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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • सौजन्या मामले में न्याय सुनिश्चित करने का सरकार का भरोसा, SIT अधिकारी ने मांगी जांच से मुक्ति

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 30 सितंबर 2026। कर्नाटक के चर्चित सौजन्या मामले में राज्य सरकार ने निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि सरकार का उद्देश्य मामले की सच्चाई सामने लाना है और वह सौजन्या के परिवार या किसी अन्य की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहती। इसी बीच, 2012 के इस मामले की नए सिरे से जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) के सदस्य एवं बेंगलुरु ग्रामीण के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) वेंकटेश प्रसन्ना ने सरकार को पत्र लिखकर SIT से स्वयं को मुक्त करने का अनुरोध किया है। यह घटनाक्रम SIT के गठन के बाद कुछ लोगों और सौजन्या के परिवार की ओर से कुछ अधिकारियों की नियुक्ति पर आपत्ति जताए जाने के बीच सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गठित हुई SIT सौजन्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर 2026 को नए सिरे से जांच का निर्देश दिया था। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने 24 सितंबर को पांच सदस्यीय SIT गठित की। टीम की अध्यक्षता आईजीपी एन. शशिकुमार को सौंपी गई है। SIT में मंगलुरु सिटी के पुलिस आयुक्त सी.एच. सुधीर कुमार रेड्डी, इंटेलिजेंस एसपी निशा जेम्स, सीआईडी एसपी लोकेश जगलसर और बेंगलुरु ग्रामीण के एएसपी वेंकटेश प्रसन्ना को शामिल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार जांच को तीन महीने के भीतर पूरा कर सक्षम अदालत के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। अधिकारियों की नियुक्ति पर उठे सवाल SIT के गठन के बाद सौजन्या के परिवार और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने टीम में शामिल अधिकारियों को लेकर आपत्तियां जताईं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, विशेष रूप से एएसपी वेंकटेश प्रसन्ना की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए गए। इसके बाद प्रसन्ना ने राज्य सरकार से SIT से उन्हें अलग करने का अनुरोध किया है। गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि SIT का गठन निष्पक्ष और उचित जांच के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की मंशा नहीं है। खड़गे के अनुसार, यदि परिवार या जनता को किसी अधिकारी की नियुक्ति को लेकर आपत्ति है तो सरकार उन चिंताओं पर विचार करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य मामले को निष्कर्ष तक पहुंचाना, सच्चाई सामने लाना और न्याय सुनिश्चित करना है। करीब 14 साल पुराने मामले की फिर शुरू हुई जांच सौजन्या 2012 में कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के उजिरे क्षेत्र में मृत पाई गई थीं। मामले की जांच पहले विभिन्न एजेंसियों ने की थी, लेकिन दोष सिद्ध नहीं हो सका। मामले में आरोपी संतोष राव को 2023 में निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था। इसके बाद सौजन्या की मां ने मामले की नए सिरे से जांच की मांग को लेकर न्यायिक रास्ता अपनाया। सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देश के बाद अब SIT को मामले की जांच नए सिरे से करने की जिम्मेदारी दी गई है। अदालत ने जांच में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर जोर दिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि परिवार की आपत्तियों और जांच की निष्पक्षता से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप की जाएगी।

  • उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने पर तनाव, AI वीडियो से अफवाह फैलाने की जांच

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com उज्जैन, 29 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने के दौरान सोमवार को पैदा हुआ तनाव मंगलवार को भी प्रशासन और पुलिस के लिए चुनौती बना रहा। घटना के बाद संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित AI-जनरेटेड वीडियो और भ्रामक सामग्री की जांच भी तेज कर दी है। सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है मामला प्रशासन के अनुसार कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर की ओर जाने वाली सड़क को सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत चौड़ा किया जा रहा है। इसी सड़क की प्रस्तावित सीमा में शाही मस्जिद का एक हिस्सा आ रहा था। रिपोर्टों के मुताबिक प्रभावित हिस्से को हटाने को लेकर प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के बीच सहमति बनने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी इस मामले से संबंधित याचिकाओं और बाद में सहमति के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ने की जानकारी सामने आई है। सोमवार को कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस पर पथराव किए जाने की सूचना है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और बल प्रयोग किया। पुलिस के अनुसार घटना में कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई, जिसके बाद क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। AI वीडियो ने बढ़ाया भ्रम घटना की जांच में सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ कथित AI-जनरेटेड वीडियो महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार इन वीडियो में शाही मस्जिद को पूरी तरह गिराए जाने का दृश्य दिखाया गया, जबकि वास्तविक कार्रवाई सड़क चौड़ीकरण की सीमा में आने वाले हिस्से तक सीमित थी। पुलिस का कहना है कि ऐसे भ्रामक वीडियो और अन्य पोस्टों के प्रसार से लोगों के बीच भ्रम पैदा हुआ और बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित वीडियो कहां तैयार किए गए, किसने उन्हें सोशल मीडिया पर डाला और किन माध्यमों से वे तेजी से प्रसारित हुए। आठ FIR, 20 लोग नामजद पुलिस के मुताबिक तीन थानों में आठ FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें 20 लोगों को नामजद किया गया है। इनमें कुछ कंटेंट क्रिएटर्स के नाम भी शामिल हैं। अब तक 15 लोगों को हिरासत में लिए जाने अथवा गिरफ्तार किए जाने की जानकारी विभिन्न रिपोर्टों में सामने आई है। पुलिस सोशल मीडिया खातों की निगरानी के साथ-साथ पथराव में शामिल लोगों की पहचान के लिए CCTV और ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल कर रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। करीब 2,500 सुरक्षाकर्मी तैनात तनाव के बाद शाही मस्जिद और आसपास के संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों तथा सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। रिपोर्टों के अनुसार करीब 2,500 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। शहर में फ्लैग मार्च और निगरानी के माध्यम से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन और स्थानीय धार्मिक प्रतिनिधियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने तथा बिना आवश्यकता घटनास्थल पर भीड़ नहीं जुटाने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और सोशल मीडिया पर भ्रामक या उत्तेजक सामग्री की निगरानी जारी है। प्रभावित हिस्सा हटाने में समुदाय की भागीदारी स्थिति शांत होने के बाद मस्जिद प्रबंधन और स्थानीय मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों द्वारा सड़क चौड़ीकरण की जद में आए हिस्से को हटाने की प्रक्रिया में सहयोग किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार प्रभावित संरचना को हटाने की कार्रवाई समुदाय के सदस्यों द्वारा भी की गई। AI सामग्री ने उठाए गंभीर सवाल उज्जैन की घटना ने संवेदनशील घटनाओं के दौरान सोशल मीडिया पर AI से तैयार सामग्री के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार तस्वीर या वीडियो वास्तविक घटना जैसा दिखाई दे सकता है, लेकिन उसकी प्रामाणिकता अलग से जांचना आवश्यक है। विशेष रूप से धार्मिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में बिना सत्यापन किसी सामग्री को साझा करना भ्रम और तनाव को बढ़ा सकता है। इस मामले में पुलिस की जांच का एक प्रमुख पहलू यही है कि कथित भ्रामक वीडियो की उत्पत्ति और उसके प्रसार की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जाए। साथ ही वास्तविक घटनाक्रम और सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों के बीच अंतर स्पष्ट करना भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। फिलहाल प्रशासन का ध्यान उज्जैन में शांति और सामान्य स्थिति बनाए रखने पर है। पुलिस सुरक्षा व्यवस्था के साथ सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी निगरानी कर रही है। घटना से यह स्पष्ट हुआ है कि किसी संवेदनशील मुद्दे पर अपुष्ट डिजिटल सामग्री तेजी से जनधारणा को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में आधिकारिक जानकारी की पुष्टि किए बिना किसी वीडियो, तस्वीर या दावे को साझा करने से बचना कानून-व्यवस्था और सामाजिक शांति दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

  • अमेरिका-ईरान वार्ता तेज, मध्यस्थों के जरिए सात दिन के प्रस्ताव पर बातचीत

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com अंतरराष्ट्रीय, 29 सितंबर 2026। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास फिर तेज हुए हैं। दोनों देशों के अधिकारियों ने सोमवार को मध्यस्थों के माध्यम से अलग-अलग बातचीत की। वार्ता का केंद्र ईरान की ओर से रखे गए सात दिन के प्रस्ताव के संशोधित प्रारूप, युद्धविराम और रणनीतिक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सामान्य समुद्री यातायात बहाल करने की संभावनाओं पर है। हालांकि, अभी किसी अंतिम समझौते या युद्धविराम की घोषणा नहीं हुई है। मध्यस्थों के जरिए आगे बढ़ी बातचीत अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच प्रत्यक्ष आमने-सामने बातचीत के बजाय मध्यस्थों के माध्यम से संपर्क जारी है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के प्रस्ताव में कुछ संशोधन किए जाने की संभावना है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि तेहरान अमेरिकी पक्ष की औपचारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिकी अधिकारियों के मध्यस्थों के साथ संपर्क में होने की पुष्टि की है। हालांकि, ट्रंप ने उन रिपोर्टों को खारिज किया है जिनमें ईरान को प्रतिबंधों में राहत या जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच देने की पेशकश की बात कही गई थी। ईरान के सात दिन के प्रस्ताव में क्या है? ईरानी विदेश मंत्री अराघची के अनुसार, प्रस्ताव में अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में राहत और युद्धविराम जैसे कदमों की मांग शामिल है। इसके बदले ईरान ने सात दिनों के भीतर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सामान्य समुद्री आवागमन बहाल करने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर शुरू करने की बात कही है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही ईरान के मूल सात दिन के प्रस्ताव को अस्वीकार करने की बात कह चुके हैं। इसके बावजूद मध्यस्थों के जरिए संपर्क जारी रहना यह दर्शाता है कि कूटनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर दुनिया की नजर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने की स्थिति में तेल और गैस की आपूर्ति, परिवहन लागत तथा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकते हैं। मध्य-पूर्व की आपूर्ति को लेकर जारी चिंता का असर तेल बाजार और क्षेत्रीय शेयर बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। मंगलवार को अधिकांश प्रमुख खाड़ी शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान कूटनीतिक प्रयासों के परिणाम पर बनी रही। पुरानी कोशिशों से अलग होगी इस बार की चुनौती अमेरिका और ईरान के बीच पहले भी संघर्ष रोकने और बातचीत आगे बढ़ाने के प्रयास हुए हैं, लेकिन वे स्थायी समाधान में नहीं बदल सके। ऐसे में मौजूदा कूटनीतिक प्रक्रिया के सामने चुनौती केवल प्रारंभिक सहमति तक पहुंचने की नहीं, बल्कि किसी संभावित समझौते को लागू कराने और उसे टिकाऊ बनाए रखने की भी होगी। दोनों पक्षों के बीच परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों जैसे मुद्दों पर मतभेद अभी बने हुए हैं। इसलिए मध्यस्थों की भूमिका और दोनों देशों की शर्तों में संभावित बदलाव आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेंगे। समझौते की राह अभी खुली, लेकिन अनिश्चित फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है, लेकिन किसी व्यापक युद्धविराम या अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने की शर्तों, प्रतिबंधों और परमाणु वार्ता को लेकर दोनों पक्षों के रुख में अंतर बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में मध्यस्थों के जरिए होने वाली बातचीत और अमेरिकी प्रतिक्रिया इस कूटनीतिक प्रक्रिया की अगली दिशा तय कर सकती है। इसका प्रभाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित न रहकर वैश्विक ऊर्जा बाजार और मध्य-पूर्व की क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

  • CBSE की तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट से कक्षा 6 को राहत, कक्षा 7–9 के समान व्यवस्था

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन-भाषा व्यवस्था को लेकर चल रही सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान कक्षा 6 के विद्यार्थियों को राहत देने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कक्षा 6 के विद्यार्थियों को कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध संक्रमणकालीन राहत के समान व्यवस्था देने को कहा है। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। तीसरी भाषा की पढ़ाई जारी, मूल्यांकन में राहत न्यायालय के निर्देश का मुख्य प्रभाव तीसरी भाषा के मूल्यांकन से जुड़ा है। उपलब्ध न्यायिक रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान कक्षा 6 के विद्यार्थी तीन-भाषा व्यवस्था के तहत तीसरी भाषा पढ़ेंगे, लेकिन इस संक्रमणकालीन व्यवस्था में तीसरी भाषा के आधार पर उनकी कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा, अंतिम प्रमोशन या प्रमाणन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह राहत पहले कक्षा 7 से 9 के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध थी, जिसे अब वर्तमान कक्षा 6 तक भी विस्तारित किया गया है। 2027 से नई व्यवस्था लागू करने पर पहले हुई थी चर्चा इससे पहले 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से कक्षा 6 के लिए तीन-भाषा नीति के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने की संभावना पर विचार करने को कहा था। अदालत ने अचानक बदलाव से विद्यार्थियों और परिवारों को होने वाली संभावित कठिनाइयों तथा स्कूलों की तैयारी को ध्यान में रखने की जरूरत बताई थी। तीन-भाषा व्यवस्था का आधार CBSE की संशोधित योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसके तहत कक्षा 6 से आगे विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं के अध्ययन की व्यवस्था की गई है, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं। इस व्यवस्था को लागू करने के दौरान स्कूलों में भाषा शिक्षकों, पाठ्यपुस्तकों और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता से जुड़े मुद्दे भी सुनवाई में उठे। करीब 99 प्रतिशत स्कूलों की तैयारी का दावा सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से बताया गया कि CBSE से संबद्ध लगभग 99 प्रतिशत स्कूलों में नई तीसरी भाषा व्यवस्था लागू करने के लिए आवश्यक तैयारी उपलब्ध है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि करीब 1.2 प्रतिशत स्कूलों में कार्यान्वयन संबंधी कठिनाइयां बनी हुई हैं। अदालत ने शेष स्कूलों की स्थिति और उनकी व्यावहारिक कठिनाइयों को समझने के लिए CBSE को संबंधित संस्थानों से जानकारी लेने की दिशा में भी कदम उठाने को कहा है। अंग्रेजी की स्थिति पर भी सवाल सुनवाई के दौरान तीन-भाषा व्यवस्था में अंग्रेजी की स्थिति को लेकर भी सवाल उठे। याचिकाकर्ताओं की ओर से भाषा वर्गीकरण से संबंधित आपत्तियां रखी गईं। यह मुद्दा भी मामले की आगे की सुनवाई का हिस्सा रहेगा। नीति की वैधता पर अंतिम फैसला अभी बाकी सुप्रीम कोर्ट का ताजा निर्देश मुख्य रूप से वर्तमान कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए संक्रमणकालीन राहत से संबंधित है। तीन-भाषा नीति की व्यापक वैधता और उससे जुड़े अन्य कानूनी प्रश्नों पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। मामले की आगे की सुनवाई में इन पहलुओं पर विचार जारी रहेगा। इस निर्देश से वर्तमान कक्षा 6 के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को भाषा व्यवस्था में अचानक बदलाव से जुड़ी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक चिंताओं के संदर्भ में राहत मिलने की स्थिति बनी है।

  • एशियन गेम्स में भारत की धाक, महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने जीता स्वर्ण

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com एशियन गेम्स, 29 सितंबर 2026। एशियन गेम्स 2026 के 11वें दिन भारतीय एथलेटिक्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला 4×400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। किरण, एम. पूवम्मा, प्राची और विद्या रामराज की भारतीय टीम ने 3 मिनट 29.69 सेकंड का समय निकालकर शीर्ष स्थान हासिल किया। बहरीन ने रजत और चीन ने कांस्य पदक जीता। यह एशियन गेम्स 2026 में एथलेटिक्स में भारत का पहला स्वर्ण पदक है। महिला रिले टीम की इस सफलता ने ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में भारत के पदक अभियान को महत्वपूर्ण बढ़त दी है। रिले टीम का शानदार तालमेल महिला 4×400 मीटर रिले में भारतीय टीम ने पूरे मुकाबले के दौरान बेहतर तालमेल बनाए रखा। अंतिम चरण में टीम ने अपनी बढ़त को कायम रखते हुए 3:29.69 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया। बहरीन की टीम ने 3:30.21 सेकंड और चीन ने 3:31.02 सेकंड के समय के साथ क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किया। गुलवीर सिंह ने पदकों की हैट्रिक पूरी की एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर एशियन गेम्स 2026 में अपना तीसरा पदक हासिल किया। इससे पहले वह 1500 मीटर और 10,000 मीटर में रजत पदक जीत चुके हैं। 5000 मीटर में 13:32.75 सेकंड के समय के साथ कांस्य जीतकर उन्होंने इस संस्करण में पदकों की हैट्रिक पूरी की। भारत ने पुरुष 4×400 मीटर रिले में भी कांस्य पदक हासिल किया। इसके अलावा मिश्रित 4×100 मीटर रिले में भारतीय टीम ने कांस्य पदक अपने नाम किया। निशानेबाजी में नीरू धांडा का स्वर्ण निशानेबाजी में नीरू धांडा ने महिला व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को दिन की एक और महत्वपूर्ण सफलता दिलाई। इससे पहले नीरू धांडा, आशिमा अहलावत और मनिषा कीर की भारतीय टीम ने महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता था। मुक्केबाजी में भी भारत की मजबूत मौजूदगी मुक्केबाजी में परवीन और अंकुश पंघाल ने अपने-अपने वर्गों के सेमीफाइनल मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाई। वहीं नरेंदर बरवाल को सेमीफाइनल में हार के बाद कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ तीनों भारतीय मुक्केबाजों का पदक पहले ही सुनिश्चित हो गया था। एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों की विभिन्न खेलों में पदक उपलब्धियों का सिलसिला जारी है। एथलेटिक्स, निशानेबाजी और मुक्केबाजी में मिली सफलताओं के बाद प्रतियोगिता के अगले मुकाबलों में भी भारतीय दल की नजर पदक दौर में बेहतर प्रदर्शन पर रहेगी।

  • बारिश से धुले क्वार्टरफाइनल, भारत-श्रीलंका एशियन गेम्स सेमीफाइनल में आमने-सामने

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नागोया, 29 सितंबर 2026। आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 के पुरुष क्रिकेट मुकाबलों में लगातार बारिश ने क्वार्टरफाइनल चरण का पूरा समीकरण बदल दिया है। चारों क्वार्टरफाइनल मुकाबले बारिश की वजह से बिना नतीजे के समाप्त होने के बाद भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश ने सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही भारत और श्रीलंका के बीच दूसरा सेमीफाइनल 1 अक्टूबर 2026 को खेला जाएगा, जबकि दूसरे सेमीफाइनल में पाकिस्तान का सामना बांग्लादेश से होगा। भारत-अफगानिस्तान मुकाबला भी बारिश में धुला भारत और अफगानिस्तान के बीच 28 सितंबर को निसिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में प्रस्तावित क्वार्टरफाइनल लगातार बारिश और खराब मैदान के कारण शुरू नहीं हो सका। टूर्नामेंट के नियमों के तहत बेहतर वरीयता प्राप्त भारत को सेमीफाइनल में स्थान मिला। भारत पुरुष क्रिकेट में मौजूदा एशियन गेम्स चैंपियन भी है।इसका मतलब है कि भारतीय टीम को अब तक टूर्नामेंट में मैदान पर कोई मुकाबला खेलने का अवसर नहीं मिला है। टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर कर रहे हैं। श्रीलंका भी बिना खेले सेमीफाइनल में 29 सितंबर को श्रीलंका और नेपाल के बीच प्रस्तावित क्वार्टरफाइनल भी लगातार बारिश के कारण रद्द हो गया। मैच में टॉस तक नहीं हो सका। बेहतर रैंकिंग के आधार पर श्रीलंका को अंतिम चार में जगह मिली। इसी तरह बांग्लादेश-मलेशिया मुकाबला भी बारिश की भेंट चढ़ गया। इससे चारों क्वार्टरफाइनल मुकाबलों में किसी भी टीम को मैदान पर उतरकर जीत हासिल करने का अवसर नहीं मिला। 1 अक्टूबर को भारत-श्रीलंका सेमीफाइनल क्वार्टरफाइनल चरण के बाद अब भारत और श्रीलंका के बीच 1 अक्टूबर को सेमीफाइनल मुकाबला निर्धारित है। दूसरे सेमीफाइनल में पाकिस्तान और बांग्लादेश आमने-सामने होंगे। दोनों सेमीफाइनल निसिन स्थित कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में खेले जाने हैं। भारतीय टीम में श्रेयस अय्यर के अलावा जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल, रवि बिश्नोई, अर्शदीप सिंह, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी सहित कई प्रमुख खिलाड़ी शामिल हैं। मौसम पर फिर टिकी निगाहें लगातार बारिश के कारण एशियन गेम्स के पुरुष क्रिकेट मुकाबलों का कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। आयोजकों के सामने अब सेमीफाइनल मुकाबलों को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराने की चुनौती है। भारत और श्रीलंका के खिलाड़ी भी अब तक क्वार्टरफाइनल में मैदान पर नहीं उतर सके हैं, ऐसे में सेमीफाइनल दोनों टीमों के लिए प्रतियोगिता में पहला वास्तविक मुकाबला होगा। एशियन गेम्स के पुरुष क्रिकेट में भारत के सामने अब सीधे पदक दौर की चुनौती है। बारिश के कारण बदले कार्यक्रम के बीच क्रिकेट प्रशंसकों की नजर 1 अक्टूबर के भारत-श्रीलंका मुकाबले पर रहेगी।

  • अमेरिका ने कुछ भारतीय विशेष दवाओं को 100% टैरिफ से दी राहत, फार्मा उद्योग के लिए अहम फैसला

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026। अमेरिका ने भारत समेत 20 देशों और क्षेत्रों से आयात होने वाली कुछ विशेष श्रेणी की फार्मास्युटिकल दवाओं और उनसे जुड़े आवश्यक घटकों को 100 प्रतिशत आयात शुल्क से राहत दी है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग की अधिसूचना के अनुसार, यह छूट निर्धारित पात्र उत्पादों पर शून्य शुल्क की व्यवस्था के रूप में लागू होगी। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने कुछ पेटेंट वाली फार्मास्युटिकल दवाओं और संबंधित घटकों पर ‘सेक्शन 232’ के तहत 100 प्रतिशत शुल्क लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है। अधिकांश कंपनियों के लिए यह शुल्क 29 सितंबर 2026 से प्रभावी होना निर्धारित किया गया था। किन दवाओं को मिलेगी शून्य शुल्क की सुविधा अमेरिकी व्यवस्था के तहत शून्य शुल्क का लाभ निर्धारित विशेष श्रेणी के उत्पादों को मिलेगा। इनमें दुर्लभ बीमारियों के उपचार के लिए नामित दवाएं, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा-आधारित उपचार, फर्टिलिटी दवाएं, सेल एवं जीन थेरेपी तथा एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (ADCs) शामिल हैं। कुछ चिकित्सा आपातकालीन प्रतिरोधक उत्पादों और पशु-स्वास्थ्य संबंधी फार्मास्युटिकल उत्पादों को भी व्यवस्था में शामिल किया गया है। इन उत्पादों से जुड़े कुछ आवश्यक घटक भी पात्रता के दायरे में हैं। हालांकि, शून्य शुल्क की व्यवस्था स्वतः सभी भारतीय दवा उत्पादों पर लागू नहीं होती। पात्रता उत्पाद की निर्धारित श्रेणी, मूल देश और अमेरिकी नियमों में तय अन्य शर्तों पर निर्भर करेगी। कुछ मामलों में अमेरिका की तत्काल स्वास्थ्य जरूरत के आधार पर भी विशेष उत्पादों को शून्य शुल्क के लिए पात्र माना जा सकता है। 100 प्रतिशत शुल्क का प्रावधान अमेरिकी राष्ट्रपति की 2 अप्रैल 2026 की घोषणा के बाद पेटेंट वाली फार्मास्युटिकल दवाओं, बायोलॉजिक्स और उनसे जुड़े कुछ घटकों पर शुल्क व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अमेरिकी प्रशासन ने इस नीति का उद्देश्य घरेलू फार्मास्युटिकल उत्पादन को प्रोत्साहित करना बताया है। कुछ कंपनियों के लिए शुल्क 31 जुलाई से प्रभावी हुआ, जबकि अन्य कंपनियों के लिए 29 सितंबर से लागू होने की व्यवस्था की गई। जेनेरिक दवाओं पर अलग नियम भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सामान्य जेनेरिक दवाएं और उनसे जुड़े घटक फिलहाल इस विशेष सेक्शन 232 फार्मास्युटिकल टैरिफ के दायरे में नहीं हैं। इसलिए विशेष दवाओं के लिए घोषित शून्य शुल्क को भारत से अमेरिका जाने वाले पूरे फार्मास्युटिकल निर्यात पर लागू छूट के रूप में देखना सही नहीं होगा। भारत के फार्मा कारोबार के लिए क्या मायने अमेरिका भारतीय दवा उद्योग के प्रमुख विदेशी बाजारों में शामिल है। ऐसे में विशेष दवाओं की निर्धारित श्रेणियों पर अतिरिक्त शुल्क से राहत से संबंधित भारतीय निर्यातकों के लिए लागत और अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा से जुड़े प्रभाव सामने आ सकते हैं। हालांकि वास्तविक असर संबंधित उत्पाद की पात्रता, कंपनी की स्थिति और अमेरिकी नियमों के तहत अंतिम वर्गीकरण पर निर्भर करेगा। अमेरिकी वाणिज्य विभाग की सूची में भारत के अलावा जापान, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, यूरोपीय संघ और अन्य देश एवं क्षेत्र भी शामिल हैं। अमेरिकी अधिसूचना में शून्य शुल्क की पात्रता को व्यापार एवं सुरक्षा ढांचे से जुड़े प्रावधानों तथा कुछ मामलों में अमेरिका की तत्काल स्वास्थ्य जरूरतों से जोड़ा गया है। इस घटनाक्रम से भारत-अमेरिका फार्मास्युटिकल व्यापार में विशेष श्रेणी की दवाओं को लेकर शुल्क संबंधी तस्वीर पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट हुई है। आने वाले समय में कंपनियों और उत्पादों की पात्रता तथा अमेरिकी प्रशासन की व्याख्या के आधार पर इसका व्यावहारिक प्रभाव और स्पष्ट होगा।

  • SIR प्रक्रिया में मतदाताओं की सुविधा पर जोर, BLO घर-घर पहुंचकर जुटा रहे दस्तावेज

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 29 सितंबर 2026। बेंगलुरु उत्तर क्षेत्र में स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए निर्वाचन अधिकारियों की ओर से मतदाताओं की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत अनमैप्ड और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी से जुड़े मामलों में नोटिस प्राप्त मतदाताओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर पहुंचकर दस्तावेज एकत्र कर रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर, बेंगलुरु नॉर्थ के अधिकार क्षेत्र में संबंधित मतदाताओं से एकत्र किए जा रहे दस्तावेजों को ECINet पर अपलोड कर संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के विचार एवं निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। सामान्यतः कार्यालय बुलाने की आवश्यकता नहीं निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में मतदाताओं को सामान्य परिस्थितियों में सुनवाई के लिए ERO अथवा AERO कार्यालय बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि किसी विशेष मामले में ERO सुनवाई को आवश्यक मानते हैं, तो ऑनलाइन सुनवाई को प्राथमिकता देने का प्रावधान बताया गया है। जरूरत पड़ने पर मतदाता अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए परिवार के किसी वयस्क सदस्य को नामित भी कर सकते हैं। इसका उद्देश्य SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को अनावश्यक असुविधा से बचाना और प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना है। विशेष शिविर और हेल्प डेस्क से सहायता SIR प्रक्रिया से संबंधित जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष शिविर एवं हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं। इन माध्यमों के जरिए नागरिकों को मतदाता सूची, दस्तावेज जमा करने और संबंधित चुनावी प्रक्रियाओं के बारे में आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि SIR प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं को आवश्यक जानकारी और सहायता समय पर मिल सके। छूटे नामों के लिए भी आवेदन का अवसर SIR प्रक्रिया के दौरान अथवा उसके बाद यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाता है, तो वह निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के समक्ष आवेदन कर सकता है। पात्र युवा एवं पहली बार मतदाता बनने वाले नागरिक भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और ERO को पात्र मतदाताओं के नामांकन को सुगम बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक माध्यमों से जानकारी लेने की अपील बेंगलुरु नॉर्थ प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि SIR, मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए संबंधित ERO, AERO तथा अधिकृत हेल्प डेस्क से संपर्क करें। नागरिकों से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक दस्तावेज जमा करने और आधिकारिक माध्यमों से ही जानकारी प्राप्त करने का आग्रह किया गया है।

  • बनशंकरी मंदिर के सामने सरकारी जमीन से कब्जा हटाया, निगम मुख्यालय के लिए होगी जमीन का उपयोग

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 29 सितंबर 2026। बनशंकरी मंदिर के सामने सरक्की गांव स्थित सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाकर उसे बेंगलुरु साउथ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के नियंत्रण में लेने की कार्रवाई की गई है। निगम आयुक्त के.एन. रमेश के अनुसार, सर्वे नंबर 73 में स्थित करीब 3 एकड़ 13 गुंटे जमीन को निगम मुख्यालय के निर्माण के लिए सुरक्षित किया गया है। निगम के अनुसार, उक्त भूमि का बाजार मूल्य लगभग 100 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में कार्रवाई के संबंध में एक स्थान पर जमीन का मूल्य करीब 1.5 करोड़ रुपये भी उल्लेखित है। इसलिए जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। निगम मुख्यालय के लिए सरकार ने दी मंजूरी अधिकारियों के मुताबिक, सरक्की गांव के सर्वे नंबर 73 की जमीन पहले कर्नाटक एग्रीकल्चरल मार्केटिंग विभाग के फल एवं सब्जी प्रभाग (APMC) को आवंटित की गई थी। निर्धारित उद्देश्य के लिए जमीन का उपयोग नहीं होने के कारण सरकार ने पूर्व आवंटन को रद्द कर दिया। इसके बाद 3 सितंबर 2026 को सरकार ने उक्त जमीन को ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) को निगम मुख्यालय के निर्माण के उद्देश्य से मंजूरी प्रदान की। JCB से हटाए गए शेड और अवैध कब्जे सरकारी मंजूरी के बाद योजना विभाग के कार्यकारी अभियंता महंतेश के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निगम की जमीन पर बने बिना अनुमति के शेड और अन्य कथित अवैध कब्जों को JCB मशीनों की सहायता से हटाया गया। अधिकारियों ने इसी सर्वे नंबर के दूसरे हिस्से में कथित रूप से अवैध निर्माण करने वालों को भी निगम की जमीन तत्काल खाली करने की हिदायत दी। कब्जाधारियों पर कानूनी कार्रवाई के संकेत निगम आयुक्त के.एन. रमेश ने कहा कि जमीन को निगम के नियंत्रण में लेने की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। निगम प्रशासन का कहना है कि जमीन का उपयोग प्रस्तावित निगम मुख्यालय के निर्माण के लिए किया जाएगा। कार्रवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम मौके पर मौजूद रही।

  • सूखा राहत पर विजयेंद्र का सरकार पर हमला, बोले—किसानों को पर्याप्त सहायता दे कांग्रेस

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 29 सितंबर 2026। कर्नाटक में सूखे की स्थिति और किसानों के लिए घोषित राहत को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने राज्य सरकार द्वारा सूखा प्रभावित किसानों के लिए घोषित ₹2,500 की इनपुट सब्सिडी को अपर्याप्त बताते हुए सरकार की वित्तीय स्थिति पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। राज्य सरकार ने 25 सितंबर को विधानसभा में सूखा प्रभावित किसानों को तत्काल ₹2,500 की इनपुट सब्सिडी देने की घोषणा की थी। पहले चरण में करीब ₹1,250 करोड़ खर्च होने और लगभग 45-50 लाख किसानों को लाभ मिलने की जानकारी सरकार की ओर से दी गई थी। यह सहायता केंद्र से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत सहायता की प्रतीक्षा के बीच घोषित की गई है। विजयेंद्र ने ₹50 हजार प्रति हेक्टेयर सहायता की मांग दोहराई बेंगलुरु स्थित भाजपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत में विजयेंद्र ने कहा कि सूखे से प्रभावित किसानों को अधिक प्रभावी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों द्वारा किसानों को दी गई राहत का हवाला देते हुए प्रति हेक्टेयर ₹50 हजार मुआवजे की मांग दोहराई। उन्होंने राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। विजयेंद्र का आरोप है कि सरकार की गारंटी योजनाओं और अन्य व्यय के कारण राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा है। ये दावे भाजपा की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा हैं और सरकार की वित्तीय स्थिति का स्वतंत्र आकलन अलग विषय है। करदाताओं के धन के इस्तेमाल पर उठाए सवाल विजयेंद्र ने गारंटी योजनाओं से जुड़ी समितियों और उनके प्रशासनिक खर्चों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के कर से प्राप्त धन का उपयोग राजनीतिक कार्यकर्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दिव्यांगों, बुजुर्गों और गरीबों से जुड़ी योजनाओं में कथित वित्तीय कमी का मुद्दा भी उठाया और सरकार से खर्च तथा प्राथमिकताओं पर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। चुनावी तैयारियों के बीच राजनीतिक अभियान विजयेंद्र ने भाजपा के आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राज्य में सेवा-संकल्प से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही जिला एवं तालुक पंचायत चुनावों की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए भाजपा की ओर से बूथ स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए अगले कुछ महीनों में राज्य के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया जाएगा। राहुल गांधी और चुनाव आयोग को लेकर भी टिप्पणी विजयेंद्र ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर चुनाव आयोग तथा संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के संदर्भ में भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। उनके ये बयान राजनीतिक आरोप और भाजपा का दृष्टिकोण हैं। चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों और आरोपों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए। शिकारिपुरा से कांग्रेस की पदयात्रा पर विजयेंद्र की प्रतिक्रिया कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद द्वारा शिकारिपुरा से ‘भारत जोड़ो-2’ पदयात्रा शुरू करने की घोषणा पर विजयेंद्र ने प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस 30 सितंबर से 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के हारने वाले 84 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने वाली पदयात्रा शुरू करने जा रही है। शिकारिपुरा से इसकी शुरुआत प्रस्तावित है। शिकारिपुरा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व वर्तमान में बी.वाई. विजयेंद्र करते हैं और यह क्षेत्र उनके पिता तथा पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा का भी राजनीतिक क्षेत्र रहा है। विजयेंद्र ने कांग्रेस के इस कार्यक्रम को राजनीतिक चुनौती के रूप में लेते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ता क्षेत्र में पार्टी के विकास कार्यों और संगठनात्मक आधार के साथ जनता के बीच जाएंगे। सूखा राहत पर केंद्र से सहायता की मांग भी जारी सूखा राहत को लेकर राज्य सरकार की ओर से केंद्र से अतिरिक्त सहायता की मांग भी जारी है। राज्य सरकार ने सूखे से हुए नुकसान के आकलन के आधार पर केंद्र से राहत राशि जारी करने का आग्रह किया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र की टीमें अक्टूबर की शुरुआत में राज्य के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करने के लिए आने वाली हैं। इस बीच, सूखा राहत की राशि, राज्य की वित्तीय स्थिति और सरकार की योजनाओं को लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। किसानों के लिए वास्तविक राहत और उसके क्रियान्वयन की स्थिति आने वाले दिनों में इस बहस का प्रमुख केंद्र बनी रहेगी।

  • पूजा बाहरी क्रियाकांड नहीं, आत्मशुद्धि का विज्ञान है: वीरसागर जी महाराज

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 29 सितंबर 2026। जैन धर्म में पूजा केवल बाहरी विधि-विधान पूरा करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मा के अंतरंग को निर्मल करने और उसके वास्तविक स्वरूप की ओर बढ़ने का माध्यम है। निर्यापक श्रमण श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने ‘पूजा के विज्ञान को जाने’ विषय पर प्रवचन करते हुए कहा कि पूजा का वास्तविक उद्देश्य आत्मा पर अनादिकाल से पड़े कर्मों के आवरण को हटाकर आत्मिक गुणों की ओर बढ़ना है। मुनिश्री ने कहा कि पूजा के दौरान अष्टद्रव्य अर्पित करना, अभिषेक करना अथवा तीर्थंकर प्रतिमा के समक्ष धार्मिक क्रियाएं करना बाहरी पक्ष है। इन क्रियाओं का महत्व तभी है, जब इनके माध्यम से व्यक्ति के अंतरंग परिणामों में विशुद्धि और जीवन-व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आए। ‘पूजा’ का वास्तविक अर्थ अंतरंग का मार्जन वीरसागर जी महाराज ने पूजा के अर्थ को समझाते हुए कहा कि इसका संबंध पवित्रता, निर्मलता और गुणों के स्मरण से है। उन्होंने बर्तन में जमने वाली चिकनाई का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल बाहर से बर्तन चमकाने से उसकी अंदरूनी गंदगी दूर नहीं होती। इसी प्रकार मंदिर जाकर पूजा करने के बावजूद यदि मन में क्रोध, मान, माया, लोभ, राग और द्वेष की परतें बनी रहें, तो पूजा के वास्तविक उद्देश्य की पूर्ति नहीं होती। उन्होंने कहा कि पूजा बाहरी स्वरूप को सजाने के बजाय अंतरंग को मांझने और आत्मिक शुद्धि की दिशा में बढ़ने का अभ्यास है। अष्टद्रव्य और प्रतिमा हैं आत्मशुद्धि के आलंबन मुनिश्री ने कहा कि जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, दीप, धूप, फल और अर्घ्य सहित अष्टद्रव्य केवल अर्पण की वस्तुएं नहीं हैं। जैन परंपरा में इनका उपयोग आत्मचिंतन और शुभ-विशुद्ध भावों को जागृत करने के आलंबन के रूप में किया जाता है। इसी प्रकार जिनवाणी, मंत्र, गुरु और तीर्थंकरों की वीतरागी प्रतिमा साधक के चित्त को बाहरी विषयों से हटाकर आत्मचिंतन की ओर मोड़ने में निमित्त बनते हैं। उन्होंने कहा कि इन माध्यमों का उद्देश्य व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और आत्मिक विकास के लिए पुरुषार्थ करने की प्रेरणा देना है। अनंत चतुष्टय आत्मा की पूर्णता का प्रतीक प्रवचन में तीर्थंकरों के स्वरूप की चर्चा करते हुए वीरसागर जी महाराज ने अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन, अनंत सुख और अनंत वीर्य यानी अनंत चतुष्टय का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन के अनुसार तीर्थंकरों ने अपनी साधना के माध्यम से आत्मा में निहित इन अनंत शक्तियों को पूर्ण रूप से प्रकट किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वीतराग भगवान किसी व्यक्ति को अपनी शक्ति, सुख या सिद्धि का अंश प्रदान नहीं करते। पूजा का उद्देश्य भगवान से किसी भौतिक या व्यक्तिगत लाभ की मांग करना नहीं, बल्कि उनके वीतराग स्वरूप को आदर्श मानकर अपने भीतर आत्मिक गुणों को विकसित करने का पुरुषार्थ करना है। बोरवेल का उदाहरण देकर समझाया आत्मशुद्धि का सिद्धांत आत्मा में निहित शक्तियों को समझाने के लिए मुनिश्री ने बोरवेल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जमीन में बोरवेल करने पर पानी बनाया नहीं जाता, बल्कि मिट्टी, कंकड़ और पत्थरों की परतें हटाकर पहले से मौजूद जल तक पहुंच बनाई जाती है। इसी प्रकार जैन दर्शन के अनुसार आत्मा में ज्ञान, दर्शन, सुख और वीर्य की अनंत क्षमता विद्यमान है। कर्मों के आवरण इन गुणों को ढकते हैं। पूजा, भक्ति, स्वाध्याय, तप, संयम और आत्मचिंतन का उद्देश्य कोई नई शक्ति पैदा करना नहीं, बल्कि आत्मा पर पड़े आवरणों को हटाने की दिशा में पुरुषार्थ करना है। बाहरी पूजा के साथ भावों की शुद्धि जरूरी वीरसागर जी महाराज ने कहा कि अनंत भवों से संचित राग-द्वेष, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी कषायों से मुक्ति के लिए निरंतर साधना और आत्मचिंतन आवश्यक है। केवल धार्मिक क्रियाओं की पुनरावृत्ति से आत्मशुद्धि स्वतः नहीं होती। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि पूजा तभी सार्थक मानी जा सकती है, जब उसका प्रभाव व्यक्ति के विचार, व्यवहार और आंतरिक भावों में दिखाई दे। धार्मिक अनुष्ठान को आत्मनिरीक्षण और परिणामों की विशुद्धि से जोड़ना आवश्यक है। शांतिधारा में आत्मशुद्धि की भावना का आह्वान मुनिश्री ने शांतिधारा और अभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं को बाहरी क्रिया के साथ आंतरिक भावों पर ध्यान देने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शांतिधारा के जल को भीतर के क्रोध और कषायों को शांत करने की भावना से जोड़ा जा सकता है। चंदन अर्पित करते समय शीतलता और समता तथा दीप प्रज्वलित करते समय आत्मज्ञान के प्रकाश की भावना जागृत की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब पूजा की प्रत्येक सामग्री को उसके आध्यात्मिक उद्देश्य से जोड़ा जाता है, तब बाहरी अनुष्ठान आत्मचिंतन और अंतरंग साधना का माध्यम बन जाता है। समाचार प्रेषक: विपिन कुमार जैन, बेंगलुरु

  • मैसूर रोड होस गुड्डाहल्ली में गणेश उत्सव का आयोजन, विशेष अतिथि महेंद्र मुणोत सम्मानित

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 29 सितंबर 2026। मैसूर रोड स्थित होस गुड्डाहल्ली क्षेत्र में स्थानीय नागरिकों की ओर से गणेश उत्सव कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के नागरिकों और आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने भाग लेकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की तथा उत्सव की परंपराओं के अनुरूप धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता की। कार्यक्रम में विशेष अतिथि महेंद्र मुणोत का आयोजकों की ओर से सम्मान किया गया। इस अवसर पर आयोजकों ने उन्हें सम्मानित करते हुए गणेश उत्सव के आयोजन में सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। नागरिकों ने उत्साह से लिया हिस्सा गणेश उत्सव के दौरान क्षेत्र के नागरिकों ने सामूहिक रूप से कार्यक्रम में भाग लिया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन स्थानीय लोगों को एक साथ जोड़ने के साथ आपसी सौहार्द और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देते हैं। कार्यक्रम के दौरान गणेश भगवान की आराधना और धार्मिक गतिविधियों के साथ उपस्थित लोगों ने उत्सव की खुशियां साझा कीं। आयोजकों एवं नागरिकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। समाचार प्रेषक : उपेन्द्र कुमार, बेंगलुरु

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