कावेरी विवाद पर कर्नाटक बंद का मिला-जुला असर, मांड्या में हाईवे जाम
- धन्नाराम चौधरी

- 14 अग॰
- 4 मिनट पठन
मांड्या में किसानों का उग्र प्रदर्शन, बेंगलुरु-मैसूरु में जनजीवन सामान्य; कन्नड़ संगठनों के समर्थन वापस लेने से बंद की धार पड़ी कमजोर

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 13 अगस्त, 2026 बेंगलुरु। तमिलनाडु के लिए 12,000 क्यूसेक कावेरी पानी छोड़े जाने के विरोध में कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ता वी. नागराज के नेतृत्व वाले महासंघ की ओर से आहूत कर्नाटक बंद का राज्य में मिला-जुला असर देखने को मिला। कावेरी आंदोलन के प्रमुख केंद्र मांड्या में किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए बेंगलुरु-मैसूरु पुराने राजमार्ग को अवरुद्ध किया, जबकि बेंगलुरु और मैसूरु में जनजीवन अधिकांशतः सामान्य रहा।
कई कन्नड़ संगठनों द्वारा बंद से समर्थन वापस लेने के बाद राज्यव्यापी बंद का प्रभाव सीमित दिखाई दिया। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी बताया कि प्रवीण शेट्टी और एस.आर. गोविंदु सहित कुछ कार्यकर्ताओं ने उनसे मुलाकात कर बंद का आह्वान वापस लेने की जानकारी दी।
कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की ओर से तमिलनाडु के लिए 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश के विरोध में बंद का आह्वान किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से पानी छोड़ने के फैसले का विरोध करने और कर्नाटक के किसानों तथा पेयजल जरूरतों को प्राथमिकता देने की मांग की।
मांड्या में प्रदर्शन तेज, हाईवे पर लगाया जाम
कावेरी आंदोलन के केंद्र मांड्या में किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों का विरोध सबसे अधिक प्रभावी नजर आया। संजय सर्कल सहित कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर उतरकर नारेबाजी की और बेंगलुरु-मैसूरु पुराने राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने खाली बर्तनों और कुलथी के साथ विरोध जताया। कुलथी को पानी की कमी के कारण किसानों द्वारा धान के विकल्प के रूप में अपनाई जाने वाली फसल के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने “हमारा पानी, हमारा हक” जैसे नारे लगाते हुए सरकार से तमिलनाडु को अतिरिक्त पानी नहीं छोड़ने की मांग की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कावेरी जल छोड़ने के निर्देशों को किसानों के हितों के लिए गंभीर खतरा बताया।
कावेरी जल विवाद को लेकर प्रदर्शनकारियों ने पिछली सरकारों की भी आलोचना की। उनका आरोप था कि लंबे समय से कानूनी लड़ाई और भारी खर्च के बावजूद कावेरी विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है।
वी. नागराज को प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिया
बेंगलुरु में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस ने कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ता वी. नागराज को उनके डॉलर्स कॉलोनी स्थित आवास से एहतियातन हिरासत में लिया।
जानकारी के अनुसार नागराज ने प्रस्तावित रैली में शामिल होने से इनकार करते हुए घर के भीतर ही मौन विरोध का तरीका अपनाया। उन्होंने मुंह पर पट्टी बांधकर विरोध जताया और पुलिस से बातचीत नहीं करने की बात कही।
नागराज के नेतृत्व में बीएमटीसी-केएसआरटीसी बस अड्डे से टाउन हॉल और फिर फ्रीडम पार्क तक रैली निकालने की योजना बताई गई थी। पुलिस ने संभावित प्रदर्शन को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए।
बेंगलुरु में बस, स्कूल और एयरपोर्ट सेवाएं सामान्य
राजधानी बेंगलुरु में कर्नाटक बंद का असर सीमित रहा। केम्पेगौड़ा बस अड्डे से बीएमटीसी और केएसआरटीसी की बस सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हुईं। शहर के प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई और संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई।
बेंगलुरु के स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय भी सामान्य रूप से खुले रहे। देवनहल्ली स्थित केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी बंद का कोई प्रमुख असर दिखाई नहीं दिया।
पुलिस ने बसों को रोकने, यातायात बाधित करने या पथराव जैसी संभावित घटनाओं से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी।
मैसूरु में भी जनजीवन सामान्य
मैसूरु में बंद का प्रभाव मुख्य रूप से विरोध-प्रदर्शनों तक सीमित रहा। उपनगरीय बस अड्डे से बेंगलुरु, मंगलुरु और राज्य के अन्य हिस्सों के लिए बस सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं।
दुकानें, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान सामान्य दिनों की तरह खुले रहे। ऑटो और टैक्सी सेवाएं भी चलती रहीं।
हालांकि, उपनगरीय बस अड्डे के पास कुछ कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं ने बसों को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों ने कर्नाटक और तमिलनाडु सरकारों के खिलाफ नारे लगाए और तमिलनाडु को कावेरी का पानी नहीं देने की मांग की।
कावेरी मुद्दे पर केंद्र से मध्यस्थता की मांग
‘कर्नाटक सेना’ के जिला अध्यक्ष तेजस लोकेश गौड़ा ने राज्य सरकार से कावेरी मुद्दे पर तमिलनाडु के दबाव में नहीं आने की अपील की। उन्होंने केंद्र सरकार से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच मध्यस्थता करने तथा दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाकर स्थायी समाधान खोजने की मांग की।
उन्होंने कम बारिश वाले वर्षों में पानी के बंटवारे के लिए वैज्ञानिक फॉर्मूला तैयार करने की आवश्यकता बताई। साथ ही मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया।
कावेरी जल विवाद में पानी की उपलब्धता, किसानों की सिंचाई जरूरत और पेयजल सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कम बारिश वाले वर्षों में पानी के बंटवारे को लेकर ऐसा तंत्र होना चाहिए, जिससे दोनों राज्यों की आवश्यकताओं का संतुलन बनाया जा सके।
समर्थन वापस लेने से कमजोर पड़ा बंद
कर्नाटक बंद के राज्यव्यापी प्रभाव को लेकर तस्वीर मिश्रित रही। जहां मांड्या में किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों का विरोध तेज रहा, वहीं बेंगलुरु और मैसूरु जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्रों में परिवहन, शिक्षा, बाजार और हवाई यातायात सामान्य रहा।
बंद का आह्वान करने वाले समूह के लिए विभिन्न कन्नड़ संगठनों का समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा था। लेकिन कुछ संगठनों द्वारा बाद में बंद से दूरी बनाने के कारण इसका असर पहले की अपेक्षा सीमित रहा।
फिलहाल कावेरी जल विवाद एक बार फिर कर्नाटक की राजनीति, किसान संगठनों और कन्नड़ समर्थक समूहों के बीच प्रमुख मुद्दा बन गया है। मांड्या में प्रदर्शन और हाईवे जाम ने जहां विरोध की तीव्रता दिखाई, वहीं बेंगलुरु और मैसूरु में सामान्य जनजीवन ने राज्यव्यापी बंद की सीमित पहुंच को सामने रखा।
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