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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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आईआईएम बेंगलुरु में परीक्षा का नया प्रयोग, लिखित पेपर की जगह छात्रों ने बनाया अपना एआई चैटबॉट

लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
धन्ना राम चौधरी
8 अक्टू॰
3 मिनट पठन
आईआईएम बेंगलुरु में जनरेटिव एआई कोर्स के छात्रों द्वारा चैटबॉट आधारित मिडटर्म मूल्यांकन

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 8 अक्टूबर 2026। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच आईआईएम बेंगलुरु ने विद्यार्थियों के मूल्यांकन का एक नया तरीका अपनाकर शिक्षा जगत में चर्चा छेड़ दी है। संस्थान के जनरेटिव एआई कोर्स के जून-जुलाई 2026 सत्र में शामिल 78 छात्रों को पारंपरिक लिखित मिडटर्म परीक्षा देने के बजाय अपना खुद का एआई चैटबॉट विकसित करना पड़ा। छात्रों को इसी चैटबॉट की मदद से 15 सवालों के जवाब देने थे।

इस प्रयोग का उद्देश्य केवल यह देखना नहीं था कि विद्यार्थी एआई के बारे में कितनी सैद्धांतिक जानकारी रखते हैं, बल्कि यह समझना भी था कि वे एआई तकनीक को वास्तविक और व्यावहारिक परिस्थितियों में कितनी प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकते हैं।


परीक्षा से ज्यादा प्रोजेक्ट जैसा रहा मूल्यांकन

पारंपरिक परीक्षा में जहां छात्र निर्धारित प्रश्नपत्र के उत्तर लिखते हैं, वहीं इस मूल्यांकन में विद्यार्थियों को पहले अपना चैटबॉट तैयार करना था। इसके बाद उन्हें उस तकनीक का इस्तेमाल करते हुए निर्धारित प्रश्नों के उत्तर प्रस्तुत करने थे।

इस प्रक्रिया में छात्रों की तकनीकी समझ के साथ-साथ उनकी समस्या सुलझाने की क्षमता, एआई टूल के उपयोग, निर्देश देने की क्षमता और प्राप्त उत्तरों का मूल्यांकन करने की योग्यता भी सामने आती है। इस लिहाज से यह परीक्षा से अधिक एक व्यावहारिक परियोजना जैसी प्रक्रिया रही।


एआई का इस्तेमाल ही बना मूल्यांकन का हिस्सा

जनरेटिव एआई के दौर में केवल यह जानना पर्याप्त नहीं रह गया है कि किसी विद्यार्थी को तकनीक की सैद्धांतिक जानकारी है या नहीं। महत्वपूर्ण यह भी है कि वह तकनीक का उपयोग वास्तविक समस्या को हल करने में कितनी कुशलता से कर सकता है।

आईआईएम बेंगलुरु का यह प्रयोग इसी बदलती शैक्षणिक जरूरत को दर्शाता है। छात्रों को एआई से उत्तर हासिल करने के बजाय अपना चैटबॉट तैयार कर उसके माध्यम से सवालों का सामना करना पड़ा। इससे यह आकलन करने का अवसर मिला कि विद्यार्थी एआई को केवल तैयार उत्तर पाने के साधन के रूप में देखते हैं या उसका उपयोग एक उपयोगी तकनीकी उपकरण के रूप में कर सकते हैं।


शिक्षा में एआई के बढ़ते इस्तेमाल का संकेत

आईआईएम बेंगलुरु का यह प्रयोग ऐसे समय हुआ है जब उच्च शिक्षा संस्थानों के सामने एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ परीक्षा और मूल्यांकन की पारंपरिक पद्धतियों को बदलने की चुनौती है। जनरेटिव एआई के उपलब्ध होने से केवल लिखित परीक्षाओं के जरिए विद्यार्थियों की वास्तविक क्षमता का आकलन करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

ऐसे में प्रोजेक्ट आधारित और तकनीक-केंद्रित मूल्यांकन विद्यार्थियों की व्यावहारिक दक्षताओं को परखने का एक विकल्प बन सकता है। हालांकि, ऐसी पद्धतियों में मूल्यांकन की पारदर्शिता, सभी विद्यार्थियों के लिए समान तकनीकी अवसर और एआई के उपयोग की स्पष्ट सीमाएं तय करना भी महत्वपूर्ण रहेगा।


भविष्य की परीक्षाओं के लिए बन सकता है मॉडल

आईआईएम बेंगलुरु का यह प्रयोग शिक्षा क्षेत्र में मूल्यांकन के बदलते स्वरूप की ओर संकेत करता है। यदि ऐसे प्रयोगों से विद्यार्थियों की वास्तविक सीख और तकनीकी दक्षता का बेहतर आकलन संभव होता है, तो आने वाले समय में अन्य उच्च शिक्षण संस्थान भी पारंपरिक परीक्षा के साथ ऐसे व्यावहारिक मूल्यांकन को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

फिलहाल 78 छात्रों के साथ किया गया यह प्रयोग इस बात की ओर इशारा करता है कि एआई के दौर में परीक्षा का सवाल केवल यह नहीं रहेगा कि छात्र क्या जानते हैं, बल्कि यह भी होगा कि वे उपलब्ध तकनीक का इस्तेमाल करके उस ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों में कैसे लागू करते हैं।



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