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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम: 500 नई PCR वैन सड़क पर उतारी गईं

    राजधानी के संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी, रात में विशेष पेट्रोलिंग अभियान शुरू नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में महिला सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस विभाग ने 500 नई PCR वैन को सेवा में उतारने की घोषणा की है। अधिकारियों के अनुसार, ये वैन खास तौर पर उन इलाकों में तैनात की जाएंगी जहाँ शाम और रात के समय सुरक्षा को लेकर शिकायतें अधिक मिलती रही हैं। पुलिस आयुक्त ने बताया कि सभी PCR वैन में आधुनिक GPS सिस्टम और लाइव मॉनिटरिंग सुविधा होगी, जिससे कंट्रोल रूम से सीधे निगरानी की जा सकेगी। इसके अलावा, महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी बढ़ाई गई है। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस पहल का उद्देश्य राजधानी में सुरक्षा का माहौल मजबूत करना और महिलाओं में विश्वास बढ़ाना है। स्थानीय निवासियों ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे सकारात्मक पहल बताया है।

  • “बेंगलूरु में मुख्य सड़कों पर स्ट्रीट वेंडिंग पर लगेगा ब्रेक: पैदल यात्रियों के लिए नई फुटपाथ नीति तैयार”

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु| कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में शहरी यातायात और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया जाने वाला है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को घोषणा की कि प्रस्तावित नई नीति के तहत शहर की मुख्य और उप-सड़कों पर स्ट्रीट वेंडिंग (रेहड़ी-पटरी) पर रोक लगाई जाएगी। फुटपाथ होंगे पूरी तरह खाली, पैदल यात्रियों को राहत विधान सौध में आयोजित बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में शिवकुमार ने बताया कि सरकार एक व्यापक फुटपाथ नीति पर काम कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य अतिक्रमण हटाकर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में फुटपाथों पर रेहड़ी-पटरी वालों के कब्जे के कारण आम नागरिकों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नई नीति के तहत फुटपाथों को पूरी तरह आम जनता के उपयोग के लिए खाली रखा जाएगा। निर्धारित स्थानों पर ही लगेगी रेहड़ी-पटरी सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि स्ट्रीट वेंडर्स को पूरी तरह हटाया नहीं जाएगा, बल्कि उनके लिए शहर में कुछ विशेष स्थान निर्धारित किए जाएंगे। केवल उन्हीं जगहों पर वैध पहचान पत्र के साथ वेंडिंग की अनुमति होगी। शिवकुमार के अनुसार, इस प्रस्ताव को सभी दलों के विधायकों का सर्वसम्मत समर्थन मिला है, जिससे इसके लागू होने की संभावना और मजबूत हो गई है। 60 हजार वेंडर्स पंजीकृत, विशेष वाहनों की तैयारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 60,000 रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं ने पंजीकरण कराया है, जिनमें से करीब 30,000 ने विशेष वेंडिंग वाहनों की मांग की है। इसके लिए सरकार पहले ही टेंडर जारी कर चुकी है। लावारिस वाहनों पर भी सख्ती उपमुख्यमंत्री ने शहर की सड़कों पर लंबे समय से खड़े लावारिस वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की घोषणा की। ऐसे वाहनों को टो कर निर्धारित स्थानों पर ले जाया जाएगा। इसके लिए बेल्लाहल्ली, बिडागनहल्ली, बिड्डानहल्ली और सोंडेकोप्पा जैसे स्थानों की पहचान की गई है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक निगम को ‘नो-पार्किंग’ क्षेत्रों में खड़े वाहनों को हटाने के लिए दो-दो टोइंग वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। फ्लेक्स बैनरों पर भारी जुर्माने की तैयारी शहर में अवैध फ्लेक्स बैनरों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए शिवकुमार ने कहा कि सरकार इस पर कड़ा नियंत्रण लगाने की योजना बना रही है। प्रस्तावित नियमों के तहत अवैध बैनर लगाने पर 50,000 से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार चेतावनी के बावजूद जन्मदिन और अन्य आयोजनों के लिए मनमाने ढंग से बैनर लगाए जा रहे हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सख्त नियम: रात में ठेले छोड़ने पर जब्ती रेहड़ी-पटरी वालों को चेतावनी दी गई है कि वे काम खत्म होने के बाद अपनी गाड़ियां सड़कों पर न छोड़ें। यदि कोई ठेला लावारिस पाया गया, तो उसे जब्त कर लिया जाएगा। अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर भी चर्चा नगर प्रबंधन से जुड़े अन्य विषयों पर बोलते हुए शिवकुमार ने बताया कि शहर के पार्कों के खुलने और बंद होने का समय स्थानीय विधायकों के परामर्श से तय किया जाएगा। वहीं, वार्ड स्तर पर 5 से 10 करोड़ रुपये के बजट आवंटन की मांग को उन्होंने अत्यधिक बताते हुए कहा कि इस पर पुनर्विचार किया जाएगा।

  • “भक्ति का ढोंग कर पुजारियों को बनाता था निशाना: बेंगलुरु में शातिर ठग गिरफ्तार, लाखों के गहने बरामद”

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु | कर्नाटक की राजधानी बेंगलूरु से एक चौंकाने वाला ठगी का मामला सामने आया है, जहां एक शातिर आरोपी ने भक्ति और आस्था का सहारा लेकर मंदिरों के पुजारियों को अपना शिकार बनाया। राजाजीनगर पुलिस ने इस आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से लाखों रुपये के आभूषण बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपी की पहचान प्रवीण भट्ट के रूप में हुई है, जो खुद को एक संपन्न व्यवसायी बताकर शहर के विभिन्न मंदिरों में जाता था और पुजारियों का विश्वास जीतता था। भक्ति की आड़ में रची ठगी की साजिश पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से अपने अपराध को अंजाम देता था। वह मंदिरों में जाकर विशेष पूजा-अर्चना करवाता, दान-पात्र में बड़ी रकम चढ़ाता और धार्मिक प्रवृत्ति का दिखावा कर पुजारियों के बीच भरोसा कायम करता था। उसकी इस चालाकी के चलते किसी को उस पर संदेह नहीं होता था। नई दुकान के उद्घाटन का झांसा जब पुजारी पूरी तरह से उसके प्रभाव में आ जाते, तब आरोपी अपनी अगली चाल चलता। वह बताता कि उसने नई दुकान खोली है और उसके उद्घाटन के लिए पुजारी परिवार का आशीर्वाद जरूरी है। इसके बाद वह पुजारियों की पत्नियों या परिवार की महिलाओं को अपने साथ ले जाता। रास्ते में आरोपी महिलाओं को यह कहकर गहने उतरवाता कि जहां वे जा रहे हैं, वहां आभूषण पहनना उचित नहीं है। जैसे ही महिलाएं अपने गहने उसे सौंपतीं, वह उन्हें बीच रास्ते में छोड़कर फरार हो जाता। कई इलाकों में दर्ज हैं मामले पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ हेब्बल, राममूर्तिनगर, सिटी मार्केट और सीके अचुकट्टू सहित विभिन्न क्षेत्रों में पांच से अधिक धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी राजाजीनगर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उसके कब्जे से करीब 116 ग्राम सोना और 409 ग्राम चांदी बरामद की गई है, जिसकी कुल कीमत लगभग 15 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस फिलहाल आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने और किन-किन लोगों को अपना शिकार बनाया है। सतर्क रहने की अपील पुलिस ने आम नागरिकों और विशेष रूप से मंदिरों से जुड़े लोगों से अपील की है कि वे अनजान व्यक्तियों पर आसानी से भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें।

  • ईरान पर इज़रायल का बड़ा हमला: आईडीएफ का दावा—दो शीर्ष कमांडर ढेर

    रातभर चले हमलों में भारी तबाही, ईरान ने दी कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) तेहरान/तेल अवीव। मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए कथित बड़े हमले के बाद क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं। इज़रायली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने दावा किया है कि इस हमले में ईरान के दो शीर्ष सैन्य कमांडर मारे गए हैं। आईडीएफ के अनुसार, यह हमला रातभर चला, जिसमें रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। हमलों में मिसाइल और हवाई हमलों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई सैन्य प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा है। इज़रायल के दावे के मुताबिक, मारे गए प्रमुख व्यक्तियों में ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी अली लारीजानी और ईरान की कुद्स फोर्स से जुड़े वरिष्ठ कमांडर गुलामरेज़ा सुलेमानी शामिल हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। ईरान की ओर से इस हमले को “गंभीर आक्रामक कार्रवाई” बताया गया है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि इस घटना का “मुंहतोड़ जवाब” दिया जाएगा। तेहरान में उच्च स्तरीय बैठकों का दौर जारी है और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला दोनों देशों के बीच चल रहे लंबे समय से तनाव का नया और खतरनाक मोड़ हो सकता है। यदि स्थिति नहीं संभली तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसमें अन्य देशों की भी भागीदारी संभव है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस घटनाक्रम पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। फिलहाल, क्षेत्र में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है और दुनिया की नजरें ईरान की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

  • संयम पथ पर अग्रसर मुमुक्षु संजय पुगलिया का भव्य सम्मान समारोह

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिवमोग्गा। शहर के गांधी बाजार स्थित स्थानक भवन में मुमुक्षु संजय पुगलिया के सम्मान में 23 मार्च 2026 ने रविवार सायं एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। आगामी 29 अप्रैल 2026 को बेंगलूरु में होने वाली उनकी जैन भागवती दीक्षा के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और संयम मार्ग पर अग्रसर होने के उनके निर्णय की सराहना की। कार्यक्रम का आयोजन श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, शिवमोग्गा के तत्वावधान में हुआ। समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं ने मुमुक्षु संजय पुगलिया का पुष्पमालाओं व अभिनंदन पत्रों के साथ सम्मान किया तथा उनके त्याग, तप और संयम के संकल्प की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में सांसारिक सुखों का त्याग कर आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर होना अत्यंत प्रेरणादायक है। मुमुक्षु संजय पुगलिया का यह निर्णय समाज के युवाओं के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है, जो उन्हें धर्म और संयम के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेगा। कार्यक्रम में जयगच्छाधिपति आचार्य प्रवर 1008 पूज्य श्री पार्श्वचंद्रजी म.सा. के आशीर्वाद तथा अणुप्पेहा ध्यान प्रणेता डॉ. श्री पदमचंद्रजी म.सा. की प्रेरणा का विशेष उल्लेख किया गया। उनके मार्गदर्शन में ही मुमुक्षु संजय पुगलिया दीक्षा पथ पर अग्रसर हो रहे हैं। समारोह के अंत में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने मुमुक्षु के उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की मंगलकामनाएं व्यक्त कीं तथा दीक्षा समारोह में अधिकाधिक संख्या में सहभागी बनने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। प्रेषक: शांतिलाल साकरिया, शिवमोग्गा

  • मदुरै में मुमुक्षु आगम गुलेच्छा का भव्य स्वागत, दीक्षा से पूर्व उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मदुरै। जैन समाज में आध्यात्मिक उत्साह और श्रद्धा का वातावरण उस समय देखने को मिला जब सूरत निवासी मुमुक्षु आगम दिलीप गुलेच्छा के मदुरै आगमन पर उनका भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया। दीक्षा से पूर्व आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और भाव-विभोर होकर अनुमोदना की। प्रवक्ता दिनेश सालेचा ने जानकारी देते हुए बताया कि मुमुक्षु आगम गुलेच्छा अपने दादा प्रकाशमल एवं शांतिलाल गुलेच्छा के निवास स्थान पर पधारे, जहां परिवारजनों ने घर को आकर्षक रूप से सजाकर पारंपरिक विधि-विधान से उनका अभिनंदन किया। अक्षत से बधामना, श्रीफल अर्पण एवं माल्यार्पण कर मुमुक्षु का सम्मान किया गया। इस अवसर पर दीक्षार्थी की अनुमोदना हेतु सायंकालीन सांझी का भी आयोजन किया गया, जिसमें “दीक्षार्थी अमर रहे” जैसे जयघोषों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने मुमुक्षु के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए उनके आगामी आध्यात्मिक जीवन के लिए मंगलकामनाएं दीं। मुमुक्षु आगम के माता-पिता निर्मला एवं दिलीप कुमार गुलेच्छा ने सभी उपस्थितजनों से आगामी 23 अप्रैल 2026 को पालीताना स्थित पावन शत्रुंजय तीर्थ में आयोजित दीक्षा महोत्सव में सपरिवार पधारने का विनम्र आमंत्रण दिया। उल्लेखनीय है कि मुमुक्षु आगम गुलेच्छा मूलतः राजस्थान के पाली जिले के बिटू, मारवाड़ निवासी हैं तथा वर्तमान में सूरत में प्रवासरत हैं। उनकी दीक्षा 23 अप्रैल 2026 को शत्रुंजय तीर्थ में पूज्य आचार्य श्रीमद् रत्नचंद्र सूरीश्वरजी म.सा. एवं आचार्य श्रीमद् विजय उदयरत्न सूरीश्वरजी म.सा. (डहेलावाला) सहित विशाल श्रमण-श्रमणी भगवंतों की निश्रा में संपन्न होगी। कार्यक्रम में मोहनलाल तातेड़, विजराज श्रीश्रीमाल, कांतिलाल पटियात, मंगलचंद सालेचा, प्रकाशमल गुलेच्छा, गौतमचंद बाफना, शांतिलाल गुलेच्छा, रमेश कांकरिया, ललित जैन, जितेंद्र जैन, प्रकाश सालेचा, राहुलसिंह, दिनेश सालेचा, नवरत्न चोपड़ा सहित अनेक गणमान्य नागरिक, महिलाएं एवं सर्व समाज के लोग उपस्थित रहे।

  • सुणजौ रे संसारी लोगों एह्ड़ो जमानो आवेला...

    यह केवल पंक्ति नहीं अपितु पश्चिम राजस्थान के लोक संत कवि राजाराम जी की चेतावनी है, जो लोकत्रंत के आगमन और उसमें निहित सामाजिक और राजनीतिक ढाँचे सटीक भविष्यवाणी है। संत राजाराम जी लोक में श्रीकृष्ण के अवतार के रूप में प्रसिद्ध है। संत राजाराम का जन्म जोधपुर के पास शिकारपुरा कस्बे में कलबी (पटेल) कुल में सन् 1882 (संवत 1939, रामनवमी) को हुआ। इसलिए इनकी संत राजाराम की की मुख्य पीठ गाँव शिकारपुरा, तहसील-लूणी, ज़िला जोधपुर, राजस्थान में स्थित है। संत राजाराम जी के अनुयायी मुख्य रूप से राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात में ज्यादा है। अनुयायी इनके अनुयायी विशेषकर पटेल समाज के लोग है, जिसे अनेक स्थानों पर अलग अलग नामों से जाना जाता है। राजस्थान के जोधपुर, बालोतरा, बाड़मेर, जालौर और सिरोही में इनके अनुयायी कलबी जाति के है, जिन्हें चौधरी और पटेल भी कहा जाता है। राजस्थान के चितौड़गढ़ जिले और मध्यप्रदेश के उज्जैन और रतलाम जिले में इनके अनुयायियों को आँजणा (पटेल) कहा जाता है। राजाराम जी के जन्म से पहले यह सब जातियाँ की अलग-अलग पहचान थी। मूल रूप से खेती करने वाले लोग इस संप्रदाय के अनुयायी है। संत राजाराम जी ने सनातन धर्म से अलग कोई नए नियम नहीं बनाये, न ही किसी नई धारा को नहीं पनपाया। जिस समाज में संत का राजाराम का जन्म हुआ, उसी जाति-समाज के सांस्कृतिक गौरव को आगे बढाया। अपनी ही जाति में बढ़ रही रुढियों और अंधविश्वास को मिटाने का प्रयास किया, जिसे एक सामान्य समाज सुधारक करता है। संत राजाराम ने अपने अनुयायियों को इतनी सहूलियत दी कि वह स्वयं कृष्ण भक्त थे, लेकिन स्वयं के नाम के पीछे राम लगा है। भक्ति में निर्गुण राम के स्मरण पर जोर देते हैं जबकि उनके अनुयायी उन्हें कृष्ण अवतार के रूप में पूजते हैं। इस संप्रदाय के अनुयायी सरनेम में आज भी राम नाम लगाते ही है। उपदेश इनकी संपूर्ण वाणी लौकिक होने साथ मौखिक वाणी है। इनके बचपन का नाम राजू था। अल्पायु में पिता हरींगाराम और माता मोतीबाई का देहवसान हो गया। माता-पिता की मृत्यु के बाद बड़े भाई रुघनाथ राम भी साधुओं की जमात में चले गए। सामंती काल में शिक्षा की उपयुक्त व्यवस्था नहीं थी इसलिए वे अल्प शिक्षित रहे। परिस्थिति अनुसार सामंतों के घर हाली (सेवक) का कार्य स्वीकार किया, काम के बदले भोजन मिलता था, जनश्रुति के अनुसार जितना भोजन मिलता उसका आधा हमेशा कुत्तों को डाल देते थे, सामंत प्रतिदिन आधा करता जाता, पर राजाराम के कुत्तों को आधा भोजन देने का क्रम भी निरंतर चलता रहा। आवे जिणसु आध, कुतों ने नोके। पावे पछे परसाद, जिणसु सुबरि करे।। संत राजाराम जी बाल्यावस्था में ही शोषण विहीन, नशामुक्त समाज, पशुप्रेम, अहिंसा, नारी उत्थान जैसे अनेक विषयों पर उपदेश करते हुए समाज सुधार का कार्य किया। वे संत सच्चे संत-भक्त थे। संत भक्त इसलिए कि कृष्ण को निराकार मानकर उनकी आराधना करते थे। निर्गुण राम का जप जीवनपर्यन्त चलता रहा। पश्चिम राजस्थान में भक्ति के बदलते स्वरूप को युगानुकुल आचरण में ढालने वालों में राजाराम संत और समाज सुधारक के रूप में प्रसिद्ध हुए। श्रेष्ठ प्रकृति चिंतक राजाराम जी उनके जीवन के अनेक प्रसंगों से प्रमाणित होता है कि घने जंगल में जाकर तपस्या की और प्रकृति को अपना सहचरी बनाया। शिवरात्रि के पावन अवसर पर लोग इक्कठे हुए, लेकिन अकाल पड़ने के कारण पानी की किल्लत थी, पानी की महत्ता को समझाने के लिए उन्होंने समाज से सरोवर खुदवाया। उसी दिन बारिश से खुदवाया गया सरोवर पानी से भर गया। रात-रात में रल गयो, भर गयो सागर भाल। दिन उगा सब देखियाँ, पहुँच गयो जल पाल। जनता ने पवित्र मानकर सरोवर का पूजन किया। उसके आसपास हरे वृक्ष लगवाए, जिसमें विविध जड़ी बूटियों के पौधे भी लगवाए। राजारामजी ने गाँव वालों से इन सूखे पेड़ो को हरे-भरे रखने का संकल्प करवाया। एक दोहे से स्पष्ट होता है कि उनके सरोवर के पास सघन वृक्ष थे। फूल-फूलवाड़ी फरकिया, कई-कई जात जरद। जिणमे देखाण दौ दिया, मेले उभा मरद।। चंपा, चमेली, मोगरो, गहर, गुलाब, गंभीर। जूही केतकी केवड़ो, उगा सरवर तीर।। वे अपने सरोवर को इतना साफ़ रखते थे कि आज भी हर श्रद्धालु उसमें स्नान करना, गंगा स्नान करने के समान मानते हैं। अपने उपदेशों में उन्होंने पशु-पक्षियों के प्रति अपनत्व भाव दिखाते हुए कहा कि- सरवर तीर के वृक्ष को, काटो मती किसान। पंछी बैठे पेड़ पर, सांझ पड़े उड़ आन।। आवे सरवर उपरे पशु, किया प्यासों धाय। कदे न तिरसो काडणो, पाणी देहु पिलाय।। अतः प्रमाणित है कि राजारामजी ने पशु-पक्षी, पेड़-पौधों का चिंतन कर पर्यावरण संतुलन की वकालत की तथा वे अहिंसा के भी प्रबल समर्थक थे। पशु मिनखरी री पांख है, वा टूटा दुख होय। ताकि रकसा कीजिए, होम किया सुख होय।। आज पूरा विश्व पर्यावरण संकट को लेकर चिंतित है, लेकिन भारतीय जीवन दृष्टि ने पानी, पशु, पत्थर, कीट-पंतग और यहाँ तक कि कागज में भी ईश्वर के दर्शन किए हैं। इस दृष्टि के पीछे केवल संतों का पूरे विश्व को अपना परिवार मानने वाला जीवंत चिंतन है। नारी-दृष्टिकोण राजारामजी ने महिलाओं को पुरुष की अपेक्षा महत्त्वपूर्ण माना है और उन्हें परिवार, समाज और संस्कृति की वाहक मानते हुए भविष्यवाणी में चेतवानी दी, जो आज सटीक साबित हो रही है- स्त्रियाँ गेणों तज देसी, दो दो चूड़ी राखेला। स्वाग-भाग सब छोड़ केसा ने सुलजावेला। यहाँ राजारामजी चेतावनी देते हैं लेकिन समाज को स्त्री के प्रति बहन की दृष्टि से सोचने के लिए आग्रह किया है। मध्यकालीन संतों की संतों की वाणी में स्त्री को माया, डाकिन, सर्पिणी, विरहिणी और जीवात्मा है, लेकिन इनके साहित्य स्त्री बहन है। उनकी समुचित शिक्षा के लिए भी आग्रह करते है। पंच बुलावे प्रेम सूं पढ़िए ने निज पास। करें घणेरी खातरी, बात मान विश्वास। शिक्षा के प्रभावस्वरूप इनके अनुयायियों का जीवन एकदम सादा-सरल रहता है। सबसे बड़ी बात पटेल समाज में आज भी लिंगानुपात अन्य जातियों की अपेक्षा ज्यादा है। सबसे बड़ा कारण संत राजाराम के उपदेशों के फलस्वरूप दहेज प्रथा से मुक्त समाज है। राजा का शिष्यत्व स्वीकार करना संत राजाराम को सेवाभाव और जप-तप के कारण बहुत प्रसिध्दि प्राप्त हुई। प्रकृति से सहज जुड़ाव के कारण उनके उपयोगिता को वे बखूबी जानते थे। जड़ी बूटियों के माध्यम बीमार पशुओं का इलाज सेवाभाव से करते थे। नीम-हाकिमों ने उनको सताना शुरू किया। मारवाड़ के राजा प्रतापसिंह ने भी उनका विरोध किया, लेकिन सच्ची सेवाभाव और ईश्वर-भक्ति के कारण उनको भी नतमस्तक होना पड़ा। (सोरठा) सब कपड़ा पर छाप उघड़ी एक दिन। पिछ्ताया परताप, अरज करी उणवार में। सर परताप सीखाकर, माफ़ी ले मुनिराय। अपने भवन आय के, सिद्ध री बात सुनाय।। मानव मूल्यों का संवर्धन मनुष्य के जीवन जीने के तरीकों मानवीय मूल्य कहते है। संत राजाराम भी मानवीय मूल्यों के पक्षधर है। दीनों को सताने से, चोरी करने से, गलत तरीके से लगान या कर लेने से व्यक्ति से ईश्वर विमुख हो जाता है और जनता का उन पर से विश्वास भी उठ जाता है। वे लिखते हैं कि- दुख मत दिजो दीन को म्हारों कयो मान। हाय बुरी है गरीब की कबहु न निरफल जान।। चोरी झारी मत करो मतलो हासल चुराय। ईश्वर ते वेमुख हुवे पत पंचों में जाय ।। प्रेम संत राजाराम प्रेमभाव को सर्वोच्च स्थान देते हैं, वे उसे संपत्ति का दर्जा देते हैं। मधुमक्खियाँ की भाँति प्रेम की सीख देते हुए कहते हैं कि प्रेम से किए गए सुकृत कार्य से ईश्वर प्रसन्न होता है तथा देश का भी कल्याण होता हैं। संपत ऐसी राखजो जैसे मधु की माख सुख दुःख में सामल रहे देवे अमृत की दाख।। ....सांचे मन शत्रु तब संपत देख सुजाण। हिलमिल भाँया चलो करो देश कल्याण । मानव मात्र के कल्याण का भाव संत राजाराम जी का सामजिक चिंतन केवल एक जाति का न होकर संपूर्ण मानव जाति का है। गाँव की प्रत्येक जाति और वंचित तबके के लोगों की भरसक सेवा करने का संकल्प अपने जीवन में किया। समतामूलक समाज की स्थापना को वे धर्म का मार्ग मानते हैं। राजूराम साची कही सबे मानो संसार। नीति वचन निभाय के चलो धर्म के लार। हुवे गरीब निज गाँव में सब जाति के तात। सेवा करो सब उणरी भाव रखो सब भ्रात, करो मदद उणरी कहूँ तं मन धन सू तात सगलो सू संपत रखो जिण सू सुधरे जात।। इस प्रकार संत राजाराम ने युगीन दृष्टि को ध्यान में रखकर सामाजिक समभाव पर बल दिया। जाति व्यवस्था को तोड़ने के लिए संतों ने जो कदम उठाया वह हमारे लिए प्रासंगिक है। आटा-साटा एवं अन्य कुप्रथाओं का विरोध काल, परिस्थिति सापेक्ष संत राजाराम ने भी स्त्री शिक्षा, संस्कार एवं सशक्तिकरण के लिए भरसक प्रयास किए। तत्कालीन लोक में व्याप्त कुरुतियाँ यथा आटा-साटा प्रथा, पैसा लेकर लड़की की शादी करना, मृत्युभोज करना और नशाखोरी जैसी बुराइयों पर प्रहार किया जो आज भी नासूर बनी हुई है। लड़की की शादी के बदले पैसा लेना जीव हत्या के समान मानते हुए कहते हैं- लेवे पईसो लोभकर, रूठे जिण सूं राम। हाड़ मांस कुं बेचकर किउं करो कसाई काम।। काज किरयावर मत करो, करो न मोसर कोय। ...उमर भर दुख भोगवो शोभा घड़ी एक होय। समाज के पंचों को उपदेश आज समाज का युवा वर्ग पुरानी न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास जाहिर कर न्यायालय का रास्ता अपना रहे हैं लेकिन गुरुदेव भगवान ने बहुत समय पहले ही सही न्याय करने के लिए उपदेश दिया- राजाराम तुम सूं कहे सुणजो पंच सुजान। करो पंचायत न्याय सू पक्ष पाट तज आण।। ईशवर को तुम डर राखो करो न्याय इखलाफ। शत्रु हो चाहे भाई सगो अदल करो इनसाफ़।। सत्संग एवं सतगुरु महिमा के उपदेश संत राजाराम भी सत्संग को अध्यात्म का मार्ग बताते हुए उनकी महत्ता को स्थापित करते हैं। सांची संगत बिन सूरता नहीं जागी, नहीं होवे ज्ञान ब्रह्मा रो। संत राजाराम भी सतगुरु की महिमा को अपने पदों में गाया है। सतगुरु महिमा में उनके साहित्य पर नाथ संप्रदाय का प्रभाव उल्ल्लेखित हैं। राजाराम हरि गुण गाया, सात गुरु मोहि आय जगाया। सतगुरु मो पर कृपा किनी ओम सोऽहं की सुमिरन दिनी सुरता जाय नुरत सूं लागी, ईड़ा पिंगला सुकमणा जागी।। नाम स्मरण पर जोर (नाम जप) संत राजाराम मूलतः निर्गुण संत थे, क्योंकि मध्यकालीन संतों की तरह उनके स्वानुभूत नैतिक उपदेश ज्यादा है। उन्होंने सगुण की दोनों धाराओं का सम्मान किया, तो जनता ने इसे श्रीकृष्ण का अवतार मानकर पूजा की। निर्गुण राम की महिमा का वर्णन करते हुए लिखते हैं कि- निर्गुण राम सकल घट माही, पुरुष नारी में वोही समाई। धरा आसमान सुन में समायो, ज्यारी करो ओलखाई।। यहाँ लोक प्रसिद्ध मुहावरा ‘करो ओलखाई’ से तात्पर्य ‘पहचान करना’ है। संत राजाराम इस मुहावरे के माध्यम से ईश्वरीय पहचान की बात करते हैं। मनोविकारों का त्याग राजाराम जी मनोविकारों का त्याग की बात करते हैं जो व्यक्तिगत सुख के लिए सहायक है। काम क्रोध मद मोह तजो तजो द्रोह को तात। कूड़ कपट आगो करो जनम सुधारो तात। सटीक भविष्यवाणी संत राजाराम की वाणी आज चेतावनी के भजनों के रूप में लोक प्रसिद्ध है, उनकी एक भविष्यवाणी जो उनके जन्म के तीस साल बाद अर्थात सन् 1912 के आसपास की जिसमें उन्होंने तत्कालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आने वाले वैश्विक संकटों और राजनीतिक परिवर्तनों को अनुभूत कर लिया था जो आज हूबहू हमारे सामने है। अन्न और पानी का संकट अन्न और पानी एक वैश्विक समस्या बनकर खड़ी होगी, भूमि की उर्वरकता समाप्त हो जाएगी। अकाल या बेमौसम बरसात से जनजीवन प्रभावित होगा। अत्यधिक जनसंख्या बढने से भूखमरी बढ़ेगी, जिसे आज विशव भुगत रहा है। एक सेर रो धान बिकेला, पाणी टांक तुलावेला। भूमि बीज उपज तज देसी, इंद्र नहीं बरसावेला। मानखो बध जासी ज्यादा धान हाथ नहीं आवेला। एक रोटी रे कारण लड़कर अपनो प्राण गमावेला।। ईश्वर में अविश्वास वे कहते हैं कि लोग हमारी सनातन परंपरा को छोड़कर ईश्वरीय शक्तियों न मानते हुए, आर्थिक नियोजन के पीछे भागते दिखेंगे। नेम धर्म अरू करम तज देसी, सब दिन टका कमावेला। ईश्वर ने ईश्वर नी जाणे, आप ब्रह्म बण जावेला। वैश्विक युद्धों से मानवता पर संकट आज चल रहे युद्धों से संत राजाराम जी मानव के बदलते स्वभाव के कारण परिचित थे। राजा-रजवाड़े समाप्त होने बाद लोकतंत्र की स्थापना और साम्राज्यवाद के भाव को पहचान कर समाज को जागृत करते है- समदा पार विलायत केसी, आपस में लड़ जावेला, धुआं धार घोर जुध मचसी, लाखा ही खप जावेला। इसलिए आज संत राजाराम की स्वानुभूत वाणी हमें युगीन अनुभूत हो रही है। संत राजाराम जी ने लोक से अनुभूत विषयों से समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करके समाज को आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाया। वे तो समाज की चेतना के जागरण में अग्रगण्य रहे। वे पहले कबीर की भाँति पहले समाज सुधारक हैं फिर संत। संत राजाराम महाराज का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद भी समाज सेवा, शिक्षा और आध्यात्मिकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उनके उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं। जिसका प्रभाव इनके अनुयायियों पर पड़ा। प्रतिवर्ष मेला संत राजाराम ने सन् 1943 को शिकारपुरा गाँव में जीवित समाधि ली। आज भी उनके जन्म दिन अर्थात रामनवमी को शिकारपुरा में विशाल मेला भरता है, जिसमें पर्यावरण चिंतन के साथ लोकनृत्य गेर का आयोजन होता है जिसमें राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के लोग शामिल होते हैं। इनके अनुयायी वर्तमान में बड़ी संख्या में व्यापार में भागीदारी करने लगे हैं। गद्दी परंपरा और आश्रम संत राजाराम जी के बाद गद्दी परंपरा आरंभ हुई, फिर उनके उतराधिकारी संत देवाराम जी (1943 से 1996 तक) बने। उसके बाद शिक्षा जगत में क्रांति लाने वाले संत किशनराम जी (1996-2007) और वर्तमान में गादीपति संत दयाराम जी 2007 से लगातार है। जो नशा के खिलाफ अभियान छेड़कर पूरे समाज को नशा मुक्ति की ओर ले जा रहे है। शिकारपुरा के अलावा पाली जिले के चेंडा गाँव में राजाराम संप्रदाय की प्रमुख पीठ है। इसके अलवा पारलु (बालोतरा), फ़रेड़ी आश्रम (गुड़ामालानी) और लुम्बा की ढाणी (जालौर) में संत राजाराम जी के प्रमुख मंदिर है। डॉ. वीरमाराम पटेल युवा लेखक और विचारक गाँव-ढीमड़ी, तहसील-गुड़ामालानी, बाड़मेर, (राज.)

  • ईरान से एलएनजी के दो जहाज भारत पहुंचे, गैस संकट से राहत की उम्मीद

    आपूर्ति बढ़ने से घरेलू गैस उपलब्धता में सुधार, कालाबाजारी पर भी लगाम की संभावना भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। देश में रसोई गैस की बढ़ती मांग और आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ईरान से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) लेकर आए दो बड़े जहाज आज भारत के तट पर पहुंच गए हैं। इस आपूर्ति से घरेलू गैस संकट में कमी आने और आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इन जहाजों के माध्यम से बड़ी मात्रा में एलएनजी भारत लाई गई है, जिसे विभिन्न गैस टर्मिनलों के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में वितरित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे गैस सिलेंडर की कमी की समस्या जल्द ही दूर हो सकती है। हाल के दिनों में कई राज्यों में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने और कीमतों में उतार-चढ़ाव की शिकायतें सामने आई थीं। इस कारण उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे थे। ऐसे में यह नई खेप राहत का संकेत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों के कारण भारत जैसे आयात-निर्भर देशों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। ईरान से आई यह आपूर्ति इन चुनौतियों को कुछ हद तक संतुलित करने में मदद करेगी। सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि गैस वितरण प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। संबंधित एजेंसियों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम जनता तक उचित कीमत पर गैस उपलब्ध हो सके। ऊर्जा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आने वाले दिनों में और भी गैस आपूर्ति के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे देश में ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर, ईरान से पहुंचे इन एलएनजी जहाजों को देश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे निकट भविष्य में गैस की उपलब्धता बेहतर होने और उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद।

  • 12 सिलेंडर के बाद सख्ती: 13वें एलपीजी पर ऐप वेरिफिकेशन अनिवार्य

    अतिरिक्त गैस बुकिंग के लिए देना होगा कारण, परिवार व आयोजनों की जानकारी भी जरूरी भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। देश में रसोई गैस (एलपीजी) के उपयोग को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के लिए तेल कंपनियों ने गैस बुकिंग प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत अब एक उपभोक्ता द्वारा साल में 12 सिलेंडर की निर्धारित सीमा पार करने के बाद अतिरिक्त सिलेंडर लेने के लिए सख्त प्रक्रिया से गुजरना होगा। नई व्यवस्था के अनुसार, 12 सिलेंडर के बाद 13वें सिलेंडर की बुकिंग के लिए उपभोक्ताओं को अनिवार्य रूप से ‘Hello BPCL’ ऐप के माध्यम से आवेदन करना होगा। इस डिजिटल प्रक्रिया के जरिए उपभोक्ता की अतिरिक्त खपत का सत्यापन किया जाएगा। तेल कंपनियों के अनुसार, यह कदम घरेलू गैस के दुरुपयोग को रोकने और सब्सिडी का सही लाभ पात्र उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है। अब उपभोक्ताओं को अतिरिक्त सिलेंडर बुक करते समय यह स्पष्ट करना होगा कि उनकी खपत क्यों बढ़ी है। बुकिंग के दौरान उपभोक्ताओं से परिवार के सदस्यों की संख्या, घर में आए मेहमानों की जानकारी या किसी विशेष आयोजन जैसे शादी, भंडारा या अन्य कार्यक्रम का विवरण देना अनिवार्य किया गया है। इन जानकारियों के आधार पर संबंधित एजेंसी और कंपनी द्वारा वेरिफिकेशन किया जाएगा। नियमों के मुताबिक, सभी आवश्यक जानकारियां और दस्तावेज सही पाए जाने पर ही अतिरिक्त सिलेंडर की आपूर्ति की जाएगी। यदि उपभोक्ता पर्याप्त कारण नहीं दे पाते हैं, तो उनकी अतिरिक्त बुकिंग को रोका भी जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई व्यवस्था गैस वितरण प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाएगी और फर्जी या व्यावसायिक उपयोग के मामलों में कमी लाएगी। हालांकि, ग्रामीण और तकनीकी रूप से कम सक्षम उपभोक्ताओं के लिए ऐप आधारित प्रक्रिया एक चुनौती भी बन सकती है। कुल मिलाकर, 12 सिलेंडर के बाद गैस बुकिंग अब पहले जितनी सरल नहीं रहेगी। उपभोक्ताओं को अतिरिक्त सिलेंडर के लिए उचित कारण और डिजिटल सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, तभी उन्हें गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

  • मध्य पूर्व तनाव से एलएनजी संकट गहराया, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ा दबाव

    कतर के गैस प्लांट पर हमले से वैश्विक बाजार में हलचल, भारत की आयात निर्भरता बनी चिंता का विषय भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कतर के प्रमुख गैस संयंत्र पर हुए हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस घटना के बाद तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर भारत समेत कई आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, कतर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की अस्थिरता वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती है। हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जिससे ऊर्जा आयात करने वाले देशों की चिंता बढ़ गई है। भारत पर संभावित प्रभाव भारत की ऊर्जा जरूरतों में एलएनजी का महत्वपूर्ण स्थान है, और इसमें कतर की भूमिका बेहद अहम है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरत का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा कतर से आयात करता है। इसके अलावा, देश हर साल करीब 12-13 मिलियन टन एलएनजी कतर से मंगाता है। ऐसे में यदि आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा आती है, तो भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर सीधा असर पड़ सकता है। गैस आधारित बिजली संयंत्रों, उर्वरक उद्योगों और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। कीमतों में उछाल की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वैश्विक बाजार में एलएनजी की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और घरेलू स्तर पर गैस की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों पर पड़ेगा। विकल्पों की तलाश में भारत स्थिति को देखते हुए भारत अन्य देशों से एलएनजी आयात बढ़ाने के विकल्प तलाश रहा है। साथ ही, सरकार घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दे रही है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटा जा सके। विशेषज्ञों की राय ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि मध्य पूर्व में स्थिरता बहाल होने तक वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में विविधता लाने और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों को मजबूत करने की जरूरत है। मध्य पूर्व का यह ताजा घटनाक्रम एक बार फिर यह संकेत देता है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति कितनी संवेदनशील है। भारत के लिए यह समय सतर्क रहने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने का है।

  • चारधाम यात्रा से पहले बड़ा निर्णय: केदारनाथ–बद्रीनाथ में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक

    धार्मिक परंपराओं की रक्षा का हवाला, फैसले पर शुरू हुई बहस भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) देहरादून। उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा से पहले एक महत्वपूर्ण और विवादित निर्णय सामने आया है। राज्य के प्रमुख तीर्थस्थलों केदारनाथ मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है। इस निर्णय ने धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, यह कदम मंदिरों की पारंपरिक मर्यादा और धार्मिक आस्था की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है। संबंधित प्रबंधन समितियों और स्थानीय धार्मिक संगठनों का कहना है कि इन प्राचीन धामों की पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है, जिसके लिए प्रवेश नियमों को सख्त किया गया है। चारधाम यात्रा, जिसमें यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर शामिल हैं, हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। ऐसे में इस तरह के फैसले का सीधा असर यात्रा की व्यवस्था और स्वरूप पर पड़ सकता है। हालांकि, इस निर्णय को लेकर विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ धार्मिक संगठनों ने इसे परंपरा की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है, वहीं कई सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने इसे भेदभावपूर्ण करार देते हुए सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐसे निर्णय संविधान में प्रदत्त समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के विपरीत हो सकते हैं। राज्य प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले पर आधिकारिक विस्तृत बयान का इंतजार है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस फैसले को लेकर कानूनी पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। चारधाम यात्रा की तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं और प्रशासन सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस बीच, इस निर्णय ने यात्रा शुरू होने से पहले ही एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसका असर आने वाले दिनों में और स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

  • बंगाल चुनाव 2026 में तीसरा मोर्चा: ओवैसी–कबीर गठबंधन से बढ़ी सियासी हलचल, क्या बदलेगा ‘दीदी’ का समीकरण?

    फ़ाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता/हैदराबाद। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति में एक नया समीकरण उभरकर सामने आया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने हुमायूं कबीर की नवगठित पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJDUP) के साथ गठबंधन का ऐलान किया है। इस गठबंधन को राज्य की राजनीति में तीसरे मोर्चे के रूप में देखा जा रहा है, जो तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधे मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकता है। रविवार को हैदराबाद में हुई घोषणा के बाद अब 25 मार्च को कोलकाता में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमें सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति की विस्तृत रूपरेखा पेश की जाएगी। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को चुनावी समीकरण बदलने वाली संभावित चाल के रूप में देखा जा रहा है। 182 सीटों पर नजर, AIMIM सीमित सीटों पर लड़ेगी गठबंधन के तहत AJDUP ने राज्य की 294 सीटों में से 182 सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य तय किया है। वहीं AIMIM के लगभग 8 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की संभावना जताई जा रही है। हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी के 18 उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी है, जिसमें मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे संवेदनशील जिले शामिल हैं। कबीर स्वयं मुर्शिदाबाद जिले की भगवानगोला, नौदा और राजीनगर सीटों से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। उनका दावा है कि यदि विधानसभा त्रिशंकु स्थिति में पहुंचती है, तो उनका गठबंधन “किंगमेकर” की भूमिका निभा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ऐसी स्थिति में वे भारतीय जनता पार्टी या तृणमूल कांग्रेस में से किसे समर्थन देंगे। ‘बाबरी मस्जिद’ विवाद से चर्चा में आए कबीर हुमायूं कबीर पहले तृणमूल कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं, लेकिन ‘बाबरी मस्जिद’ नाम से मस्जिद निर्माण के उनके बयान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया। कबीर इस मुद्दे को भावनात्मक बताते हुए मानते हैं कि यह चुनावी विमर्श को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि उनकी पार्टी सत्ता में आई तो राज्य को पहला मुस्लिम मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री मिल सकता है। टीएमसी के वोट बैंक पर असर की आशंका राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह गठबंधन मुख्य रूप से अल्पसंख्यक मतदाताओं को केंद्र में रखकर बनाया गया है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी लगभग 27 प्रतिशत है, जो अब तक बड़े पैमाने पर तृणमूल कांग्रेस के साथ रही है। मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में इस नए गठबंधन की सक्रियता टीएमसी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। यदि AIMIM–AJDUP गठबंधन मुस्लिम बहुल सीटों पर सीमित वोट भी खींचने में सफल रहता है, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है और ममता बनर्जी के लिए चुनौती बढ़ सकती है। दो चरणों में मतदान, 4 मई को नतीजे राज्य की सभी 294 सीटों पर मतदान दो चरणों में होगा। पहला चरण 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और दूसरा चरण 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। मतगणना 4 मई 2026 को होगी, जिसके साथ ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि नया गठबंधन बंगाल की राजनीति में कितना असर डाल पाया। ओवैसी और कबीर का यह गठबंधन बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर चुका है। अब नजर इस बात पर है कि यह तीसरा मोर्चा कितना प्रभावी साबित होता है और क्या यह वाकई ‘दीदी’ के मजबूत चुनावी किले में दरार डाल पाता है या नहीं।

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