top of page

 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

WhatsApp Video 2026-10-04 at 8.50.36 PM.mp4

इस साइट पर खोजें

1908किसी भी खाली खोज के साथ परिणाम मिले

  • गणेश उत्सव विवाद पर भाजपा का मोर्चा, इंस्पेक्टर के निलंबन की मांग

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com मैसूर, 13 सितंबर 2026। कर्नाटक में गणेश उत्सव के आयोजन को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि राज्य के कुछ हिस्सों में गणेश उत्सव समितियों से जुड़े युवाओं को पुलिस की ओर से कथित तौर पर धमकाया जा रहा है। पार्टी ने मैसूर जिले के टी. नरसीपुरा में सामने आए एक मामले को लेकर संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। भाजपा के अनुसार, टी. नरसीपुरा में गणेश समिति से जुड़े युवाओं के साथ एक पुलिस इंस्पेक्टर द्वारा कथित रूप से सार्वजनिक तौर पर सख्ती और धमकी भरा व्यवहार किया गया। हालांकि, घटना के पूरे तथ्य और पुलिस अधिकारी का पक्ष आधिकारिक रूप से सामने आना अभी बाकी है। प्रह्लाद जोशी ने उठाए सवाल पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी ने इस मामले पर नाराजगी जताते हुए कांग्रेस सरकार तथा पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक आयोजन में शामिल युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। जोशी ने संबंधित पुलिस इंस्पेक्टर धनंजय को तत्काल निलंबित करने की मांग की है। उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है और किसी भी धार्मिक या सामाजिक समूह के साथ निष्पक्ष एवं सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए। भाजपा का आरोप—आयोजकों पर बढ़ रहा दबाव भाजपा नेताओं का दावा है कि राज्य के विभिन्न स्थानों पर गणेश उत्सव के आयोजकों को अनुमति और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के नाम पर अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। पार्टी ने टी. नरसीपुरा की घटना को इसी कथित रवैये का उदाहरण बताया है। भाजपा का कहना है कि यदि किसी धार्मिक आयोजन से कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौती उत्पन्न होने की आशंका हो तो प्रशासन को आयोजकों के साथ संवाद कर नियमों और शर्तों की जानकारी देनी चाहिए। पार्टी के अनुसार, सार्वजनिक रूप से धमकाने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए। जांच और दोनों पक्षों का बयान जरूरी इस पूरे मामले में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और घटना की परिस्थितियों की आधिकारिक जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण है। यह भी स्पष्ट होना आवश्यक है कि पुलिस अधिकारी और गणेश समिति से जुड़े युवाओं के बीच विवाद किस कारण उत्पन्न हुआ तथा बातचीत के दौरान वास्तव में क्या हुआ। किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई से पहले प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों के बयान सामने आना मामले की निष्पक्षता के लिए जरूरी माना जा रहा है। राजनीतिक मुद्दा बनने के आसार भाजपा ने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगी। पार्टी ने धार्मिक आयोजनों के दौरान सभी समुदायों को समान अवसर और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। फिलहाल टी. नरसीपुरा की घटना को लेकर भाजपा की ओर से इंस्पेक्टर धनंजय के निलंबन और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। अब सरकार और पुलिस प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा जांच के निष्कर्ष से ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • प्लॉगिंग से मडीवाला झील हुई साफ, 110 किलो प्लास्टिक निकला

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 13 सितंबर 2026। बेंगलुरु की मडीवाला झील को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बैनरघट्टा कैंपस के छात्रों और इंडियन प्लॉगर्स आर्मी ने बेंगलुरु साउथ सिटी कॉर्पोरेशन (बीएससीसी) के सहयोग से प्लॉगिंग अभियान चलाया। अभियान के दौरान झील परिसर से करीब 110 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया। 15 बोरे कचरा एकत्र अभियान के दौरान झील के आसपास करीब 100 मीटर के दायरे में सफाई की गई। इस दौरान प्लास्टिक की बोतलें, दूध के पैकेट, चॉकलेट के रैपर, प्लास्टिक स्ट्रॉ सहित अन्य कचरा एकत्र कर करीब 15 बोरियों में भरा गया। अभियान सुबह 7:30 बजे से 9:15 बजे तक चला। आयोजकों के अनुसार यह इंडियन प्लॉगर्स आर्मी का 1032वां प्लॉगिंग अभियान था। अभियान का नेतृत्व संगठन के संस्थापक नागराज, जिन्हें ‘प्लॉग राजा’ के नाम से भी जाना जाता है, ने किया। युवाओं ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश अभियान का उद्देश्य केवल झील से कचरा हटाना ही नहीं, बल्कि लोगों को प्लास्टिक प्रदूषण के प्रति जागरूक करना और स्वच्छता को सामुदायिक जिम्मेदारी के रूप में बढ़ावा देना भी था। आयोजकों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता को व्यवहारिक कार्रवाई में बदलना आवश्यक है। क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट की सहायक प्रोफेसर दीपिका एसआर ने कहा कि जब युवा नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालते हैं, तो स्वच्छ झील के लिए किया गया प्रत्येक प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संदेश देता है। नागरिकों और प्रशासन की संयुक्त भागीदारी जरूरी बीएससीसी आयुक्त केएन रमेश ने कहा कि शहर की झीलों और पर्यावरण को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त रखने के लिए नागरिकों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने सामुदायिक भागीदारी को शहरी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए ऐसे अभियानों को निरंतरता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। मडीवाला झील पर आयोजित इस अभियान ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सामूहिक प्रयासों के माध्यम से सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत किया जा सकता है। प्लॉगिंग जैसे अभियानों में युवाओं की भागीदारी स्वच्छता के साथ-साथ नागरिक जिम्मेदारी की भावना को भी बढ़ावा देती है।

  • बेंगलूरु में 48वां दशहरा महोत्सव 11 अक्टूबर से

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलूरु, 13 सितंबर 2026। प्रवासी बिहारियों की बेंगलूरु स्थित सबसे पुरानी संस्थाओं में शामिल सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति (कन्नड़िगा बिहारी संगठन) एवं राजेन्द्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट बिहार भवन, आर.टी. नगर के संयुक्त तत्वावधान में इस वर्ष 48वें दशहरा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव 11 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक प्रिंसेस श्राइन, गेट नंबर 9, पैलेस ग्राउंड, रमण महर्षि रोड, बेंगलूरु में आयोजित होगा। समिति अध्यक्ष के.के. सिंह (कुमार बाबू) ने बताया कि प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुरूप इस वर्ष भी मां दुर्गा पूजा अनुष्ठान को सुव्यवस्थित एवं भव्य रूप से संपन्न कराने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसके लिए दुर्गा पूजा उपसमिति का गठन किया गया है। उपसमिति की अध्यक्षता अनिल कुमार तिवारी करेंगे और उनके मार्गदर्शन में दशहरा महोत्सव से जुड़े धार्मिक एवं आयोजनात्मक कार्यक्रमों को संचालित किया जाएगा। बैठक में सदस्यों ने संभाली जिम्मेदारियां महोत्सव की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भाग लिया। इस दौरान आयोजन को सफल बनाने के लिए विभिन्न जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई और सदस्यों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाने का संकल्प लिया। बैठक में समिति सचिव सुबोध कुमार सिंह, उपाध्यक्ष अमित कुमार सिंह, जे.पी. सिंह, उपेन्द्र सिंह, एस.के. पुरी, शेषनाथ दूबे, कोषाध्यक्ष राम कँवल सिंह, कार्यालय प्रभारी कुशवाहा जी सहित अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। समिति पदाधिकारियों के अनुसार दशहरा महोत्सव को धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप आयोजित करने के लिए सभी स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन के माध्यम से प्रवासी बिहारी समाज के लोगों को अपनी सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का भी प्रयास किया जाएगा। परंपरा और सामाजिक एकजुटता का उत्सव बेंगलूरु जैसे महानगर में लंबे समय से आयोजित हो रहा दशहरा महोत्सव प्रवासी बिहारियों के लिए धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव का अवसर भी बनता है। आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से इस वर्ष भी महोत्सव को सफल बनाने की तैयारियां आगे बढ़ाई जा रही हैं। समिति की ओर से बताया गया कि आयोजन से संबंधित तैयारियों को निर्धारित जिम्मेदारियों के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा। महोत्सव के दौरान मां दुर्गा की पूजा-अर्चना एवं दशहरा से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं की भागीदारी रहने की उम्मीद है। समाचार प्रेषक: श्रीकान्त शर्मा, बेंगलुरु

  • बाबा रामदेवजी के जयकारों से गूंजा होसपेट

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com होसपेट, 14 सितंबर 2026। जन्मोत्सव के मुख्य कार्यक्रम के तहत श्री बाबा रामदेवजी मंदिर, पुराना सब्जी बाजार से सुबह भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में होसपेट के विधायक एच.आर. गवियप्पा भी शामिल हुए। उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर बाबा रामदेवजी की आरती में भाग लिया और श्रद्धालुओं के साथ धार्मिक आयोजन में सहभागिता निभाई। वरघोड़े में धार्मिक ध्वज, भक्ति संगीत और बाबा रामदेवजी के जयकारों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। विधायक गवियप्पा की सहभागिता से आयोजन में समाजबंधुओं एवं श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ गया। ट्रस्ट ने विधायक का किया सम्मान आयोजन के दौरान श्री रामदेवजी चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से विधायक एच.आर. गवियप्पा का स्वागत एवं सम्मान किया गया। ट्रस्ट अध्यक्ष चन्द्रणसिंह भाटी एवं सचिन मांगीलाल राजपुरोहित ने उन्हें शॉल एवं माला पहनाकर सम्मानित किया। विधायक ने जन्मोत्सव की भव्यता और समाज की सामूहिक सहभागिता की सराहना की। सुंदरकांड और जागरण से हुआ आयोजन का आगाज जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर शनिवार रात श्री बाबा रामदेवजी मंदिर परिसर में श्री हनुमान मित्र मंडल की ओर से सुंदरकांड पाठ एवं जागरण का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में लीन रहे। मंदिर परिसर में भजनों और बाबा रामदेवजी के जयकारों से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। महाआरती के बाद श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी शोभायात्रा के पश्चात मंदिर परिसर में बाबा रामदेवजी की महाआरती आयोजित की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लेकर सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की। इसके बाद विजय टॉकीज के पास स्थित के.एल.एस. कल्याण मंडप में भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। प्रतिष्ठान बंद रखकर समाज ने दिखाई एकजुटता जन्मोत्सव को लेकर विष्णु समाजबंधुओं में विशेष उत्साह रहा। समाज की अपील पर व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर परिवार एवं इष्ट-मित्रों के साथ आयोजन में सहभागिता निभाई। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने जन्मोत्सव को व्यापक सामाजिक सहभागिता वाला धार्मिक आयोजन बना दिया। श्री रामदेवजी चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि.), होसपेट के अध्यक्ष चन्द्रणसिंह भाटी एवं ट्रस्ट सदस्यों ने विधायक एच.आर. गवियप्पा सहित सभी समाजबंधुओं, श्रद्धालुओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समाचार प्रेषक: जब्बरसिंह राजपुरोहित, होसपेट, कर्नाटक

  • पीरजी महाराज के जागरण की तैयारियां पूरी

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 14 सितंबर 2026। राजस्थान राजपूत संघ, बेंगलुरु की ओर से श्री श्री 1008 पीरजी श्री शांतिनाथजी महाराज की 14वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 27 सितंबर 2026 को पैलेस ग्राउंड में भव्य जागरण आयोजित किया जाएगा। आयोजन की तैयारियों को लेकर समाजबंधुओं में उत्साह है। संघ की कमेटी बैठक में कार्यक्रम से संबंधित व्यवस्थाओं और जिम्मेदारियों को अंतिम रूप दिया गया। राजस्थान राजपूत संघ के अध्यक्ष सुजानसिंह भाटी की अध्यक्षता में हुई कमेटी बैठक में जागरण की तैयारियों, विभिन्न व्यवस्थाओं, समाजबंधुओं की सहभागिता तथा कार्यकर्ताओं को सौंपी जाने वाली जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सचिव और कार्यकारिणी सदस्यों ने व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए आयोजन को सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप दिया। 27 सितंबर को पैलेस ग्राउंड में आयोजन श्री पीरजी शांतिनाथजी महाराज की 14वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में रविवार, 27 सितंबर 2026 को पैलेस ग्राउंड, गेट नंबर 6, बेंगलुरु में जागरण का आयोजन होगा। कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 3 बजे से होगी। जागरण में प्रसिद्ध भजन गायक जोग भारती एवं गीता गोस्वामी भजनों की प्रस्तुति देंगे। भक्तिमय प्रस्तुतियों के माध्यम से पीरजी महाराज की महिमा का गुणगान किया जाएगा। आयोजन में बड़ी संख्या में समाजबंधुओं के पहुंचने की संभावना है। सपरिवार सहभागिता का आह्वान संघ अध्यक्ष सुजानसिंह भाटी सहित पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों ने समाज के सभी सम्माननीय बंधुओं और परिवारजनों से जागरण में सपरिवार अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया। पदाधिकारियों ने समाजबंधुओं से इस धार्मिक आयोजन में सहभागी बनकर पीरजी श्री शांतिनाथजी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की। जागरण को लेकर संघ के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता सक्रियता से व्यवस्थाओं में जुटे हैं। कमेटी बैठक में कार्यक्रम से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा के बाद उन्हें अंतिम रूप दिया गया।समाचार प्रेषक: दलपतसिंह भायल, बेंगलुरु

  • BRICS में बड़ा फैसला: 11 देशों ने अपनाया नई दिल्ली घोषणापत्र

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 12 सितंबर 2026 नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के पहले दिन सदस्य देशों ने संयुक्त नई दिल्ली घोषणापत्र स्वीकार किया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के बीच BRICS देशों ने स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की, जो क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकते हैं। घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान संवाद, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से किए जाने पर जोर दिया गया। BRICS देशों ने संघर्ष के दौरान नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की बात कही। भारत की मेजबानी में हो रहे इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सहित BRICS के सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा भी विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। BRICS के सामने पश्चिम एशिया का संकट एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि समूह में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात दोनों शामिल हैं। ऐसे माहौल में सभी सदस्य देशों की सहमति से संयुक्त घोषणापत्र सामने आना समूह के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। घोषणापत्र में वैश्विक व्यापार को सुचारु बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। BRICS देशों ने व्यापार को प्रभावित करने वाले एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों को लेकर चिंता जताई है। इसके अलावा समूह के व्यापक एजेंडे में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, बहुपक्षीय सहयोग, व्यापार, निवेश, तकनीक और सीमा-पार भुगतान जैसे विषय भी शामिल हैं। भारत के लिए यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत कर रहा है। भारत ने इस वर्ष की अध्यक्षता के लिए “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” की थीम रखी है और BRICS के माध्यम से व्यावहारिक तथा विकास-केंद्रित सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। क्यों महत्वपूर्ण है? नई दिल्ली में हुआ यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में BRICS का संयुक्त संदेश भारत की मेजबानी में समूह की सामूहिक कूटनीतिक भूमिका को सामने लाता है।

  • "जीवन पथ" कविता संग्रह

    रचनाकार - डॉ. स्वामी नाथ मिश्र कविता संवेदनशील हृदय की रस-सिक्त उपज है। करुणा उसका सबसे मधुर रूप है। वैसे प्रेम, आक्रोश एवं आश्चर्य से प्लावित कविता भी कम प्रभावशाली नहीं होती। उद्दीपन, आलंबन, भाव, बिंब, रस, छंद, अलंकार आदि से परिपूर्ण कविता किसी भी पाठक के हृदय में उतर सकती है। कविता का रूप लावण्य और मुखरित हो उठता है जब उसमें जीवन के रस एवं स्वर घुले हों। साहित्यकार डॉ. स्वामीनाथ मिश्र जी द्वारा रचित एवं डॉ. राकेश गौतम जी द्वारा संपादित कविता संग्रह "जीवन पथ" जीवन के विभिन्न पहलुओं को छूता एक महत्वपूर्ण काव्य संग्रह है। जीवन प्रारंभ से लेकर जीवन के अंतिम स्वर तक इस संग्रह में विद्यमान हैं। पाँच भागों में विभक्त यह पुस्तक 223 कविताओं का एक मजबूत एवं वृहद दस्तावेज है। सन् 2018 में चौखंभा पब्लिशर्स, वाराणसी से प्रकाशित इस पुस्तक का विस्तार कुल 268 पृष्ठों में है। इस पुस्तक की भूमिका वरिष्ठ एवं ख्यातिलब्ध साहित्यकार, मीडिया विशेषज्ञ डॉ. अमरनाथ अमर जी ने लिखी है। प्रथम भाग श्रद्धा व भक्ति से प्रारंभ होता है जिसमें कुल 18 कविताएं विद्यमान हैं। विघ्नहर्ता प्रथम देव गणेश की वंदना के साथ-साथ श्री राम, गोविंद, गंगा, दुर्गा, सरस्वती माँ की वंदना एवं नवांकुर जीवन के झंकृत स्वरों को अपने अंदर समेटे ये अठारहों कविताएँ हमारे 18 पुराणों जैसा प्रतीत होती हैं। द्वितीय भाग नैतिक एवं सामाजिक संस्कारों से ओतप्रोत है। जीवन का मूल्य, जीवन की उड़ान का दर्शन कराती कुल 55 कविताएं हमारे अंदर नैतिकता का पाठ पढ़ाने में सक्षम हैं। रचनाकार डॉ. स्वामीनाथ मिश्र जी ने अपनी कविताओं में सदाचार, सद्भाव एवं मानवता का जो ताना-बाना बुना है वह वास्तव में हमारे अंदर एक चेतना स्थापित करने में सक्षम है। उपभोक्तावाद की त्रासदी से कवि का मन व्यथित है तभी तो वे लिखते हैं - सूख गया पानी धरती का, खेती बंजर कर डाली। घटते घटते जंगल घट गए, प्रदूषित हवा भी कर डाली।। असंख्य समस्याओं के बावजूद कवि हृदय देश की आन-बान-शान के लिए तत्पर है। डॉ. मिश्र जी की लेखनी विजय पताका लिए जयघोष कर रही है। अनेकता में भी एकता का दर्शन एवं नैराश्य जीवन में भी आशा की चमकती किरण का डंका बजती कविताएं किसी भी पाठक को मुग्ध कर सकतीं हैं - शूल सहते रहे कंटकों का सदा, गीत गाते रहे हम सृजन के लिए, नीर पीते रहे तप्त विष का सदा, भार सहते रहे अस्मिता के लिए। इसी खंड की एक और कविता देखें- स्वर्ण अग्नि में गल कर ही कर लेता पावन निज जीवन। उस भांति बनो तुम प्रखर सूर्य, कर महा ताप का आलिंगन। "जीवन पथ" काव्य संग्रह का तीसरा खंड प्राकृतिक एवं शृंगारिक रचनाओं से परिपूर्ण है। आंसू के मोल, उषा का मिलन, शरद की पूर्णिमा से लेकर 'फिर आऊंगा पास प्रिये' जैसी 64 कविताएं इस खंड में शामिल हैं। प्रकृति हमारे जीवन में सदैव ऊर्जा का संचार करती है। नदी, पहाड़, झरने, बादल, सूर्य, सुबह, शाम, चाँद, दिन और रात इत्यादि प्रकृति के अंग हैं जो हमें नित्य नवीन ऊर्जा से अभिसिंचित करते रहते हैं। तभी तो डॉ. स्वामीनाथ मिश्र जी रचते हैं - नई सुबह है नया सृजन है, नई रोशनी आई है। छटा अंधेरा धूप खिली है नव कलियां मुस्काई हैं। हुई तरंगित सरस वायु, पाकर तरंग तेरे तन की। क्या अभी किया तूने श्रृंगार खिल उठी हैं कलियां कानन की। पुस्तक का चतुर्थ खंड आध्यात्मिक एवं सांसारिक ज्ञान से सराबोर है। इस भाग में कुल 65 रचनाएं निहित हैं जो मानव को मानव बनाने में दक्ष हैं। इस भाग में डॉ. स्वामीनाथ मिश्र जी के जीवन के महत्वपूर्ण अनुभव शामिल हैं। लोक-परलोक को एकाकार करती रचनाओं को पढ़कर ऐसा लगता है कि जैसे हम किसी आध्यात्मिक एवं नीतिपरक ग्रंथ का अध्ययन कर रहे हों - तुम काया नहीं आत्मा हो, यह शरीर साधना जैसा, तुम सत्य चित्र आनंद रूप निशा मध्य दीपक जैसा। खोलो कपाट जो बंद हुए खिल जाओगे सूरज जैसा, मिटा राह के सभी तिमिर बन जाओगे सोने जैसा।। "जीवन पथ" इस पुस्तक का पांचवाँ एवं अंतिम खंड है। "जीवन पथ" शीर्षक से युक्त इसी कविता के नाम पर ही इस पुस्तक का नामकरण हुआ है। यह एक लंबी कविता है जो 28 पृष्ठों में समाहित है। इस कविता को डॉ. स्वामीनाथ मिश्र जी ने अपनी पत्नी स्वर्गीया शशि मिश्रा के वियोग में रचा है। इसमें विवाह से लेकर अंतिम यात्रा तक का काव्यात्मक चित्र उकेरा गया है, जो प्रेम, त्याग और सौंदर्य की पराकाष्ठा को समेटे हुए है। एक पति के जीवन में उसकी पत्नी का कितना महत्व होता है, सब कुछ लिख दिया है डॉ. स्वामी नाथ मिश्र जी ने। कविता में भावों-विचारों की गहराई अद्भुत है, जो हमें मार्मिकता में बांधे रखती है। कुल मिलाकर डॉ. स्वामी नाथ मिश्र जी द्वारा रचित "जीवन पथ" काव्य संग्रह साहित्य जगत के लिए एक अद्भुत कृति है। कहीं-कहीं टंकण की त्रुटियां मौजूद हैं जिसके लिए हम रचनाकार को दोषी नहीं मान सकते। "जीवन पथ" काव्य संग्रह का प्रत्येक खंड एक पुस्तक का रूप ले सकता था, अगर ऐसा हुआ होता तो पांच पुस्तकों का प्रकाशन हो गया होता। खैर... समीक्षक -लालबहादुर चौरसिया लाल (साहित्यकार एवं कवि) महामंत्री- विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई वरिष्ठ साहित्यकार एवं आयुर्वेदाचार्य डॉ. स्वामीनाथ मिश्र जी की यह कृति साहित्य जगत के आकाश में एक चमकीले तारे के समान चमकती रहे, मेरी यही शुभकामना है।

  • 15 सितंबर से चीनी पर नई पाबंदी, जमाखोरी पर कसेगा शिकंजा

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026। त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों और उपलब्धता पर निगरानी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के डीलरों और स्टॉकिस्टों के लिए भंडारण सीमा घटाने का फैसला किया है। नई व्यवस्था 15 सितंबर 2026 से लागू होने जा रही है। इसके तहत कोई भी चीनी डीलर या कारोबारी 2,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। सरकार का उद्देश्य बाजार में कृत्रिम कमी, जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाना तथा उपभोक्ताओं के लिए चीनी की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस कदम से खुदरा बाजार में चीनी कितनी सस्ती होगी, यह मांग-आपूर्ति और बाजार की वास्तविक स्थिति पर निर्भर करेगा। हर शुक्रवार देना होगा स्टॉक का हिसाब नई व्यवस्था के तहत थोक विक्रेताओं और डीलरों को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद उन्हें हर शुक्रवार अपने पास मौजूद चीनी के कुल स्टॉक की जानकारी ऑनलाइन अपडेट करनी होगी। इस व्यवस्था से सरकार को देशभर में चीनी के भंडार और आपूर्ति की स्थिति पर नियमित नजर रखने में मदद मिलेगी। किसी क्षेत्र में अचानक स्टॉक कम होने या अत्यधिक मात्रा में जमा होने की स्थिति में निगरानी और कार्रवाई की संभावना बढ़ जाएगी। सीमा से अधिक स्टॉक पर कार्रवाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सीमा से अधिक चीनी का भंडारण पाए जाने पर कार्रवाई की जा सकती है। यदि जांच में किसी कारोबारी के पास 2,000 क्विंटल से अधिक स्टॉक मिलता है या जानबूझकर आपूर्ति रोककर कीमत बढ़ाने की कोशिश सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जमाखोरी और कालाबाजारी के मामलों में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधान लागू किए जा सकते हैं। बड़े खरीदार भी निगरानी में सरकार की निगरानी केवल चीनी के डीलरों और स्टॉकिस्टों तक सीमित नहीं रहेगी। मिठाई कारोबार, शीतल पेय निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण तथा अन्य बड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को भी नई व्यवस्था के दायरे में रखा गया है। जिन औद्योगिक या वाणिज्यिक इकाइयों की औसत मासिक चीनी खपत 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक है, उन्हें अपने उत्पादन या व्यावसायिक उपयोग के लिए 15 दिनों से अधिक का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। चीनी मिलों को भी रखनी होगी बिक्री की जानकारी बड़े वाणिज्यिक खरीदारों को चीनी की बिक्री पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। चीनी मिलों को ऐसे खरीदारों को बेची गई चीनी की मात्रा और संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सरकार को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि बड़े खरीदार वास्तव में अपनी जरूरत के अनुरूप चीनी खरीद रहे हैं या बाजार में अतिरिक्त स्टॉक जमा करने के उद्देश्य से खरीदारी की जा रही है। क्या सस्ती होगी चीनी? सरकार का मकसद बाजार में अनावश्यक स्टॉक जमा करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना, आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना और त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराना है। हालांकि, नई स्टॉक सीमा लागू होने मात्र से चीनी की कीमत निश्चित रूप से कम होगी, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। कीमतों पर उत्पादन, मांग, मिलों की आपूर्ति, थोक एवं खुदरा बाजार की स्थिति और त्योहारी मांग जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। नई व्यवस्था का वास्तविक असर बाजार में इसके लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • ब्रिक्स से बदली दुनिया की चाल, अमेरिकी मीडिया में भारत पर नजर

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर दुनिया की निगाहें टिकी हैं। ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ सहयोगी देशों के प्रमुखों की मौजूदगी ने इस सम्मेलन को वैश्विक कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण बना दिया है। सम्मेलन के बीच अमेरिकी मीडिया में भी भारत, चीन, रूस और ईरान की बढ़ती नजदीकियों तथा बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है। अमेरिकी अखबारों की रिपोर्टों में नई दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन को केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था के संकेत के रूप में देखा गया है। खासतौर पर चीन और ईरान के नेताओं की एक मंच पर मौजूदगी तथा भारत-चीन संबंधों में हालिया सुधार को अमेरिकी मीडिया ने प्रमुखता दी है। मोदी या शी, ग्लोबल साउथ की आवाज कौन? द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में इस सवाल पर चर्चा की गई है कि विकासशील देशों की दुनिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग में से कौन अधिक प्रभावशाली आवाज के रूप में उभर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ब्रिक्स को अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देने वाले महत्वपूर्ण मंच के तौर पर देखता है। दूसरी ओर, भारत की प्राथमिकता ब्रिक्स को एक ऐसे व्यापक और खुले मंच के रूप में बनाए रखने की है, जहां देशों को किसी एक शक्ति-गुट का चुनाव करने के लिए मजबूर न होना पड़े। यह अंतर भारत और चीन की ब्रिक्स को लेकर अलग-अलग रणनीतिक सोच को भी सामने लाता है। शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर अमेरिकी मीडिया की नजर अमेरिकी मीडिया में ब्रिक्स सम्मेलन के साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को भी विशेष महत्व दिया गया है। रिपोर्टों में इसे सात वर्ष बाद उनकी भारत यात्रा के रूप में रेखांकित किया गया है। 2020 में सीमा पर हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा। इसके बाद 2024 से दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में सावधानीपूर्वक कूटनीतिक प्रयास शुरू हुए। ऐसे में शी की नई दिल्ली यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में संभावित बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, शी जिनपिंग की आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रस्तावित मुलाकात के संदर्भ में भी भारत यात्रा महत्वपूर्ण हो जाती है। युद्ध, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी टैरिफ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दे वैश्विक शक्तियों के बीच संबंधों को नए सिरे से प्रभावित कर रहे हैं। भारत-अमेरिका संबंधों पर चीन की नजर वॉशिंगटन स्थित स्टिमसन सेंटर के चीन कार्यक्रम की निदेशक युन सन के हवाले से अमेरिकी मीडिया में कहा गया है कि चीन की प्रमुख चिंताओं में भारत का अमेरिका की ओर बढ़ता रणनीतिक झुकाव शामिल है। ऐसे में बीजिंग के लिए नई दिल्ली के साथ संबंधों को बेहतर बनाने का अवसर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्रिक्स सम्मेलन इस दृष्टि से दोनों देशों के नेताओं को संवाद और रणनीतिक मतभेदों पर चर्चा का अवसर भी उपलब्ध कराता है। वॉशिंगटन पोस्ट ने बताया मुश्किल संतुलन वॉशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्टों में नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन को भारत के लिए एक जटिल कूटनीतिक संतुलन की कवायद के रूप में देखा गया है। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे नेताओं की मौजूदगी भारत की विदेश नीति के व्यापक दायरे को दर्शाती है। सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुतिन और पेजेश्कियान के साथ अलग-अलग बातचीत भी इस कूटनीतिक सक्रियता का हिस्सा रही। बढ़े ब्रिक्स के सामने बड़ी चुनौती ब्रिक्स के विस्तार के बाद समूह के 11 सदस्य वैश्विक व्यवस्था में अधिक प्रभाव और प्रतिनिधित्व की मांग को मजबूती से उठा रहे हैं। हालांकि, इन देशों के राजनीतिक, आर्थिक और विदेश नीति से जुड़े हित पूरी तरह समान नहीं हैं। यही इस समूह के सामने सबसे बड़ी चुनौती भी है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ विश्लेषक प्रवीण डोंथी के अनुसार, ग्लोबल साउथ को एक समान राजनीतिक या रणनीतिक समूह के रूप में देखना उचित नहीं होगा। अलग-अलग देशों के हितों और प्राथमिकताओं के कारण समूह के भीतर मतभेदों को संभालना और उनमें मध्यस्थता करना आसान नहीं होगा। बदलती विश्व व्यवस्था का मंच बना ब्रिक्स अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों से स्पष्ट है कि नई दिल्ली में हो रहा ब्रिक्स सम्मेलन अब केवल सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं माना जा रहा। भारत, चीन, रूस और ईरान जैसे देशों की एक साथ मौजूदगी तथा वैश्विक व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और तकनीक से जुड़े बदलते समीकरणों ने इसके रणनीतिक महत्व को बढ़ा दिया है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत रखते हुए रूस, चीन, ईरान और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भी अपने हितों को संतुलित करे। यही संतुलन नई दिल्ली की विदेश नीति और ब्रिक्स सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर खास बना रहा है।

  • BRICS Summit के चलते दिल्ली में ट्रैफिक बदलाव, कई रास्तों पर डायवर्जन

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com)नई दिल्ली | 11 सितंबर 2026 नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही को देखते हुए राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात को नियंत्रित और डायवर्ट किया जा रहा है। इससे दिल्ली-एनसीआर के दैनिक यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने की सलाह दी गई है। कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक नियंत्रण BRICS Summit के दौरान नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में 35 से अधिक सड़कों पर यातायात नियंत्रण की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही 22 प्रमुख डायवर्जन प्वाइंट निर्धारित किए गए हैं। VIP काफिलों की आवाजाही के दौरान कुछ मार्गों पर थोड़े समय के लिए यातायात रोका या वैकल्पिक मार्ग पर भेजा जा सकता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले यातायात की स्थिति और आधिकारिक दिशा-निर्देशों की जानकारी लें तथा अनावश्यक रूप से नियंत्रित क्षेत्रों में जाने से बचें। मेट्रो को प्राथमिकता देने की सलाह एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की यात्रा करने वाले लोगों को मेट्रो सहित सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। प्रशासन का कहना है कि इससे सड़क पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी और यात्रियों को भी अपेक्षाकृत सुविधाजनक यात्रा मिल सकेगी। आम लोगों की रोजमर्रा की यात्रा प्रभावित BRICS सम्मेलन की सुरक्षा व्यवस्था के कारण कई इलाकों में सामान्य आवाजाही प्रभावित होने की संभावना है। कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, डिलीवरी कर्मचारियों, टैक्सी और ऑटो चालकों तथा अन्य दैनिक यात्रियों को लंबे रास्ते और अतिरिक्त यात्रा समय का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करने और पुलिस द्वारा बताए गए डायवर्जन मार्गों का पालन करने की अपील की है। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्री रहें सावधान दिल्ली से बाहर जाने या दिल्ली पहुंचने वाले यात्रियों के लिए भी ट्रैफिक व्यवस्था महत्वपूर्ण है। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को सामान्य से पहले निकलने तथा यात्रा के लिए अतिरिक्त समय रखने की सलाह दी गई है। आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं के वाहनों के लिए विशेष व्यवस्था जारी रखने की बात कही गई है। भारतार्थ खबर का निष्कर्ष:BRICS Summit भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण दिल्ली में आम लोगों की आवाजाही पर असर पड़ रहा है। ऐसे में यात्रियों के लिए सबसे जरूरी है कि वे यात्रा से पहले रूट की जानकारी लें, अतिरिक्त समय रखें और जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें।

  • पुस्तक समीक्षा-"मन गगन सा"

    समीक्षक - लालबहादुर चौरसिया लाल, साहित्यकार एवं कवि महामंत्री-विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई "मन गगन सा" कवयित्री डॉ. प्रतिभा मिश्र जी की एक कालजई कृति ही नहीं वरन विविध रंगों एवं विविध गंधो से रचा बसा फूलों का अनुपम गुलदस्ता है। पुस्तक के आवरण व पुस्तक के नामकरण से ही पुस्तक में अंकित कविताओं का दायित्व बोध मुखरित होने लगता है। कविताओं में नारी मन का व्यापक समावेश के साथ-साथ पुरुष मन को भी कलात्मकता के साथ उकेरने का अनुपम प्रयास किया गया है। कई रचनाएं तो जीवन सूत्र की तरह झलकती हैं। काव्य परंपरा से जुड़ी कवयित्री डॉ. प्रतिभा मिश्र नारी व्यथा के प्रति संवेदनशील हैं। सामाजिक संबंधों व पारिवारिक संबंधों के प्रति उदार हैं। "ये प्यारी सी बेटियां" "जननी" "पिता" "मैं नारी हूं" "मां" आदि शीर्षकों से सुशोभित कविताएं मन को अत्यंत सुकून प्रदान करती हैं। जब देश प्रेम व आपसी सद्भाव या समरसता की बात आती है तो डॉ. प्रतिभा मिश्र समाज से प्रश्न पूछने में कोई गुरेज नहीं करतीं। अपने हृदय के उद्गार को समाज के समक्ष "क्यों बांटते हो" नामक कविता में परोस ही देतीं हैं...... क्यों बांटते हो हिंदू मुसलमान में हमें। क्यों ढूंढते हो गीता या कुरान में हमें।। डॉ. प्रतिभा के मन में प्रकृति के संपूर्ण स्वरूपों को छूने की व्यापक समझ है। कल्पना की उड़ान जब अंगड़ाई लेती है तब धरातल से गगन तक पहुंचने का सुनहरा सपना साकार होता है। तब कविताएं.... "दूध जैसी चांदनी सी" "वसंत ऋतु" "हवा की चिट्ठी" "गुनगुनाती धूप" "बसंती पवन ने छुवा" इत्यादि प्रस्फुटित होती हैं। डॉ. प्रतिभा मिश्र एक नारी हैं। नारी मन में प्रेम का अगाध सागर समाहित होता है। प्रतिभा जी ने स्त्री जीवन की संपूर्ण पीड़ा एवं विसंगतियों को कुछ समय के लिए भूलाकर प्रेम में जीने का अनुपम प्रयास किया है। "मिल अगर जाओ" नामक शीर्षक की चार पंक्तियां प्रेम की पराकाष्ठा से परिपूर्ण है..... मिल अगर जाओ तुम,प्यार-मनुहार हो। नेह की लौ जले, दिव्य उपहार हो। दूरियां इतनी अब, ठीक नहीं लगती। सामने आओ तो, एक त्यौहार हो।। इनकी छंद युक्त रचनाओं के साथ-साथ छंद मुक्त रचनाएं अत्यंत प्रभावित करती हैं। काव्य का प्रवाह छंद मुक्त रचनाओं मेंं भरपूर समाहित है। पुस्तक के अंत में अंकित "मुक्तक" मन को छूने का हर संभव प्रयास करते हैं। इसमें एक मुक्तक तो मुझे कंठस्थ ही हो गया..... आज नहीं तो कल मिलना है, सभी व्यवस्थित पल मिलना है, सब की सीमा निर्धारित है, हर प्रश्नों का हल मिलना है।। प्रतिभा जी की पुस्तक मन गगन सा हिंदी साहित्य जगत में एक नया कीर्तिमान स्थापित करें यही हमारी शुभकामनाएं हैं। -लालबहादुर चौरसिया "लाल" महामंत्री-विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई

  • बैंक हड़ताल से सेवाओं पर असर, कई राज्यों में चार दिन का व्यवधान

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026। देशभर में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की यूनियनों द्वारा शुक्रवार, 11 सितंबर को बुलाई गई एकदिवसीय हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने सहित विभिन्न लंबित मांगों को लेकर हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है। बातचीत के बावजूद मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकलने के बाद यूनियनों ने हड़ताल वापस लेने से इनकार किया। हड़ताल का सबसे अधिक असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में देखने को मिल सकता है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) समेत कई बैंकों ने अपने ग्राहकों को संभावित परिचालन बाधाओं की जानकारी दी है। एसबीआई ने कहा है कि हड़ताल के दिन शाखाओं और कार्यालयों के सामान्य संचालन के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं, लेकिन कर्मचारियों की भागीदारी के कारण बैंकिंग कार्य प्रभावित हो सकते हैं। पांच दिन के बैंकिंग सप्ताह की मांग प्रमुख मुद्दा बैंक यूनियनों की प्रमुख मांग सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करना है। यूनियनों का कहना है कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह से संबंधित प्रस्ताव पर पहले सहमति बनी थी, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया। इसके अलावा प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) व्यवस्था और कर्मचारियों से जुड़े अन्य लंबित मुद्दे भी आंदोलन के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। UFBU का कहना है कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था का मुद्दा लंबे समय से लंबित है और सरकार तथा संबंधित पक्षों के साथ हुई बातचीत के बावजूद इसे लागू करने की कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है। इसी कारण यूनियनों ने 11 सितंबर की हड़ताल को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। कई राज्यों में लगातार चार दिन प्रभावित हो सकती हैं शाखा सेवाएं 11 सितंबर को शुक्रवार के बाद 12 सितंबर को दूसरा शनिवार और 13 सितंबर को रविवार है। इसके बाद 14 सितंबर को कुछ राज्यों में गणेश चतुर्थी के कारण बैंक अवकाश रहेगा। ऐसे में संबंधित राज्यों में बैंक शाखाओं की नियमित सेवाओं पर लगातार चार दिनों तक असर पड़ सकता है। हालांकि, यह व्यवस्था पूरे देश में समान नहीं होगी, क्योंकि 14 सितंबर का अवकाश राज्यवार बैंक अवकाश कैलेंडर पर निर्भर करेगा। इस दौरान नकद जमा और निकासी, चेक संबंधी कार्य, केवाईसी, दस्तावेज जमा करने तथा अन्य शाखा-आधारित सेवाओं में देरी या असुविधा हो सकती है। इसलिए जिन ग्राहकों को शाखा में जाकर जरूरी बैंकिंग कार्य निपटाने हैं, उन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। डिजिटल बैंकिंग से सामान्य लेनदेन जारी रहने की उम्मीद हड़ताल के बावजूद इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और एटीएम जैसी डिजिटल एवं स्वचालित सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की उम्मीद है। हालांकि, किसी तकनीकी समस्या या नकदी उपलब्धता की स्थिति में इन सेवाओं पर स्थानीय स्तर पर असर पड़ सकता है। शाखा से जुड़े ऐसे काम, जिनमें बैंक कर्मचारी की प्रत्यक्ष भूमिका आवश्यक है, उनमें देरी की संभावना अधिक है। ग्राहकों के लिए बेहतर होगा कि वे आवश्यक नकद जरूरतों, चेक जमा, दस्तावेजी कार्य और अन्य शाखा-आधारित लेनदेन की योजना पहले से बना लें। नियमित डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों को यूपीआई और अन्य उपलब्ध डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने में अपेक्षाकृत कम परेशानी हो सकती है। आगे भी आंदोलन की चेतावनी बैंक यूनियनों ने सितंबर में आगे भी आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है। मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी गई है। हालांकि बैंकिंग व्यवस्था में डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग ने ग्राहकों को शाखा बंद रहने की स्थिति में कई विकल्प दिए हैं, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था में बैंक शाखाओं की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से छोटे व्यापारियों, वरिष्ठ नागरिकों, ग्रामीण ग्राहकों और ऐसे उपभोक्ताओं के लिए शाखा सेवाएं जरूरी हैं, जो डिजिटल माध्यमों पर पूरी तरह निर्भर नहीं हैं। ऐसे में बैंक प्रबंधन, सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच संवाद के माध्यम से समाधान निकालना सभी पक्षों के हित में होगा। कर्मचारियों की जायज मांगों पर विचार के साथ यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि बार-बार होने वाले औद्योगिक विवादों का असर आम ग्राहक और कारोबार पर न्यूनतम पड़े। ग्राहकों के लिए संदेश: 11 सितंबर की हड़ताल के दौरान शाखा-आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। जरूरी लेनदेन की योजना पहले से बनाएं और उपलब्ध डिजिटल बैंकिंग विकल्पों का उपयोग करें। 14 सितंबर को बैंक अवकाश राज्य के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

bottom of page