बंगाल चुनाव 2026 में तीसरा मोर्चा: ओवैसी–कबीर गठबंधन से बढ़ी सियासी हलचल, क्या बदलेगा ‘दीदी’ का समीकरण?
- धन्ना राम चौधरी

- 23 मार्च
- 3 मिनट पठन

फ़ाइल फोटो
भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
कोलकाता/हैदराबाद। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति में एक नया समीकरण उभरकर सामने आया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने हुमायूं कबीर की नवगठित पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJDUP) के साथ गठबंधन का ऐलान किया है। इस गठबंधन को राज्य की राजनीति में तीसरे मोर्चे के रूप में देखा जा रहा है, जो तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधे मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकता है।
रविवार को हैदराबाद में हुई घोषणा के बाद अब 25 मार्च को कोलकाता में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमें सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति की विस्तृत रूपरेखा पेश की जाएगी। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को चुनावी समीकरण बदलने वाली संभावित चाल के रूप में देखा जा रहा है।
182 सीटों पर नजर, AIMIM सीमित सीटों पर लड़ेगी
गठबंधन के तहत AJDUP ने राज्य की 294 सीटों में से 182 सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य तय किया है। वहीं AIMIM के लगभग 8 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की संभावना जताई जा रही है। हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी के 18 उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी है, जिसमें मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे संवेदनशील जिले शामिल हैं।
कबीर स्वयं मुर्शिदाबाद जिले की भगवानगोला, नौदा और राजीनगर सीटों से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। उनका दावा है कि यदि विधानसभा त्रिशंकु स्थिति में पहुंचती है, तो उनका गठबंधन “किंगमेकर” की भूमिका निभा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ऐसी स्थिति में वे भारतीय जनता पार्टी या तृणमूल कांग्रेस में से किसे समर्थन देंगे।
‘बाबरी मस्जिद’ विवाद से चर्चा में आए कबीर
हुमायूं कबीर पहले तृणमूल कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं, लेकिन ‘बाबरी मस्जिद’ नाम से मस्जिद निर्माण के उनके बयान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया।
कबीर इस मुद्दे को भावनात्मक बताते हुए मानते हैं कि यह चुनावी विमर्श को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि उनकी पार्टी सत्ता में आई तो राज्य को पहला मुस्लिम मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री मिल सकता है।
टीएमसी के वोट बैंक पर असर की आशंका
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह गठबंधन मुख्य रूप से अल्पसंख्यक मतदाताओं को केंद्र में रखकर बनाया गया है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी लगभग 27 प्रतिशत है, जो अब तक बड़े पैमाने पर तृणमूल कांग्रेस के साथ रही है।
मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में इस नए गठबंधन की सक्रियता टीएमसी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। यदि AIMIM–AJDUP गठबंधन मुस्लिम बहुल सीटों पर सीमित वोट भी खींचने में सफल रहता है, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है और ममता बनर्जी के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
दो चरणों में मतदान, 4 मई को नतीजे
राज्य की सभी 294 सीटों पर मतदान दो चरणों में होगा। पहला चरण 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और दूसरा चरण 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। मतगणना 4 मई 2026 को होगी, जिसके साथ ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि नया गठबंधन बंगाल की राजनीति में कितना असर डाल पाया।
ओवैसी और कबीर का यह गठबंधन बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर चुका है। अब नजर इस बात पर है कि यह तीसरा मोर्चा कितना प्रभावी साबित होता है और क्या यह वाकई ‘दीदी’ के मजबूत चुनावी किले में दरार डाल पाता है या नहीं।
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