जेल में मोबाइल फोन के साथ दिखे प्रज्वल रेवन्ना, वीडियो से मचा हड़कंप
- धन्नाराम चौधरी

- 14 अग॰
- 4 मिनट पठन
परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में 5G स्मार्टफोन मिलने के बाद सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल; जेल अधिकारी निलंबित, अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 13 अगस्त, 2026 बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी में स्थित परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना का जेल की कोठरी के भीतर मोबाइल फोन पर बात करते हुए एक वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वीडियो में रेवन्ना कथित तौर पर सादे कपड़ों में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। इसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि हाई-सिक्योरिटी जेल की कोठरी तक मोबाइल फोन कैसे पहुंचा और लंबे समय तक इसका पता क्यों नहीं चला।
मामला सामने आने के बाद केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) की छापेमारी में रेवन्ना की साझा बैरक से 5G स्मार्टफोन, चार्जर, पेन ड्राइव और स्क्रिबलिंग पैड बरामद किए गए। अधिकारियों के मुताबिक फोन में WhatsApp, Facebook, Instagram, Netflix और Amazon Prime जैसे ऐप मौजूद थे। इस घटनाक्रम ने जेल में कैदियों को प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध होने और सुरक्षा निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
CCB की छापेमारी में खुला मोबाइल फोन का राज
मंगलवार, 11 अगस्त को CCB ने करीब 100 पुलिसकर्मियों के साथ परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में अचानक तलाशी अभियान चलाया। रिपोर्टों के अनुसार तलाशी दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुई और रात 9 बजे तक चली।
इसी कार्रवाई के दौरान रेवन्ना और कैदी प्रताप राय की साझा बैरक से Redmi 5G स्मार्टफोन बरामद किया गया। इसके साथ चार्जर, पेन ड्राइव और लिखने का पैड भी मिला। जांच में फोन में कई सोशल मीडिया और मनोरंजन संबंधी ऐप पाए गए।
रिपोर्टों के अनुसार दोनों कैदियों ने फोन का इस्तेमाल परिवार और वकीलों से संपर्क के लिए करने की बात स्वीकार की, लेकिन फोन के पासवर्ड साझा करने से इनकार किया। अधिकारियों की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि प्रतिबंधित फोन जेल परिसर के भीतर कैसे पहुंचा और सुरक्षा जांच के बावजूद इसका इस्तेमाल कैसे होता रहा।
जेल अधिकारी निलंबित, अधीक्षक को नोटिस
घटना के बाद जेल प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट इरण्णा रंगापुर को निलंबित किया गया है, जबकि बेंगलुरु सेंट्रल जेल के अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रतिबंधित वस्तुओं के जेल में पहुंचने और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की जांच की जा रही है।
प्रज्वल रेवन्ना और प्रताप राय के खिलाफ जेल में प्रतिबंधित सामान रखने से संबंधित प्रावधानों के तहत नई FIR दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल जेल की निगरानी व्यवस्था को लेकर है—यदि हाई-सिक्योरिटी बैरक में 5G स्मार्टफोन पहुंच सकता है और उसका इस्तेमाल किया जा सकता है, तो जेल की तलाशी और निगरानी प्रणाली में कहां चूक हुई?
वीडियो ने बढ़ाई VIP ट्रीटमेंट की चर्चा
मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए सामने आए कथित वीडियो ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में “VIP ट्रीटमेंट” को लेकर सवाल तेज कर दिए हैं। हालांकि, किसी अधिकारी द्वारा रेवन्ना को औपचारिक रूप से “VIP सुविधा” दिए जाने की पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस दावे को जांच का विषय माना जाना चाहिए।
वीडियो में कथित तौर पर रेवन्ना को कोठरी के भीतर मोबाइल फोन पर बातचीत करते देखा जा सकता है। इसी कारण जेल प्रशासन से यह सवाल पूछा जा रहा है कि प्रतिबंधित मोबाइल फोन उनकी बैरक तक कैसे पहुंचा और इसे रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति कौन था।
2025 में सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा
प्रज्वल रेवन्ना को बेंगलुरु की विशेष अदालत ने अगस्त 2025 में एक बलात्कार मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत के फैसले में IPC की विभिन्न धाराओं के तहत दोषसिद्धि और सजा दर्ज की गई थी।
अदालत के आदेश के अनुसार, बलात्कार से संबंधित धाराओं में उन्हें उम्रकैद की सजा और जुर्माना लगाया गया था। फैसले में पीड़िता को मुआवजे के रूप में ₹11.25 लाख दिए जाने का भी आदेश दर्ज है।
इस मामले में रेवन्ना के खिलाफ अन्य आपराधिक मामलों की कार्यवाही भी अलग से चलती रही है। इसलिए जेल में मोबाइल फोन मिलने की नई घटना ने उनके मामले को एक बार फिर सार्वजनिक और प्रशासनिक जांच के केंद्र में ला दिया है।
कौन हैं प्रज्वल रेवन्ना?
प्रज्वल रेवन्ना जनता दल (सेक्युलर) यानी JDS के पूर्व सांसद हैं। वे पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पोते और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के भतीजे हैं।
उन्होंने 2019 से 2024 तक हासन लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 2024 में उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न और अश्लील वीडियो से जुड़े आरोप सामने आने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया।
2025 में बेंगलुरु की विशेष अदालत द्वारा एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद वे जेल में हैं।
अब जांच का केंद्र तीन बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में जांच एजेंसियों और जेल प्रशासन के सामने प्रमुख रूप से तीन सवाल हैं—मोबाइल जेल के भीतर कैसे पहुंचा, किसने इसे उपलब्ध कराया और सुरक्षा जांच के बावजूद इसका इस्तेमाल कैसे जारी रहा?
इसके अलावा वीडियो रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति और वीडियो के जेल से बाहर आने की परिस्थितियों की भी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
परप्पना अग्रहारा जेल में पहले भी हाई-प्रोफाइल कैदियों को लेकर सुरक्षा और विशेष सुविधाओं से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में ताजा घटना ने जेल प्रशासन की जवाबदेही और हाई-सिक्योरिटी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर बहस फिर तेज कर दी है।
फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है और प्रतिबंधित मोबाइल फोन मिलने की परिस्थितियों की जांच जारी है। जांच के निष्कर्ष से ही यह स्पष्ट होगा कि यह केवल सुरक्षा में लापरवाही का मामला था या इसके पीछे जेल के भीतर किसी बड़े नेटवर्क अथवा मिलीभगत की भूमिका थी।
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