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FCRA संशोधन बिल पर संसद में हंगामा, संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया विधेयक

  • लेखक की तस्वीर: Ashok kumar Singh
    Ashok kumar Singh
  • 14 अग॰
  • 2 मिनट पठन
FCRA संशोधन बिल 2026 पर संसद-गृह, किताब व हथौड़ा; JPC रिपोर्ट, लोकसभा में हंगामा और विधेयक से जुड़े हिंदी टेक्स्ट वाला न्यूज ग्राफिक

भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली 12 अगस्त, 2026,

दिल्ली विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए लाया गया Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 यानी FCRA संशोधन विधेयक संसद में राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। 12 अगस्त 2026 को लोकसभा ने विधेयक को विस्तृत जांच और विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया। इसका अर्थ यह है कि विधेयक अभी कानून नहीं बना है और आगे संसदीय जांच की प्रक्रिया से गुजरेगा।


क्या है FCRA संशोधन विधेयक?


FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act भारत में विदेशी अंशदान प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाला कानून है। 2026 का संशोधन विधेयक ऐसे संगठनों के विदेशी अंशदान और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन से संबंधित नई व्यवस्था प्रस्तावित करता है, जिनका FCRA प्रमाणपत्र रद्द हो गया हो, संगठन ने उसे वापस कर दिया हो या उसका नवीनीकरण नहीं हुआ हो।


विधेयक में ऐसे मामलों के लिए एक Designated Authority बनाने का प्रस्ताव है, जो संबंधित विदेशी अंशदान और उससे जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन तथा निपटान की प्रक्रिया देखेगी। धार्मिक स्थल से जुड़ी संपत्ति के मामले में उसके धार्मिक चरित्र को बनाए रखने की बात भी विधेयक में प्रस्तावित है।


विधेयक अभी कानून नहीं बना


फैक्ट-चेक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि FCRA संशोधन विधेयक को संसद ने अभी पारित करके कानून का रूप नहीं दिया है। 12 अगस्त को इसे JPC को भेजा गया है। समिति विधेयक के प्रावधानों की जांच करेगी और उसके बाद संसदीय प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इसलिए सोशल मीडिया पर यदि यह दावा किया जा रहा है कि “FCRA नया कानून लागू हो गया” तो उसे सही नहीं माना जा सकता।


विपक्ष ने जताई आपत्ति


विपक्षी दलों ने विधेयक को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित प्रावधानों का असर गैर-सरकारी संगठनों और अल्पसंख्यक संस्थाओं पर पड़ सकता है। सरकार और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है और विधेयक को विदेशी अंशदान से जुड़ी व्यवस्था में पारदर्शिता तथा निगरानी मजबूत करने की दिशा में कदम बताया है।


JPC में होगी विस्तृत जांच


विधेयक को JPC के पास भेजे जाने का मतलब है कि अब विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। समिति संबंधित पक्षों से राय लेने और विधेयक के प्रभावों की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट संसद के समक्ष रखेगी। इसके बाद विधेयक पर आगे की संसदीय कार्रवाई होगी।

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