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काशी विश्वशांति महायज्ञ: श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने धारवाड़ से दिया आध्यात्मिक जागरण का संदेश

  • Writer: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 2 days ago
  • 2 min read

25,000 होम कुंड वाले विश्वशांति महायज्ञ के लिए हुबली-धारवाड़ के श्रद्धालुओं को किया आमंत्रित, सनातन सेवा और ब्रह्मविद्या का दिया संदेश

People light a ceremonial lamp on a decorated stage, with a woman in a yellow sari and men in white under orange ceiling panels.

धारवाड़ में आयोजित आध्यात्मिक सभा को संबोधित करते श्री विज्ञानदेव जी महाराज।

भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) धारवाड़ | 25 जुलाई, 2026 काशी विश्वशांति महायज्ञ के लिए देशभर में चल रही स्वर वेद संदेश यात्रा के तहत काशी के पूज्य श्री विज्ञानदेव जी महाराज शनिवार को पहली बार धारवाड़ पहुंचे और हजारों श्रद्धालुओं को विश्वशांति, सनातन संस्कृति तथा ब्रह्मविद्या विहंगम योग का प्रेरणादायी संदेश दिया। दिसंबर 2026 में पवित्र नगरी काशी (वाराणसी) में आयोजित होने वाले दुनिया के पहले 25,000 होम कुंड वाले विश्वशांति महायज्ञ के लिए उन्होंने हुबली-धारवाड़ सहित उत्तर कर्नाटक के श्रद्धालुओं को सपरिवार आमंत्रित किया।


धारवाड़ के हेब्बल्ली रोड स्थित श्री चन्नबसव तैयव्वानव कल्याण मंडप में आयोजित विशाल आध्यात्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने विश्वशांति वैदिक हवन, ब्रह्मविद्या विहंगम योग, ध्यान, साधना और मानव कल्याण पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आध्यात्मिक जागरण ही विश्व में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

पने संबोधन में श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने कहा कि वे पिछले लगभग 20 वर्षों से कश्मीर से कन्याकुमारी और कन्याकुमारी से कश्मीर तक स्वर वेद संदेश यात्रा के माध्यम से सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्रत्येक पवित्र भूमि में सनातन संस्कृति की दिव्य शक्ति विद्यमान है।


उन्होंने धारवाड़ की पहली यात्रा को विशेष बताते हुए कहा कि यह शहर केवल शिक्षा और संस्कृति का केंद्र ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का भी महत्वपूर्ण स्थल है। यहां मातृशक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का अद्भुत संगम दिखाई देता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से समाज सेवा, मानव कल्याण और आध्यात्मिक जीवन को अपनाने का आह्वान किया।


श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने कहा कि सनातन विहंगम योग समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए ताकि प्रत्येक व्यक्ति आत्मिक शांति, मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवन का अनुभव कर सके। उन्होंने कहा कि सेवा और साधना के माध्यम से ही विश्वशांति का सपना साकार हो सकता है।


कार्यक्रम के समापन पर हजारों श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। पूरे आयोजन में भक्ति, आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।

इस अवसर पर पतंजलि योग पीठ कर्नाटक के स्टेट इंचार्ज एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष भवरलाल आर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में ऋषि श्रृंगी की परंपरा में जन्मे पूज्य श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने 17 वर्षों की कठोर तपस्या और साधना के बाद ईश्वर की अनुभूति प्राप्त की। उन्होंने मानव कल्याण के उद्देश्य से काशी में ब्रह्मविद्या विहंगम योग संस्थान की स्थापना कर आध्यात्मिक चेतना का व्यापक अभियान शुरू किया।


कार्यक्रम में डिप्टी मेयर रत्नाबाई नाज़ारे, कॉर्पोरेशन सदस्य शंकर शलाके, विहंगम योग संस्था के प्रचारक नितिन अग्रवाल, मुक्ति रंजन, सुमा जगदीश, बाबा रामदेव सेवा संस्था धारवाड़ के अध्यक्ष स्वरूपराम चौधरी, आयोजन समिति के सदस्य मोहनलाल सिरवी, दुदारामा चौधरी, मालाराम देवासी, पतंजलि परिवार के रमेश सुलाके, उमा अगाड़ी, शैलजा मडिकर, एमडी पाटिल, लीलावती संब्रानी सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।


कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक ऊर्जा, सेवा भावना और विश्वशांति के संदेश को नई दिशा प्रदान की तथा दिसंबर में काशी में होने वाले ऐतिहासिक 25,000 होम कुंड विश्वशांति महायज्ञ के प्रति उत्साह भी बढ़ाया।

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