बात करते हुए एक वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वीडियो में रेवन्ना कथित तौर पर सादे कपड़ों में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। इसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि हाई-सिक्योरिटी जेल की कोठरी तक मोबाइल फोन कैसे पहुंचा और लंबे समय तक इसका पता क्यों नहीं चला। मामला सामने आने के बाद केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) की छापेमारी में रेवन्ना की साझा बैरक से 5G स्मार्टफोन, चार्जर, पेन ड्राइव और स्क्रिबलिंग पैड बरामद किए गए। अधिकारियों के मुताबिक फोन में WhatsApp, Facebook, Instagram, Netflix और Amazon Prime जैसे ऐप मौजूद थे। इस घटनाक्रम ने जेल में कैदियों को प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध होने और सुरक्षा निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। CCB की छापेमारी में खुला मोबाइल फोन का राज मंगलवार, 11 अगस्त को CCB ने करीब 100 पुलिसकर्मियों के साथ परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में अचानक तलाशी अभियान चलाया। रिपोर्टों के अनुसार तलाशी दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुई और रात 9 बजे तक चली। इसी कार्रवाई के दौरान रेवन्ना और कैदी प्रताप राय की साझा बैरक से Redmi 5G स्मार्टफोन बरामद किया गया। इसके साथ चार्जर, पेन ड्राइव और लिखने का पैड भी मिला। जांच में फोन में कई सोशल मीडिया और मनोरंजन संबंधी ऐप पाए गए। रिपोर्टों के अनुसार दोनों कैदियों ने फोन का इस्तेमाल परिवार और वकीलों से संपर्क के लिए करने की बात स्वीकार की, लेकिन फोन के पासवर्ड साझा करने से इनकार किया। अधिकारियों की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि प्रतिबंधित फोन जेल परिसर के भीतर कैसे पहुंचा और सुरक्षा जांच के बावजूद इसका इस्तेमाल कैसे होता रहा। जेल अधिकारी निलंबित, अधीक्षक को नोटिस घटना के बाद जेल प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट इरण्णा रंगापुर को निलंबित किया गया है, जबकि बेंगलुरु सेंट्रल जेल के अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रतिबंधित वस्तुओं के जेल में पहुंचने और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की जांच की जा रही है। प्रज्वल रेवन्ना और प्रताप राय के खिलाफ जेल में प्रतिबंधित सामान रखने से संबंधित प्रावधानों के तहत नई FIR दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल जेल की निगरानी व्यवस्था को लेकर है—यदि हाई-सिक्योरिटी बैरक में 5G स्मार्टफोन पहुंच सकता है और उसका इस्तेमाल किया जा सकता है, तो जेल की तलाशी और निगरानी प्रणाली में कहां चूक हुई? वीडियो ने बढ़ाई VIP ट्रीटमेंट की चर्चा मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए सामने आए कथित वीडियो ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में “VIP ट्रीटमेंट” को लेकर सवाल तेज कर दिए हैं। हालांकि, किसी अधिकारी द्वारा रेवन्ना को औपचारिक रूप से “VIP सुविधा” दिए जाने की पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस दावे को जांच का विषय माना जाना चाहिए। वीडियो में कथित तौर पर रेवन्ना को कोठरी के भीतर मोबाइल फोन पर बातचीत करते देखा जा सकता है। इसी कारण जेल प्रशासन से यह सवाल पूछा जा रहा है कि प्रतिबंधित मोबाइल फोन उनकी बैरक तक कैसे पहुंचा और इसे रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति कौन था। 2025 में सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा प्रज्वल रेवन्ना को बेंगलुरु की विशेष अदालत ने अगस्त 2025 में एक बलात्कार मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत के फैसले में IPC की विभिन्न धाराओं के तहत दोषसिद्धि और सजा दर्ज की गई थी। अदालत के आदेश के अनुसार, बलात्कार से संबंधित धाराओं में उन्हें उम्रकैद की सजा और जुर्माना लगाया गया था। फैसले में पीड़िता को मुआवजे के रूप में ₹11.25 लाख दिए जाने का भी आदेश दर्ज है। इस मामले में रेवन्ना के खिलाफ अन्य आपराधिक मामलों की कार्यवाही भी अलग से चलती रही है। इसलिए जेल में मोबाइल फोन मिलने की नई घटना ने उनके मामले को एक बार फिर सार्वजनिक और प्रशासनिक जांच के केंद्र में ला दिया है। कौन हैं प्रज्वल रेवन्ना? प्रज्वल रेवन्ना जनता दल (सेक्युलर) यानी JDS के पूर्व सांसद हैं। वे पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पोते और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के भतीजे हैं। उन्होंने 2019 से 2024 तक हासन लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 2024 में उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न और अश्लील वीडियो से जुड़े आरोप सामने आने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया। 2025 में बेंगलुरु की विशेष अदालत द्वारा एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद वे जेल में हैं। अब जांच का केंद्र तीन बड़े सवाल इस पूरे घटनाक्रम में जांच एजेंसियों और जेल प्रशासन के सामने प्रमुख रूप से तीन सवाल हैं—मोबाइल जेल के भीतर कैसे पहुंचा, किसने इसे उपलब्ध कराया और सुरक्षा जांच के बावजूद इसका इस्तेमाल कैसे जारी रहा? इसके अलावा वीडियो रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति और वीडियो के जेल से बाहर आने की परिस्थितियों की भी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। परप्पना अग्रहारा जेल में पहले भी हाई-प्रोफाइल कैदियों को लेकर सुरक्षा और विशेष सुविधाओं से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में ताजा घटना ने जेल प्रशासन की जवाबदेही और हाई-सिक्योरिटी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर बहस फिर तेज कर दी है। फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है और प्रतिबंधित मोबाइल फोन मिलने की परिस्थितियों की जांच जारी है। जांच के निष्कर्ष से ही यह स्पष्ट होगा कि यह केवल सुरक्षा में लापरवाही का मामला था या इसके पीछे जेल के भीतर किसी बड़े नेटवर्क अथवा मिलीभगत की भूमिका थी।

  • आँजणा पटेल समाज शिवमोग्गा में नई कमेटी का गठन, चेनारामजी खागड़ा अध्यक्ष और मांगीलालजी ओड़ सचिव निर्वाचित

    तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर पुरानी कमेटी को सम्मान; सर्वसम्मति से चुनी गई नई कार्यकारिणी ने समाज की एकता और विकास का संकल्प लिया भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिवमोग्गा | 11 अगस्त, 2026 शिवमोग्गा। कर्नाटक के शिवमोग्गा में आँजणा पटेल समाज की नई कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। समाज की नई कमेटी में श्रीमान चेनारामजी खागड़ा को अध्यक्ष और श्रीमान मांगीलालजी ओड़ को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। नई कार्यकारिणी के गठन के अवसर पर समाज के सदस्यों ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का हर्षोल्लास के साथ अभिनंदन किया और समाज की एकता, विकास एवं सेवा को नई गति देने की उम्मीद जताई। शिवमोग्गा के सदस्यों ने पुरानी कमेटी के तीन वर्ष के सफल कार्यकाल को पूरा होने पर सभी पदाधिकारियों और सदस्यों के योगदान की सराहना की। समाज की ओर से कहा गया कि पुराने पदाधिकारियों ने समाज की एकता, विकास और सेवा के लिए समय, मेहनत तथा समर्पण के साथ कार्य किया, जिसे समाज सदैव सम्मान के साथ याद रखेगा। बैठक में पुरानी कमेटी के कार्यकाल की सेवाओं के लिए सभी सम्माननीय सदस्यों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। समाज के सदस्यों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वे भविष्य में भी समाजहित के कार्यों में अपना सहयोग और मार्गदर्शन जारी रखेंगे। सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी का गठन पुरानी कमेटी के तीन वर्ष के कार्यकाल के पूर्ण होने के बाद समाज की बैठक में नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई। सदस्यों ने आपसी सहमति और सर्वसम्मति से नई कमेटी का गठन किया। नई कार्यकारिणी में चेनारामजी खागड़ा, रामा-जालौर, शिवमोग्गा को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई। वहीं चौथारामजी जड़मल, लोलासनी-जोधपुर, तीर्थहंल्ली को उपाध्यक्ष तथा नरपतजी खागड़ा, सरवड़ी-बालोतरा, शिवमोग्गा को उपाध्यक्ष बनाया गया। संगठन के प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी मांगीलालजी ओड़, शिवमोग्गा, बाकरा-जालौर को सचिव पद पर सौंपी गई। हनुमानरामजी डागी, चेंडा-पाली, शिवमोग्गा को सहसचिव नियुक्त किया गया। वित्तीय व्यवस्था की जिम्मेदारी बाबूलालजी फक, माधोपुर-आहोर-जालोर, शिवमोग्गा को कोषाध्यक्ष तथा चमनाजी भूरिया, होनाली-जालौर, शिवमोग्गा को सह-कोषाध्यक्ष पद पर दी गई। नई कार्यकारिणी में इन पदाधिकारियों को मिली जिम्मेदारी - अध्यक्ष: श्रीमान चेनारामजी खागड़ा, रामा-जालौर, शिवमोग्गा - उपाध्यक्ष: श्रीमान चौथारामजी जड़मल, लोलासनी-जोधपुर, तीर्थंहल्ली - उपाध्यक्ष: श्रीमान नरपतजी खागड़ा, सरवड़ी-बालोतरा, शिवमोग्गा - सचिव: श्रीमान मांगीलालजी ओड़, शिवमोग्गा, बाकरा-जालौर - सहसचिव: श्रीमान हनुमानरामजी डागी, चेंडा-पाली, शिवमोग्गा - कोषाध्यक्ष: श्रीमान बाबूलालजी फक, माधोपुर-आहोर-जालोर, शिवमोग्गा - सह-कोषाध्यक्ष: श्रीमान चमनाजी भूरिया, होनाली-जालौर, शिवमोग्गा पुरानी कमेटी के योगदान को किया नमन नई कार्यकारिणी के गठन से पहले समाज की पुरानी कमेटी के तीन वर्ष के कार्यकाल की सेवाओं को याद किया गया। सदस्यों ने कहा कि समाज की एकता, विकास और सेवा के लिए पुराने पदाधिकारियों ने जो समय और श्रम दिया, वह प्रशंसनीय है। समाज की ओर से पुराने पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा गया कि उनका सेवा योगदान समाज के लिए हमेशा यादगार रहेगा। साथ ही ईश्वर से प्रार्थना की गई कि सभी पूर्व पदाधिकारियों को भविष्य में भी समाजहित में सक्रिय भूमिका निभाने की शक्ति और सफलता प्राप्त हो। समाज की एकता और विकास को मिलेगी नई दिशा नई कार्यकारिणी के गठन के बाद समाज में उत्साह का माहौल दिखाई दिया। सदस्यों ने उम्मीद जताई कि नई टीम समाज की एकता को और मजबूत करेगी तथा शिक्षा, सामाजिक सेवा, संगठनात्मक विकास और सामुदायिक हित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाएगी। सर्वसम्मति से कार्यकारिणी का गठन होने से समाज में आपसी सहयोग और सामंजस्य का संदेश भी सामने आया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से समाज के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि वे सामूहिक नेतृत्व की भावना के साथ सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। कार्यकारिणी के गठन के बाद सभी नवनिर्वाचित महानुभावों का आँजणा पटेल समाज, शिवमोग्गा (कर्नाटक) की ओर से हर्षोल्लास के साथ अभिनंदन किया गया। समाज के सदस्यों ने नई टीम को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि नई कार्यकारिणी समाज की सेवा, संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक एकता के लिए प्रभावी ढंग से कार्य करेगी।

  • मन पर विजय ही आत्मविकास की पहली सीढ़ी: मुनि श्री वीरसागर जी

    नकारात्मक विचारों पर लगाम, क्षमा-विनय-कृतज्ञता से आत्मपरिवर्तन का संदेश; बोले—संसार में रहें, लेकिन उसकी नकारात्मकता को भीतर प्रवेश न करने दें भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 12 अगस्त 2026। ज्ञानोदय परिसर, इनर रिफ्लेक्शन सेंटर, तुबरहल्ली में चल रहे आध्यात्मिक प्रवचनों के क्रम में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने मन की प्रकृति, नकारात्मक विचारों, आत्मसंयम और सकारात्मक जीवन-दृष्टि पर प्रेरणादायी संदेश दिया। मुनि श्री वीरसागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में वास्तविक आत्मविकास तब शुरू होता है, जब वह यह समझता है कि वह मन नहीं, बल्कि मन का साक्षी और स्वामी है। मुनिश्री ने कहा कि मन में उठने वाला प्रत्येक विचार व्यक्ति का वास्तविक स्वरूप नहीं होता। मन विचारों के प्रवाह का माध्यम है और व्यक्ति को विवेक के आधार पर यह तय करना चाहिए कि किस विचार को स्वीकार करना है और किसे वहीं रोक देना है। उनके अनुसार मन पर विजय का अर्थ मन को दबाना नहीं, बल्कि उसके विचारों को पहचानकर उन्हें सही दिशा देना है। उन्होंने समझाया कि आंखें देखने का माध्यम हैं, जिह्वा स्वाद ग्रहण करने का साधन है, उसी प्रकार मन विचारों के प्रवाह का माध्यम है। यदि व्यक्ति मन में उठने वाले प्रत्येक विचार को अपना स्वरूप मान लेता है, तो वह चिंता, भय, क्रोध और नकारात्मकता के चक्र में फंस सकता है। इसके विपरीत जागरूकता और संयम के साथ विचारों का निरीक्षण किया जाए तो जीवन की दिशा बदली जा सकती है। बार-बार दोहराए विचार बन जाते हैं मानसिक आदत मुनि श्री वीरसागर जी महाराज ने नकारात्मक विचारों की आदत को समझाने के लिए पानी के प्रवाह का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ढलान पर लगातार बहता पानी एक ही स्थान पर गहरी लकीर बना देता है, उसी प्रकार किसी विचार को बार-बार दोहराने से मन में उसका एक निश्चित मार्ग बन जाता है। चिंता, भय, क्रोध, ईर्ष्या, अनावश्यक कल्पनाएं और नकारात्मक चिंतन भी इसी प्रक्रिया के कारण धीरे-धीरे मानसिक आदतों का रूप ले सकते हैं। व्यक्ति को कई बार यह महसूस भी नहीं होता कि वह किसी विचार को नियंत्रित कर रहा है या वही विचार उसके व्यवहार को नियंत्रित करने लगा है। मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को सजग रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि पुराने मानसिक मार्गों को बदलने के लिए निरंतर अभ्यास आवश्यक है। नकारात्मक विचार आते ही उनके पीछे बहने के बजाय व्यक्ति को उन्हें पहचानना चाहिए और अपने विवेक से आत्मकल्याणकारी विचारों की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मपरिवर्तन केवल इच्छा से नहीं, बल्कि जागरूकता, संयम और निरंतर अभ्यास से संभव होता है। समुद्र में जहाज जैसा हो जीवन प्रवचन में मुनिश्री ने संसार में रहते हुए भी उसकी नकारात्मकता से स्वयं को बचाने के लिए समुद्र में चलने वाले जहाज का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जहाज समुद्र के पानी में रहकर भी सुरक्षित आगे बढ़ता है, क्योंकि समुद्र का पानी उसके बाहर रहता है। जैसे ही पानी जहाज के भीतर प्रवेश करता है, उसके डूबने का खतरा पैदा हो जाता है। इसी प्रकार मनुष्य को संसार से भागने की आवश्यकता नहीं है। उसे परिवार, व्यवसाय, नौकरी और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए संसार में रहना है, लेकिन तनाव, द्वेष, क्रोध, नकारात्मकता और विकारों को अपने भीतर स्थायी स्थान नहीं देना है। उन्होंने कहा कि संसार के बीच रहते हुए अपनी आंतरिक शांति को सुरक्षित रखना ही वास्तविक साधना है। बाहरी परिस्थितियां हमेशा व्यक्ति की इच्छा के अनुसार नहीं बदल सकतीं, लेकिन अपनी प्रतिक्रिया और दृष्टिकोण को बदलने का प्रयास व्यक्ति स्वयं कर सकता है। क्रोध में वस्तु फेंकने से नुकसान हमारा मुनिश्री ने जैन परंपरा में वर्णित अजीव आसादना के संदर्भ में भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। प्रतिक्रमण के माध्यम से व्यक्ति अपने व्यवहार और भावों का आत्मावलोकन करता है तथा निर्जीव वस्तुओं के प्रति किए गए अनुचित व्यवहार के लिए भी क्षमा-भाव रखता है। उन्होंने कहा कि क्रोध में मोबाइल, गिलास, थैला या किसी अन्य वस्तु को पटकने अथवा फेंकने से वस्तु को भावनात्मक पीड़ा नहीं होती, लेकिन ऐसा व्यवहार व्यक्ति के अपने मानसिक संतुलन को प्रभावित करता है। क्रोध में की गई ऐसी प्रतिक्रिया भीतर के असंयम को मजबूत करती है। मुनिश्री ने संदेश दिया कि क्रोध की स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ क्षण रुकना, विचार करना और फिर निर्णय लेना आत्मसंयम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। व्यक्ति जितना अपने व्यवहार को देखने लगेगा, उतना ही वह अपनी कमजोरियों को पहचानकर उनमें सुधार कर पाएगा। क्षमा, विनय और कृतज्ञता से सकारात्मक बदलाव आत्मपरिवर्तन की दिशा में मुनिश्री ने क्षमा, विनय और कृतज्ञता को तीन महत्वपूर्ण भाव बताया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले व्यक्ति को अपने व्यवहार और गलतियों का ईमानदारी से आत्मावलोकन करना चाहिए। अपनी भूल स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मसुधार की पहली सीढ़ी है। इसके बाद जीवन में विनय का भाव विकसित करना आवश्यक है। विनम्र व्यक्ति सीखने और अपनी कमियों को सुधारने के लिए अधिक तैयार रहता है। अहंकार व्यक्ति को अपनी भूल देखने से रोकता है, जबकि विनय उसे लगातार सीखने की क्षमता देता है। तीसरा महत्वपूर्ण भाव कृतज्ञता है। जीवन में उपलब्ध अवसरों, गुणों और दूसरों के सहयोग को पहचानने की आदत मन को शिकायत से निकालकर संतोष और सकारात्मकता की ओर ले जाती है। कृतज्ञता केवल किसी व्यक्ति को धन्यवाद कहने तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की प्रक्रिया है। गुणग्राही दृष्टि से बदलती है जीवन की दिशा मुनिश्री ने गुणग्राही दृष्टि को जीवन में शांति और सकारात्मकता का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति लगातार दूसरों की कमियां खोजता रहेगा, तो उसका मन भी उसी दिशा में सोचने लगेगा। इसके विपरीत यदि वह दूसरों के गुणों को देखने और उनसे सीखने का अभ्यास करता है, तो उसके भीतर भी अच्छे भाव विकसित होंगे। उन्होंने चुंबक का उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस प्रकार चुंबक अपने अनुकूल धातु को आकर्षित करता है, उसी प्रकार गुणों को देखने वाली दृष्टि व्यक्ति के भीतर सकारात्मक भावों को विकसित करती है। परिवार और समाज में भी गुणग्राही दृष्टि का विशेष महत्व है। यदि हर व्यक्ति केवल दूसरे की कमी खोजने के बजाय उसके अच्छे गुणों को पहचानने का प्रयास करे, तो रिश्तों में कटुता कम हो सकती है और आपसी सम्मान बढ़ सकता है। आत्मपरिवर्तन बाहर नहीं, भीतर से शुरू होता है मुनि श्री वीरसागर जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति अक्सर जीवन की समस्याओं का कारण परिस्थितियों, लोगों और बाहरी वातावरण को मानता है। लेकिन स्थायी परिवर्तन का रास्ता स्वयं के भीतर से शुरू होता है। यदि व्यक्ति परिस्थितियों को बदलने में सक्षम न हो, तो भी वह अपनी प्रतिक्रिया बदल सकता है। किसी घटना पर क्रोध करना या शांत रहना, शिकायत करना या सीख लेना, दोष देखना या गुण पहचानना—इन विकल्पों में व्यक्ति की अपनी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने मन का स्वामी बनने का प्रयास करना चाहिए। जब मनुष्य अपने विचारों और प्रतिक्रियाओं को विवेकपूर्ण दिशा देने लगता है, तब बाहरी परिस्थितियां उसके जीवन की पूरी दिशा तय नहीं कर पातीं। मुनिश्री का संदेश आधुनिक जीवन की तेज रफ्तार के बीच विशेष रूप से प्रासंगिक दिखाई देता है। तकनीक, प्रतिस्पर्धा, व्यस्तता और निरंतर बदलती परिस्थितियों के बीच व्यक्ति के लिए अपने मन की शांति को बनाए रखना बड़ी चुनौती है। ऐसे में आत्मनिरीक्षण, संयम, क्षमा, विनय, कृतज्ञता और गुणग्राही दृष्टि जीवन को संतुलित बनाने के प्रभावी आध्यात्मिक सूत्र बन सकते हैं।

  • अखिल समाज सेवा दल ने कर्नाटक कार्यकारिणी का किया विस्तार

    जयंतीलाल जैन बने प्रदेश महासचिव, दलपत सिंह को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी भारतार्थ खबर। बेंगलुरु संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 11 अगस्त 2026।अखिल समाज सेवा दल ने कर्नाटक प्रदेश में संगठन को और अधिक सशक्त, सक्रिय और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार किया है। संगठन के विस्तार एवं आगामी सामाजिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से विचार-विमर्श के बाद दो महत्वपूर्ण नियुक्तियों की घोषणा की गई। प्रदेश प्रभारी डॉ. नीतू राठौर जैन एवं संगठन की संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती वर्षा नायक के साथ विचार-विमर्श के बाद श्री जयंतीलाल जैन को कर्नाटक प्रदेश महासचिव तथा श्री दलपत सिंह को कर्नाटक प्रदेश मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया है। दोनों नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से प्रभावी मानी गई हैं। संगठन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नई जिम्मेदारियां संगठनात्मक विस्तार, सामाजिक सेवा गतिविधियों और जनसंपर्क को मजबूत करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। नवनियुक्त पदाधिकारियों से संगठन के उद्देश्यों को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने और प्रदेश में सेवा कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की अपेक्षा व्यक्त की गई है। जयंतीलाल जैन को प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी श्री जयंतीलाल जैन को अखिल समाज सेवा दल की कर्नाटक प्रदेश इकाई में महासचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। महासचिव के रूप में संगठनात्मक गतिविधियों में समन्वय, कार्यकारिणी के साथ तालमेल तथा सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रमों को गति देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। संगठन पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि जयंतीलाल जैन अपनी निष्ठा, सक्रियता और समर्पण के साथ संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में प्रभावी योगदान देंगे। दलपत सिंह बने प्रदेश मीडिया प्रभारी इसी क्रम में श्री दलपत सिंह को कर्नाटक प्रदेश मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया है। संगठन की गतिविधियों, सामाजिक सेवा अभियानों और जनहित से जुड़े कार्यों को समाज एवं आमजन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मीडिया विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मीडिया प्रभारी के रूप में दलपत सिंह संगठन की गतिविधियों के प्रचार-प्रसार, मीडिया समन्वय और सकारात्मक सामाजिक संदेशों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की दिशा में कार्य करेंगे। संगठन को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद अखिल समाज सेवा दल की कर्नाटक प्रदेश कार्यकारिणी के विस्तार को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई जिम्मेदारियों के साथ संगठन को प्रदेश में अपनी सामाजिक गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित और व्यापक रूप देने में मदद मिलने की उम्मीद है। संगठन का उद्देश्य समाज सेवा, जनजागरूकता और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यों को मजबूत करना है। ऐसे में प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारियों का विस्तार संगठन की कार्यक्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। पदाधिकारियों ने दी बधाई नवनियुक्त पदाधिकारियों की घोषणा के बाद संगठन के विभिन्न राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। राष्ट्रीय महासचिव श्री विनोद कुमार नायक, राष्ट्रीय महिला उपाध्यक्ष डॉ. रेनू रांका जैन, राष्ट्रीय सलाहकार श्रीमती कमला बोहरा जैन, राष्ट्रीय सहसचिव श्री भरत संघवी जैन तथा बेंगलुरु प्रभारी श्री जितेंद्र कावड़ जैन सहित समस्त पदाधिकारीगण ने जयंतीलाल जैन और दलपत सिंह को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि दोनों नवनियुक्त पदाधिकारी संगठन के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ निभाएंगे और अखिल समाज सेवा दल को कर्नाटक में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सेवा कार्यों को गति देने पर जोर संगठन के विस्तार का प्रमुख उद्देश्य सामाजिक सेवा कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना और संगठन की गतिविधियों को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाना है। नई कार्यकारिणी के माध्यम से स्थानीय स्तर पर समाजसेवा से जुड़े कार्यों में समन्वय और सक्रियता बढ़ाने की उम्मीद जताई गई है। कर्नाटक जैसे विविध सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश वाले राज्य में किसी भी सामाजिक संगठन के लिए मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क और प्रभावी जनसंपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी दिशा में महासचिव और मीडिया प्रभारी की नियुक्तियां संगठन की आगामी गतिविधियों के लिए अहम मानी जा रही हैं। जिम्मेदारी के साथ बढ़ेगी जवाबदेही नई जिम्मेदारियों के साथ दोनों पदाधिकारियों के सामने संगठन की गतिविधियों को अधिक सक्रिय बनाने की चुनौती भी होगी। महासचिव के रूप में संगठनात्मक समन्वय और मीडिया प्रभारी के रूप में संगठन के सेवा कार्यों को प्रभावी संचार माध्यमों से लोगों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। संगठन पदाधिकारियों के अनुसार, दोनों नवनियुक्त पदाधिकारी अपनी क्षमता, अनुभव और सक्रिय सहभागिता के माध्यम से संगठन को मजबूत करने में योगदान देंगे। अखिल समाज सेवा दल द्वारा कर्नाटक प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार संगठन को अधिक सक्रिय एवं मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। श्री जयंतीलाल जैन को प्रदेश महासचिव और श्री दलपत सिंह को प्रदेश मीडिया प्रभारी नियुक्त किए जाने से संगठनात्मक गतिविधियों तथा जनसंपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है। संगठन के राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों ने दोनों नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे निष्ठा, सेवा भावना और समर्पण के साथ संगठन के सामाजिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाएंगे। ---

  • अवलहली देवी उत्सव में महेंद्र मुणोत ने की पूजा, अन्नदान में दी सेवा

    अण्णम्मा देवी एवं बंडी महाकाली देवी उत्सव में श्रद्धा और सेवा का संगम; आयोजकों ने मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का किया सम्मान भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 12 अगस्त, 2026 बेंगलुरु। अवलहली युवक संघ द्वारा आयोजित अण्णम्मा देवी एवं बंडी महाकाली देवी उत्सव श्रद्धा, भक्ति और सेवा की भावना के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने देवी मां की विशेष पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की। इसके बाद उन्होंने अन्नदान कार्यक्रम में सेवा प्रदान कर सामाजिक सहभागिता और सेवा भावना का संदेश दिया। आयोजन समिति ने महेंद्र मुणोत का सम्मान कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया। अवलहली देवी उत्सव के दौरान धार्मिक वातावरण में श्रद्धालुओं ने देवी मां के दर्शन एवं पूजा-अर्चना में भाग लिया। अण्णम्मा देवी एवं बंडी महाकाली देवी उत्सव स्थानीय धार्मिक आस्था और सामुदायिक सहभागिता का महत्वपूर्ण अवसर रहा। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने परिवार और क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि तथा खुशहाली के लिए देवी मां से प्रार्थना की। मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने विधि-विधान एवं श्रद्धाभाव के साथ देवी मां की विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने देवी मां के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों के मंगलमय जीवन की कामना की। पूजा के साथ सेवा का संदेश धार्मिक आयोजन के साथ आयोजित अन्नदान कार्यक्रम ने उत्सव को सामाजिक सेवा से भी जोड़ा। महेंद्र मुणोत ने अन्नदान में स्वयं सेवा प्रदान की और कार्यक्रम में अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। भारतीय परंपरा में अन्नदान को सेवा और मानव कल्याण से जोड़कर देखा जाता है। इसी भावना के साथ आयोजित अन्नदान कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। महेंद्र मुणोत की सेवा सहभागिता से कार्यक्रम में श्रद्धा के साथ सामाजिक सरोकार का संदेश भी मजबूत हुआ। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का महत्व तब और बढ़ जाता है, जब उनमें सेवा, सहयोग और मानव कल्याण की भावना भी शामिल हो। अन्नदान जैसी गतिविधियां समाज में परस्पर सहयोग, सद्भाव और सेवा संस्कार को मजबूत करती हैं। आयोजकों ने महेंद्र मुणोत का किया सम्मान कार्यक्रम के दौरान अवलहली युवक संघ के पदाधिकारियों और आयोजकों ने मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का सम्मान किया। आयोजकों ने देवी उत्सव में उनकी उपस्थिति, पूजा-अर्चना और अन्नदान सेवा में सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। सम्मान के अवसर पर आयोजकों ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में समाज के सेवाभावी लोगों की सहभागिता से आयोजन को नई ऊर्जा मिलती है। साथ ही युवाओं को भी धार्मिक परंपराओं और सामाजिक सेवा गतिविधियों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। युवाओं की सक्रिय भूमिका बनी आकर्षण अवलहली युवक संघ द्वारा आयोजित इस उत्सव में युवाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। धार्मिक आयोजन की व्यवस्थाओं से लेकर सेवा गतिविधियों तक युवाओं की सहभागिता ने सामुदायिक सहयोग की भावना को मजबूत किया। अवलहली युवक संघ के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि युवा शक्ति यदि धार्मिक परंपराओं, सामाजिक सेवा और सामुदायिक गतिविधियों से जुड़े तो समाज में सकारात्मक बदलाव को गति मिल सकती है। अण्णम्मा देवी एवं बंडी महाकाली देवी उत्सव में धार्मिक आस्था के साथ सामूहिक सहभागिता का वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में भाग लिया और अन्नदान कार्यक्रम में सहयोग किया। धार्मिक आस्था और सामाजिक सेवा का संगम अवलहली देवी उत्सव केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सामाजिक सेवा का भी प्रभावी समावेश दिखाई दिया। देवी मां के प्रति श्रद्धा के साथ अन्नदान सेवा ने आयोजन को जनकल्याण की भावना से जोड़ा। महेंद्र मुणोत द्वारा अन्नदान कार्यक्रम में सेवा प्रदान करना इसी भावना का हिस्सा रहा। आयोजकों ने उनके सहयोग की सराहना करते हुए सम्मान किया। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज के लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने, अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने और सेवा कार्यों में सहभागिता करने का अवसर मिलता है। अवलहली में आयोजित यह उत्सव भी इसी सामाजिक और धार्मिक समन्वय का उदाहरण बनकर सामने आया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का माहौल रहा। देवी मां की पूजा-अर्चना के बाद अन्नदान कार्यक्रम में लोगों ने सहभागिता की। आयोजन समिति ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, सेवाभावी कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। अवलहली युवक संघ की ओर से आयोजित अण्णम्मा देवी एवं बंडी महाकाली देवी उत्सव ने श्रद्धा, सेवा और सामाजिक सहभागिता को एक मंच पर लाने का सफल प्रयास किया। महेंद्र मुणोत की पूजा-अर्चना और अन्नदान सेवा में सहभागिता तथा आयोजकों द्वारा उनका सम्मान कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।आयोजकों द्वारा उनका सम्मान कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।

  • बेंगलुरु में WTI 2026 का लोगो लॉन्च, ग्लोबल टेक्सटाइल कारोबार को नई उड़ान

    30 देशों की भागीदारी की उम्मीद; 1 से 4 अक्टूबर तक KTPO व्हाइटफील्ड में जुटेंगे टेक्सटाइल, अपैरल और फैशन जगत के दिग्गज भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 12 अगस्त 2026 बेंगलुरु में वर्ल्ड टेक्सटाइल इंडिया 2026 के पहले चैप्टर की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग को वैश्विक बाजार से जोड़ने की महत्वाकांक्षी पहल के तहत बुधवार को WTI 2026 का लोगो प्रदर्शित किया गया। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन 1 से 4 अक्टूबर 2026 तक कर्नाटक ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइज़ेशन (KTPO), व्हाइटफील्ड, बेंगलुरु में आयोजित होगा। वर्ल्ड टेक्सटाइल इंडिया 2026 का लक्ष्य भारतीय टेक्सटाइल, अपैरल, फैशन, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, ब्रांड्स, निवेशकों और उद्योग विशेषज्ञों से जोड़ना है। आयोजन में टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर, एक्सपोर्टर, डिजाइनर, ब्रांड, उद्यमी और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजकों के मुताबिक करीब 30 देशों की भागीदारी संभावित है, जिससे बेंगलुरु चैप्टर को अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्किंग के लिहाज से महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है। लोगो अनावरण को भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए वैश्विक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया गया। आयोजकों का कहना है कि WTI 2026 केवल पारंपरिक प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उद्देश्य व्यापार, नवाचार, निर्यात, सहयोग और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच के लिए एक एकीकृत प्लेटफॉर्म तैयार करना है। बेंगलुरु क्यों बना पहला केंद्र? आयोजकों के अनुसार बेंगलुरु को पहले चैप्टर के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि शहर में टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, उद्यमिता और वैश्विक व्यापार का मजबूत इकोसिस्टम मौजूद है। दक्षिण भारत के प्रमुख कारोबारी केंद्र के रूप में बेंगलुरु भारतीय टेक्सटाइल व्यवसायों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और ब्रांड्स से जोड़ने के लिए उपयुक्त वातावरण उपलब्ध करा सकता है। चार दिवसीय वर्ल्ड टेक्सटाइल इंडिया 2026 में देश के विभिन्न हिस्सों से टेक्सटाइल और अपैरल क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों के साथ विदेशी प्रतिनिधियों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। कनाडा, दक्षिण कोरिया, जापान और वियतनाम सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों से उद्योग प्रतिनिधियों के आने की उम्मीद जताई गई है। फैशन शो में डिजाइन प्रतिभा को मिलेगा मंच WTI 2026 की प्रमुख विशेषताओं में अंतरराष्ट्रीय फैशन शो भी शामिल है। आयोजकों के अनुसार इसमें प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹5 लाख तथा वर्ष के सर्वश्रेष्ठ डिजाइनर का सम्मान दिया जाएगा। इसके अलावा संस्थागत फैशन शो में ₹1 लाख के प्रथम पुरस्कार के साथ भारतीय डिजाइन प्रतिभाओं को अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। आयोजकों का कहना है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से अनुभवी डिजाइनरों के साथ उभरती प्रतिभाओं को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। तीन इंटरनेशनल समिट भी होंगे एक्सपो के दौरान टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर तीन इंटरनेशनल समिट आयोजित किए जाने की योजना है। इनमें केंद्र और राज्य सरकार से जुड़े प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के विशेषज्ञों, उद्यमियों और अन्य हितधारकों की भागीदारी प्रस्तावित है। इन समिट का उद्देश्य टेक्सटाइल उद्योग के भविष्य, व्यापार विस्तार, नवाचार, निर्यात, बाजार पहुंच और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे विषयों पर संवाद को बढ़ावा देना है। इससे उद्योग से जुड़े प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के विचार जानने और संभावित कारोबारी साझेदारियों की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिल सकता है। WTI को वैश्विक कारोबारी श्रृंखला से जोड़ने की तैयारी आयोजकों के अनुसार वर्ल्ड टेक्सटाइल इंडिया 2026 को एक बार होने वाले आयोजन के बजाय निरंतर चलने वाले वैश्विक प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने की योजना है। बेंगलुरु चैप्टर में चयनित उद्यमियों और ब्रांड्स को 2026 और 2027 के दौरान UAE, मलेशिया और कनाडा में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय एक्सपो से जोड़ने की योजना बताई गई है। इस पहल से भारतीय कंपनियों को नए बाजारों की तलाश, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और निर्यात विस्तार के अवसर मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए वैश्विक खरीदारों तक पहुंच बनाने का अवसर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। के. एच. मुनियप्पा ने बताया महत्वपूर्ण पहल कार्यक्रम में कर्नाटक सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री के. एच. मुनियप्पा ने कहा कि वर्ल्ड टेक्सटाइल इंडिया 2026 भारत के टेक्सटाइल क्षेत्र की क्षमता को वैश्विक अवसरों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बेंगलुरु के तकनीकी, औद्योगिक और उद्यमिता इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए उपयुक्त बताते हुए कहा कि ऐसी पहलें टेक्सटाइल उद्यमियों, निर्माताओं, डिजाइनरों और निर्यातकों के लिए नए रास्ते खोल सकती हैं। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अब्दुल रशीद (सेवानिवृत्त IPS) ने कहा कि WTI का उद्देश्य भारतीय टेक्सटाइल व्यवसाय को वैश्विक बाजार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि करीब 30 देशों की संभावित भागीदारी के साथ बेंगलुरु चैप्टर कारोबारियों, निर्यातकों, डिजाइनरों और ब्रांड्स के लिए नए संपर्क और विकास के अवसर तैयार कर सकता है। ट्रेड एंड फैसिलिटेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. वेम्पल्ली अमानुल्ला ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुविधा को WTI की प्रमुख प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग के पास वैश्विक स्तर पर विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं और यह मंच कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स, खरीदारों तथा व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास करेगा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय निदेशक-विकास एवं सुविधा डॉ. सांबा शिवा, दक्षिण प्रभाग के प्रभागीय अध्यक्ष अरविंद गोविंदप्पा, दक्षिण भारत के क्षेत्रीय अध्यक्ष-विकास एवं स्थापना एम. जयशंकर, तकनीकी सुविधा एवं अनुसंधान के राष्ट्रीय निदेशक नवीन कुमार तथा उद्योग अनुसंधान एवं विकास महासंघ के दक्षिण प्रभाग के राष्ट्रीय निदेशक-व्यापार सुविधा मंजूनाथ आचार्य सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बेंगलुरु से वैश्विक टेक्सटाइल बाजार तक नई कनेक्टिविटी लोगो अनावरण के साथ वर्ल्ड टेक्सटाइल इंडिया 2026 ने अपने पहले चैप्टर की औपचारिक तैयारियों को गति दी है। आयोजन के जरिए भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग को व्यापार, डिजाइन, तकनीक, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। 1 से 4 अक्टूबर तक प्रस्तावित यह आयोजन बेंगलुरु को टेक्सटाइल कारोबार के एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मिलन-बिंदु के रूप में स्थापित करने की दिशा में कदम हो सकता है। अब उद्योग जगत की नजरें अक्टूबर में होने वाले WTI 2026 चैप्टर पर हैं, जहां भारतीय कंपनियों और वैश्विक बाजार के बीच नए कारोबारी संपर्क बनने की उम्मीद है।

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