मध्य पूर्व तनाव से एलएनजी संकट गहराया, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ा दबाव
- धन्ना राम चौधरी

- 24 मार्च
- 2 मिनट पठन
कतर के गैस प्लांट पर हमले से वैश्विक बाजार में हलचल, भारत की आयात निर्भरता बनी चिंता का विषय

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कतर के प्रमुख गैस संयंत्र पर हुए हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस घटना के बाद तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर भारत समेत कई आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, कतर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की अस्थिरता वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती है। हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जिससे ऊर्जा आयात करने वाले देशों की चिंता बढ़ गई है।
भारत पर संभावित प्रभाव
भारत की ऊर्जा जरूरतों में एलएनजी का महत्वपूर्ण स्थान है, और इसमें कतर की भूमिका बेहद अहम है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरत का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा कतर से आयात करता है। इसके अलावा, देश हर साल करीब 12-13 मिलियन टन एलएनजी कतर से मंगाता है।
ऐसे में यदि आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा आती है, तो भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर सीधा असर पड़ सकता है। गैस आधारित बिजली संयंत्रों, उर्वरक उद्योगों और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
कीमतों में उछाल की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वैश्विक बाजार में एलएनजी की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और घरेलू स्तर पर गैस की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों पर पड़ेगा।
विकल्पों की तलाश में भारत
स्थिति को देखते हुए भारत अन्य देशों से एलएनजी आयात बढ़ाने के विकल्प तलाश रहा है। साथ ही, सरकार घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दे रही है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटा जा सके।
विशेषज्ञों की राय
ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि मध्य पूर्व में स्थिरता बहाल होने तक वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में विविधता लाने और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों को मजबूत करने की जरूरत है।
मध्य पूर्व का यह ताजा घटनाक्रम एक बार फिर यह संकेत देता है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति कितनी संवेदनशील है। भारत के लिए यह समय सतर्क रहने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने का है।
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