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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • धारावाहिक उपन्यास | मौन दान (भाग–06)

    अजनबी की वापसी ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह नोट: "मौन दान" एक मौलिक काल्पनिक धारावाहिक उपन्यास है। इसके पात्र, घटनाएँ और स्थान साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। एक अजनबी की वापसी ने खोला शिवनारायण के जीवन का नया अध्याय बरामदे में बैठे लोगों की निगाहें अब उसी अधेड़ व्यक्ति पर टिक गई थीं, जो धीरे-धीरे शिवनारायण के घर की ओर बढ़ रहा था। उसकी उम्र लगभग साठ वर्ष रही होगी। धूप से तपा चेहरा, सफ़ेद होते बाल और हाथ में वर्षों पुराना चमड़े का बैग। वह आँगन में पहुँचा। कुछ क्षण तक चुपचाप शिवनारायण की अर्थी के सामने खड़ा रहा। फिर सिर झुकाकर मौन श्रद्धांजलि दी। बरामदे में गहरा सन्नाटा छा गया। दयानाथ त्रिपाठी आगे बढ़े। "आप...?" अजनबी ने अपनी जेब से एक पुराना पहचान-पत्र निकाला। "मेरा नाम रमेश पाठक है।" "मैं पहले जिला अस्पताल में कम्पाउंडर था।" "और शायद... इस गाँव में मुझे कोई नहीं पहचानता।" दयानाथ ने गौर से उनका चेहरा देखा। अचानक उनके चेहरे पर पहचान की झलक उभरी। "रमेश...! क्या तुम वही हो?" रमेश ने हल्की मुस्कान के साथ सिर झुका दिया। "हाँ, दयानाथ जी... बहुत वर्षों बाद लौट पाया हूँ।" गाँव वाले उत्सुक हो उठे। सरपंच ने पूछा— "आपका शिवनारायण जी से क्या संबंध था?" रमेश ने गहरी साँस ली। "रिश्ता खून का नहीं था..." "...लेकिन मैं उनका सबसे बड़ा कर्ज़दार हूँ।" यह सुनकर बरामदे में बैठे लोग एक-दूसरे की ओर देखने लगे। रमेश ने अपना पुराना चमड़े का बैग खोला। उसमें से एक पुरानी डायरी निकाली, जिसके पन्ने समय के साथ पीले पड़ चुके थे। उन्होंने वह डायरी दयानाथ को सौंपते हुए कहा— "यह मुझे शिवनारायण जी ने पंद्रह वर्ष पहले दी थी।" "उन्होंने कहा था— यदि मैं कभी अपने गाँव लौट न सकूँ, तो इसे मेरी मृत्यु के बाद ही खोलना।" दयानाथ ने सावधानी से डायरी खोली। पहले पन्ने पर केवल एक वाक्य लिखा था— "हर इंसान का एक ऐसा सच होता है, जिसे वह दुनिया से नहीं, स्वयं से छिपाता है।" उन्होंने अगला पन्ना पलटा। वहाँ एक अस्पताल का बिल रखा था। मरीज़ का नाम— रमेश पाठक। जमा करने वाले का नाम— रिक्त। लेकिन अस्पताल की मुहर के पास दयानाथ की अपनी लिखावट थी— "राशि प्राप्त।" रमेश की आँखें भर आईं। उन्होंने भर्राए स्वर में कहा— "पंद्रह साल पहले मेरे दिल का ऑपरेशन होना था।" "मेरे पास पैसे नहीं थे।" "मैंने इलाज छोड़ने का निर्णय कर लिया था।" "लेकिन अगले दिन डॉक्टर ने कहा— तुम्हारा पूरा खर्च जमा हो चुका है।" "मैंने बहुत पूछा कि किसने मदद की..." "लेकिन किसी ने नाम नहीं बताया।" उन्होंने शिवनारायण की अर्थी की ओर देखा। "दो साल बाद मुझे पता चला..." "...वह इंसान शिवनारायण थे।" बरामदे में बैठे कई लोगों ने अनायास अपने सिर झुका लिए। रामदीन की आवाज़ भर्रा गई। "हमने जिनके लिए कभी एक अच्छा शब्द नहीं कहा..." "...वे चुपचाप सबके लिए जीते रहे।" उसी समय दयानाथ की नज़र डायरी के अंतिम पन्ने पर गई। वहाँ गाँव के बाहर स्थित पुराने आम के बाग़ का एक हाथ से बना नक्शा था। नक्शे के नीचे केवल एक पंक्ति लिखी थी— "यदि कभी सच अधूरा लगे, तो उस बरगद के पास आना... जहाँ मैंने पहली बार 'मौन दान' का संकल्प लिया था।" दयानाथ ने नक्शा सबके सामने रखा। जमुना दादी की आँखें फैल गईं। "वह बरगद..." "वहाँ तो वर्षों से कोई नहीं गया।" दयानाथ ने दृढ़ स्वर में कहा— "कल सुबह हम सब वहीं चलेंगे।" "मुझे विश्वास है कि शिवनारायण ने अपनी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय वहीं हमारे लिए छोड़ रखा है।" बरामदे में बैठे लोगों के चेहरों पर पहली बार केवल जिज्ञासा नहीं, सम्मान भी दिखाई दे रहा था। अब वे किसी संदूक का रहस्य नहीं... एक इंसान के पूरे जीवन का सच जानना चाहते थे। और शायद... यही शिवनारायण की सबसे बड़ी जीत थी। क्रमशः... अगले भाग में पढ़िए — "बरगद के नीचे" जहाँ पहली बार सामने आएगा "मौन दान" के संकल्प का वास्तविक कारण और शिवनारायण के जीवन का सबसे बड़ा रहस्य। केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित धारावाहिक उपन्यास — मौन दान । सन्देश ; - अगर आपने इस धारावाहिक उपन्यास के पिछले भाग को नहीं पढ़ा है तो पढ़ें, भाग 01, भाग 02, भाग 03, भाग 4, भाग 5 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • रामदेव एकता साइकिल यात्रा रवाना, जयकारों से गूंजा बेंगलुरु

    20वीं धार्मिक यात्रा का भव्य शुभारंभ; एक माह में रामदेवरा पहुंचेगी, समाज में एकता और श्रद्धा का संदेश अलसूर गेट पुलिस स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना होती 20वीं रामदेव एकता साइकिल यात्रा। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 26 जुलाई, 2026 बेंगलुरु: रामदेव एकता साइकिल यात्रा का 20वां संस्करण रविवार को अलसूर गेट पुलिस स्टेशन से धार्मिक उल्लास, भक्ति और उत्साह के बीच भव्य रूप से रवाना हुआ। लोकदेवता बाबा रामदेवजी के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। परम भक्त थानाराम ने हरी झंडी दिखाकर यात्रा का शुभारंभ किया। यात्रा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं ने बाबा रामदेवजी के समक्ष सुख-शांति, समाज की समृद्धि और यात्रियों की सुरक्षित यात्रा की प्रार्थना की। यात्रा नगरथपेट, चिकपेट, बलेपेट, अक्कीपेट स्थित रामदेवजी मंदिर तथा राणासिंहपेट स्थित चामुंडा माताजी मंदिर सहित बेंगलुरु के प्रमुख मार्गों से होकर आगे बढ़ी। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर और जयकारों के साथ साइकिल यात्रियों का स्वागत किया। राजस्थानी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में मनमोहक लोकनृत्य प्रस्तुत कर धार्मिक आयोजन की भव्यता को और बढ़ाया। श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्ति ने यात्रा को यादगार बना दिया। आयोजकों के अनुसार यह रामदेव एकता साइकिल यात्रा लगभग एक माह में राजस्थान के पावन तीर्थ रामदेवरा पहुंचेगी। यात्रा का मार्ग तुमकुर, सिरा, दावणगेरे, हुबली, कोल्हापुर, पुणे, सूरत और अहमदाबाद से होकर गुजरेगा। इसके बाद श्रद्धालु सुंधा माताजी एवं मोदरान आशापुरा माताजी मंदिर में दर्शन करते हुए बाबा रामदेवजी के समाधि स्थल रामदेवरा पहुंचेंगे। यात्रा के विशेष सहयोगी रघुवीरसिंह दासपा, साइकिल सहयोगी जबराराम माली, अध्यक्ष रतनसिंह सोढ़ा, मालमसिंह सोढ़ा, दलपतसिंह भायल, पिंटूसिंह, कैलाशसिंह सोढ़ा, मांगीलाल देवासी, रमेश सिरवी, विक्रमसिंह भाटी सहित बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने यात्रियों का उत्साहवर्धन करते हुए यात्रा की सफलता की कामना की। आयोजकों ने बताया कि यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और एकता का भी संदेश है। पिछले दो दशकों से लगातार आयोजित हो रही यह यात्रा राजस्थान और कर्नाटक के बीच सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंधों को मजबूत कर रही है। यात्रा के दौरान विभिन्न शहरों और कस्बों में समाजबंधु श्रद्धालुओं का स्वागत करेंगे और सेवा कार्यों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। लोकदेवता बाबा रामदेवजी को सामाजिक समानता, मानव सेवा और सर्वधर्म समभाव का प्रतीक माना जाता है। देशभर से लाखों श्रद्धालु हर वर्ष पैदल, साइकिल और अन्य साधनों से रामदेवरा पहुंचकर दर्शन करते हैं। बेंगलुरु से निकली यह यात्रा भी उसी अटूट आस्था, सेवा और भक्ति की परंपरा का सशक्त उदाहरण है। श्रद्धालुओं ने बाबा रामदेवजी से समाज में सुख, शांति, भाईचारे और सभी के कल्याण की प्रार्थना की।

  • Subconscious Mind का रहस्य: मुनि श्री वीरसागर जी ने बताया स्थायी परिवर्तन का अचूक मंत्र

    चातुर्मास प्रवचन में आत्मनिरीक्षण, सकारात्मक संस्कार और अवचेतन मन की शक्ति पर दिया प्रेरक संदेश; श्रद्धालुओं ने लिया आत्मविकास का संकल्प मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज चातुर्मास प्रवचन देते हुए एवं उपस्थित श्रद्धालु। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 25 जुलाई, 2026। Subconscious Mind अर्थात अवचेतन मन की शक्ति को समझे बिना जीवन में स्थायी परिवर्तन संभव नहीं है। यही प्रेरक संदेश निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने ज्ञानोदय परिसर, तुबरहल्ली में आयोजित चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला में दिया। "अपने Subconscious Mind की फितरत को जानो" विषय पर दिए गए उनके ओजस्वी प्रवचन ने बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन की नई दिशा प्रदान की। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य का अधिकांश व्यवहार, निर्णय, आदतें और प्रतिक्रियाएँ उसके चेतन (Conscious) मन से नहीं, बल्कि अवचेतन (Subconscious) मन से संचालित होती हैं। यही कारण है कि लोग नए वर्ष, जन्मदिन या किसी विशेष अवसर पर बड़े-बड़े संकल्प तो लेते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद वे संकल्प टूट जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल इच्छाशक्ति से नहीं, बल्कि अवचेतन मन में बसे संस्कारों को बदलने से ही वास्तविक और स्थायी परिवर्तन संभव होता है। अपने प्रवचन को सरल और प्रभावी बनाने के लिए मुनि श्री ने हींग और केसर के पात्र का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जिस डिब्बे में वर्षों तक हींग रखी गई हो, उसमें बाद में केसर रखने पर भी हींग की गंध बनी रहती है। उसी प्रकार मन में वर्षों से संचित नकारात्मक संस्कार, क्रोध, भय, ईर्ष्या और बुरी आदतें केवल नए संकल्प लेने से समाप्त नहीं होतीं। इनके परिवर्तन के लिए नियमित साधना, तप, स्वाध्याय, ध्यान और सकारात्मक संस्कारों का निरंतर अभ्यास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जैसे शरीर को प्रतिदिन स्नान और घर को नियमित सफाई की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मन की भी प्रतिदिन सफाई जरूरी है। यदि मन को नकारात्मक विचारों और विकारों से मुक्त नहीं किया जाएगा तो मानसिक अशांति बनी रहेगी। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन आत्मचिंतन, ध्यान और आध्यात्मिक अध्ययन के माध्यम से अपने मन को निर्मल बनाने का प्रयास करना चाहिए। मुनि श्री ने आत्मनिरीक्षण को आत्मपरिवर्तन का पहला चरण बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हर समय यह देखना चाहिए कि उसकी आँखें क्या देख रही हैं, कान क्या सुन रहे हैं और मन में किस प्रकार के विचार जन्म ले रहे हैं। जब मनुष्य स्वयं को निष्पक्ष भाव से देखने लगता है, तभी उसके भीतर वास्तविक परिवर्तन का आरंभ होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता, मानसिक शांति और आत्मविकास बाहरी परिस्थितियों को बदलने से नहीं, बल्कि अपने भीतर के संस्कारों को सकारात्मक दिशा देने से प्राप्त होते हैं। चातुर्मास प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के प्रेरक विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया और आध्यात्मिक साधना के महत्व को समझा।

  • 2028 चुनाव नहीं लड़ेंगे सिद्धारमैया, चुनावी राजनीति से संन्यास का ऐलान

    पूर्व मुख्यमंत्री बोले—स्वास्थ्य और बदलती राजनीतिक संस्कृति के कारण लिया फैसला, जनता की सेवा जारी रखने का किया वादा मांड्या जिले के केआरपेटे में संबोधित करते पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 26 जुलाई, 2026 बेंगलुरु: सिद्धारमैया 2028 चुनाव नहीं लड़ेंगे। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने विधानसभा चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। मांड्या जिले के केआरपेटे में आयोजित कृष्ण जयंती कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्ष 2028 का विधानसभा चुनाव उनका अंतिम नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति से पूरी तरह दूर रहने का निर्णय होगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि वे सक्रिय राजनीति नहीं छोड़ रहे हैं और जनता की आवाज बनकर सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रहेंगे। अपने संबोधन और सोशल मीडिया पोस्ट में सिद्धारमैया ने कहा कि आज राजनीति का स्वरूप तेजी से बदल चुका है। उनका मानना है कि चुनावी प्रक्रिया में धनबल का प्रभाव बढ़ा है, जिससे ईमानदार राजनीति करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि पहले जनता चुनाव लड़ाने में सहयोग करती थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने निर्णय के पीछे बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य को भी प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक उनकी आयु 81–82 वर्ष हो जाएगी और उस समय पहले जैसी ऊर्जा के साथ चुनावी जिम्मेदारियां निभाना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि राजनीति में रहते हुए उन्होंने हमेशा अपने सिद्धांतों और अंतरात्मा के अनुसार कार्य किया और यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। सिद्धारमैया ने याद दिलाया कि उन्होंने वर्ष 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। लगभग पांच दशकों के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने जीत और हार दोनों का सामना किया, लेकिन कभी अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें हमेशा स्नेह और सम्मान दिया है और वे जीवन के शेष वर्षों में भी लोगों की समस्याओं और अधिकारों की आवाज बने रहेंगे। हाल ही में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद डीके शिवकुमार ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला है। ऐसे समय में सिद्धारमैया का यह ऐलान कांग्रेस की भविष्य की रणनीति और नेतृत्व को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों ने उनसे अपना फैसला बदलने और अगले कई वर्षों तक राजनीति में सक्रिय रहने की अपील की, लेकिन उन्होंने अपने निर्णय को दोहराते हुए कहा कि वे अब कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्धारमैया का यह फैसला कांग्रेस में नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। दूसरी ओर, उनके समर्थक चाहते हैं कि वे अपने अनुभव और राजनीतिक मार्गदर्शन से पार्टी को आगे भी मजबूत करते रहें। कर्नाटक की राजनीति में सिद्धारमैया का नाम लंबे समय तक प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता रहा है। वे दो बार मुख्यमंत्री रहे और नौ बार विधायक चुने गए। उनके कार्यकाल में लागू कई जनकल्याणकारी योजनाएं आज भी चर्चा का विषय हैं। ऐसे में उनके चुनाव नहीं लड़ने के फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है।

  • कर्नाटक ओपन योगासन चैंपियनशिप में 600 खिलाड़ियों ने दिखाया दम

    दीर्घायु इंस्टिट्यूट ऑफ़ योग के आयोजन में मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत बोले—योग से होता है शरीर, मन और व्यक्तित्व का समग्र विकास कर्नाटक स्टेट ओपन योगासन चैंपियनशिप 2026 का दीप प्रज्वलन करते मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत एवं मंचासीन अतिथि। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 26 जुलाई, 2026 बेंगलुरु: कर्नाटक स्टेट ओपन योगासन चैंपियनशिप 2026 का भव्य आयोजन दीर्घायु इंस्टिट्यूट ऑफ़ योग द्वारा गंगौंडानाहली स्थित श्री कनक भवन में उत्साह, अनुशासन और योग साधना के वातावरण में संपन्न हुआ। प्रतियोगिता में राज्यभर से आए 600 से अधिक योग विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा और योग कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन के साथ ही पूरे सभागार में भारतीय संस्कृति, स्वास्थ्य और योग के प्रति समर्पण का प्रेरक संदेश गूंज उठा। कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों और अभिभावकों ने योगासन प्रतियोगिता को केवल खेल नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और अनुशासित व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम बताया। प्रतियोगिता के दौरान विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने संतुलन, लचीलापन, एकाग्रता और शारीरिक दक्षता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने अपने संबोधन में कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। उन्होंने कहा कि नियमित योग और व्यायाम से व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, व्यक्तित्व तथा आध्यात्मिक विकास होता है। वर्तमान समय में बढ़ती तनावपूर्ण जीवनशैली के बीच योग स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। उन्होंने युवाओं से प्रतिदिन योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है। यदि नई पीढ़ी योग को अपनाती है तो वह न केवल बीमारियों से दूर रहेगी, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ जीवन में नई ऊंचाइयों को भी प्राप्त करेगी। दीर्घायु इंस्टिट्यूट ऑफ़ योग के योगाचार्य गणेश ने कहा कि संस्था का उद्देश्य योग को घर-घर तक पहुंचाना और बच्चों व युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि ऐसी प्रतियोगिताएं प्रतिभागियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने के साथ-साथ योग के प्रति जागरूकता भी बढ़ाती हैं। कार्यक्रम के दौरान योगाचार्य गणेश एवं अन्य अतिथियों ने मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर विभिन्न योग प्रशिक्षक, अभिभावक, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन का सफल संचालन संस्था के सदस्यों ने किया। विशेषज्ञों का मानना है कि योगासन प्रतियोगिताएं केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच नहीं हैं, बल्कि वे नई पीढ़ी को अनुशासन, आत्मविश्वास, धैर्य और स्वस्थ जीवन की दिशा में प्रेरित करती हैं। यही कारण है कि कर्नाटक में योग के प्रति युवाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है और इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहे हैं।

  • बेंगलुरु में आज ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’, फ्रीडम पार्क चलो का आह्वान

    गौ संरक्षण और सम्मान के समर्थन में जुटेंगे गौभक्त व सनातन प्रेमी; जिला कलेक्टर कार्यालय तक ज्ञापन सौंपने की तैयारी फ्रीडम पार्क, बेंगलुरु में आयोजित गो सम्मान आह्वान अभियान का पोस्टर एवं कार्यक्रम स्थल। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 27 जुलाई, 2026 बेंगलुरु: गो सम्मान आह्वान अभियान के तहत सोमवार, 27 जुलाई को राजधानी बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में गौभक्तों, सनातन धर्म प्रेमियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का एकत्रीकरण प्रस्तावित है। अभियान के आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से परिवार सहित शामिल होकर गौ संरक्षण, गौ सम्मान और सामाजिक जागरूकता के इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने की अपील की है। कार्यक्रम सुबह 8:30 बजे से प्रारंभ होगा, जबकि 10:00 बजे जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने की योजना है। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत विजय मंत्र के सामूहिक जाप से होगी। इसके बाद उपस्थित लोग फ्रीडम पार्क से जिला कलेक्टर कार्यालय तक शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचेंगे और गौ संरक्षण एवं संबंधित मांगों को लेकर ज्ञापन प्रस्तुत करेंगे। स्थल पर प्रतिभागियों के लिए अल्पाहार की व्यवस्था भी की गई है। अभियान का उद्देश्य गौ संरक्षण, गौ संवर्धन और गौ सम्मान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना बताया गया है। आयोजकों का कहना है कि गौ सेवा भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है तथा समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता से इस विषय पर सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाया जा सकता है। आयोजन के लिए जारी आह्वान में सभी गौभक्तों, सनातन धर्म प्रेमियों तथा राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिकों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई है। इसमें परिवार, मित्रों और परिचितों को भी साथ लाने का आग्रह किया गया है ताकि अभियान का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंच सके। कार्यक्रम के दौरान शांति, अनुशासन और सामाजिक सहभागिता बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया है। आयोजकों ने बताया कि ज्ञापन के माध्यम से संबंधित संवैधानिक पदाधिकारियों तक अपनी मांगें पहुंचाई जाएंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस अभियान से गौ संरक्षण और समाज में जागरूकता को नई दिशा मिलेगी। बेंगलुरु में समय-समय पर सामाजिक और धार्मिक विषयों पर विभिन्न जागरूकता अभियान आयोजित होते रहे हैं। इसी क्रम में यह आयोजन भी गौ संरक्षण के विषय पर जनभागीदारी बढ़ाने का प्रयास माना जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी की संभावना को देखते हुए कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

  • धारावाहिक उपन्यास | मौन दान (भाग–05)

    सरकारी पत्र✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह नोट: "मौन दान" एक मौलिक काल्पनिक धारावाहिक उपन्यास है। इसके पात्र, घटनाएँ और स्थान साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। तीस वर्ष पुरानी बाढ़ का रहस्य फिर खुला, एक सरकारी पत्र ने बदल दी कहानी की दिशा डाकिए के जाते ही पूरे बरामदे में फिर से सन्नाटा छा गया। दयानाथ त्रिपाठी ने सरकारी लिफ़ाफ़े को सावधानी से खोला। कागज़ बिल्कुल नया था, लेकिन उसे पढ़ते ही उनके चेहरे पर वर्षों पुरानी यादों की परछाइयाँ उतर आईं। सरपंच ने धीमे स्वर में पूछा— "क्या बात है, वकील साहब?" दयानाथ ने पत्र को मोड़ा और कुछ क्षण तक चुप रहे। फिर बोले— "यह ज़िला प्रशासन की ओर से आया है। शिवनारायण जी के नाम दर्ज एक पुरानी सरकारी फ़ाइल दोबारा खोली गई है।" बरामदे में खड़े लोग एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। रामदीन ने उत्सुकता से पूछा— "कौन-सी फ़ाइल?" दयानाथ ने गहरी साँस लेते हुए उत्तर दिया— "आज से लगभग तीस वर्ष पहले आई भीषण बाढ़ की फ़ाइल।" यह सुनते ही कई बुज़ुर्गों के चेहरे गंभीर हो गए। वह बाढ़, जिसने गाँव की तस्वीर बदल दी थी। रामदीन की आँखें फैल गईं। "वही बाढ़... जिसमें कई घर बह गए थे?" दयानाथ ने सिर हिलाया। "हाँ... लेकिन उस घटना का एक सच आज तक किसी को पता नहीं था।" उन्होंने संदूक से एक छोटी कपड़े की थैली निकाली। उसमें नदी की मिट्टी से सना एक पुराना पीतल का सिक्का, एक टूटी हुई लकड़ी की सीटी और एक पहचान-पत्र रखा था। पहचान-पत्र पर धुँधले अक्षरों में केवल इतना पढ़ा जा सकता था— "स्वयंसेवी राहत दल" सरपंच ने आश्चर्य से पूछा— "क्या शिवनारायण राहत दल के सदस्य थे?" दयानाथ ने शांत स्वर में कहा— "हाँ... लेकिन उन्होंने कभी इसका ज़िक्र नहीं किया।" जमुना दादी की आँखों में यादों की नमी उतर आई। उन्होंने कहा— "अब समझ में आया... उस बाढ़ के बाद कई परिवार अचानक कैसे संभल गए थे।" दयानाथ ने थैली से एक मुड़ा हुआ कागज़ निकाला। उस पर शिवनारायण की अपनी लिखावट थी। उन्होंने पढ़ना शुरू किया— "जिस दिन मैंने नदी से तीन बच्चों को बाहर निकाला, उसी दिन मैं अपने बेटे तक समय पर नहीं पहुँच सका। लोग कहते हैं कि मैंने दूसरों की जान बचाई, लेकिन मेरे भीतर का पिता आज तक खुद को माफ़ नहीं कर पाया।" पूरा बरामदा मौन हो गया। अब पहली बार लोगों को एहसास हुआ कि शिवनारायण की चुप्पी घमंड नहीं थी... वह एक ऐसा घाव था, जो समय के साथ भी कभी नहीं भर सका। रामविलास की आँखें नम हो गईं। उन्होंने धीमे स्वर में पूछा— "तो इसलिए... वे हर साल बाढ़ आने से पहले स्कूल में अनाज और दवाइयाँ भिजवाते थे?" दयानाथ ने उत्तर दिया— "हाँ। वे हर उस दर्द को रोकना चाहते थे, जिसे वे स्वयं नहीं रोक पाए थे।" तभी बाहर साइकिल की घंटी सुनाई दी। गाँव का चौकीदार तेज़ी से आँगन में पहुँचा। "सरपंच जी... शहर से एक सज्जन आए हैं।" "वे कहते हैं कि उन्हें शिवनारायण जी से मिलना था।" सरपंच ने धीमे स्वर में कहा— "उन्हें बता दो... शिवनारायण अब इस दुनिया में नहीं रहे।" चौकीदार ने सिर झुका लिया। फिर बोला— "मैंने बताया था... लेकिन उन्होंने कहा—" "मैं बहुत देर से आया हूँ... फिर भी मुझे उस संदूक तक ज़रूर ले चलिए। उसमें शायद मेरा भी अतीत बंद है।" बरामदे में खड़े सभी लोगों की नज़र एक साथ दरवाज़े की ओर उठ गई। दूर धूल भरी पगडंडी पर एक अधेड़ व्यक्ति धीरे-धीरे गाँव की ओर बढ़ रहा था। उसके हाथ में पुराना चमड़े का बैग था... और आँखों में वर्षों की तलाश। क्रमशः... अगले भाग में पढ़िए — "अजनबी की वापसी" 📚 केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित धारावाहिक उपन्यास — मौन दान अगर आप इसके पिछले भाग को नहीं पड़े हो तो अभी पढ़ें, भाग 01, भाग 02, भाग 03, भाग, 04 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • सुधांशु महाराज अमृत ज्ञान वर्षा: 7 से 9 अगस्त तक बेंगलुरु में होगा भव्य आध्यात्मिक महोत्सव

    विश्व जागृति मिशन के तत्वावधान में तीन दिवसीय ‘अमृत ज्ञान वर्षा’, हजारों श्रद्धालुओं के उमड़ने की उम्मीद आचार्यश्री सुधांशुजी महाराज का प्रवचन देते हुए प्रेरणादायी दृश्य। भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 25 जुलाई, 2026 सुधांशु महाराज अमृत ज्ञान वर्षा का बहुप्रतीक्षित आध्यात्मिक महोत्सव 7 से 9 अगस्त 2026 तक बेंगलुरु में आयोजित होगा। विश्व जागृति मिशन, बेंगलुरु के तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में पूज्य आचार्यश्री सुधांशुजी महाराज अपने ओजस्वी प्रवचनों के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान, सकारात्मक जीवन, भारतीय संस्कृति और मानव मूल्यों का संदेश देंगे। हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, धर्मप्रेमियों और अनुयायियों के शामिल होने की संभावना है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का संदेश प्रसारित किया जाएगा। विश्व जागृति मिशन के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय कृष्णकेदार टांटिया ने पिछले 26 वर्षों तक बेंगलुरु में श्रद्धा और समर्पण के साथ आचार्यश्री सुधांशुजी महाराज के कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया। उनके निधन के बाद अब उनके पुत्र एवं मिशन के वर्तमान अध्यक्ष आदित्य टांटिया इस आध्यात्मिक परंपरा को उसी समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। आदित्य टांटिया ने बताया कि 7 अगस्त को सायं 5:00 बजे से 7:30 बजे तक जयनगर स्थित पूर्णिमा कन्वेंशन हॉल में अमृत ज्ञान वर्षा का पहला सत्र आयोजित होगा। 8 अगस्त को सुबह 9:30 बजे से 12:00 बजे तथा सायं 5:00 बजे से 7:30 बजे तक दो विशेष प्रवचन सत्र होंगे, जिनमें आचार्यश्री जीवन प्रबंधन, आध्यात्मिक उन्नति, पारिवारिक मूल्यों और तनावमुक्त जीवन पर मार्गदर्शन देंगे। कार्यक्रम का समापन 9 अगस्त को राजनकुंटे स्थित आदिविश्वनाथपुरा के श्रीधाम आश्रम में होगा, जहां सुबह 11:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक विशेष सत्संग एवं आध्यात्मिक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को ध्यान, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जीवन के विभिन्न आयामों से परिचित कराया जाएगा। आदित्य टांटिया ने सभी धर्मप्रेमियों, समाजसेवियों और आचार्यश्री के अनुयायियों से आग्रह किया कि वे परिवार सहित इस दिव्य आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, नैतिक मूल्यों और पारस्परिक सद्भाव को मजबूत करने का कार्य करते हैं। आचार्यश्री सुधांशुजी महाराज के प्रवचन देश-विदेश में लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। उनके सरल, प्रभावशाली और जीवनोपयोगी विचार युवाओं से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक सभी वर्गों को प्रभावित करते हैं। बेंगलुरु में आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक शांति, प्रेरणा और जीवन को नई दिशा देने का एक विशेष अवसर माना जा रहा है।

  • काशी विश्वशांति महायज्ञ: श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने धारवाड़ से दिया आध्यात्मिक जागरण का संदेश

    25,000 होम कुंड वाले विश्वशांति महायज्ञ के लिए हुबली-धारवाड़ के श्रद्धालुओं को किया आमंत्रित, सनातन सेवा और ब्रह्मविद्या का दिया संदेश धारवाड़ में आयोजित आध्यात्मिक सभा को संबोधित करते श्री विज्ञानदेव जी महाराज। भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) धारवाड़ | 25 जुलाई, 2026 काशी विश्वशांति महायज्ञ के लिए देशभर में चल रही स्वर वेद संदेश यात्रा के तहत काशी के पूज्य श्री विज्ञानदेव जी महाराज शनिवार को पहली बार धारवाड़ पहुंचे और हजारों श्रद्धालुओं को विश्वशांति, सनातन संस्कृति तथा ब्रह्मविद्या विहंगम योग का प्रेरणादायी संदेश दिया। दिसंबर 2026 में पवित्र नगरी काशी (वाराणसी) में आयोजित होने वाले दुनिया के पहले 25,000 होम कुंड वाले विश्वशांति महायज्ञ के लिए उन्होंने हुबली-धारवाड़ सहित उत्तर कर्नाटक के श्रद्धालुओं को सपरिवार आमंत्रित किया। धारवाड़ के हेब्बल्ली रोड स्थित श्री चन्नबसव तैयव्वानव कल्याण मंडप में आयोजित विशाल आध्यात्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने विश्वशांति वैदिक हवन, ब्रह्मविद्या विहंगम योग, ध्यान, साधना और मानव कल्याण पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आध्यात्मिक जागरण ही विश्व में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। अपने संबोधन में श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने कहा कि वे पिछले लगभग 20 वर्षों से कश्मीर से कन्याकुमारी और कन्याकुमारी से कश्मीर तक स्वर वेद संदेश यात्रा के माध्यम से सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्रत्येक पवित्र भूमि में सनातन संस्कृति की दिव्य शक्ति विद्यमान है। उन्होंने धारवाड़ की पहली यात्रा को विशेष बताते हुए कहा कि यह शहर केवल शिक्षा और संस्कृति का केंद्र ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का भी महत्वपूर्ण स्थल है। यहां मातृशक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का अद्भुत संगम दिखाई देता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से समाज सेवा, मानव कल्याण और आध्यात्मिक जीवन को अपनाने का आह्वान किया। श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने कहा कि सनातन विहंगम योग समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए ताकि प्रत्येक व्यक्ति आत्मिक शांति, मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवन का अनुभव कर सके। उन्होंने कहा कि सेवा और साधना के माध्यम से ही विश्वशांति का सपना साकार हो सकता है। कार्यक्रम के समापन पर हजारों श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। पूरे आयोजन में भक्ति, आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। इस अवसर पर पतंजलि योग पीठ कर्नाटक के स्टेट इंचार्ज एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष भवरलाल आर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में ऋषि श्रृंगी की परंपरा में जन्मे पूज्य श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने 17 वर्षों की कठोर तपस्या और साधना के बाद ईश्वर की अनुभूति प्राप्त की। उन्होंने मानव कल्याण के उद्देश्य से काशी में ब्रह्मविद्या विहंगम योग संस्थान की स्थापना कर आध्यात्मिक चेतना का व्यापक अभियान शुरू किया। कार्यक्रम में डिप्टी मेयर रत्नाबाई नाज़ारे, कॉर्पोरेशन सदस्य शंकर शलाके, विहंगम योग संस्था के प्रचारक नितिन अग्रवाल, मुक्ति रंजन, सुमा जगदीश, बाबा रामदेव सेवा संस्था धारवाड़ के अध्यक्ष स्वरूपराम चौधरी, आयोजन समिति के सदस्य मोहनलाल सिरवी, दुदारामा चौधरी, मालाराम देवासी, पतंजलि परिवार के रमेश सुलाके, उमा अगाड़ी, शैलजा मडिकर, एमडी पाटिल, लीलावती संब्रानी सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक ऊर्जा, सेवा भावना और विश्वशांति के संदेश को नई दिशा प्रदान की तथा दिसंबर में काशी में होने वाले ऐतिहासिक 25,000 होम कुंड विश्वशांति महायज्ञ के प्रति उत्साह भी बढ़ाया।

  • फिट ओ फ्रीक 2.0: डेका डिसिप्लिन चैलेंज का भव्य समापन, अनुशासन और फिटनेस का जश्न

    10 दिनों के अनोखे फिटनेस अभियान में प्रतिभागियों ने अपनाई स्वस्थ जीवनशैली, विजेताओं का हुआ सम्मान फिट ओ फ्रीक 2.0 समापन समारोह, विजेताओं का सम्मान एवं सामूहिक समूह फोटो भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 25 जुलाई, 2026 फिट ओ फ्रीक 2.0: डेका डिसिप्लिन चैलेंज का 10 दिवसीय प्रेरणादायी अभियान शानदार समापन के साथ संपन्न हुआ। अनुशासन, फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ योग, प्राणायाम, ध्यान, व्यायाम, रेन थेरेपी, ज़ुम्बा और स्लीप थेरेपी जैसी गतिविधियों में नियमित भाग लेकर नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का परिचय दिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि बेहतर स्वास्थ्य केवल व्यायाम से नहीं बल्कि अनुशासित जीवनशैली और अच्छी आदतों से भी प्राप्त होता है। 10 दिनों तक प्रतिभागियों ने केवल शारीरिक फिटनेस ही नहीं बल्कि मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया। "बड़ों को प्रणाम दिवस", "नो शुगर-मैदा दिवस" और "नो फोन दिवस" जैसी अभिनव गतिविधियों ने सभी सदस्यों को स्वस्थ जीवन के साथ-साथ पारिवारिक मूल्यों और डिजिटल संतुलन का महत्व भी समझाया। समापन समारोह का आयोजन अत्यंत गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यक्ष जेसी ललिता बोथरा ने की। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में कहा कि अनुशासन और नियमित अभ्यास किसी भी व्यक्ति को सफलता के शिखर तक पहुंचा सकता है तथा ऐसे आयोजन समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनते हैं। इमीडिएट पास्ट प्रेसिडेंट जेसी सुनील मेहर ने सभी प्रतिभागियों के समर्पण, नियमितता और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। कार्यक्रम के अंत में जेसीआई रीना गांधी ने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर ज़ोन ऑफिसर जेसी मोनिका कुमट, कोषाध्यक्ष जेसी दीपिका जैन तथा संयुक्त सचिव जेसी दीपक जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में प्रशिक्षण उपाध्यक्ष जेसी ममता मुणोत, लोकल ऑर्गेनाइजेशन उपाध्यक्ष जेसी रौनक नागोरी, परियोजना समन्वयक जेसी संजना कोठारी एवं जेसी धृति जैन, परियोजना निदेशक जेसी तरुण भंसाली तथा जूनियर जेसी आर्या जैन ने उल्लेखनीय योगदान दिया। प्रतियोगिता के विजेताओं में प्रथम स्थान जेसी गिरीश राखेचा, द्वितीय स्थान जेसी सुनील मेहर तथा तृतीय स्थान जेसी स्वेता राखेचा ने प्राप्त किया। इसके अलावा स्टेप किंग का खिताब जेसी गिरीश राखेचा तथा स्टेप क्वीन का सम्मान जेसी स्वेता राखेचा को प्रदान किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने भविष्य में भी ऐसे स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को नियमित रूप से आयोजित करने का संकल्प लिया। उपस्थित सदस्यों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे फिटनेस, अनुशासन और सामाजिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

  • अदीना मस्जिद विवाद: पूजा के बाद 'आदिनाथ मंदिर' का दावा, शिवलिंग स्थापना के ऐलान से बढ़ी हलचल

    पश्चिम बंगाल के मालदा में ऐतिहासिक अदीना मस्जिद को लेकर नया विवाद, प्रशासन की बढ़ी सतर्कता मालदा स्थित ऐतिहासिक अदीना मस्जिद परिसर और पूजा-अर्चना का प्रतिनिधिक दृश्य भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मालदा (पश्चिम बंगाल) | 25 जुलाई, 2026 अदीना मस्जिद विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित लगभग 650 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक अदीना मस्जिद के बाहर एक हिंदू संगठन द्वारा पूजा-अर्चना किए जाने और इसे प्राचीन आदिनाथ शिव मंदिर बताए जाने के दावे ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। संगठन ने मस्जिद के निकट विशाल शिवलिंग स्थापित करने की भी घोषणा की है। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जा रही है। बताया गया है कि संबंधित हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने मस्जिद परिसर के बाहर धार्मिक अनुष्ठान किया और दावा किया कि वर्तमान अदीना मस्जिद का निर्माण कथित रूप से एक प्राचीन आदिनाथ मंदिर को ध्वस्त कर किया गया था। संगठन ने इस दावे के समर्थन में ऐतिहासिक तथ्यों की जांच की मांग भी उठाई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में किसी सक्षम न्यायालय या सरकारी एजेंसी की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। इतिहासकारों के बीच भी इस विषय पर अलग-अलग मत रहे हैं। ऐसे में मामले को लेकर विभिन्न पक्षों की राय सामने आ रही है। अदीना मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मारक मानी जाती है। यह अपनी वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है। हालिया घटनाक्रम के बाद स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने को कहा है। धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवादों का समाधान केवल प्रमाण, कानूनी प्रक्रिया और संबंधित सक्षम संस्थाओं के निर्णयों के आधार पर ही होना चाहिए। फिलहाल शिवलिंग स्थापना की घोषणा और मंदिर संबंधी दावों को लेकर प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। मामले को लेकर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

  • NEET पेपर लीक पर कांग्रेस का देशव्यापी कैंडल मार्च, राहुल गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज, छात्रों के समर्थन में जिला स्तर पर सत्याग्रह का ऐलान कांग्रेस के कैंडल मार्च, राहुल गांधी की प्रतिक्रिया और छात्रों के प्रदर्शन की प्रतिनिधिक तस्वीर भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 25 जुलाई, 2026 NEET पेपर लीक का मुद्दा देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस का देशव्यापी कैंडल मार्च शनिवार को छात्रों के समर्थन में आयोजित किया जा रहा है। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए मेट्रो, सड़कें और इंटरनेट तक बंद कर दिए, लेकिन NEET पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या को रोकने में विफल रही। यही कारण है कि यह मामला अब केवल परीक्षा का नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल बन गया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "मेट्रो बंद करो, रास्ते बंद करो, दुकानें बंद करो, इंटरनेट बंद करो, खाना बंद करो। अपना हक मांग रहे छात्रों के खिलाफ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए। बस एक चीज बंद नहीं कर पाए, मोदी जी–पेपर लीक।" राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली में प्रदर्शनों के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने शनिवार को भी 18 मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने की जानकारी दी है। राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात भी प्रभावित रहा। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी प्रदेश कांग्रेस समितियों (PCC) को निर्देश जारी करते हुए प्रत्येक जिले में कैंडल मार्च और सत्याग्रह आयोजित करने को कहा है। पार्टी के अनुसार यह आंदोलन NEET, CBSE सहित शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए किया जा रहा है। 24 जुलाई को जारी परिपत्र के अनुसार, प्रत्येक जिला कांग्रेस समिति अपने क्षेत्र में महात्मा गांधी या डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा तक शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकालेगी। इसके माध्यम से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के हितों की रक्षा की मांग उठाई जाएगी। दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाया है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो सरकार के साथ किसी भी बैठक का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन अपनी आगे की रणनीति तैयार कर रहा है और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सीजेपी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यदि प्रधानमंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं ले सकते हैं तो उन्हें स्वयं नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NEET पेपर लीक का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़कों तक गर्म रहने वाला है। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि लाखों छात्र निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

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