आतंकवाद पर मोदी का दो टूक संदेश
- Ashok kumar Singh

- 3 दिन पहले
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भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बिश्केक, 1 सितंबर 2026। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का कड़ा और स्पष्ट रुख दोहराया। उन्होंने सदस्य देशों से आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करने के लिए एकजुट होकर कार्रवाई करने का आह्वान किया।
सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान सहित एससीओ सदस्य देशों के शीर्ष नेता मौजूद रहे।
आतंकवाद के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल आतंकवादियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने आतंकवाद की फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वाले पूरे नेटवर्क को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने एससीओ सदस्य देशों से आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंड समाप्त करने और एक समान नीति अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में रणनीतिक साधन के तौर पर इस्तेमाल करने या आतंकियों को समर्थन एवं संरक्षण देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ व्यापक और समन्वित कार्रवाई की मांग करता रहा है। एससीओ सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री मोदी ने इसी नीति को स्पष्ट रूप से सामने रखा।
मोदी-शी-पुतिन की मुलाकात ने खींचा ध्यान
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात भी चर्चा का केंद्र रही।
सम्मेलन स्थल पर प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर अभिवादन किया और दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत हुई। वहीं रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात को भारत-रूस संबंधों और वैश्विक मुद्दों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और रूस के नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग के साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों नेताओं ने भारत की वर्ष 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के संदर्भ में भी चर्चा की।
वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय कूटनीति
एससीओ सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय भागीदारी को भारत की बहुपक्षीय कूटनीति के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत एक ओर सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे को मजबूती से उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संवाद और सहयोग की नीति को भी आगे बढ़ा रहा है।
सम्मेलन के दौरान मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन की मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। हालांकि इन मुलाकातों को किसी नए राजनीतिक गठबंधन के संकेत के रूप में देखना जल्दबाजी होगी, क्योंकि भारत लगातार स्वतंत्र और राष्ट्रीय हितों पर आधारित विदेश नीति को प्राथमिकता देता रहा है।
अब नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन पर नजर
बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के बाद अब वैश्विक समुदाय की नजर नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर है। भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के नेताओं के साथ आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रखा गया है। एससीओ मंच से आतंकवाद के खिलाफ प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट संदेश यह दर्शाता है कि भारत आतंकवाद, उसकी फंडिंग और उसे संरक्षण देने वाले तंत्र के खिलाफ वैश्विक स्तर पर ठोस कार्रवाई की मांग को लगातार आगे बढ़ाता रहेगा।
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