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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • नेपाल में जलप्रलय का कहर: 1,127 मौतें, 4,858 लोग लापता; युद्धस्तर पर तलाश जारी

    भारतार्थ खबर संवाददाता (Bhaarataarth.com) काठमांडू | 2 सितंबर 2026 नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और उससे जुड़ी आपदा ने भारी तबाही मचा दी है। ताजा जानकारी के अनुसार अब तक 1,127 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 4,858 लोग अभी भी लापता हैं। सुरक्षा बलों और राहत टीमों का खोज एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाल पुलिस के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव और शवों की पहचान का काम भी चल रहा है। पुलिस ने 911 अज्ञात शवों का विवरण उपलब्ध कराया है, ताकि लापता लोगों के परिजन उनकी पहचान कर सकें। सबसे अधिक शव चितवन जिले से बरामद हुए हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम, नुवाकोट, गोरखा, धादिंग, रसुवा और तनहूं सहित कई जिले बाढ़ की चपेट में आए हैं। भारत में भी नेपाल की बाढ़ से जुड़े नौ शव बरामद होने की जानकारी सामने आई है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद कई इलाकों में सड़कें, पुल, घर और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। राहत और बचाव दल मलबे तथा कठिन परिस्थितियों के बीच लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। कुछ जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में भी लोगों के फंसे होने की आशंका के कारण बचाव अभियान विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। नेपाल में जारी यह त्रासदी पूरे क्षेत्र के लिए बेहद गंभीर मानवीय संकट बन गई है। प्रशासन और सुरक्षा बलों का मुख्य जोर लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और बरामद शवों की पहचान कर उन्हें परिजनों तक पहुंचाने पर है।

  • PM मोदी का बड़ा संदेश: विदेश घूमने, विदेश में शादी और जरूरत न हो तो सोना खरीदने से बचें

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की अपील करते हुए कहा कि जहां संभव हो, वहां देश में बने उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से अनावश्यक विदेशी यात्राओं, विदेश में शादी समारोह आयोजित करने और जरूरत न होने पर सोना खरीदने से बचने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री का संदेश ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में स्थानीय उत्पादन, घरेलू बाजार को मजबूत करने और भारतीय अर्थव्यवस्था में अधिक से अधिक धन के प्रवाह को लेकर लगातार जोर दिया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपनी जरूरत और खर्च को लेकर सोच-समझकर निर्णय लेने की अपील की। विदेश में होने वाले खर्च की जगह देश के भीतर पर्यटन, विवाह समारोह और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा देने से घरेलू कारोबार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। प्रधानमंत्री ने सोने की खरीद को लेकर भी लोगों से सावधानी बरतने की बात कही। उनका संदेश है कि यदि सोने की वास्तविक जरूरत नहीं है तो केवल खरीदारी के लिए धन खर्च करने के बजाय उसे देश की अर्थव्यवस्था में उपयोगी गतिविधियों में लगाया जा सकता है। प्रधानमंत्री की इस अपील को ‘वोकल फॉर लोकल’, स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। संदेश का मूल उद्देश्य देश के भीतर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और भारतीय उत्पादों एवं सेवाओं के प्रति लोगों की प्राथमिकता मजबूत करना है। मोटू-पतलू शैली के लोकप्रिय यूट्यूब क्रिएटर के लिए भारतार्थ प्रचार वीडियो प्रॉम्प्ट: “भारतार्थ खबर के लिए 45 से 60 सेकंड का एक मनोरंजक, जानकारीपूर्ण और परिवार के साथ देखने योग्य हिंदी प्रचार वीडियो तैयार करें। वीडियो में मोटू और पतलू जैसे दो मजेदार, गोल-मटोल और दुबले-पतले दोस्त दिखाई दें, लेकिन किसी मौजूदा कार्टून शो के हूबहू पात्र, नाम, आवाज, लोगो या कॉपीराइटेड दृश्य का उपयोग न किया जाए। दोनों पात्र भारत में पर्यटन, स्थानीय बाजार, स्वदेशी उत्पादों और घरेलू कारोबार को बढ़ावा देने पर हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत करें। वीडियो की शुरुआत एक आकर्षक सवाल से हो: ‘क्या आपका खर्च भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है?’ इसके बाद संवाद के माध्यम से बताया जाए कि अनावश्यक विदेश यात्रा, विदेश में शादी और जरूरत न होने पर सोना खरीदने के बजाय देश के भीतर पर्यटन, स्थानीय सेवाओं और भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देना उपयोगी हो सकता है। संदेश को संतुलित रखें और यह स्पष्ट करें कि अंतिम निर्णय व्यक्ति अपनी जरूरत, बजट और परिस्थितियों के अनुसार लें।

  • पुस्तक समीक्षा - "काले अक्षर कविता और कवि" काव्य संग्रह

    समीक्षक - लालबहादुर चौरसिया 'लाल' महामंत्री - विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी, आज़मगढ़ इकाई "वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान, उमड़कर आँखों से चुपचाप बही होगी कविता अनजान।" महाकवि सुमित्रानंदन पंत जी की इन पंक्तियों को जब मैं पढ़ता हूँ और इसकी गहराई में जाता हूँ, तो अनेक कवियों की छाया मेरे अंतःपटल पर अंकित हो उठती है। ऐसे कवि सिर्फ़ समाज के लिए अवतरित होते हैं। समाज की पीड़ा और आह्लाद उनकी कविताओं में निहित होता है। उन्हीं कवियों में एक हैं साहित्यकार श्री पवन तिवारी जी। "काले अक्षर कविता और कवि" उनका पहला काव्य संग्रह है। कविता क्या है? कवि क्या है? इन शब्दों की परिभाषाएँ अनेक विद्वानों ने अपनी-अपनी क्षमता के अनुरूप दी हैं। कविता मन की सूक्ष्म अभिव्यक्ति है। कविता किसी कवि द्वारा की गई साहित्यिक साधना का वह प्रसाद है, जिसके ग्रहण करने से संपूर्ण जनमानस सुखद एवं तृप्ति की अनुभूति प्राप्त करता है। हाँ, एक बात तो सत्य है कि कविता के तीन मूल तत्त्व हैं, यदि कोई कविता इन तीनों मूल तत्त्वों से विरक्त है तो वह कविता कहलाने की हक़दार नहीं है। ये तीनों मूल तत्त्व हैं - लोक-रंजन, लोक-मंगल व लोक-रक्षण। पवन तिवारी जी की पुस्तक "काले अक्षर कविता और कवि" सैंतीस विविध रंगों व भावों से अनुप्राणित कविताओं का एक अनूठा काव्य संग्रह है। पुस्तक की सभी रचनाएँ अतुकांत हैं। कविता में पीड़ा के साथ-साथ समाज की विभिन्न विद्रूपताओं को साहित्यकार पवन तिवारी जी ने पटल पर लाने का भरपूर प्रयास किया है। वास्तव में कविता पीड़ा से ही निकलती है, अभाव से निकलती है। परिस्थितियाँ जब विपरीत होती हैं तब कविता निकलती है। कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि जो ग़रीब हो या जो अभाव से ग्रस्त हो, वही कविता लिखेगा। कविता लिखने के लिए हमें अपने मन को वहाँ तक पहुँचाना होगा, तब जाकर सच्ची कविता निकलेगी। सच्ची कविता को ही समाज अंगीकार करेगा। पुस्तक "काले अक्षर कविता और कवि" इन्हीं मनोभावों से अनुप्राणित है। कवि श्री पवन तिवारी जी ने अपनी पुस्तक में सिर्फ़ स्वयं से संवाद नहीं किया है। यह संवाद लाखों-करोड़ों लोगों का संवाद जान पड़ता है। यही कविता की सार्थकता है। पवन जी ने अनेक अनछुए पहलुओं पर अपनी लेखनी चलाई है। पुस्तक की दूसरी कविता 'मरकर लिया भूख ने बदला' में मनुष्य और भूख का अंतर्द्वंद्व चिंतन करने पर मजबूर कर देता है। मनुष्य हो या कोई जीव, वह भूखा नहीं रह सकता। किंतु अभाव में, विपन्नता में जब उसे भोजन नहीं मिलता है तो उसके अंदर भूख का जन्म होता है। धीरे-धीरे भूख अपने चरम पर पहुँचती है, अर्थात जवान होती है और जब भोजन की पूर्ति नहीं होती है तो धीरे-धीरे मरने लगती है। भूख सिर्फ़ भोजन की ही नहीं होती। मान की भी होती है, पद की भी होती है, प्रतिष्ठा की भी होती है, धन की भी होती है। पवन जी ने भूख के माध्यम से बड़ा ही सूक्ष्म अवलोकन प्रस्तुत किया है - "भूख ने देख लिया था, मेरी मजबूरी की रसोई को, शायद इसीलिए उसने साध ली थी, चुप्पी, उसे आदत पड़ गई थी, भूख घुट-घुट कर मर रही थी, अंदर ही अंदर।" कविता 'अब मैं गाँव नहीं हूँ' में पवन तिवारी जी ने गाँव के बदलते स्वरूप का बड़ा ही हृदयस्पर्शी खाका खींचा है। गाँव के भौगोलिक एवं सांस्कृतिक बदलाव पर कवि स्वयं स्तब्ध हैं। कविता पढ़कर जिसने गाँव देखा है वह ज़रूर भावुक हो जाएगा। इस कविता में गाँव अपने हृदय के दर्द को चीख़-चीख़ कर बयाँ कर रहा है। एक बानगी देखें - "मुझे शहर बनाने के नाम पर, विकास के नाम पर, लूटा गया। मुझे पिछड़ा, गँवार कह कर, दुत्कारा गया, शहर बनने के सपने दिखाए गए, हमारे खेतों-खलिहानों को, उद्योगों के नाम पर हड़प लिया गया।" बारिश का मौसम सभी को बड़ा ही मनोहारी लगता है, बड़ा ही सुहाना व सुखद होता है। बारिश तो सभी ने अवश्य देखी होगी। हज़ारों कवियों ने वर्षा ऋतु का वर्णन बड़े ही रोचक ढंग से किया है। कहा जाता है वर्षा ऋतु, नायक-नायिका के प्रेम में उद्दीपन का आधार प्रदान करती है। बरसात का मौसम पवन तिवारी जी ने भी देखा, लेकिन क्या देखा - बिल्कुल अलग। 'निर्दयी और बदसूरत बारिश' शीर्षक कविता में कवि ने एक असहाय, पत्थर काटने वाली, सड़क के किनारे झुग्गी-झोपड़ी में रात बिताने वाली अबला की व्यथा का चित्रण करते हुए लिखा है - "टाट की छत से, उसके चूल्हे और भात में, बेरहमी से टपकी, नहीं बरसी थी, नीचे भी, ज़बरदस्ती घुस आई थी, फटी चटाई पर और, उस पर सोया था, उसका दो साल का बेटा।" कवि श्री पवन तिवारी जी ने 'मैंने भविष्य देखा' शीर्षक कविता में अपनी बेबाक़ लेखनी चलाई है और ऐसे भविष्य को देखा है कि जिसके एहसास मात्र से ही रोम-रोम कंपायमान हो उठता है। समाज के तीव्र गति से बदलते स्वरूप की ऐसी तस्वीर दिखाई गई है कि पढ़कर मन द्रवित हो उठता है - "यहाँ अब पति-पत्नी नहीं होते, विवाह शब्द भविष्य के लोग नहीं जानते, स्त्रियों एवं पुरुषों में कोई भेद नहीं होता, वे माँ नहीं बनतीं, बच्चे नहीं जनतीं। मनुष्य हो गया है रोबोट, और रोबोट मनुष्यता की ओर बढ़ रहा है, मनुष्य, मनुष्य से आदमी और, आदमी से रोबोट हो गया है।" 'तब लिखता हूँ कविता' शीर्षक के माध्यम से पवन जी समय का आवरण हटाकर समाज में फैली विभीषिका को बड़े ही आत्मीय ढंग से प्रस्तुत करते हैं - "मैं क्यों लिखता हूँ, तुम रोज़ पूछते हो, सो सोचा आज तुम्हें बता दूँ, एक श्रमिक को, मज़दूरी के बदले मिलती हैं, निःशुल्क भद्दी गालियाँ, वह समझ नहीं पाता कि, क्यों मिलीं उसे गालियाँ, तड़प उठता है, उसका रोम-रोम।" पवन तिवारी जी के काव्य संग्रह की कविताएँ - 'आलोचना की खोज', 'सपने में गाँव', 'सबसे बड़ा दुख', 'कवि और पीड़ा', 'गाँव में नई दीवारें', 'काले अक्षर कविता और कवि', 'पेड़ अब नहीं हँसता', 'मैं तुम पर कविता क्यों नहीं लिखता' - शीर्षक के रूप में बड़ी ही हृदयस्पर्शी हैं। कविताओं में भाव, भाषा, शिल्प, कथ्य व प्रवाह बेजोड़ है। आर. के. पब्लिकेशन, मुंबई से प्रकाशित यह पुस्तक श्री पवन जी का शानदार काव्य संग्रह है। काव्य संग्रह प्रकाशन के साथ-साथ साहित्यकार श्री पवन तिवारी जी को हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। मेरा पूर्ण विश्वास है कि साहित्य जगत में यह पुस्तक "काले अक्षर कविता और कवि" एक कीर्तिमान स्थापित करेगी। समीक्षक - लालबहादुर चौरसिया 'लाल' महामंत्री - विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी, आज़मगढ़ इकाई

  • SCO मंच पर मोदी, पुतिन और जिनपिंग की मुलाकात

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बिश्केक (किर्गिस्तान), 1 सितंबर 2026। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। सम्मेलन के दौरान तीनों नेताओं की संक्षिप्त बातचीत और अभिवादन के दृश्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया तथा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने रहे। एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान विभिन्न सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों का आधिकारिक समूह फोटो सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति शी जिनपिंग, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित कई देशों के नेता एक ही मंच पर मौजूद रहे। रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने समूह फोटो से पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से संक्षिप्त मुलाकात की और बातचीत की। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच इस अवसर पर किसी औपचारिक बातचीत या हाथ मिलाने की सूचना सामने नहीं आई। 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित हुआ शिखर सम्मेलन बिश्केक में आयोजित यह एससीओ सम्मेलन संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष महत्व रखता है। सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान और मध्य एशियाई देशों सहित सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया। भारत वर्ष 2017 से शंघाई सहयोग संगठन का पूर्ण सदस्य है। संगठन क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, संपर्क व्यवस्था, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय समन्वय जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच संवाद का मंच प्रदान करता है। रूस-यूक्रेन संघर्ष और शांति पर भारत का रुख प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई बातचीत में भारत-रूस संबंधों के साथ विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की गई। रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर भारत का रुख दोहराया। भारत लगातार यह कहता रहा है कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण माध्यमों से ही संभव है। भारत-पाकिस्तान संबंधों पर रही नजर एससीओ सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी के कारण भारत-पाकिस्तान संबंधों पर भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजर रही। हालांकि समूह फोटो और सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच किसी औपचारिक द्विपक्षीय मुलाकात की घोषणा नहीं की गई। सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं के संबंध में विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर किसी घटना के राजनीतिक अर्थ निकालने से पहले आधिकारिक जानकारी और संबंधित पक्षों के बयानों को महत्वपूर्ण माना जाता है। वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय कूटनीति एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी को भारत की बहुपक्षीय कूटनीति के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। सम्मेलन में सुरक्षा, आतंकवाद, क्षेत्रीय संपर्क, आर्थिक सहयोग और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर चर्चा केंद्र में रहे। बिश्केक में एक ही मंच पर भारत, रूस और चीन के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी ने सम्मेलन को विशेष अंतरराष्ट्रीय महत्व प्रदान किया।

  • जल विवादों पर कर्नाटक की कानूनी तैयारी तेज

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026। कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री एन. चालुवारायास्वामी ने राज्य से जुड़े प्रमुख अंतरराज्यीय नदी जल विवादों और महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं पर कानूनी रणनीति को मजबूत करने के उद्देश्य से नई दिल्ली में वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में कावेरी नदी जल विवाद, मेकेदातु परियोजना तथा अपर कृष्णा परियोजना (यूकेपी) से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और कानूनी टीम के प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया। बैठक में जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव गौरव गुप्ता, केबीजेएनएल के प्रबंध निदेशक कृष्णमूर्ति कुलकर्णी, आईएसडब्ल्यू के मुख्य अभियंता नंदीश तथा सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड निशांत पाटिल सहित राज्य की कानूनी टीम के वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। कावेरी विवाद पर कानूनी पहलुओं की समीक्षा बैठक में कावेरी नदी जल विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और कावेरी बेसिन में जल उपलब्धता की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की गई। इसके साथ ही कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपनाई जाने वाली कानूनी रणनीति और आवश्यक कदमों पर विचार-विमर्श हुआ। राज्य के पक्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए उपलब्ध तथ्यों, जल की वास्तविक स्थिति और कानूनी प्रावधानों के आधार पर मजबूत तर्क तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। मेकेदातु परियोजना के महत्व पर चर्चा जल संसाधन मंत्री एन. चालुवारायास्वामी ने बैठक के दौरान मेकेदातु परियोजना के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बदलती जलवायु परिस्थितियों और वर्षा के पैटर्न में हो रहे बदलावों के संदर्भ में जल भंडारण क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री ने कानूनी टीम के समक्ष यह पक्ष रखा कि मेकेदातु जलाशय परियोजना से जल प्रबंधन को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है और इसका लाभ कर्नाटक के साथ-साथ निचले क्षेत्रों में जल उपयोग से जुड़े हितों को भी मिल सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा जल परिस्थितियां और वर्षा में उतार-चढ़ाव भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रभावी जल प्रबंधन की जरूरत को दर्शाते हैं। अपर कृष्णा परियोजना की चुनौतियों पर मंथन बैठक में अपर कृष्णा परियोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इनमें परियोजना क्षेत्र में जलमग्न भूमि से संबंधित चुनौतियां, भूमि अधिग्रहण, प्रभावित लोगों को मुआवजा वितरण, मध्यस्थता संबंधी कार्यवाही और विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों का विषय प्रमुख रहा। इन मामलों के शीघ्र और प्रभावी समाधान के लिए कानूनी एवं प्रशासनिक स्तर पर संभावित रणनीतियों पर विचार किया गया। परियोजना से जुड़े लंबित विवादों के समाधान की दिशा में आवश्यक कानूनी कदमों को लेकर भी चर्चा हुई। किसानों के हितों की सुरक्षा पर जोर बैठक में अंतरराज्यीय जल विवादों में कर्नाटक के दावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा राज्य के किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। मंत्री की मौजूदगी में कानूनी विशेषज्ञों और अधिकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले संभावित कानूनी तर्कों और रणनीतिक दृष्टिकोण पर व्यापक विचार-विमर्श किया। बैठक को कर्नाटक से जुड़े महत्वपूर्ण जल विवादों और सिंचाई परियोजनाओं के मामलों में राज्य की कानूनी तैयारी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में कावेरी जल विवाद, मेकेदातु परियोजना और अपर कृष्णा परियोजना से संबंधित मामलों में राज्य की आगे की कानूनी कार्रवाई पर विशेष नजर रहेगी।

  • नेपाल में जलप्रलय, 1,003 मौतें

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com काठमांडू, 1 सितंबर 2026। नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की आपदा ने व्यापक तबाही मचा दी है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, मंगलवार दोपहर तक 1,003 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 3,916 लोग अब भी लापता हैं। प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान जारी है। हिमालयी क्षेत्र में 26 अगस्त को शुरू हुई इस प्राकृतिक आपदा के बाद बर्फ, पानी, चट्टानों और भारी मलबे के तेज बहाव ने निचले इलाकों में भारी विनाश किया। फ्लैश फ्लड की चपेट में आने से सड़कें, पुल, मकान और अन्य महत्वपूर्ण ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए। कई जिलों में तबाही का व्यापक असर रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहुन, चितवन और आसपास के क्षेत्रों में आपदा का व्यापक प्रभाव देखा गया है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित होने के कारण राहत सामग्री पहुंचाने और बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में नुवाकोट, रसुवा और जलविद्युत परियोजनाओं के आसपास के इलाके शामिल हैं। कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों और आसपास के क्षेत्रों में लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है। अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में कर्मचारी और अन्य लोग अब भी लापता हैं। 11 हजार से अधिक लोगों को बचाया गया नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 11 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के हजारों जवान प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। नेपाल की सेना द्वारा दुर्गम इलाकों में हवाई बचाव अभियान भी चलाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने और गंभीर रूप से घायल लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया जा रहा है। जलविद्युत परियोजनाओं पर विशेष बचाव अभियान बचाव दलों का विशेष ध्यान जलविद्युत परियोजनाओं के आसपास फंसे और लापता लोगों की तलाश पर केंद्रित है। कई सुरंगों में भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा भर जाने के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, बचावकर्मी लगातार दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश के प्रयास कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सहायता भी पहुंची भीषण आपदा के बाद नेपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहायता मिल रही है। भारत, चीन और अन्य देशों के साथ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग कर रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने, संपर्क मार्ग बहाल करने और खोज अभियान में अंतरराष्ट्रीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। नेपाल सरकार और राहत एजेंसियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों का पता लगाना, प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को बहाल करना है। यह आपदा हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर संबंधी खतरों से निपटने के लिए बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है।

  • भारत की GDP ने पकड़ी तेज रफ्तार, 7.8% की छलांग

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026। भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 7.8 प्रतिशत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर दर्ज की है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि में दर्ज यह वृद्धि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 6.9 प्रतिशत की तुलना में अधिक रही और आर्थिक अनुमानों से भी बेहतर मानी जा रही है। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पहली तिमाही में देश की वास्तविक सकल मूल्य वर्धित वृद्धि (GVA) 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई। निवेश और घरेलू मांग ने दी अर्थव्यवस्था को मजबूती पहली तिमाही में निवेश गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली। सकल स्थायी पूंजी निर्माण (GFCF) में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो अर्थव्यवस्था में निवेश गतिविधियों के मजबूत होने का संकेत है। घरेलू मांग और उपभोग में भी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि निर्यात क्षेत्र ने आर्थिक गतिविधियों को अतिरिक्त सहारा दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक निवेश के साथ निजी क्षेत्र की निवेश गतिविधियों में तेजी ने आर्थिक वृद्धि को मजबूती प्रदान की। विनिर्माण क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन देश के विनिर्माण क्षेत्र ने पहली तिमाही की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट, सूचना प्रौद्योगिकी और पेशेवर सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों ने भी आर्थिक गतिविधियों को गति दी। पिछली तिमाही से कम, लेकिन सालाना आधार पर बेहतर हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में दर्ज संशोधित 8.6 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में मौजूदा तिमाही की 7.8 प्रतिशत वृद्धि कम है, लेकिन सालाना आधार पर अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन मजबूत रहा है। पिछले वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस लिहाज से मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत प्रदर्शन वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों, मुद्रास्फीति, रुपये की स्थिति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जताया विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि को देश की अर्थव्यवस्था के लिए उत्साहजनक बताया। उन्होंने कहा कि मजबूत आर्थिक आंकड़े देश में बढ़ते आर्थिक विश्वास को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और देशवासियों की सामूहिक क्षमता को प्रतिबिंबित करता है। भारत की अर्थव्यवस्था के सामने अब चुनौती इस विकास गति को आने वाली तिमाहियों में बनाए रखने की होगी। इसके लिए घरेलू मांग, निजी निवेश, विनिर्माण, निर्यात और रोजगार सृजन को निरंतर मजबूती देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • BRICS से पहले दिल्ली में ट्रैफिक अलर्ट, VVIP रिहर्सल से बदले मार्ग

    भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026। आगामी BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियों के बीच मंगलवार को नई दिल्ली में VVIP मोटरकेड की फुल-स्केल रिहर्सल के चलते कई प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। सुरक्षा तैयारियों के तहत कुछ स्थानों पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के साथ आवश्यकता के अनुसार यातायात को वैकल्पिक मार्गों की ओर डायवर्ट किया गया। रिहर्सल को देखते हुए नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के संवेदनशील एवं प्रमुख मार्गों पर यातायात पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। सुरक्षा व्यवस्था और VVIP आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए विभिन्न चौराहों एवं मार्गों पर विशेष निगरानी रखी गई। इन प्रमुख मार्गों पर पड़ा असर रिहर्सल के दौरान सरदार पटेल मार्ग, मदर टेरेसा क्रिसेंट, तीन मूर्ति मार्ग, अकबर रोड, मथुरा रोड, डॉ. जाकिर हुसैन मार्ग, जनपथ, अशोका रोड, बाराखंबा रोड, शांति पथ, नीति मार्ग और पंचशील मार्ग सहित कई प्रमुख सड़कों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया। यातायात नियंत्रण के दौरान जरूरत के अनुसार वाहनों को वैकल्पिक रास्तों पर भेजा गया। आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों की आवाजाही को प्राथमिकता देने की व्यवस्था भी रखी गई। यात्रियों से अतिरिक्त समय लेकर चलने की अपील इन मार्गों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है। ऐसे में यातायात पुलिस ने यात्रियों से घर से निकलने से पहले संबंधित मार्गों की स्थिति की जानकारी लेने और संभावित यातायात दबाव को देखते हुए यात्रा के लिए अतिरिक्त समय रखने की सलाह दी है। भीड़भाड़ वाले मार्गों से बचने के लिए सार्वजनिक परिवहन, विशेषकर मेट्रो सेवा, का उपयोग यात्रियों के लिए सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। BRICS सम्मेलन को लेकर सुरक्षा तैयारियां तेज नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा और यातायात संबंधी तैयारियों को तेज किया गया है। संभावित VVIP आवागमन को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियों और यातायात व्यवस्था से जुड़े विभागों द्वारा तैयारियां की जा रही हैं। मंगलवार को हुआ VVIP मोटरकेड रिहर्सल इसी व्यापक सुरक्षा तैयारी का हिस्सा बताया गया। सम्मेलन से पहले आने वाले दिनों में भी सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार दिल्ली के कुछ क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था में अस्थायी बदलाव किए जा सकते हैं। यात्रियों से यातायात संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देने और निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की गई है।

  • आतंकवाद पर मोदी का दो टूक संदेश

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बिश्केक, 1 सितंबर 2026। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का कड़ा और स्पष्ट रुख दोहराया। उन्होंने सदस्य देशों से आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करने के लिए एकजुट होकर कार्रवाई करने का आह्वान किया। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान सहित एससीओ सदस्य देशों के शीर्ष नेता मौजूद रहे। आतंकवाद के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की अपील प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल आतंकवादियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने आतंकवाद की फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वाले पूरे नेटवर्क को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने एससीओ सदस्य देशों से आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंड समाप्त करने और एक समान नीति अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में रणनीतिक साधन के तौर पर इस्तेमाल करने या आतंकियों को समर्थन एवं संरक्षण देने की अनुमति नहीं दी जा सकती। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ व्यापक और समन्वित कार्रवाई की मांग करता रहा है। एससीओ सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री मोदी ने इसी नीति को स्पष्ट रूप से सामने रखा। मोदी-शी-पुतिन की मुलाकात ने खींचा ध्यान शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात भी चर्चा का केंद्र रही। सम्मेलन स्थल पर प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर अभिवादन किया और दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत हुई। वहीं रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात को भारत-रूस संबंधों और वैश्विक मुद्दों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और रूस के नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग के साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों नेताओं ने भारत की वर्ष 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के संदर्भ में भी चर्चा की। वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय कूटनीति एससीओ सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय भागीदारी को भारत की बहुपक्षीय कूटनीति के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत एक ओर सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे को मजबूती से उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संवाद और सहयोग की नीति को भी आगे बढ़ा रहा है। सम्मेलन के दौरान मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन की मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। हालांकि इन मुलाकातों को किसी नए राजनीतिक गठबंधन के संकेत के रूप में देखना जल्दबाजी होगी, क्योंकि भारत लगातार स्वतंत्र और राष्ट्रीय हितों पर आधारित विदेश नीति को प्राथमिकता देता रहा है। अब नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन पर नजर बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के बाद अब वैश्विक समुदाय की नजर नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर है। भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के नेताओं के साथ आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रखा गया है। एससीओ मंच से आतंकवाद के खिलाफ प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट संदेश यह दर्शाता है कि भारत आतंकवाद, उसकी फंडिंग और उसे संरक्षण देने वाले तंत्र के खिलाफ वैश्विक स्तर पर ठोस कार्रवाई की मांग को लगातार आगे बढ़ाता रहेगा।

  • पुस्तक समीक्षा : "ऐ नाविक! थोड़ा ठहरो ना"

    कवयित्री - सरोज यादव , समीक्षक - लालबहादुर चौरसिया लाल महामंत्री -विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई "ऐ नाविक! थोड़ा ठहरो ना" काव्य-संग्रह आज़मगढ़ की प्रतिष्ठित कवयित्री श्रीमती सरोज यादव जी की अनुपम काव्य-कृति ही नहीं, वरन् विविध रंगों के फूलों से सजा एक अनुपम गुलदस्ता है। काव्यानुभूति की व्यापकता से परिपूर्ण कवयित्री सरोज जी की यह पुस्तक लोकमंगल, लोकरंजन व लोकरक्षण से परिपूर्ण मानवीय मूल्यों का उद्बोधन करती है तथा संपूर्ण मानव-जगत को नए-नए आयाम देने के प्रति समर्पित है। जब रचनाकार साहित्यिक साधना में डुबकी लगाता है, तो उसे शब्द-संधान की व्यापक रहस्यानुभूति प्राप्त होती है। ऐसी ही रहस्यानुभूति सरोज जी की अनेक रचनाओं में देखने को मिलती है, जो लोकमंगल का ध्वज लिए खड़ी प्रतीत होती है। मातृभूमि के प्रति कवयित्री की रचना नमन-योग्य है। जग की जो सुंदरतम रचना, जो स्वर्गलोक से न्यारी है। वह है मेरी मातृभूमि, मुझको प्राणों से प्यारी है।। चाहे मातृभूमि की बात हो, प्रकृति की बात हो, नारी-चिंतन हो, प्रेम की बात हो या गरीबी, भुखमरी, मजदूरी की बात हो - सरोज जी ने समाज की तमाम ज्वलंत समस्याओं पर न केवल लेखनी चलाई है, बल्कि समाज को सामाजिक विसंगतियों के प्रति सचेत भी किया है। सरोज जी ने सच को सिर्फ सच लिखा है, वो भी बेबाक, निर्भीक व निडर होकर। कवयित्री सरोज जी एक नारी हैं। उनकी तमाम रचनाएँ नारी की मनोवृत्तियों से अभिसिंचित हैं। नारी-मन अति कोमल होता है। प्रकृति के विविध आयामों को जब स्त्री-मन छूता है तो उसकी लचक और कल्पनाशीलता मक्खन की तरह सौम्य हो जाती है। संपूर्ण नारी-समूह को सचेत करते हुए सरोज जी ने 'कब तक अबला अभी कहेगा' शीर्षक में लिखा है - कब तक अबला अभी कहेगा, नारी तुमको यह संसार। दीवारों में दबी रहेगी, कब तक तेरी चीख-पुकार।। "नारी तुम शक्ति स्वरूपा हो" शीर्षक में कवयित्री ने नारी को उसके स्वरूप का व्यापक बोध कराते हुए लिखा है - नारी तुम शक्ति स्वरूपा हो, कमजोर नहीं खुद को मानो, तुझसे अस्तित्व मिला जग को, ना और डरो, निर्भय हो जाओ।। उपर्युक्त कविता पढ़कर हमें प्रसाद जी की 'कामायनी' याद आती है, जिसमें प्रसाद जी ने कहा है - नारी! तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास-रजत-नग पग-तल में, पीयूष-स्रोत सी बहा करो, जीवन के सुंदर समतल में।। किंतु कवयित्री सरोज जी ने नारी के अधिकार का व्यापक उद्बोधन किया है। उनके हृदय में समग्र समाज के प्रति एकता का भाव है। उन्हें यह बखूबी ज्ञात है कि जब संपूर्ण समाज एक सूत्र में बँधता है, तो एक स्वस्थ समाज का निर्माण होता है। कवयित्री के मन में मीरा, महादेवी और सुभद्रा कुमारी चौहान की भावनाएँ रची-बसी हैं, जो गगन-मंडल पर धैर्य, संतोष, एकता के साथ-साथ अधिकार का ध्वज लिए खड़ी प्रतीत होती हैं। पुस्तक के शीर्षक में हमें एक याचना का स्वर सुनाई देता है, वो भी नाविक से, तथा किनारों से साक्षात्कार करने की अभिलाषा जागृत होती है। कवयित्री चाहतीं तो बलपूर्वक नाविक को रोक सकती थीं, किंतु ऐसा नहीं है। यह कवयित्री के विशाल हृदय का उदाहरण है। कवयित्री के मन में पपीहे की भावना आंदोलित है, जो बादलों से स्वाति की बूँद माँगने का प्रयास करती है। स्वाति का जल सिर्फ पपीहे की प्यास नहीं बुझाता, वरन् संपूर्ण धरा पर स्थित या विचरण करने वाले जड़ व चेतन सभी को संपन्नता प्रदान करता है। एक-दो रचना करके कोई कवि नहीं बन जाता। कवि बनने के लिए उसे कविता में जीना पड़ता है। किसी पुस्तक का आना रचनाकार के एक-दो दिन का नहीं, वरन् उसके वर्षों के चिंतन व साधना का परिणाम होता है। साहित्य-जगत में कवयित्री सरोज जी की पुस्तक "ऐ नाविक! थोड़ा ठहरो ना" एक नया कीर्तिमान स्थापित करे, यही मेरी शुभकामना है। लालबहादुर चौरसिया "लाल"गीतकार व कवि 9452088890

  • एक देश, एक समय: मार्च 2027 से IST होगा आधिकारिक मानक

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026। भारत में समय को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 को 27 अगस्त 2026 को अधिसूचित कर दिया है। नए नियमों के तहत इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) को देशभर में कानूनी, प्रशासनिक, वाणिज्यिक और अन्य आधिकारिक कार्यों के लिए सामान्य समय-संदर्भ बनाया जाएगा। नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के 180 दिन बाद प्रभावी होंगे। ऐसे में इनके मार्च 2027 के आसपास लागू होने की संभावना है। हालांकि, अंतिम प्रभावी तिथि राजपत्र में प्रकाशन की तारीख के आधार पर तय होगी। क्या है ‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल? सरकार की इस पहल का उद्देश्य देश में समय के लिए एक समान, सटीक और भरोसेमंद राष्ट्रीय संदर्भ स्थापित करना है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, दूरसंचार, रेलवे, बिजली व्यवस्था, कंप्यूटर नेटवर्क और सरकारी रिकॉर्ड जैसे क्षेत्रों में सटीक टाइम-स्टैम्प का महत्व लगातार बढ़ा है। सरकार के अनुसार अलग-अलग समय स्रोतों के कारण होने वाली असंगतियों को कम करने और महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिए भारतीय समय-संदर्भ को मजबूत बनाने में यह व्यवस्था मदद करेगी। 180 दिन का संक्रमण काल नियमों को तत्काल लागू करने के बजाय सरकार ने 180 दिन का समय दिया है। इस अवधि में सरकारी विभागों, कारोबारियों, संस्थानों और अन्य संबंधित संगठनों को अपने मौजूदा सिस्टम की समीक्षा करने तथा आवश्यक तकनीकी बदलाव करने का अवसर मिलेगा। इसमें सर्वर, नेटवर्क, टाइम-सिंक प्रणाली और डिजिटल ढांचे को आधिकारिक भारतीय समय-संदर्भ के अनुरूप तैयार करना शामिल हो सकता है। IST का आधिकारिक आधार क्या होगा? नए नियमों में भारतीय मानक समय को UTC(NPLI) से जुड़े आधिकारिक टाइम स्केल के रूप में परिभाषित किया गया है। नियमों के अनुसार IST, UTC(NPLI) में 5 घंटे 30 मिनट जोड़कर निर्धारित किया जाता है और इसका रखरखाव CSIR-National Physical Laboratory (CSIR-NPL) करता है। इसका उद्देश्य केवल घड़ियों को एक जैसा दिखाना नहीं, बल्कि देश में समय की सटीकता, ट्रेसेबिलिटी, सिंक्रोनाइजेशन और विश्वसनीयता के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय व्यवस्था विकसित करना है। बैंकिंग और डिजिटल भुगतान में फायदा आज लगभग हर डिजिटल वित्तीय लेन-देन के साथ समय का रिकॉर्ड जुड़ा होता है। करोड़ों लेन-देन वाले बैंकिंग और डिजिटल भुगतान तंत्र में सटीक और समान टाइम-स्टैम्प रिकॉर्ड के मिलान तथा तकनीकी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक सामान्य राष्ट्रीय टाइम रेफरेंस ऐसे समय-निर्भर सिस्टम में समन्वय और रिकॉर्ड की एकरूपता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। टेलीकॉम, बिजली और परिवहन क्षेत्र भी होंगे लाभान्वित आधुनिक दूरसंचार नेटवर्क, बिजली प्रणालियां और परिवहन व्यवस्था भी सटीक समय-सिंक्रोनाइजेशन पर निर्भर करती हैं। सरकार की योजना के तहत भारतीय मानक समय के सुरक्षित और सटीक प्रसार के लिए राष्ट्रीय टाइम-डिसेमिनेशन व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इससे बैंकिंग एवं वित्तीय बाजार, दूरसंचार, पावर सिस्टम, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को विश्वसनीय भारतीय टाइम रेफरेंस उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। बेंगलुरु में White Rabbit तकनीक का प्रदर्शन ‘One Nation, One Time’ पहल के तहत 16 जुलाई 2026 को बेंगलुरु के जक्कूर स्थित Regional Reference Standards Laboratory (RRSL) में White Rabbit Technology आधारित IST Dissemination Demonstration Network शुरू किया गया था। यह नेटवर्क CSIR-NPL, ISRO और संबंधित संस्थाओं के सहयोग से विकसित किया गया है। इसके माध्यम से बैंकिंग, वित्तीय बाजार, दूरसंचार, बिजली, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सटीक भारतीय मानक समय पहुंचाने की क्षमता का प्रदर्शन किया गया। सरकार के अनुसार RRSL बेंगलुरु और NSE चेन्नई के बीच भी White Rabbit Technology के माध्यम से IST के सुरक्षित प्रसार का सत्यापन किया गया। इसमें CSIR-NPL, ISRO, SEBI, NSE, BSNL और अन्य संबंधित संस्थाओं ने सहयोग किया। विदेशी टाइम सोर्स पर निर्भरता घटाने की दिशा सरकार का कहना है कि भारत में स्वदेशी टाइम-डिसेमिनेशन ढांचे को मजबूत करने से महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिए बाहरी टाइम स्रोतों पर निर्भरता कम करने के अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होंगे। इसका उद्देश्य किसी विदेशी समय प्रणाली को अचानक बंद करना नहीं, बल्कि भारत के पास अपना अधिक मजबूत, सुरक्षित और ट्रेसेबल राष्ट्रीय टाइम इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना है। आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर? आम नागरिकों के लिए यह किसी नई घड़ी या अलग समय क्षेत्र की शुरुआत नहीं है। भारत पहले से IST (UTC+5:30) का पालन करता है। बदलाव मुख्य रूप से उन कानूनी, प्रशासनिक, वाणिज्यिक और तकनीकी प्रणालियों से संबंधित है, जहां आधिकारिक समय-संदर्भ और सटीक टाइम-स्टैम्प महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच या घर की सामान्य घड़ी अचानक किसी नए समय पर चलने नहीं लगेगी। मुख्य उद्देश्य आधिकारिक और महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों में एक समान भारतीय समय-संदर्भ सुनिश्चित करना है। एक नजर में 10 महत्वपूर्ण बातें 1. केंद्र सरकार ने Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 अधिसूचित किए हैं। 2. नियम 27 अगस्त 2026 को अधिसूचित हुए। 3. नियम राजपत्र में प्रकाशन के 180 दिन बाद लागू होंगे। 4. लागू होने की संभावित अवधि मार्च 2027 के आसपास होगी। 5. IST को कानूनी, प्रशासनिक, वाणिज्यिक और अन्य आधिकारिक कार्यों के लिए सामान्य समय-संदर्भ बनाया जाएगा। 6. सरकारी विभागों और संस्थानों को सिस्टम तैयार करने के लिए संक्रमण अवधि मिलेगी। 7. बैंकिंग और डिजिटल भुगतान में सटीक टाइम-स्टैम्पिंग को मजबूती मिल सकती है। 8. टेलीकॉम, बिजली और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बेहतर टाइम-सिंक्रोनाइजेशन का आधार तैयार होगा। 9. CSIR-NPL भारतीय आधिकारिक समय पैमाने को बनाए रखने में प्रमुख भूमिका निभाएगा। 10. White Rabbit Technology के जरिए भारतीय मानक समय के सुरक्षित प्रसार का बेंगलुरु से प्रदर्शन किया जा चुका है। समय की एकरूपता से डिजिटल भारत को मजबूती ‘One Nation, One Time’ पहल का महत्व केवल घड़ी की सुइयों को एक समान रखने तक सीमित नहीं है। डिजिटल युग में समय एक महत्वपूर्ण तकनीकी संसाधन बन चुका है। बैंकिंग से लेकर दूरसंचार, बिजली, परिवहन और सरकारी डिजिटल सेवाओं तक अनेक प्रणालियों को सटीक और समन्वित समय की आवश्यकता होती है। नए नियमों के माध्यम से भारत अपने आधिकारिक समय-संदर्भ को अधिक मजबूत, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसका वास्तविक प्रभाव नियम लागू होने के बाद विभिन्न संस्थानों द्वारा किए जाने वाले तकनीकी अनुपालन और राष्ट्रीय टाइम-डिसेमिनेशन व्यवस्था की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगा।

  • विदेश में एकता, देश में सवाल: हरिप्रसाद ने RSS से मांगा जवाब

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 31 अगस्त 2026। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) के अध्यक्ष बी. के. हरिप्रसाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए गए धार्मिक एकता संबंधी बयान का उल्लेख करते हुए संघ की विचारधारा और देश के भीतर अल्पसंख्यकों को लेकर बन रहे राजनीतिक माहौल पर सवाल उठाए हैं। हरिप्रसाद ने कहा कि मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित एक अंतरधार्मिक संवाद के दौरान कहा था कि जो व्यक्ति भारत में मुसलमानों के न रहने की इच्छा रखता है, वह सच्चा हिंदू नहीं हो सकता। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भागवत ने ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में धार्मिक विविधता, मानव गरिमा और विभिन्न आस्थाओं के प्रति सम्मान की बात कही थी। हरिप्रसाद ने इस बयान का स्वागत करते हुए प्रश्न उठाया कि यदि आरएसएस की सोच सभी धर्मों और समुदायों के प्रति समान सम्मान की है, तो भारत के भीतर अल्पसंख्यकों को लेकर राजनीतिक ध्रुवीकरण और अविश्वास के आरोप बार-बार क्यों सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में हिंदू-मुस्लिम एकता और धार्मिक सद्भाव का संदेश दिया जाना महत्वपूर्ण है, लेकिन ऐसे संदेशों की वास्तविक विश्वसनीयता तब और मजबूत होती है, जब उनका प्रभाव देश की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में भी दिखाई दे। संविधान की भावना का दिया हवाला हरिप्रसाद ने भारतीय संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के समक्ष समान संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है। उनके अनुसार किसी भी नागरिक को धर्म के आधार पर कमतर समझने वाली सोच संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार सभी नागरिकों के अधिकारों की समान सुरक्षा है और सरकार तथा राजनीतिक संगठनों की जिम्मेदारी समाज में सभी समुदायों के बीच विश्वास और समानता का वातावरण बनाए रखना है। राजनीतिक ध्रुवीकरण पर उठाए सवाल केपीसीसी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि देश में धार्मिक पहचान को राजनीतिक विमर्श का प्रमुख विषय बनाए जाने से सामाजिक और आर्थिक न्याय के मूल प्रश्न पीछे छूट जाते हैं। उन्होंने कहा कि दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़े वर्गों ने ऐतिहासिक रूप से शिक्षा, रोजगार, संपत्ति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्रों में असमानताओं का सामना किया है। संविधान ने इन ऐतिहासिक चुनौतियों के समाधान के लिए आरक्षण, समान अवसर और सामाजिक न्याय जैसे प्रावधान किए हैं। हरिप्रसाद के अनुसार, जब सार्वजनिक बहस का केंद्र सामाजिक न्याय के बजाय बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक की धार्मिक पहचान बन जाती है, तब समाज के वंचित वर्गों से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। वाजपेयी से जुड़ी पुरानी घटना का उल्लेख अपने बयान में हरिप्रसाद ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विदेश मंत्री रहने के दौरान कोलंबो में हुई एक कथित घटना का भी उल्लेख किया। वरिष्ठ पत्रकार बी. आर. पी. भास्कर द्वारा अपने संस्मरणों में वर्णित एक प्रसंग के अनुसार, एक भोज के दौरान वाजपेयी से एक व्यंजन को लेकर सवाल किया गया था, जिस पर उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि यह भारतीय गाय का मांस नहीं है। इस प्रसंग का उल्लेख वर्षों बाद भास्कर के संस्मरणों के आधार पर प्रकाशित रिपोर्टों में हुआ है। हरिप्रसाद ने कहा कि इस प्रकार के प्रसंगों को किसी व्यक्ति की निजी खान-पान की पसंद के संदर्भ में अलग ढंग से देखा जा सकता है, लेकिन जब धार्मिक प्रतीकों और आस्थाओं का उपयोग राजनीतिक विमर्श में किया जाता है, तब सार्वजनिक जीवन में कथनी और व्यवहार के बीच समानता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। ‘कथनी और व्यवहार में समानता जरूरी’ हरिप्रसाद ने कहा कि मोहन भागवत के न्यूयॉर्क संदेश को केवल एक भाषण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसकी कसौटी भारत के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में दिखाई देने वाले व्यवहार पर भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सभी धर्मों और समुदायों के प्रति समान सम्मान का संदेश वास्तविक है, तो देश के भीतर भी मुस्लिम, ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के बीच सुरक्षा, विश्वास और समानता का वातावरण मजबूत होना चाहिए। हालांकि, आरएसएस स्वयं को किसी भी समुदाय के विरोधी संगठन के रूप में स्वीकार नहीं करता है और विभिन्न अवसरों पर संगठन के नेताओं ने सामाजिक समरसता तथा सभी समुदायों के साथ संवाद की बात कही है। मोहन भागवत के हालिया न्यूयॉर्क संबोधन में भी उन्होंने कहा कि भारत में मुसलमानों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए, ऐसा मानने वाला व्यक्ति हिंदू होने के मूल भाव से दूर हो जाता है। भारतीयता को प्राथमिक पहचान बनाने की अपील हरिप्रसाद ने कहा कि संविधान की दृष्टि में नागरिक की प्राथमिक पहचान भारतीय नागरिक के रूप में है और राज्य का दायित्व किसी एक धार्मिक समुदाय की भावनाओं को प्राथमिकता देना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की समान रूप से रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक विविधता भारत की ऐतिहासिक और सामाजिक शक्ति रही है। इसलिए राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को ऐसी भाषा और व्यवहार अपनाना चाहिए, जिससे समाज में भाईचारा, विश्वास और समान नागरिकता की भावना मजबूत हो। विदेशी मंचों का संदेश भारत में भी दिखे हरिप्रसाद ने अपने बयान में कहा कि विदेशों में धार्मिक एकता और मानवता का संदेश देना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे संदेशों की वास्तविक परीक्षा देश के भीतर सामाजिक व्यवहार और राजनीतिक वातावरण में होती है। उन्होंने कहा कि भारत की सड़कों, गांवों, शहरों और राजनीतिक विमर्श में भी वही एकता और भाईचारे की भाषा दिखाई देनी चाहिए, जिसकी चर्चा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर की जाती है। उन्होंने आरएसएस और उससे जुड़े राजनीतिक विमर्श से जुड़े लोगों से आग्रह किया कि धार्मिक पहचान के आधार पर विभाजन की राजनीति से ऊपर उठकर संविधान, सामाजिक न्याय, समान नागरिक अधिकार और राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता दी जाए। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मोहन भागवत के न्यूयॉर्क संबोधन के बाद धार्मिक सह-अस्तित्व, आरएसएस की विचारधारा और भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। इस बहस में विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के विचार अलग-अलग हैं, जबकि सभी पक्षों के लिए संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव को केंद्र में रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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