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कर्नाटक ओपन योगासन चैंपियनशिप में 600 खिलाड़ियों ने दिखाया दम

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 26 जुल॰
  • 2 मिनट पठन

दीर्घायु इंस्टिट्यूट ऑफ़ योग के आयोजन में मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत बोले—योग से होता है शरीर, मन और व्यक्तित्व का समग्र विकास

Group poses on stage as men present a plaque and garland to a seated man in yellow, before a Kannada event banner.

कर्नाटक स्टेट ओपन योगासन चैंपियनशिप 2026 का दीप प्रज्वलन करते मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत एवं मंचासीन अतिथि।

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 26 जुलाई, 2026 बेंगलुरु: कर्नाटक स्टेट ओपन योगासन चैंपियनशिप 2026 का भव्य आयोजन दीर्घायु इंस्टिट्यूट ऑफ़ योग द्वारा गंगौंडानाहली स्थित श्री कनक भवन में उत्साह, अनुशासन और योग साधना के वातावरण में संपन्न हुआ। प्रतियोगिता में राज्यभर से आए 600 से अधिक योग विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा और योग कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन के साथ ही पूरे सभागार में भारतीय संस्कृति, स्वास्थ्य और योग के प्रति समर्पण का प्रेरक संदेश गूंज उठा।


कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों और अभिभावकों ने योगासन प्रतियोगिता को केवल खेल नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और अनुशासित व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम बताया। प्रतियोगिता के दौरान विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने संतुलन, लचीलापन, एकाग्रता और शारीरिक दक्षता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।


मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने अपने संबोधन में कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। उन्होंने कहा कि नियमित योग और व्यायाम से व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, व्यक्तित्व तथा आध्यात्मिक विकास होता है। वर्तमान समय में बढ़ती तनावपूर्ण जीवनशैली के बीच योग स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।

Group of students and adults onstage holding certificates and trophies at an award ceremony, with a banner behind them.

उन्होंने युवाओं से प्रतिदिन योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है। यदि नई पीढ़ी योग को अपनाती है तो वह न केवल बीमारियों से दूर रहेगी, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ जीवन में नई ऊंचाइयों को भी प्राप्त करेगी।


दीर्घायु इंस्टिट्यूट ऑफ़ योग के योगाचार्य गणेश ने कहा कि संस्था का उद्देश्य योग को घर-घर तक पहुंचाना और बच्चों व युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि ऐसी प्रतियोगिताएं प्रतिभागियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने के साथ-साथ योग के प्रति जागरूकता भी बढ़ाती हैं।


कार्यक्रम के दौरान योगाचार्य गणेश एवं अन्य अतिथियों ने मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर विभिन्न योग प्रशिक्षक, अभिभावक, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन का सफल संचालन संस्था के सदस्यों ने किया।


विशेषज्ञों का मानना है कि योगासन प्रतियोगिताएं केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच नहीं हैं, बल्कि वे नई पीढ़ी को अनुशासन, आत्मविश्वास, धैर्य और स्वस्थ जीवन की दिशा में प्रेरित करती हैं। यही कारण है कि कर्नाटक में योग के प्रति युवाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है और इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहे हैं।

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