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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • नेलामंगला में 11 से 21 अक्टूबर तक गूंजेगी मां दुर्गा की महिमा, पांचवां शारदीय नवरात्र महोत्सव आज से

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह बेंगलुरु, 10 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु के नेलामंगला क्षेत्र में मां दुर्गा की आराधना और भक्ति का वातावरण बनने जा रहा है। मां दुर्गा पूजा समिति की ओर से लगातार पांचवें वर्ष शारदीय नवरात्र एवं दुर्गा पूजा महोत्सव का आयोजन 11 से 21 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा। धार्मिक अनुष्ठानों, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजे इस महोत्सव में श्रद्धालुओं को मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और भक्ति संगीत का अवसर मिलेगा। महोत्सव का आयोजन श्री मारुति साईं धाम मंदिर परिसर, अरकमारनहल्ली बस स्टॉप के पास, तुमकुर रोड, बेंगलुरु में होगा। समिति ने श्रद्धालुओं से परिवार सहित शामिल होकर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है। विज्ञापन कलश स्थापना से होगा महोत्सव का शुभारंभ महोत्सव की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के साथ होगी। आयोजन के दौरान प्रतिदिन सुबह और शाम पूजा-अर्चना, आरती तथा महाप्रसाद की व्यवस्था रहेगी। वाराणसी के विद्वान आचार्यों द्वारा विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे। नवरात्र के दौरान मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी और मां कालरात्रि सहित देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाएगी। कार्यक्रम के अंतर्गत महाअष्टमी, महानवमी, हवन, कन्या पूजन और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। 18 और 19 अक्टूबर को भजन संध्या के विशेष कार्यक्रम महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में बिहार के भजन गायक आकाश मिश्रा और गायिका नेहा निष्ठा की प्रस्तुतियां शामिल हैं। दोनों कलाकार 18 और 19 अक्टूबर को शाम के समय भक्ति गीतों की प्रस्तुति देंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति संगीत का आनंद लेने का अवसर मिलेगा। विजयादशमी पर प्रतिमा विसर्जन के साथ समापन समिति की योजना के अनुसार, 21 अक्टूबर, बुधवार को मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन के साथ 11 दिवसीय महोत्सव का समापन होगा। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक परंपराओं, सामूहिक सहभागिता और सांस्कृतिक गतिविधियों पर विशेष जोर रहेगा। मां दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष राजेश तिवारी की अध्यक्षता में महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। आयोजन की जानकारी समिति के संस्थापक सदस्य नवीन सिंह ने दी। समिति ने श्रद्धालुओं, भक्तों और परिवारों को सादर आमंत्रित करते हुए अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पूजा-अर्चना में भाग लेने की अपील की है।

  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत जारी, टैरिफ और बाजार पहुंच बनी चुनौती

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 10 अक्टूबर 2026 भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। दोनों देश आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाना अब भी चुनौती बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 सितंबर को फोन पर बातचीत के दौरान व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की थी। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने तथा आपसी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई थी। विज्ञापन व्यापार समझौते को लेकर भारत की प्राथमिकताओं में घरेलू उद्योगों, किसानों और संवेदनशील कृषि क्षेत्रों के हितों की सुरक्षा शामिल है। वहीं, अमेरिका बाजार तक अधिक पहुंच और व्यापार से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव चाहता है। टैरिफ और ऊर्जा आयात से जुड़े मतभेदों ने बातचीत को जटिल बनाया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हालिया बयान में कहा कि दोनों देश व्यापार समझौते के विवरण पर काम कर रहे हैं। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बातचीत में सीमित गुंजाइश का उल्लेख किया है। इससे स्पष्ट है कि समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अभी और चर्चा की आवश्यकता है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होने से निर्यातकों, उद्योगों, निवेशकों और रोजगार के अवसरों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, समझौते की शर्तें तय होने से पहले इसके संभावित लाभों और प्रभावों का अंतिम आकलन करना जल्दबाजी होगी।

  • आत्मशक्ति का सोपान: 27 दिनों के मासखमण से करुणा नाहटा ने बढ़ाया तप और त्याग का गौरव

    फोटो-किशोर दफ्तरी भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) राजराजेश्वरी नगर | 10 अक्टूबर 2026 बेंगलुरु। राजराजेश्वरी नगर स्थित तेरापंथ भवन में परमपूज्य युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री आकाश कुमार जी ठाणा-2 के सान्निध्य में चातुर्मास के प्रथम मासखमण की तपस्या पूर्ण करने वाली तपस्विनी श्रीमती करुणा नाहटा की तप-अनुमोदना एवं अभिनंदन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुजानगढ़ निवासी देवेन्द्र जी नाहटा की धर्मपत्नी श्रीमती करुणा नाहटा को मुनिश्री ने अपने मुखारविंद से 27 दिनों के मासखमण का प्रत्याख्यान करवाया। इस अवसर पर उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्विनी की दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मसंयम और धर्मनिष्ठा की अनुमोदना की। फोटो-किशोर दफ्तरी आत्मशुद्धि का मार्ग है तप और त्याग मंगल उद्बोधन में मुनिश्री आकाश कुमार जी ने कहा कि बहन करुणा ने मासखमण की तपस्या के माध्यम से आत्मशुद्धि का कार्य किया है। उन्होंने गुरु-शिष्य संवाद के माध्यम से आत्मा के आरोहण और शुद्धि का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि आत्मा का आरोहण शुद्धि के माध्यम से संभव है और शुद्धि के लिए स्नान आवश्यक है। स्नान दो प्रकार के होते हैं—बाह्य और आंतरिक। बाह्य स्नान से शरीर की शुद्धि होती है, जबकि आंतरिक स्नान से आत्मा की शुद्धि होती है। मुनिश्री ने कहा कि मासखमण जैसी कठिन तपस्या आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने करुणा नाहटा की दृढ़ आत्मशक्ति की सराहना करते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों से उनके लिए एक उपवास करना भी कठिन हो रहा था, लेकिन इस बार उन्होंने अदम्य संकल्प और आत्मबल का परिचय देते हुए 27 दिनों की तपस्या पूर्ण की। उन्होंने कहा कि गुरुदेव की परम कृपा से राजराजेश्वरी नगर में चातुर्मास के शेष समय में भी तपस्या का अच्छा क्रम चल रहा है। फोटो-किशोर दफ्तरी तपस्विनी के सम्मान में उमड़ा श्रद्धाभाव कार्यक्रम का मंच संचालन मुनिश्री हितेन्द्र कुमार जी ने तप और त्याग की महिमा को अभिव्यक्त करने वाले प्रेरणादायी शब्दों के साथ किया। सभा के कोषाध्यक्ष देवेन्द्र जी नाहटा ने अपनी धर्मपत्नी की तपस्या के सम्मान में तप-गीत प्रस्तुत किया। सभा अध्यक्ष कमलसिंह जी दुगड़ ने इस तपस्या पर गर्व व्यक्त करते हुए तपस्विनी बहन के प्रति मंगलकामनाएं प्रकट कीं। सभा के कैबिनेट सदस्यों सहित उपस्थित श्रावक समाज ने उत्साहपूर्वक तप-अनुमोदना गीत प्रस्तुत किया। बजरंगलाल जी नाहटा ने अपनी पुत्रवधू की तपस्या पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि नाहटा कुल के इतिहास में यह पहला मासखमण है। उन्होंने इस आध्यात्मिक उपलब्धि की प्रेरणा देने के लिए मुनिश्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। तेयुप अध्यक्ष सरल जी पटावरी और तेममं अध्यक्ष श्रीमती मंजु बोथरा ने भी अपने भाव व्यक्त किए। मंडल की बहनों ने गीत प्रस्तुत कर तपस्विनी की साधना का अभिनंदन किया। विज्ञापन रुद्रा एंटरप्राइजेज संपर्क - 8867689130 परिजनों और श्रावक समाज ने की तप-अनुमोदना इस अवसर पर तपस्विनी के पारिवारिक सदस्यों एवं परिजनों ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। सुरेन्द्र जी नाहटा (जेठ), श्रीमती कमलेश जी लूणिया (मां), तन्वी नाहटा (पुत्री), राजकुमारी जी लूणिया, प्रिया जी छाजेड़ और रजनी बैद ने अपने विचार प्रस्तुत किए। पारिवारिक सदस्यों ने गीतों के माध्यम से तपस्या की अनुमोदना कर तपस्विनी का उत्साह बढ़ाया। कंठी तप कर रहीं बहन श्रद्धा जी मणोत के माध्यम से तपस्विनी करुणा नाहटा को जैनपट्ट एवं तप अभिनंदन पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत संगीतमय तप-अनुमोदना को और विशेष बनाने के लिए उसी दिन सायं 7:30 बजे मुनिवृन्द के सान्निध्य में तप-गीतों का विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई। करुणा नाहटा की 27 दिवसीय मासखमण तपस्या ने समाज में आत्मबल, संयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना की प्रेरणा दी। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि समस्त श्रावक समाज के लिए हर्ष और गौरव का विषय बनी।

  • डॉक्टरों को महंगे उपहार देने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, नियामकीय व्यवस्था के लिए समिति बनेगी

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026। फार्मास्युटिकल कंपनियों की ओर से डॉक्टरों को महंगे उपहार, प्रोत्साहन और अन्य सुविधाएं देकर प्रभावित करने की कथित प्रथाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार को तीन सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया है। समिति इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वैधानिक व्यवस्था बनाने से जुड़े सुझाव देगी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह निर्देश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को उपहार और अन्य प्रोत्साहन देकर अपनी दवाओं के प्रचार के लिए प्रभावित करने की आशंका पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की गई थी। वैधानिक नियंत्रण के उपाय सुझाएगी समिति अदालत के निर्देश के अनुसार, प्रस्तावित समिति संबंधित पक्षों के सुझावों और अभ्यावेदनों पर विचार करेगी। इसके बाद वह अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य फार्मा कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों के नियमन के लिए अधिक प्रभावी और बाध्यकारी कानूनी व्यवस्था की संभावनाओं पर विचार करना है। मामले में केंद्र सरकार को अनुपालन संबंधी हलफनामा दाखिल करना होगा। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 29 जनवरी की तारीख निर्धारित की है। दवा प्रचार और चिकित्सा नैतिकता पर उठे सवाल याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ फार्मास्युटिकल कंपनियां डॉक्टरों को महंगे उपहार, यात्राओं और अन्य सुविधाओं के माध्यम से प्रभावित करने का प्रयास करती हैं, ताकि उनकी दवाओं को अधिक प्राथमिकता मिले। ऐसी प्रथाओं को लेकर दवा कंपनियों की मार्केटिंग, चिकित्सकीय स्वतंत्रता और मरीजों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर सवाल उठते रहे हैं। चिकित्सा क्षेत्र में डॉक्टरों के दवा संबंधी निर्णय मरीज की जरूरत, वैज्ञानिक प्रमाण और उपचार संबंधी मानकों पर आधारित होने चाहिए। यदि किसी प्रकार का आर्थिक लाभ या निजी प्रोत्साहन इन निर्णयों को प्रभावित करता है, तो इससे मरीजों के हितों और चिकित्सा नैतिकता पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है। अब नियामकीय व्यवस्था पर नजर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब समिति के गठन, उसके विचार-विमर्श और केंद्र सरकार को सौंपी जाने वाली सिफारिशों पर नजर रहेगी। हालांकि, समिति की सिफारिशें आने और सरकार द्वारा उन पर निर्णय लिए जाने के बाद ही नियामकीय व्यवस्था में संभावित बदलावों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। यह मामला केवल दवा कंपनियों की विपणन नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, चिकित्सकीय निर्णयों की निष्पक्षता और मरीजों के हितों से भी जुड़ा है। ऐसे में प्रभावी नियमन के साथ यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि दवाओं के चयन और उपचार संबंधी निर्णयों में मरीज का हित सर्वोपरि रहे।

  • GST परिषद की 57वीं बैठक में सुधारों पर मंथन, कारोबारियों को राहत की आस

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को सरल बनाने, कारोबारियों की अनुपालन लागत घटाने और कर प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने के मुद्दों पर जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक से छोटे कारोबारियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी), जीएसटी रिफंड, पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया और कर विवादों के समाधान को अधिक सरल बनाने से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य जीएसटी अनुपालन को कम जटिल बनाना और कारोबारियों के लिए प्रक्रियागत बाधाओं को दूर करना है। आईटीसी और रिफंड प्रक्रिया में सरलता पर जोर जीएसटी व्यवस्था में आईटीसी की उपलब्धता और रिफंड में होने वाली देरी कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। विशेष रूप से छोटे उद्यमों के लिए समय पर रिफंड मिलना कार्यशील पूंजी की उपलब्धता से जुड़ा है। ऐसे में परिषद की चर्चा में इन प्रक्रियाओं को अधिक सहज और पारदर्शी बनाने के उपायों को अहम माना जा रहा है। रिटर्न दाखिल करने और पंजीकरण से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाने से कारोबारियों पर प्रशासनिक बोझ कम हो सकता है। तकनीक के बेहतर उपयोग के माध्यम से करदाताओं की समस्याओं का समयबद्ध समाधान और जीएसटी प्रशासन की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए जाने की संभावना है। विज्ञापन जीएसटी अधिकारियों की शक्तियों और अपराध संबंधी प्रावधानों पर चर्चा बैठक में जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों में संभावित बदलाव तथा कुछ जीएसटी अपराधों को गैर-आपराधिक श्रेणी में रखने के प्रस्तावों पर भी चर्चा का विषय बताया गया है। इसके साथ ही आपराधिक कार्रवाई लागू होने की सीमा में बदलाव जैसे मुद्दे भी विचाराधीन हैं। इन प्रस्तावों का उद्देश्य कर अनुपालन सुनिश्चित करने के साथ कारोबारियों को अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से बचाने के बीच संतुलन स्थापित करना हो सकता है। हालांकि, इन विषयों पर परिषद की अंतिम सहमति और सरकार के औपचारिक निर्णय के बाद ही किसी बदलाव की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। छोटे कारोबारियों और एमएसएमई की उम्मीदें छोटे कारोबारियों के लिए जीएसटी नियमों का पालन करना कई बार समय, संसाधन और अतिरिक्त लागत की चुनौती बन जाता है। यदि पंजीकरण, रिटर्न, आईटीसी और रिफंड की प्रक्रियाओं में व्यावहारिक सुधार होते हैं, तो इससे कारोबार संचालन में आसानी आ सकती है। फिलहाल व्यापक जीएसटी दरों में बदलाव की प्रमुख अपेक्षा नहीं जताई जा रही है। ऐसे में बैठक का ध्यान कर दरों में व्यापक फेरबदल के बजाय प्रक्रियागत सुधारों और प्रशासनिक सरलता पर रहने की संभावना है। अंतिम फैसलों पर टिकी नजरें जीएसटी परिषद के प्रस्तावों और सिफारिशों का प्रभाव कारोबारियों, उद्योगों और करदाताओं पर पड़ सकता है। हालांकि, केवल चर्चा या प्रस्ताव के आधार पर किसी बदलाव को लागू नहीं माना जा सकता। अंतिम निर्णयों, आधिकारिक घोषणाओं और आवश्यक अधिसूचनाओं के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जीएसटी व्यवस्था में कौन-कौन से सुधार प्रभावी होंगे। कारोबार जगत की निगाहें अब परिषद के अंतिम निर्णयों पर टिकी हैं। यदि प्रस्तावित प्रक्रियागत सुधार लागू होते हैं, तो जीएसटी अनुपालन को सरल बनाने और छोटे उद्यमों के लिए कारोबारी माहौल बेहतर करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

  • हर जिले तक पहुंचा 5G, डिजिटल भारत में नई छलांग का दावा

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026। भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार और दूरसंचार क्षेत्र में तकनीकी बदलावों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 5G नेटवर्क देश के हर जिले तक पहुंच चुका है। उन्होंने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के दसवें संस्करण का उद्घाटन करते हुए डिजिटल तकनीक को सुशासन, नागरिक सुविधाओं और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। प्रधानमंत्री के अनुसार, देश में 5.5 लाख से अधिक 5G बेस स्टेशन संचालित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2022 की तुलना में भारत में मोबाइल इंटरनेट की गति में लगभग दस गुना वृद्धि हुई है। इन आंकड़ों के माध्यम से उन्होंने दूरसंचार अवसंरचना के विस्तार और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती भूमिका को सामने रखा। मोबाइल फोन बना सरकारी सेवाओं का अहम माध्यम प्रधानमंत्री ने कहा कि मोबाइल फोन का उपयोग अब केवल बातचीत और संदेश भेजने तक सीमित नहीं रह गया है। यह सरकारी सेवाओं तक पहुंच, सुशासन, गेमिंग और डिजिटल सामग्री निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने डिजिटल तकनीक के नागरिकों को मिलने वाले लाभों का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक का उद्देश्य लोगों की यात्रा, प्रतीक्षा और खर्च कम करना तथा सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाना होना चाहिए। डिजिटल माध्यमों से सरकारी सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने पर नागरिकों को कई काम घर बैठे करने की सुविधा मिल सकती है। हालांकि, डिजिटल सेवाओं का वास्तविक लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि नेटवर्क की गुणवत्ता, इंटरनेट की वहनीयता और डिजिटल साक्षरता कितनी व्यापक है तथा दूरदराज के क्षेत्रों में सेवाएं कितनी भरोसेमंद हैं। डिजिटल सुरक्षा और डीपफेक पर चिंता डिजिटल विस्तार के साथ बढ़ते साइबर जोखिमों की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने मोबाइल फोन और नेटवर्क की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने डीपफेक जैसी तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर मजबूत ढांचा विकसित करने की आवश्यकता भी बताई। डीपफेक तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या वीडियो में कृत्रिम बदलाव करके भ्रामक सामग्री तैयार की जा सकती है। ऐसी सामग्री का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने, लोगों को गुमराह करने और डिजिटल धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। इसलिए तकनीकी विकास के साथ साइबर सुरक्षा, उपयोगकर्ताओं की जागरूकता और डिजिटल सामग्री की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। विज्ञापन 5G से 6G तक की तकनीक पर मंथन इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का आयोजन 7 से 10 अक्टूबर तक ‘Scale Without Boundaries’ थीम के तहत किया जा रहा है। आयोजन में 100 से अधिक देशों की भागीदारी बताई गई है। सम्मेलन में 5G और 6G संचार तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नेटवर्क, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह आयोजन दूरसंचार कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं के लिए नई तकनीकों, निवेश की संभावनाओं तथा डिजिटल अवसंरचना के भविष्य पर विचार-विमर्श का मंच है। डिजिटल भारत की अगली चुनौती देशभर में 5G कनेक्टिविटी का विस्तार डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। तेज नेटवर्क से ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और कारोबार से जुड़ी सेवाओं को गति मिल सकती है। इसके बावजूद डिजिटल विकास की सफलता केवल बेस स्टेशनों की संख्या या इंटरनेट की गति से नहीं मापी जा सकती। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नेटवर्क की समान गुणवत्ता, सस्ती सेवाएं, व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। भारत मोबाइल कांग्रेस 2026 में सामने रखे गए तकनीकी दृष्टिकोण के बीच अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि डिजिटल विस्तार का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और तकनीक आम नागरिक के जीवन को अधिक सुरक्षित, सरल तथा सुविधाजनक बनाए।

  • 17 हजार फीट की ऊंचाई पर IndiGo विमान को नुकसान, 104 यात्री और 6 क्रू सदस्य सुरक्षित

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com)लखनऊ | 8 अक्टूबर 2026 प टना से लखनऊ आ रहे IndiGo के विमान में बुधवार को खराब मौसम के दौरान अचानक तेज झटके की स्थिति बनी। विमान करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर था। शुरुआती रिपोर्टों में विमान के आकाशीय बिजली की चपेट में आने की बात सामने आई, जबकि IndiGo ने बताया कि विमान ने खराब मौसम और ओलावृष्टि का सामना किया, जिससे विमान के आगे लगे रैडोम को नुकसान पहुंचा। घटना के कारणों की विस्तृत तकनीकी जाँच की जा रही है। विमान में 104 यात्री और छह क्रू सदस्य सवार थे। विमान ने लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की और सभी यात्री तथा क्रू सदस्य सुरक्षित रहे। लैंडिंग के बाद विमान के अगले हिस्से में नुकसान का पता चला। इसके बाद विमान को आगे की उड़ान के लिए रोक दिया गया और तकनीकी निरीक्षण शुरू किया गया। DGCA को भी घटना की जानकारी दी गई है। विमान को आवश्यक जाँच और नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद ही दोबारा परिचालन में लाया जाएगा। इंडिगो ने यात्रियों की आगे की यात्रा के लिए दूसरे विमान की व्यवस्था की। रिपोर्टों के अनुसार यात्रियों को वैकल्पिक विमान से आगे भेजा गया। इस घटना में किसी यात्री या क्रू सदस्य के घायल होने की सूचना नहीं है। विमान के नुकसान के वास्तविक कारण को लेकर तकनीकी जाँच पूरी होने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

  • नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन, भारतीय सिनेमा ने खोया दमदार कलाकार

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह मुंबई, 8 अक्टूबर 2026। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता एवं फिल्मकार नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गोवा स्थित अपने आवास पर अस्वस्थ होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल के अनुसार उनकी मृत्यु कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई। नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही भारतीय फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने भी निधन की पुष्टि की। रिपोर्टों के अनुसार, नाना पाटेकर को गोवा स्थित उनके आवास पर अचेत अवस्था में पाए जाने के बाद मणिपाल अस्पताल ले जाया गया था। चिकित्सकों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें सीपीआर देकर बचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। करीब पांच दशक का यादगार फिल्मी सफर नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। महाराष्ट्र में जन्मे नाना पाटेकर ने मराठी रंगमंच से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की और बाद में हिंदी तथा मराठी सिनेमा में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनका फिल्मी करियर करीब पांच दशकों तक चला। ‘गमन’ से फिल्मी सफर शुरू करने के बाद उन्होंने ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘सलाम बॉम्बे!’ और ‘वेलकम’ सहित कई फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। गंभीर और सामाजिक विषयों से लेकर हास्य एवं व्यावसायिक सिनेमा तक उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों को अपनी विशिष्ट संवाद अदायगी और प्रभावशाली अभिनय से पहचान दी। उनकी अभिनय शैली में तीव्रता, स्पष्ट संवाद और मजबूत स्क्रीन उपस्थिति प्रमुख विशेषताएं मानी जाती थीं। ‘क्रांतिवीर’ सहित विभिन्न फिल्मों में उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और वर्ष 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। फिल्म जगत में शोक नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित फिल्म जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने उनके अभिनय की विशिष्टता, रचनात्मकता और प्रभावशाली उपस्थिति को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। अभिनेता अक्षय कुमार समेत कई कलाकारों ने भी उनके साथ काम के अनुभवों और उनकी अभिनय प्रतिभा को स्मरण किया। नाना पाटेकर का निधन हिंदी और मराठी सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति माना जा रहा है। रंगमंच से लेकर बड़े पर्दे तक उन्होंने अपनी अलग अभिनय पहचान बनाई और कई ऐसे किरदार छोड़े, जिन्हें दर्शक लंबे समय तक याद करते रहेंगे।

  • आंध्र प्रदेश में सूखे की मार, 21 जिलों के 388 मंडल घोषित सूखाग्रस्त

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com विजयवाड़ा, 8 अक्टूबर 2026। आंध्र प्रदेश में कमजोर मानसून ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। राज्य सरकार ने दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के खरीफ सीजन के लिए 21 जिलों के 388 मंडलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें 283 मंडलों को गंभीर और 105 मंडलों को मध्यम सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। सरकार का यह फैसला सामान्य समय-सीमा से पहले लिया गया है। राजस्व (आपदा प्रबंधन) विभाग ने 1 अक्टूबर को आदेश जारी किया। इससे पहले 30 सितंबर को उच्चस्तरीय सूखा समिति की बैठक में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए शुरुआती सूखा घोषणा की सिफारिश की गई थी। जून से अगस्त तक बारिश में 53.4 प्रतिशत कमी राज्य सरकार के अनुसार, 1 जून से 31 अगस्त 2026 के बीच आंध्र प्रदेश में औसतन 197.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 424.3 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। इस तरह इस अवधि में बारिश में 53.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। सरकार ने सूखा घोषित करने के फैसले में बारिश की कमी के साथ मौजूदा एल नीनो परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण कारण माना है। सूखे की स्थिति का असर विशेष रूप से रायलसीमा और दक्षिणी आंध्र के कई हिस्सों में दिखाई दे रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सूखे की घोषित 388 मंडलों में से 186 मंडल रायलसीमा क्षेत्र में हैं। गंभीर सूखे की श्रेणी वाले 283 मंडलों में भी 159 मंडल इसी क्षेत्र से संबंधित हैं। राहत और कृषि सहायता का रास्ता खुलेगा सरकार ने निर्धारित समय-सीमा से पहले सूखा घोषित करने का फैसला इसलिए भी किया है ताकि प्रभावित किसानों और कृषि परिवारों के लिए राहत संबंधी उपाय तेजी से शुरू किए जा सकें। रिपोर्टों के अनुसार, सूखा घोषणा से प्रभावित परिवारों को संस्थागत ऋण और अन्य राहत उपायों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। यह घोषणा केंद्र सरकार के 2016 के सूखा प्रबंधन मैनुअल में निर्धारित मानकों के आधार पर की गई है। राज्य में कुल 688 मंडल हैं, जिनमें 388 को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। विपक्ष ने उठाए सवाल सूखा घोषणा को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने सरकार पर सूखा घोषित करने में देरी का आरोप लगाया है। विपक्ष ने विशेष रूप से नेल्लोर जिले को सूची से बाहर रखने पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि जिले के कई मंडलों में भी बारिश की स्थिति चिंताजनक रही है। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं; सरकार का आधिकारिक सूखा आकलन 21 जिलों के 388 मंडलों पर लागू है। दीर्घकालिक समाधान पर नदी जोड़ने की बात मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सूखे की चुनौती के बीच गोदावरी और कावेरी नदी प्रणालियों को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि गोदावरी के अतिरिक्त बाढ़ के पानी का बेहतर उपयोग दक्षिण भारत के सूखाग्रस्त क्षेत्रों, खासकर रायलसीमा, के लिए दीर्घकालिक समाधान बन सकता है। आंध्र प्रदेश में सूखे की यह स्थिति केवल तत्काल कृषि संकट नहीं, बल्कि जल प्रबंधन, ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय से जुड़ी व्यापक चुनौती की ओर भी संकेत करती है। आने वाले दिनों में राहत पैकेज, सिंचाई व्यवस्था और जल संरक्षण संबंधी सरकारी कदम इस संकट की गंभीरता को कम करने में महत्वपूर्ण होंगे।

  • दवा के कवर पर हिंदी से तमिलनाडु में सियासी संग्राम, विवाद बढ़ा तो अस्पतालों ने इस्तेमाल रोका

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com चेन्नई, 8 अक्टूबर 2026। तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दी जाने वाली दवाओं के कवर पर तमिल और अंग्रेजी के साथ हिंदी में खुराक संबंधी निर्देश छपे मिलने के बाद राज्य में भाषा को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। करूर और कोयंबटूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में इस्तेमाल हो रहे इन कवरों पर आपत्ति के बाद अस्पताल प्रशासन ने इनके वितरण पर तत्काल रोक लगा दी है। टीआरबी राजा ने उठाया तीन-भाषा नीति का सवाल विवाद उस समय सामने आया जब डीएमके नेता टीआरबी राजा ने सोशल मीडिया पर करूर के सरकारी अस्पताल में इस्तेमाल किए जा रहे दवा कवर की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में भी तीन-भाषा नीति लागू की जा रही है। उनके मुताबिक, इसी तरह के कवर कोयंबटूर में भी इस्तेमाल किए जा रहे थे। तमिलनाडु में लंबे समय से तमिल और अंग्रेजी की द्विभाषी नीति को प्राथमिकता दी जाती रही है और राज्य की राजनीति में हिंदी के इस्तेमाल का मुद्दा संवेदनशील रहा है। ऐसे में दवा के कवर पर हिंदी शब्द सामने आने से मामला महज प्रशासनिक चूक तक सीमित न रहकर राजनीतिक बहस का विषय बन गया। अस्पतालों ने क्या कहा? करूर सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डीन डॉ. एम. भारती मोहन के अनुसार, अस्पताल सामान्य तौर पर सादे भूरे कवर इस्तेमाल करता है, जिन पर फार्मेसी कर्मचारी दवा लेने का समय तमिल में मुहर के जरिए अंकित करते हैं। नियमित कवर की कमी के कारण दिसंबर 2025 में ईरोड की एक सहकारी प्रिंटिंग प्रेस से कवर मंगाए गए थे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इन कवरों पर हिंदी समेत अन्य निर्देश छापने के लिए अलग से आदेश नहीं दिया गया था। मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद करूर अस्पताल ने इन कवरों का इस्तेमाल बंद कर दिया। कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने भी विवादित कवर हटाकर सादे कवर इस्तेमाल करने शुरू कर दिए हैं। दवा की खुराक और सेवन का तरीका अब मरीज की पर्ची के अनुसार कवर पर हाथ से अंकित करने की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने डीएमके के दावे पर उठाए सवाल तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज ने विवाद पर डीएमके को निशाने पर लेते हुए कहा कि संबंधित कवर मौजूदा सरकार ने तैयार नहीं कराए थे। मंत्री के अनुसार, करूर में नियमित कवरों की कमी के कारण दिसंबर 2025 में चार लाख कवरों का आपात ऑर्डर दिया गया था और ये जनवरी 2026 में इस्तेमाल में आए, जब पिछली डीएमके सरकार सत्ता में थी। मंत्री ने यह भी दावा किया कि कोयंबटूर में इसी तरह के कवर करीब तीन साल से इस्तेमाल में थे और उनका डिजाइन भी पिछली सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत हुआ था। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने केवल उपलब्ध स्टॉक और अस्पतालों की आवश्यकता के आधार पर कवर मंगाए थे तथा विवाद सामने आने के बाद दोनों अस्पतालों में उनका इस्तेमाल रोक दिया गया। भाषा नीति फिर बनी राजनीतिक मुद्दा इस घटनाक्रम ने तमिलनाडु में भाषा नीति को लेकर पुरानी राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है। एक ओर डीएमके ने हिंदी के इस्तेमाल को राज्य की स्थापित द्विभाषी नीति से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, वहीं सरकार का कहना है कि इन कवरों का इस्तेमाल किसी नई तीन-भाषा नीति को लागू करने के उद्देश्य से नहीं किया गया था। फिलहाल विवादित कवरों का इस्तेमाल रोक दिया गया है। करूर में पहले की व्यवस्था बहाल करने और कोयंबटूर में तमिल-अंग्रेजी वाले नए कवर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि प्रशासनिक स्तर पर इस्तेमाल होने वाली सामग्री में भाषा संबंधी नीतियों और स्थानीय संवेदनशीलताओं का पालन किस तरह सुनिश्चित किया जाए।

  • आईआईएम बेंगलुरु में परीक्षा का नया प्रयोग, लिखित पेपर की जगह छात्रों ने बनाया अपना एआई चैटबॉट

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 8 अक्टूबर 2026। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच आईआईएम बेंगलुरु ने विद्यार्थियों के मूल्यांकन का एक नया तरीका अपनाकर शिक्षा जगत में चर्चा छेड़ दी है। संस्थान के जनरेटिव एआई कोर्स के जून-जुलाई 2026 सत्र में शामिल 78 छात्रों को पारंपरिक लिखित मिडटर्म परीक्षा देने के बजाय अपना खुद का एआई चैटबॉट विकसित करना पड़ा। छात्रों को इसी चैटबॉट की मदद से 15 सवालों के जवाब देने थे। इस प्रयोग का उद्देश्य केवल यह देखना नहीं था कि विद्यार्थी एआई के बारे में कितनी सैद्धांतिक जानकारी रखते हैं, बल्कि यह समझना भी था कि वे एआई तकनीक को वास्तविक और व्यावहारिक परिस्थितियों में कितनी प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकते हैं। परीक्षा से ज्यादा प्रोजेक्ट जैसा रहा मूल्यांकन पारंपरिक परीक्षा में जहां छात्र निर्धारित प्रश्नपत्र के उत्तर लिखते हैं, वहीं इस मूल्यांकन में विद्यार्थियों को पहले अपना चैटबॉट तैयार करना था। इसके बाद उन्हें उस तकनीक का इस्तेमाल करते हुए निर्धारित प्रश्नों के उत्तर प्रस्तुत करने थे। इस प्रक्रिया में छात्रों की तकनीकी समझ के साथ-साथ उनकी समस्या सुलझाने की क्षमता, एआई टूल के उपयोग, निर्देश देने की क्षमता और प्राप्त उत्तरों का मूल्यांकन करने की योग्यता भी सामने आती है। इस लिहाज से यह परीक्षा से अधिक एक व्यावहारिक परियोजना जैसी प्रक्रिया रही। एआई का इस्तेमाल ही बना मूल्यांकन का हिस्सा जनरेटिव एआई के दौर में केवल यह जानना पर्याप्त नहीं रह गया है कि किसी विद्यार्थी को तकनीक की सैद्धांतिक जानकारी है या नहीं। महत्वपूर्ण यह भी है कि वह तकनीक का उपयोग वास्तविक समस्या को हल करने में कितनी कुशलता से कर सकता है। आईआईएम बेंगलुरु का यह प्रयोग इसी बदलती शैक्षणिक जरूरत को दर्शाता है। छात्रों को एआई से उत्तर हासिल करने के बजाय अपना चैटबॉट तैयार कर उसके माध्यम से सवालों का सामना करना पड़ा। इससे यह आकलन करने का अवसर मिला कि विद्यार्थी एआई को केवल तैयार उत्तर पाने के साधन के रूप में देखते हैं या उसका उपयोग एक उपयोगी तकनीकी उपकरण के रूप में कर सकते हैं। शिक्षा में एआई के बढ़ते इस्तेमाल का संकेत आईआईएम बेंगलुरु का यह प्रयोग ऐसे समय हुआ है जब उच्च शिक्षा संस्थानों के सामने एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ परीक्षा और मूल्यांकन की पारंपरिक पद्धतियों को बदलने की चुनौती है। जनरेटिव एआई के उपलब्ध होने से केवल लिखित परीक्षाओं के जरिए विद्यार्थियों की वास्तविक क्षमता का आकलन करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में प्रोजेक्ट आधारित और तकनीक-केंद्रित मूल्यांकन विद्यार्थियों की व्यावहारिक दक्षताओं को परखने का एक विकल्प बन सकता है। हालांकि, ऐसी पद्धतियों में मूल्यांकन की पारदर्शिता, सभी विद्यार्थियों के लिए समान तकनीकी अवसर और एआई के उपयोग की स्पष्ट सीमाएं तय करना भी महत्वपूर्ण रहेगा। भविष्य की परीक्षाओं के लिए बन सकता है मॉडल आईआईएम बेंगलुरु का यह प्रयोग शिक्षा क्षेत्र में मूल्यांकन के बदलते स्वरूप की ओर संकेत करता है। यदि ऐसे प्रयोगों से विद्यार्थियों की वास्तविक सीख और तकनीकी दक्षता का बेहतर आकलन संभव होता है, तो आने वाले समय में अन्य उच्च शिक्षण संस्थान भी पारंपरिक परीक्षा के साथ ऐसे व्यावहारिक मूल्यांकन को अपनाने पर विचार कर सकते हैं। फिलहाल 78 छात्रों के साथ किया गया यह प्रयोग इस बात की ओर इशारा करता है कि एआई के दौर में परीक्षा का सवाल केवल यह नहीं रहेगा कि छात्र क्या जानते हैं, बल्कि यह भी होगा कि वे उपलब्ध तकनीक का इस्तेमाल करके उस ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों में कैसे लागू करते हैं।

  • मेरी दृष्टि में "अटपट वाणी" पुस्तक

    लालबहादुर चौरसिया लाल कुंडलियां छंद मात्रिक छंद की एक संपूर्ण कविता है। यह छंद दोहा एवं रोला के संयोग से बनता है। इसमें कुल छः चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं। प्रथम दो पंक्तियाँ दोहे की होती हैं, बाकी चार पंक्तियाँ रोला छंद की होती हैं। इस छंद की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रचना जिस शब्द से शुरू होती है, उसी शब्द से उसका अंत होता है। प्राचीन काव्य-जगत में कुंडलिया छंद लिखने की परम्परा सर्वाधिक थी। मात्र छः पंक्तियों में रचनाकार अपनी किसी बात को आसानी से कहने में सक्षम होता है। कुंडलिया छंद की एक कुंडली अपने आप में एक सम्पूर्ण कविता होती है। इसी कुंडलिया छंद की प्राचीन लेखन परम्परा को आज भी अनेक रचनाकार अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवंत बनाए हुए हैं। उन्हीं रचनाकारों में आजमगढ़ जनपद के हास्य-व्यंग्य के ख्यातिलब्ध रचनाकार हैं श्री शैलेंद्र मोहन राय 'अटपट'। भारतीय थल सेना से सेवा-मुक्त श्री शैलेंद्र मोहन राय 'अटपट' अपनी सशक्त लेखनी से यहाँ के जनमानस में अपनी पहचान बनाने में सक्षम हैं। छासठ वर्षीय श्री अटपट जी जब अपनी कुंडलियों का वाचन किसी कवि सम्मेलन के मंच से करते हैं तो उपस्थित श्रोता झूम उठते हैं। लोग स्वतः तालियाँ बजाने पर विवश हो जाते हैं। उनकी व्यंग्यात्मक शैली में पिरोई गई रचनाएँ सभी श्रोताओं का ध्यान निश्चित रूप से आकर्षित करती हैं। पिछले वर्ष 5 अक्टूबर 2025 को श्री अटपट जी द्वारा रचित पुस्तक "अटपट वाणी" - कुंडलियों का संग्रह का लोकार्पण हुआ। यह "अटपट वाणी" पुस्तक श्री अटपट जी की प्रथम पुस्तक है। इस पुस्तक में कुल 200 कुंडलियों का संग्रह है। यह पुस्तक मुंबई के प्रतिष्ठित प्रकाशन 'आर पब्लिकेशन' द्वारा प्रकाशित है। इस पुस्तक की भूमिका हिंदी साहित्य अकादमी से सम्मानित देश के जाने-माने साहित्यकार श्री पवन तिवारी जी द्वारा लिखी गई है। श्री अटपट एक संवेदनशील रचनाकार हैं। उन्होंने इस पुस्तक में कुंडलियों के माध्यम से अपनी सशक्त लेखनी का शानदार परिचय दिया है। भाषा की तरलता पाठक को आसानी से समझ में आ जाती है। हास्य-व्यंग्य के चुटीले अंदाज में कवि ने समाज का जो खाका खींचा है, निश्चित रूप से यह एक श्रमसाध्य कार्य है। कुंडलियों में हास्य है, मार्मिकता है, वीरता है, श्रृंगार है तथा संवेदनशीलता के साथ-साथ समाज के बिगड़े रूप का भी यथार्थ चित्रण है। पुस्तक में जीवन के विविध रंग दिखाई देते हैं। शैलेंद्र मोहन राय 'अटपट' जी सच को सच कहने में गुरेज नहीं करते, न तो शासन-सत्ता का डर, न ही लोगों का खौफ दिखता है उनकी लेखनी में। सदैव अपनी व्यंग्यात्मक शैली में सब कुछ कह जाते हैं। उनकी एक ऐसी ही कुंडली देखें- ज्ञानी जन यदि चाहते बचा रहे सम्मान। बिन मांगे मत दीजिए आप किसी को ज्ञान। आप किसी को ज्ञान न बाटे रखे सुरक्षित। इच्छुक जो जन होंय कीजिए उनको दिक्षित। कह अटपट कविराय उतरवाते निज पानी । सौ सौ जूता खाय मानते खुद को ज्ञानी।। शेयर मार्केट में गिरावट देश की अर्थव्यवस्था को कितना प्रभावित करती है, यह किसी से छिपा नहीं है। जब भारत के आर्थिक तंत्र पर श्री अटपट जी की निगाह पड़ती है तो वे अपने दारुण शब्दों में बोल उठते हैं- शेयर गिरता जा रहा निफ़्टी हुआ धड़ाम । हलचल है बाजार में बुल का काम तमाम । बुल का काम तमाम रुपैया जाय लुढ़कता। सेंसेक्स है बेहाल तेल दीये का चुकता। कह अटपट कविराय ब्रेक फेल संग गेयर। पहुंच रसातल गया बना बेचारा शेयर।। आज स्त्रियाँ आकाश की ऊँचाइयाँ नाप रही हैं। सागर की गहराइयाँ नाप रही हैं। हर क्षेत्र में स्त्रियों की शानदार भागीदारी से कवि-मन आह्लादित है। सुनीता विलियम्स की अंतरिक्ष उड़ान और सकुशल वापसी से कवि की प्रसन्न लेखनी कागज पर कुछ इस तरह से दौड़ने लगती है- धरती का सुख छोड़ कर करके इंदु प्रवास। सुनीता विलियम ने रचा एक नया इतिहास। एक नया इतिहास प्रशंसित जग में नारी । अंतरिक्ष की परी प्रमाणित महिमा न्यारी। कह अटपट कविराय रही आंखों में फिरती। जीवित तुमको देख, खुशी से झूमी धरती।। अंग-प्रदर्शन से विकृत संस्कृति और बिगड़ा समाज हमें किस गर्त में ले जा रहा है, इस पर भी श्री अटपट जी नजर रखे हुए हैं और एक साहित्यकार का धर्म होता है कि अपने समाज को दलदल से बचने का भरपूर प्रयास करे। ऐसे समय में जब नई पीढ़ी जल्दी से वायरल होने की लफ्फाजी, रीलबाजी और नंगेपन को अपने जीवन में उतारने पर तुली है तो कवि-मन आहत होता है। तब श्री अटपट जी लिखते हैं- नंगापन है चरम पर बिगड़ा जाय समाज। प्रचलन में लघु वस्त्र है, नहीं शेष है लाज। नहीं शेष है लाज ,रील की लगी बीमारी। खुले आम कर रही, अंग प्रदर्शन नारी। कह अटपट कविराय, विचरती छूरी छप्पन । रही संस्कृत डुबय, बढ़ रहा है नंगापन।। वनों की अंधाधुंध कटाई से हमारे जीवन पर पड़ने वाले दुष्परिणामों की तरफ कवि श्री अटपट ध्यान आकर्षित करते हैं। हमारी प्राण-वायु आज संकट में है। पर्यावरण का संकट विकट है । पर्यावरण रूपी रक्षक हमें निगलने को आतुर है। इसके जिम्मेदार हम स्वयं हैं। कवि की नजर जब वहाँ पड़ती है तो वे पीड़ित होते हैं, पीड़ा के साथ-साथ उपाय भी सुझाते हैं। अधिक से अधिक पेड़ लगाने पर ही हमारा मंगल होगा, न कि पेड़ काटने पर। देखें एक कुंडली - जंगल काटे जा रहे, मंगल कैसे होय, बढ़ा प्रदूषण धरा पर रहा आदमी रोय, रहा आदमी रोय, हुए बेघर पशु पक्षी, धन पा करके मस्त ,मले सुरती आरक्षि, कह अटपट कविराय, चाहते अगर सुमंगल, नए लगाओ पेड़, नहीं अब काटो जंगल।। साहित्य में राजनीति का हस्तक्षेप कितना खतरनाक है, साहित्य में गुटबाजी, गोलबंदी एवं आत्ममुग्धता पर श्री अटपट जी लिखते हैं- थूको चाटो का चलन दिखता है चहुंओर, राजनीति साहित्य में है प्रकोप पुरजोर, है प्रकोप पुरजोर पतित बिन पेनी लोटा , सबको पीछे छोड़, चल रहा सिक्का खोटा , कह अटपट कविराय, पार्थ मलाई काटो, सकल प्रयोजन सिद्ध, साधना थूको चाटो। पति-पत्नी के खट्टे-मीठे नोक-झोंक को श्री अटपट जी ने अपनी इस पुस्तक में बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है। हालाँकि आपने यह पुस्तक अपनी पत्नी को ही समर्पित की है, किंतु इन्होंने पति-पत्नी के आपसी संवाद को बड़े ही हास्य-रस की चाशनी में पागा है। पति-पत्नी की नोक-झोंक को आपने कई कुंडलियों के माध्यम से अपनी इस पुस्तक में स्थान दिया है। लीजिए, देखें एक कुंडली- प्यारे पति सेवक बानो, सुबह पिलाओ चाय। गरम-गरम दो रोटियां, जोरू बैठी खाय। जोरू बैठी खाय, उठाओ सर पर बोझा। नित्य करो गुणगान, लगाओ झाड़ू पोछा। कह अटपट कविराय, नहीं अब रहे कुंवारे। बरसे घुसा लात, प्रेम से खाओ प्यारे।। कुल मिलाकर श्री शैलेंद्र मोहन राय 'अटपट' जी ने अपनी चटपटी एवं व्यंग्यात्मक लेखनी के माध्यम से एक ऐसा दस्तावेज सम्पूर्ण साहित्य-जगत को सौंपा है, जिसकी चमक सदियों तक साहित्य-आकाश में दीप्तिमान होती रहेगी। मैं श्री अटपट जी के उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय भविष्य की कामना करता हूँ। समीक्षक - *लाल बहादुर चौरसिया 'लाल'* *महामंत्री, विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी, आजमगढ़ इकाई*

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