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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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आत्मशक्ति का सोपान: 27 दिनों के मासखमण से करुणा नाहटा ने बढ़ाया तप और त्याग का गौरव

लेखक की तस्वीर: Ashok kumar Singh
Ashok kumar Singh
10 अक्टू॰
3 मिनट पठन
आत्मशक्ति का सोपान, मासखमन का प्रत्याख्यान; राजराजेश्वरी नगर में साधु, महिला व समूह फोटो, 27 दिन के मासखमन की बधाई
फोटो-किशोर दफ्तरी

भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) राजराजेश्वरी नगर | 10 अक्टूबर 2026 बेंगलुरु। राजराजेश्वरी नगर स्थित तेरापंथ भवन में परमपूज्य युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री आकाश कुमार जी ठाणा-2 के सान्निध्य में चातुर्मास के प्रथम मासखमण की तपस्या पूर्ण करने वाली तपस्विनी श्रीमती करुणा नाहटा की तप-अनुमोदना एवं अभिनंदन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुजानगढ़ निवासी देवेन्द्र जी नाहटा की धर्मपत्नी श्रीमती करुणा नाहटा को मुनिश्री ने अपने मुखारविंद से 27 दिनों के मासखमण का प्रत्याख्यान करवाया। इस अवसर पर उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्विनी की दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मसंयम और धर्मनिष्ठा की अनुमोदना की।


फोटो-किशोर दफ्तरी
फोटो-किशोर दफ्तरी

आत्मशुद्धि का मार्ग है तप और त्याग


मंगल उद्बोधन में मुनिश्री आकाश कुमार जी ने कहा कि बहन करुणा ने मासखमण की तपस्या के माध्यम से आत्मशुद्धि का कार्य किया है। उन्होंने गुरु-शिष्य संवाद के माध्यम से आत्मा के आरोहण और शुद्धि का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि आत्मा का आरोहण शुद्धि के माध्यम से संभव है और शुद्धि के लिए स्नान आवश्यक है। स्नान दो प्रकार के होते हैं—बाह्य और आंतरिक। बाह्य स्नान से शरीर की शुद्धि होती है, जबकि आंतरिक स्नान से आत्मा की शुद्धि होती है।


मुनिश्री ने कहा कि मासखमण जैसी कठिन तपस्या आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने करुणा नाहटा की दृढ़ आत्मशक्ति की सराहना करते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों से उनके लिए एक उपवास करना भी कठिन हो रहा था, लेकिन इस बार उन्होंने अदम्य संकल्प और आत्मबल का परिचय देते हुए 27 दिनों की तपस्या पूर्ण की। उन्होंने कहा कि गुरुदेव की परम कृपा से राजराजेश्वरी नगर में चातुर्मास के शेष समय में भी तपस्या का अच्छा क्रम चल रहा है।

मंच पर सफेद वस्त्रधारी साधु प्रवचन देते, सामने लाल साड़ी में महिला हाथ जोड़कर प्रार्थना करती; पृष्ठभूमि में 2026 और स्वागत बैनर।
फोटो-किशोर दफ्तरी

तपस्विनी के सम्मान में उमड़ा श्रद्धाभाव


कार्यक्रम का मंच संचालन मुनिश्री हितेन्द्र कुमार जी ने तप और त्याग की महिमा को अभिव्यक्त करने वाले प्रेरणादायी शब्दों के साथ किया। सभा के कोषाध्यक्ष देवेन्द्र जी नाहटा ने अपनी धर्मपत्नी की तपस्या के सम्मान में तप-गीत प्रस्तुत किया। सभा अध्यक्ष कमलसिंह जी दुगड़ ने इस तपस्या पर गर्व व्यक्त करते हुए तपस्विनी बहन के प्रति मंगलकामनाएं प्रकट कीं। सभा के कैबिनेट सदस्यों सहित उपस्थित श्रावक समाज ने उत्साहपूर्वक तप-अनुमोदना गीत प्रस्तुत किया। बजरंगलाल जी नाहटा ने अपनी पुत्रवधू की तपस्या पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि नाहटा कुल के इतिहास में यह पहला मासखमण है। उन्होंने इस आध्यात्मिक उपलब्धि की प्रेरणा देने के लिए मुनिश्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। तेयुप अध्यक्ष सरल जी पटावरी और तेममं अध्यक्ष श्रीमती मंजु बोथरा ने भी अपने भाव व्यक्त किए। मंडल की बहनों ने गीत प्रस्तुत कर तपस्विनी की साधना का अभिनंदन किया।


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परिजनों और श्रावक समाज ने की तप-अनुमोदना


इस अवसर पर तपस्विनी के पारिवारिक सदस्यों एवं परिजनों ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। सुरेन्द्र जी नाहटा (जेठ), श्रीमती कमलेश जी लूणिया (मां), तन्वी नाहटा (पुत्री), राजकुमारी जी लूणिया, प्रिया जी छाजेड़ और रजनी बैद ने अपने विचार प्रस्तुत किए। पारिवारिक सदस्यों ने गीतों के माध्यम से तपस्या की अनुमोदना कर तपस्विनी का उत्साह बढ़ाया। कंठी तप कर रहीं बहन श्रद्धा जी मणोत के माध्यम से तपस्विनी करुणा नाहटा को जैनपट्ट एवं तप अभिनंदन पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत संगीतमय तप-अनुमोदना को और विशेष बनाने के लिए उसी दिन सायं 7:30 बजे मुनिवृन्द के सान्निध्य में तप-गीतों का विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई। करुणा नाहटा की 27 दिवसीय मासखमण तपस्या ने समाज में आत्मबल, संयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना की प्रेरणा दी। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि समस्त श्रावक समाज के लिए हर्ष और गौरव का विषय बनी।

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