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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • सर्व पितृ मोक्ष के लिए 108 कुंडीय महायज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com संवाददाता अशोक कुमार सिंह हरिद्वार, 23 सितंबर 2026। सर्व पितृ मोक्ष की कामना के उद्देश्य से राष्ट्रीय सनातनी संगठन ट्रस्ट की ओर से 108 कुंडीय महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक आयोजन को लेकर संगठन की ओर से जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों तथा संत-महात्माओं को आमंत्रित किया गया है। संगठन के अनुसार कार्यक्रम में खानपुर विधायक उमेश कुमार, उत्तराखंड सरकार के गन्ना मंत्री श्यामबीर सैनी, वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. पहल सिंह सैनी तथा यति नरसिंहानंद सरस्वती को आमंत्रित किया गया है। 40 दिवसीय उपवास का होगा समापन संगठन के संस्थापक आचार्य प्राणनाथ जी महाराज ने बताया कि उनके 40 दिवसीय उपवास का समापन वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. पहल सिंह सैनी एवं खानपुर विधायक उमेश कुमार द्वारा किया जाएगा। आयोजन की तैयारियों को लेकर संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। संगठन की ओर से बताया गया कि धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की सहभागिता को लेकर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। पदाधिकारियों ने की सहभागिता की अपील संगठन की ओर से श्रद्धालुओं एवं सनातन धर्मावलंबियों से 108 कुंडीय महायज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा में सहभागी बनने का आह्वान किया गया है। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक वातावरण के माध्यम से श्रद्धालुओं को जोड़ना है। इस अवसर पर राष्ट्रीय सनातनी संगठन ट्रस्ट के संस्थापक आचार्य प्राणनाथ जी महाराज, प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप शर्मा, जिला युवा मोर्चा अध्यक्ष हरिद्वार चेतन चौधरी तथा जिला मंत्री कुलबीर चौधरी सहित संगठन से जुड़े पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रम में सहभागिता करने की अपील की है।

  • एशियन गेम्स में मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, 49 किग्रा वर्ग में जीता रजत पदक

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नागोया, 23 सितंबर 2026। भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर अपने लंबे इंतजार को समाप्त कर दिया। नागोया में बुधवार को हुए मुकाबले में चानू ने कुल 198 किलोग्राम भार उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया। यह एशियन गेम्स में उनका पहला पदक है। चानू ने स्नैच में 87 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का सर्वश्रेष्ठ भार उठाया। उनके कुल 198 किलोग्राम के प्रदर्शन ने उन्हें रजत पदक दिलाया। इंडोनेशिया की लुलुक डायना त्रि विजायाना ने 191 किलोग्राम के कुल भार के साथ कांस्य पदक हासिल किया। 12 साल के इंतजार के बाद मिला एशियन गेम्स पदक मीराबाई चानू ने वर्ष 2014 में एशियन गेम्स में पदार्पण किया था। इसके बाद चोट और प्रदर्शन से जुड़ी चुनौतियों के कारण उन्हें इस प्रतियोगिता के पोडियम तक पहुंचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में भी चानू पदक के करीब पहुंची थीं, लेकिन वह चौथे स्थान पर रही थीं। इस बार नागोया में उन्होंने अपने अनुभव और तैयारी का प्रभावी प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया। 49 किग्रा वर्ग में मजबूत प्रदर्शन प्रतियोगिता में चानू ने 87 किलोग्राम के स्नैच के साथ शुरुआत की। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 111 किलोग्राम का भार उठाया। दोनों वर्गों के कुल प्रदर्शन के आधार पर उनका स्कोर 198 किलोग्राम रहा। उत्तर कोरिया की री सोंग गुम ने स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने कुल 215 किलोग्राम भार उठाया, जिसमें 94 किलोग्राम स्नैच और 121 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क शामिल था। री के प्रदर्शन के साथ इस स्पर्धा में नए रिकॉर्ड भी बने। भारतीय भारोत्तोलन के लिए भी अहम उपलब्धि मीराबाई चानू का रजत पदक केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं है। इससे एशियन गेम्स में भारतीय भारोत्तोलन का लंबे समय से चला आ रहा पदक का इंतजार भी समाप्त हुआ। भारत ने इससे पहले एशियन गेम्स में भारोत्तोलन का पदक 1998 में जीता था, जब कर्णम मल्लेश्वरी ने बैंकॉक एशियन गेम्स में रजत पदक हासिल किया था। इस लिहाज से चानू का नागोया रजत भारतीय भारोत्तोलन के लिए 28 साल बाद आया पदक है। ओलंपिक और विश्व स्तर की सफलता के बाद एशियन गेम्स का पदक मीराबाई चानू पहले ही ओलंपिक और विश्व स्तर पर भारत को गौरवान्वित कर चुकी हैं। उन्होंने 2021 टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीता था और विश्व भारोत्तोलन प्रतियोगिताओं में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उनके नाम राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक हैं। एशियन गेम्स का पदक उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की उन प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हो गया है, जो लंबे समय से उनके पदक संग्रह में बाकी था। नागोया में रजत जीतकर उन्होंने एशियन गेम्स में भी भारत के लिए पदक हासिल किया। लगातार प्रयास के बाद पूरा हुआ लक्ष्य मीराबाई चानू के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एशियन गेम्स का पदक उनके करियर में लंबे समय से अधूरा लक्ष्य बना हुआ था। 2014 में पदार्पण के बाद से वह इस प्रतियोगिता में पदक हासिल करने का प्रयास कर रही थीं। नागोया में 198 किलोग्राम का कुल भार उठाकर चानू ने उस इंतजार को खत्म किया। उनका रजत पदक भारत के एशियन गेम्स अभियान में भारोत्तोलन के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है।

  • शालीमार बाग में देर रात बुलडोजर कार्रवाई, मदीना मस्जिद का हिस्सा भी हटाया गया

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026। दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में मंगलवार देर रात मैक्स हॉस्पिटल रोड के पास अतिक्रमण हटाने और सड़क चौड़ीकरण से जुड़ी कार्रवाई के दौरान मदीना मस्जिद के एक हिस्से तथा आसपास की कुछ संरचनाओं को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई। नागरिक अधिकारियों के अनुसार, अभियान सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत सड़क के लिए आवश्यक जगह खाली कराने और सार्वजनिक भूमि पर मौजूद कथित अतिक्रमण हटाने के लिए चलाया गया। अधिकारियों का कहना है कि इसी सड़क पर इससे पहले भी चौड़ीकरण से संबंधित कार्रवाई की जा चुकी है। देर रात हुई कार्रवाई, पुलिस की भारी तैनाती रिपोर्टों के मुताबिक, मंगलवार देर रात नागरिक निकाय की टीम बुलडोजर और अन्य मशीनों के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान पुलिस की पर्याप्त तैनाती की गई थी। स्थानीय लोगों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के पहुंचने के बाद इलाके में स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई। मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार, अभियान का केंद्र मैक्स हॉस्पिटल रोड का वह हिस्सा था, जहां सड़क चौड़ीकरण के लिए पहले भी कुछ संरचनाएं हटाई गई थीं। मदीना मस्जिद के हिस्से को लेकर विवाद कार्रवाई में मदीना मस्जिद का हिस्सा भी प्रभावित हुआ। प्रशासन की ओर से संबंधित संरचनाओं को सड़क चौड़ीकरण और कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जोड़ा गया है। वहीं, मस्जिद प्रबंधन ने कार्रवाई की प्रक्रिया और नोटिस को लेकर सवाल उठाए हैं। मस्जिद अध्यक्ष मोविन खान के अनुसार, प्रबंधन को नगर निगम की ओर से नोटिस जारी किए गए थे और बाद में मामला अपीलेट ट्रिब्यूनल तक भी पहुंचा। उनका दावा है कि निर्माण के अलग-अलग हिस्सों की वैधता को लेकर वहां सुनवाई हुई थी। मस्जिद प्रबंधन ने यह भी दावा किया कि कुछ ऊपरी मंजिलों के निर्माण को वर्ष 2001 से पुराना बताते हुए संबंधित दस्तावेज और साइट प्लान प्रस्तुत किए गए थे। इन दावों की अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित न्यायिक एवं प्रशासनिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी। AIMIM नेता शोएब जमाई मौके पर पहुंचे कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद AIMIM के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमाई मौके पर पहुंचे। उन्होंने देर रात की गई कार्रवाई पर आपत्ति जताई और इसे असंवैधानिक बताया। यह उनका राजनीतिक आरोप है। जमाई ने दावा किया कि उन्हें रात करीब 11:30 बजे घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने अपनी स्थानीय टीम को मौके पर भेजा और स्वयं भी शालीमार बाग पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद के भीतर मौजूद दस्तावेजों और धार्मिक सामग्री को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। इन आरोपों पर उपलब्ध रिपोर्टों में नागरिक प्रशासन की ओर से विस्तृत बिंदुवार प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इन्हें संबंधित पक्ष के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। नोटिस और कानूनी प्रक्रिया पर अलग-अलग दावे मदीना मस्जिद के अध्यक्ष मोविन खान ने कहा कि नगर निगम की ओर से उन्हें कई नोटिस मिले थे। उनके अनुसार, दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां प्राप्त करने और जवाब तैयार करने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई तथा मामला अपीलेट ट्रिब्यूनल तक पहुंचा। दूसरी ओर, कुछ रिपोर्टों में प्रशासनिक कार्रवाई को पूर्व में जारी नोटिस और सड़क चौड़ीकरण परियोजना से जोड़ा गया है। एक अन्य रिपोर्ट में कार्रवाई को न्यायिक आदेश के बाद किया गया अभियान बताया गया है। इसलिए इस मामले में नोटिस की तारीख, न्यायिक आदेश की सटीक शर्तें और संबंधित भूमि एवं निर्माण दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर इन सभी पहलुओं पर एक समान विवरण सामने नहीं आया है। रेखा गुप्ता के विधानसभा क्षेत्र में कार्रवाई शालीमार बाग दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का विधानसभा क्षेत्र है। AIMIM नेता शोएब जमाई ने इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री और प्रशासन से कार्रवाई के समय तथा तरीके को लेकर सवाल पूछे। जमाई ने यह भी कहा कि उनकी आपत्ति केवल एक समुदाय से संबंधित मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्रवाई की प्रक्रिया और देर रात किए गए अभियान को लेकर है। यह बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है। प्रशासन के अनुसार सड़क चौड़ीकरण मुख्य वजह उपलब्ध रिपोर्टों में नागरिक अधिकारियों का पक्ष स्पष्ट रूप से सड़क चौड़ीकरण और कथित अतिक्रमण हटाने से जुड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, मैक्स हॉस्पिटल रोड को चौड़ा करने के लिए सड़क के किनारे मौजूद संरचनाओं को हटाना आवश्यक था। इससे पहले भी इसी सड़क पर कार्रवाई की जा चुकी थी। मंगलवार रात का अभियान सड़क के शेष हिस्से को खाली कराने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। कार्रवाई के तरीके पर उठे सवाल घटना का एक प्रमुख विवाद देर रात कार्रवाई किए जाने को लेकर है। स्थानीय लोगों और AIMIM ने सवाल उठाया कि अभियान रात में क्यों चलाया गया और प्रभावित लोगों को सामान तथा दस्तावेज हटाने के लिए कितना समय दिया गया। दूसरी ओर, प्रशासनिक कार्रवाई को सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया बताया गया है। इसलिए विवाद का केंद्र फिलहाल कार्रवाई का समय, पूर्व नोटिस, न्यायिक प्रक्रिया और प्रभावित संरचनाओं की कानूनी स्थिति है। मामले में आगे की स्थिति संबंधित न्यायिक आदेशों, नगर निगम के नोटिस और भूमि-निर्माण से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों से अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में प्रशासन और प्रभावित पक्षों के दावों के बीच अंतर दिखाई देता है। राजनीतिक प्रतिक्रिया के बीच कानून-व्यवस्था पर नजर मस्जिद के हिस्से को हटाए जाने के बाद घटना ने स्थानीय स्तर से आगे राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। हालांकि, मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच प्रशासन ने कार्रवाई को सड़क परियोजना और अतिक्रमण हटाने से संबंधित बताया है। ऐसे संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक रिकॉर्ड, न्यायिक आदेश और संबंधित पक्षों के दस्तावेजों के आधार पर ही अंतिम स्थिति तय की जा सकती है। फिलहाल शालीमार बाग की घटना में सड़क चौड़ीकरण की प्रशासनिक कार्रवाई और उसके तरीके को लेकर उठे कानूनी एवं राजनीतिक सवाल दोनों समानांतर रूप से सामने आए हैं।

  • ट्रंप बनाम मीडिया विवाद गहराया, व्हाइट हाउस ने शुरू किया ‘ट्रंप टीवी’

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com वॉशिंगटन, 23 सितंबर 2026। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच व्हाइट हाउस में प्रवेश को लेकर विवाद अब कानूनी लड़ाई तक पहुंच गया है। CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों पर व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इन तीनों मीडिया संस्थानों ने संघीय अदालत का रुख किया है। इसी बीच प्रमुख अमेरिकी टेलीविजन नेटवर्कों की साझा राष्ट्रपति कवरेज व्यवस्था यानी TV Press Pool भी प्रभावित हुई है और व्हाइट हाउस ने अपनी 24 घंटे चलने वाली ऑनलाइन वीडियो सेवा ‘TRUMP TV: The Essentials Station’ शुरू कर दी है। तीन मीडिया संस्थानों पर प्रवेश प्रतिबंध ट्रंप ने 18 सितंबर को CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस कवरेज से प्रतिबंधित करने की घोषणा की थी। ट्रंप ने इन संस्थानों की रिपोर्टिंग पर आपत्ति जताते हुए उन्हें गलत या ‘फेक न्यूज’ प्रकाशित करने का आरोप लगाया। इसके बाद संबंधित पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोका गया और उनके प्रेस पास वापस लिए गए। इसके विरोध में CNN, MS NOW और Politico ने 21 सितंबर को संघीय अदालत में संयुक्त मुकदमा दायर किया। मीडिया संस्थानों का कहना है कि प्रतिबंध प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े प्रथम संशोधन के अधिकारों का उल्लंघन करता है और उन्होंने अपने व्हाइट हाउस एक्सेस को बहाल करने की मांग की है। व्हाइट हाउस की ओर से प्रतिबंध का बचाव करते हुए कहा गया है कि प्रथम संशोधन प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करता है, लेकिन किसी विशेष मीडिया संस्थान को व्हाइट हाउस में प्रवेश का स्वतः अधिकार नहीं देता। इस मामले में अदालत की सुनवाई आगे जारी है। क्या है TV Press Pool? अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की टेलीविजन कवरेज के लिए TV Press Pool एक साझा व्यवस्था है। इसके तहत प्रमुख नेटवर्क बारी-बारी से राष्ट्रपति के कार्यक्रमों, यात्राओं और अन्य सार्वजनिक गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग करते हैं और फुटेज को दूसरे मीडिया संस्थानों के साथ साझा करते हैं। ABC, CBS, CNN, Fox News और NBC इस व्यवस्था में प्रमुख नेटवर्कों में शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीमित स्थान या सुरक्षा व्यवस्था के कारण सभी मीडिया संस्थानों के कैमरा दल किसी कार्यक्रम में मौजूद न रह सकें, तब भी राष्ट्रपति की सार्वजनिक गतिविधियों की वीडियो कवरेज व्यापक मीडिया तक पहुंच सके। CNN पर प्रतिबंध के बाद साझा कवरेज प्रभावित CNN की निर्धारित पूल ड्यूटी के दौरान उसे व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश नहीं मिलने के बाद अन्य प्रमुख नेटवर्कों ने उसकी जगह कवरेज संभालने से इनकार कर दिया। इसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति के कुछ कार्यक्रमों की पारंपरिक साझा टीवी पूल कवरेज रोक दी गई। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिकी टीवी चैनलों ने ट्रंप की खबरों का पूर्ण रूप से प्रसारण बंद कर दिया है। स्वतंत्र रिपोर्टिंग और अन्य माध्यमों से समाचार कवरेज जारी है। व्हाइट हाउस ने शुरू किया ‘TRUMP TV’ मीडिया विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने 21 सितंबर को ‘TRUMP TV: The Essentials Station’ नाम से 24 घंटे की डिजिटल वीडियो स्ट्रीम शुरू की। व्हाइट हाउस की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसकी घोषणा की गई है। यह सेवा प्रशासन के भाषणों, घोषणाओं, प्रमुख कार्यक्रमों और चयनित वीडियो सामग्री को सीधे दर्शकों तक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस डिजिटल स्ट्रीम पर ट्रंप के पुराने भाषणों और प्रशासन से जुड़े वीडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं। इसे पारंपरिक टेलीविजन नेटवर्क पर निर्भर हुए बिना व्हाइट हाउस की ओर से अपनी वीडियो सामग्री सीधे दर्शकों तक पहुंचाने के माध्यम के रूप में देखा जा सकता है। विवाद का अगला पड़ाव अदालत CNN, MS NOW और Politico की संयुक्त याचिका के बाद विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा अब न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ गया है। मीडिया संस्थानों ने प्रतिबंध को चुनौती देते हुए प्रथम संशोधन के तहत प्रेस स्वतंत्रता के अधिकारों का हवाला दिया है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने मीडिया संस्थानों की व्हाइट हाउस तक पहुंच पर अपने अधिकारों का बचाव किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिकी राष्ट्रपति और मीडिया के संबंध, सरकारी संस्थानों में पत्रकारों की पहुंच तथा स्वतंत्र और साझा प्रेस कवरेज की व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल आगे की दिशा अदालत की सुनवाई और व्हाइट हाउस की मीडिया नीति से जुड़े निर्णयों पर निर्भर करेगी।

  • अवैध खनन रोकने पहुंचे रेंजर की मौत, डंपर से 50 मीटर तक घसीटने का आरोप

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com प्रतापगढ़, 22 सितंबर 2026। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के छोटी सादड़ी वन क्षेत्र में अवैध खनन रोकने की कार्रवाई के दौरान वन विभाग के क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रताप सिंह चुंडावत की मौत का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अवैध खनन की सूचना पर मौके पर पहुंचे रेंजर को मिट्टी से भरे डंपर ने टक्कर मार दी। घटना के बाद रेंजर और उनकी मोटरसाइकिल को करीब 50 मीटर तक घसीटे जाने की बात सामने आई है। रात में मिली थी अवैध खनन की सूचना जानकारी के अनुसार, सोमवार रात करीब 11:30 बजे वन विभाग को छोटी सादड़ी क्षेत्र के वन क्षेत्र में अवैध खनन की सूचना मिली थी। सूचना के बाद क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रताप सिंह चुंडावत एक वनपाल के साथ मौके पर पहुंचे। इसी दौरान मिट्टी से भरा एक डंपर वहां से गुजरता दिखाई दिया। रेंजर ने डंपर को रोकने का प्रयास किया। आरोप है कि डंपर चालक ने वाहन रोकने के बजाय रेंजर को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद वाहन के साथ उन्हें और उनकी मोटरसाइकिल को करीब 50 मीटर तक घसीटे जाने की जानकारी सामने आई है। अस्पताल में उपचार के दौरान मौत घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल रेंजर को छोटी सादड़ी के उप जिला चिकित्सालय ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें निंबाहेड़ा जिला चिकित्सालय रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद डंपर चालक और मौके पर मिट्टी की खुदाई में लगी जेसीबी का चालक वहां से फरार हो गया। पुलिस ने घटनास्थल का किया निरीक्षण घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया है। मामले की जांच की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार घटना के संबंध में वन विभाग, पुलिस या प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है। इसलिए घटना के पीछे किसी व्यक्ति या समूह के कथित संरक्षण संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। अवैध खनन पर कार्रवाई की चुनौती इस घटना ने वन क्षेत्रों में अवैध खनन और परिवहन पर निगरानी तथा कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, जांच पूरी होने और पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही घटना की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित वन क्षेत्र की मिट्टी का इस्तेमाल ईंट निर्माण में किया जाता है। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि मौके पर खनन और मिट्टी परिवहन के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति थी या नहीं तथा घटना के लिए जिम्मेदार वाहन और उसके चालक की भूमिका क्या थी। भारतार्थ खबर इस मामले में पुलिस और प्रशासन की आधिकारिक जांच तथा आगे सामने आने वाली जानकारी के आधार पर अपडेट जारी करेगा।

  • IIT बॉम्बे छात्र मौत मामले में CCTV से खुल रही कड़ियां, परीक्षा हॉल से हॉस्टल तक जांच तेज

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com मुंबई, 22 सितंबर 2026। आईआईटी बॉम्बे के बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की मौत के मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज अहम कड़ी बनकर सामने आई है। मुंबई क्राइम ब्रांच परीक्षा हॉल, परिसर और हॉस्टल के कैमरों की रिकॉर्डिंग के जरिए साहिल की गतिविधियों और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 18 सितंबर को दोपहर करीब 12:30 से 12:45 बजे के बीच परीक्षा हॉल की गतिविधियां कैमरों में दर्ज हुई थीं। हालांकि, क्राइम ब्रांच के अनुसार यह सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक रूप से जारी या प्रदर्शित नहीं की गई है। जांच अधिकारी रिकॉर्डिंग का विश्लेषण कर रहे हैं, इसलिए फुटेज के आधार पर सामने आई जानकारियों को फिलहाल जांच का हिस्सा माना जा रहा है, अंतिम निष्कर्ष नहीं। परीक्षा के दौरान साहिल से पूछताछ की जानकारी रिपोर्टों के अनुसार, परीक्षा समाप्त होने से कुछ समय पहले साहिल अपनी सीट पर बैठे हुए जेब की ओर देखता दिखाई दिया। इसके बाद परीक्षा निरीक्षक एवं प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला ने उससे पूछताछ की और उसे अन्य विद्यार्थियों से अलग किया। बाद में उसे परीक्षा हॉल से बाहर जाने के लिए कहा गया। साहिल पर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल और प्रश्नपत्र से संबंधित सामग्री के लिए ChatGPT का उपयोग करने का आरोप सामने आया है। इन घटनाओं की परिस्थितियों और परीक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़े तथ्यों की जांच अब पुलिस कर रही है। हॉस्टल तक पहुंचने की कड़ी भी खंगाल रही क्राइम ब्रांच जांच एजेंसियां परीक्षा हॉल से बाहर निकलने के बाद साहिल की गतिविधियों का भी सीसीटीवी रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वह करीब दोपहर 1:25 बजे अपने हॉस्टल परिसर में पहुंचा था। इसके बाद उसके कमरे और परिसर में उसकी गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है। क्राइम ब्रांच का उद्देश्य परीक्षा हॉल से लेकर हॉस्टल तक के घटनाक्रम की एक स्पष्ट समय-रेखा तैयार करना है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उस दौरान क्या-क्या हुआ। हॉस्टल कमरे की तलाशी, डिजिटल उपकरण जांच में मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने सोमवार को साहिल के हॉस्टल कमरे की तलाशी लेकर पंचनामा तैयार किया। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को भी कब्जे में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस फिलहाल यह भी जांच कर रही है कि कोई लिखित संदेश, डिजिटल सामग्री या अन्य साक्ष्य मामले की परिस्थितियों को समझने में मदद कर सकते हैं या नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अभी तक कोई सुसाइड नोट मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। परिजनों ने लगाए जातिगत भेदभाव के आरोप साहिल के परिवार ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है, जिसमें आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित प्रावधान और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधान शामिल किए गए हैं। दूसरी ओर, आईआईटी बॉम्बे ने इन आरोपों से संबंधित दावों पर अलग पक्ष रखा है। संस्थान की ओर से कहा गया है कि साहिल ने संस्थान के एससी-एसटी प्रकोष्ठ या प्रशासन के समक्ष ऐसी शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने भी कहा है कि प्रोफेसर डूला ने परीक्षा नियमों के तहत कार्रवाई की थी। जांच के नतीजे का इंतजार साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे परिसर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग ने विवाद को व्यापक बना दिया है। दूसरी ओर, संस्थान के शिक्षकों की ओर से भी प्रोफेसर डूला के समर्थन में आवाज उठाई गई है। फिलहाल पुलिस जांच का केंद्र परीक्षा हॉल की घटना, उसके बाद साहिल की गतिविधियां, डिजिटल साक्ष्य और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों के बीच संभावित संबंधों को समझना है। जांच पूरी होने से पहले यह कहना जल्दबाजी होगी कि साहिल की मौत के पीछे कोई एक निश्चित कारण था। सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • बेंगलुरु में विनायक थाली और भजन संध्या का आयोज

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 22 सितंबर 2026। श्री मातेश्वरी भक्त मंडल ट्रस्ट रजि. बेंगलुरु की ओर से अखंड ज्योत, पाट स्थापना एवं तस्वीर स्थापना कार्यक्रम के संपन्न होने के उपलक्ष्य में बुधवार, 23 सितंबर 2026 को श्री विनायकजी थाली, महाप्रसादी एवं भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर आयोजकों ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से सपरिवार शामिल होने का आग्रह किया है। आयोजन के अनुसार महाप्रसादी शाम 6:15 बजे से तथा भजन संध्या शाम 7:30 बजे से प्रभु इच्छा तक आयोजित होगी। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था के साथ भक्ति संगीत एवं भजनों की प्रस्तुति होगी। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन धार्मिक आस्था और सामूहिक भक्ति का अवसर है। कार्यक्रम में स्वामी श्री पुष्करदासजी महाराज की उपस्थिति रहेगी। वे श्री मातेश्वरी भक्त मंडल ट्रस्ट के संस्थापक हैं। भजन संध्या में महादेव भजन मंडली बेंगलुरु सहित श्रवणजी माली, चूनारामजी भायल और राजुरामजी सीखी का सहयोग रहेगा। आयोजन की व्यवस्थाओं में कैलाशजी पंवार तथा माजीसा साउंड बेंगलुरु का भी सहयोग रहेगा। कार्यक्रम का आयोजन श्री मातेश्वरी भक्त मंडल ट्रस्ट रजि. बेंगलुरु के श्री कृष्णा गौ सेवा आश्रम गौशाला परिसर में किया जाएगा। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रम में सहभागी बनने की अपील की है।

  • बेंगलुरु में पीजीओआई का यादगार पूर्व छात्र मिलन

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 22 सितंबर 2026। पटेल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (पीजीओआई) के बैंगलोर चैप्टर की ओर से पूर्व छात्र मिलन समारोह का आयोजन रविवार, 20 सितंबर 2026 को बेंगलुरु स्थित हिल्टन बेंगलुरु एम्बेसी गोल्फलिंक्स में किया गया। समारोह में विभिन्न बैचों के करीब 60 पूर्व छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। लंबे अंतराल के बाद मिले पूर्व छात्रों ने विद्यार्थी जीवन की यादें साझा करने के साथ अपने अनुभवों और उपलब्धियों पर संवाद किया। समारोह में मध्यांचल प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भोपाल की कुलाधिपति श्रीमती प्रीति पटेल, प्रो-कुलाधिपति डॉ. अजित सिंह पटेल तथा कार्यकारी निदेशक सुश्री ईशा पटेल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। प्रोफेसर समीना जफर और डॉ. विक्रांत जैन की भी कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति रही। पारंपरिक अंदाज में हुआ अतिथियों का स्वागत समारोह में प्रवीण पांडेय, रोशन, अमन राज, दीपक और मुकेश ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। श्रीमती प्रीति पटेल, डॉ. अजित सिंह पटेल, सुश्री ईशा पटेल, प्रोफेसर समीना जफर एवं डॉ. विक्रांत जैन का मैसूर साफा, पुष्पमाला और शॉल पहनाकर अभिनंदन किया गया। पारंपरिक स्वागत समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा। इससे कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और स्थानीय परंपरा की झलक देखने को मिली। अतिथियों ने आयोजन टीम के इस आत्मीय स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। डॉ. अजित सिंह पटेल ने पारंपरिक अंदाज में किए गए स्वागत के लिए प्रवीण पांडेय और उनकी टीम का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस तरह का आत्मीय आयोजन पूर्व छात्रों और संस्थान के बीच संबंधों को और मजबूत करता है। श्रीमती प्रीति पटेल ने समारोह में शामिल सभी पूर्व छात्रों और सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने पूर्व छात्रों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए आगामी 27 दिसंबर 2026 को आयोजित होने वाले पूर्व छात्र मिलन समारोह में भी सभी को शामिल होने का आमंत्रण दिया। यादों के साथ भविष्य पर संवाद कार्यक्रम में पूर्व छात्रों ने अपने विद्यार्थी जीवन से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं। आपसी परिचय और अनुभवों के आदान-प्रदान के साथ भविष्य में सहयोग और संपर्क की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। समारोह में आयोजित मनोरंजक गतिविधियों ने माहौल को और जीवंत बना दिया। पूर्व छात्रों ने खेल एवं अन्य गतिविधियों में भाग लिया तथा सामूहिक भोजन के दौरान पुराने साथियों के साथ समय बिताया। सामूहिक छायाचित्र के माध्यम से समारोह की यादों को भी संजोया गया। पूर्व छात्र मिलन समारोह ने संस्थान से जुड़े पुराने साथियों को एक मंच पर लाने के साथ आपसी संपर्क और संवाद को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया। पूरे कार्यक्रम में आत्मीयता, उत्साह और पुरानी स्मृतियों का माहौल देखने को मिला। समारोह का समापन सामूहिक छायाचित्र और भविष्य में पुनः मिलने के संकल्प के साथ हुआ। समाचार प्रेषक: प्रवीण पांडेय, बेंगलुरु।

  • 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: अनंत नाग को दादा साहेब फाल्के सम्मान, ‘आर्टिकल 370’ सर्वश्रेष्ठ फिल्म

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) एकता नगर, गुजरात | 22 सितंबर 2026 एकता नगर। भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजेताओं को सम्मानित किया। इस बार समारोह पहली बार दिल्ली से बाहर गुजरात के एकता नगर में आयोजित हुआ। वरिष्ठ कन्नड़ अभिनेता अनंत नाग को वर्ष 2024 के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं ‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला। यामी गौतम को इसी फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान दिया गया। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मम्मूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ और कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ के लिए संयुक्त रूप से मिला। निर्देशक राजकुमार पेरियासामी को तमिल फिल्म ‘अमरन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार मिला, जबकि रणदीप हुड्डा को ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ डेब्यू निर्देशक का सम्मान मिला। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का यह आयोजन भारतीय सिनेमा की अलग-अलग भाषाओं, क्षेत्रों और फिल्म विधाओं की विविधता को सामने लाता है। इस संस्करण में फिल्मों के साथ गैर-फीचर सिनेमा और सिनेमा पर लेखन से जुड़े कार्यों को भी सम्मानित किया गया।

  • UPI चार्ज पर वित्त मंत्री की सफाई, ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा MDR का बोझ

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026। यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर जारी चर्चाओं के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राहक पहले की तरह यूपीआई के जरिए भुगतान कर सकेंगे और MDR को उनसे अलग से वसूलने की व्यवस्था नहीं है। वित्त मंत्री ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि MDR को टैक्स या सेस समझना सही नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े सेवा प्रदाताओं के बीच लागू होने वाला शुल्क है। सरकार के अनुसार, इससे प्राप्त राशि केंद्र सरकार के खाते में जमा नहीं होगी, बल्कि भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े पक्षों के बीच वितरित होगी। 2,000 रुपये तक के भुगतान पर MDR नहीं नए ढांचे के अनुसार, 2,000 रुपये तक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। वहीं 2,000 रुपये से अधिक के निर्दिष्ट Person-to-Merchant (P2M) लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेन-देन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी है। महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR का दायित्व भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के संबंधित पक्षों पर रहेगा और ग्राहक से यूपीआई भुगतान के समय अलग से यह शुल्क लेने की अनुमति नहीं होगी। Person-to-Person यानी व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI लेन-देन पर भी कोई MDR लागू नहीं होगा। करीब 96 प्रतिशत P2M लेन-देन रहेंगे अप्रभावित वित्त मंत्रालय के अनुसार, नए ढांचे के बावजूद लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेन-देन अप्रभावित रहेंगे। छोटे व्यापारियों से जुड़े कुछ लेन-देन भी मौजूदा शून्य-MDR व्यवस्था के दायरे में रहेंगे। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य UPI भुगतान प्रणाली के संचालन और दीर्घकालिक विस्तार के लिए आवश्यक आर्थिक ढांचा तैयार करना है। राष्ट्रीय भुगतान निगम भारत (NPCI) ने 15 सितंबर को नए MDR ढांचे की घोषणा की थी। इसके तहत शुल्क का वितरण भुगतान प्रणाली में शामिल बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच किया जाना है। MDR को लेकर क्या है विवाद? MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी के लेन-देन से जुड़े भुगतान तंत्र में लगाया जाता है। नए नियम में 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा है कि इस शुल्क को ग्राहक पर डालने की व्यवस्था नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR सरकारी कर या उपकर नहीं है और इससे प्राप्त राशि भारत की संचित निधि में जमा नहीं होगी। राजनीतिक बहस के बीच सरकार का स्पष्टीकरण UPI MDR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के बीच वित्त मंत्री ने कहा कि इस विषय पर संसद में भी स्पष्टीकरण दिया जा चुका है। उन्होंने लोगों से किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले तथ्यों की जांच करने की अपील की। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे में आधिकारिक नियम और NPCI की निर्धारित व्यवस्था के आधार पर यह स्पष्ट है कि नए MDR का घोषित ढांचा ग्राहकों से सीधे शुल्क वसूलने के लिए नहीं है। UPI उपयोगकर्ताओं के लिए क्या बदलेगा? 15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था में सामान्य ग्राहक के लिए सबसे अहम बात यह है कि मर्चेंट को किए गए पात्र UPI भुगतान पर अलग से MDR नहीं देना होगा। 2,000 रुपये तक के पात्र मर्चेंट भुगतान पर MDR नहीं है, जबकि 2,000 रुपये से अधिक के निर्दिष्ट P2M लेन-देन में 0.4 प्रतिशत MDR भुगतान तंत्र के स्तर पर लागू होगा। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच UPI भुगतान राशि की परवाह किए बिना निःशुल्क रहेगा। इस प्रकार, UPI भुगतान पर MDR की नई व्यवस्था मुख्यतः भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र और व्यापारियों से जुड़े शुल्क ढांचे में बदलाव है, न कि ग्राहकों से सीधे UPI चार्ज वसूलने की व्यवस्था।

  • UNSC में भारत की स्थायी सीट को V4 का समर्थन, जयशंकर ने बताया ‘ऐतिहासिक’

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com न्यूयॉर्क, 22 सितंबर 2026। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को यूरोप के चार देशों—पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य—का समर्थन मिला है। यह समर्थन 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान न्यूयॉर्क में हुई पहली V4 India विदेश मंत्रिस्तरीय बैठक में सामने आया। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा कि वैश्विक दक्षिण के प्रमुख देश और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती शक्ति के रूप में भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी स्थान मिलना चाहिए। V4 देशों ने जताया भारत के समर्थन पर साझा रुख विसेग्राद समूह यानी V4 में पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य शामिल हैं। बैठक के बाद स्लोवाक विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा कि चारों देश इस बात पर सहमत हैं कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होना चाहिए। उनके अनुसार भारत वैश्विक दक्षिण का महत्वपूर्ण देश है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। नई दिल्ली का तर्क है कि वर्तमान वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को संयुक्त राष्ट्र की निर्णय लेने वाली संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। जयशंकर ने बैठक को बताया नया ऐतिहासिक अवसर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहली V4 India बैठक को एक नया और ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, संपर्क व्यवस्था और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने सहित कई विषयों पर चर्चा हुई। जयशंकर के अनुसार भारत और V4 देशों के बीच विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक आयोजित करने तथा वार्षिक बिजनेस फोरम शुरू करने पर सहमति बनी है। दोनों पक्षों ने प्रौद्योगिकी और नवाचार, रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष, कनेक्टिविटी और लोगों की आवाजाही जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार किया। बैठक में यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र के घटनाक्रम सहित प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। UNSC में सुधार की भारत की मांग संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वर्तमान में 15 सदस्य हैं। इनमें चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका पांच स्थायी सदस्य हैं, जबकि 10 गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव दो वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है। स्थायी सदस्यों को सुरक्षा परिषद में वीटो अधिकार प्राप्त है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार परिषद के गैर-प्रक्रियात्मक निर्णयों के लिए नौ सदस्यों के समर्थन के साथ स्थायी सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है। भारत सुरक्षा परिषद की संरचना में व्यापक सुधार की मांग करता रहा है। हालांकि, चार V4 देशों का समर्थन भारत की दावेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनयिक समर्थन है, लेकिन इससे अपने आप परिषद की संरचना में बदलाव नहीं होता। इसके लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की आवश्यकता होगी। V4 India से आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की तैयारी बैठक का एजेंडा केवल सुरक्षा परिषद तक सीमित नहीं रहा। भारत और V4 देशों ने राजनीतिक संवाद को नियमित बनाने, आर्थिक सहयोग को गहरा करने और रक्षा संबंधों को नई गति देने पर सहमति जताई। वार्षिक बिजनेस फोरम के माध्यम से दोनों पक्षों के उद्योगों और कारोबारी समुदायों के बीच संपर्क बढ़ाने की योजना है। साथ ही प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा, अंतरिक्ष और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर तलाशने पर भी जोर दिया गया। स्लोवाकिया के अनुसार V4 India प्रारूप को नियमित संवाद और ठोस गतिविधियों के लिए आगे बढ़ाने की दिशा में यह पहली बैठक महत्वपूर्ण रही। V4 देशों की ओर से भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन को नई दिल्ली की लंबे समय से चली आ रही UNSC सुधार मुहिम के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि स्थायी सदस्यता का अंतिम निर्णय व्यापक अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं और संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच सहमति पर निर्भर करेगा।

  • एशियन गेम्स में भारतीय महिला क्रिकेट टीम का गोल्ड पर कब्जा, PM मोदी ने दी बधाई

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 22 सितंबर 2026 नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम को जीत की बधाई देते हुए इसे भारतीय क्रिकेट के लिए शानदार उपलब्धि बताया। प्रधानमंत्री के अनुसार भारतीय महिला क्रिकेट टीम का यह प्रदर्शन आत्मविश्वास, कौशल और शानदार टीमवर्क से जुड़ा रहा। इस जीत के साथ भारत को एशियन गेम्स के इस संस्करण में अपना पहला स्वर्ण पदक मिला है। महिला क्रिकेट टीम की इस उपलब्धि को भारतीय खेलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने पूरी टीम को आगे भी सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह प्रदर्शन देश की युवा महिला क्रिकेटरों को प्रेरित करेगा।

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