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सैकड़ों मवेशी लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, बोले- “साहब बांध लें या उपाय करें”

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 14 अग॰
  • 3 मिनट पठन

अंबिकापुर के भकुरा गांव में आवारा मवेशियों से परेशान ग्रामीणों का अनोखा प्रदर्शन; फसल बर्बादी और सड़क हादसों का खतरा बताते हुए स्थायी समाधान की मांग


इमारत के सामने सड़क पर दर्जनों गायें, लोग किनारे खड़े; कोने में फाइल फोटो लिखा है।

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) अंबिकापुर | 13 अगस्त, 2026 अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में आवारा मवेशियों की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए ऐसा अनोखा प्रदर्शन किया कि कलेक्ट्रेट में मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी हैरान रह गए। भकुरा गांव के ग्रामीण सड़कों और आसपास के इलाकों में घूम रहे सैकड़ों मवेशियों को पकड़कर कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य द्वार तक ले आए। बड़ी संख्या में मवेशियों को कलेक्ट्रेट के सामने देखकर प्रशासनिक अमला भी सकते में नजर आया।


ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से आवारा मवेशियों की समस्या उनके लिए परेशानी का बड़ा कारण बनी हुई है। ये पशु खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और सड़कों पर घूमने के कारण राहगीरों तथा वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा भी पैदा करते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से दो टूक अंदाज में स्थायी समाधान की मांग करते हुए कहा कि “साहब बांध लें या उपाय करें।”


सड़कों से मवेशी पकड़कर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण


भकुरा गांव के ग्रामीणों ने पहले सड़कों पर खुले में घूम रहे मवेशियों को इकट्ठा किया और फिर उन्हें लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। देखते ही देखते कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के सामने बड़ी संख्या में मवेशी जमा हो गए।

ग्रामीणों के इस कदम का उद्देश्य प्रशासन को यह दिखाना था कि आवारा पशुओं की समस्या केवल शिकायत या कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर किसानों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।

कलेक्ट्रेट परिसर के सामने एक साथ इतने मवेशियों को देखकर वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी स्थिति को देखकर हैरान रह गए।


फसलों की रखवाली बनी किसानों की मजबूरी


ग्रामीणों के अनुसार खुले में घूमने वाले मवेशी अक्सर खेतों में घुस जाते हैं। इससे किसानों की मेहनत और फसल को भारी नुकसान पहुंचता है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए उन्हें दिन-रात निगरानी करनी पड़ती है।

किसानों के लिए फसल केवल खेत में खड़ी उपज नहीं, बल्कि पूरे परिवार की मेहनत और आय का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में मवेशियों के झुंड के खेत में प्रवेश करने से फसल बर्बाद होने का खतरा लगातार बना रहता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने से परेशानी जस की तस बनी हुई है।


सड़क हादसों का भी बढ़ रहा खतरा


ग्रामीणों ने आवारा मवेशियों की समस्या को केवल कृषि नुकसान तक सीमित नहीं बताया। उनका कहना है कि पशुपालक अपने मवेशियों को खुले में छोड़ देते हैं, जिसके बाद ये पशु सड़कों पर पहुंच जाते हैं।

सड़क पर अचानक मवेशियों के आ जाने से दोपहिया वाहन, कार, बस और अन्य वाहनों के चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ सकता है। इससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक राहगीरों और वाहन चालकों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सड़कों पर खुले में मवेशी छोड़ने वाले पशुपालकों की जिम्मेदारी तय की जाए और नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।


“अब प्रशासन ही व्यवस्था करे”


ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या कई बार प्रशासन के सामने रखी, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। इस बार ग्रामीणों ने मवेशियों को सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचाकर प्रशासन के सामने समस्या की गंभीरता रखने का फैसला किया।

ग्रामीणों का संदेश साफ था कि यदि गांव और आसपास के क्षेत्रों में खुले में घूम रहे मवेशियों की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो किसानों की फसलें लगातार प्रभावित होती रहेंगी और सड़क सुरक्षा पर भी खतरा बना रहेगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मवेशियों के लिए उचित और स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि पशुओं को सुरक्षित स्थान मिल सके और किसान भी अपनी फसलों की सुरक्षा कर सकें।


स्थायी समाधान की मांग


ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें आवारा मवेशियों के लिए उचित आश्रय और व्यवस्था करना, सड़कों पर मवेशियों को खुला छोड़ने की समस्या पर नियंत्रण करना तथा लापरवाह पशुपालकों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल मवेशियों को एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर भेजने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए प्रशासन, स्थानीय निकाय और पशुपालकों के बीच समन्वय के साथ प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।

इस अनोखे प्रदर्शन ने एक बार फिर आवारा मवेशियों की समस्या को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब शिकायतों से समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने मवेशियों को कलेक्ट्रेट तक लाकर प्रशासन को वास्तविक स्थिति दिखाने का रास्ता अपनाया।

अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए मवेशियों के लिए उचित व्यवस्था करेगा और किसानों की फसलों तथा आम लोगों की सड़क सुरक्षा को लेकर प्रभावी कदम उठाएगा।

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