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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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UPI चार्ज पर वित्त मंत्री की सफाई, ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा MDR का बोझ

लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
धन्नाराम चौधरी
22 सित॰
3 मिनट पठन
नीली पृष्ठभूमि पर साड़ी और चश्मा पहनी बुजुर्ग महिला मंच पर बोलते हुए हाथ से इशारा कर रही है

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026। यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर जारी चर्चाओं के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राहक पहले की तरह यूपीआई के जरिए भुगतान कर सकेंगे और MDR को उनसे अलग से वसूलने की व्यवस्था नहीं है।

वित्त मंत्री ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि MDR को टैक्स या सेस समझना सही नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े सेवा प्रदाताओं के बीच लागू होने वाला शुल्क है। सरकार के अनुसार, इससे प्राप्त राशि केंद्र सरकार के खाते में जमा नहीं होगी, बल्कि भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े पक्षों के बीच वितरित होगी।


2,000 रुपये तक के भुगतान पर MDR नहीं


नए ढांचे के अनुसार, 2,000 रुपये तक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। वहीं 2,000 रुपये से अधिक के निर्दिष्ट Person-to-Merchant (P2M) लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेन-देन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR का दायित्व भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के संबंधित पक्षों पर रहेगा और ग्राहक से यूपीआई भुगतान के समय अलग से यह शुल्क लेने की अनुमति नहीं होगी। Person-to-Person यानी व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI लेन-देन पर भी कोई MDR लागू नहीं होगा।


करीब 96 प्रतिशत P2M लेन-देन रहेंगे अप्रभावित


वित्त मंत्रालय के अनुसार, नए ढांचे के बावजूद लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेन-देन अप्रभावित रहेंगे। छोटे व्यापारियों से जुड़े कुछ लेन-देन भी मौजूदा शून्य-MDR व्यवस्था के दायरे में रहेंगे। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य UPI भुगतान प्रणाली के संचालन और दीर्घकालिक विस्तार के लिए आवश्यक आर्थिक ढांचा तैयार करना है।

राष्ट्रीय भुगतान निगम भारत (NPCI) ने 15 सितंबर को नए MDR ढांचे की घोषणा की थी। इसके तहत शुल्क का वितरण भुगतान प्रणाली में शामिल बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच किया जाना है।


MDR को लेकर क्या है विवाद?


MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी के लेन-देन से जुड़े भुगतान तंत्र में लगाया जाता है। नए नियम में 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा है कि इस शुल्क को ग्राहक पर डालने की व्यवस्था नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR सरकारी कर या उपकर नहीं है और इससे प्राप्त राशि भारत की संचित निधि में जमा नहीं होगी।


राजनीतिक बहस के बीच सरकार का स्पष्टीकरण


UPI MDR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के बीच वित्त मंत्री ने कहा कि इस विषय पर संसद में भी स्पष्टीकरण दिया जा चुका है। उन्होंने लोगों से किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले तथ्यों की जांच करने की अपील की।

इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे में आधिकारिक नियम और NPCI की निर्धारित व्यवस्था के आधार पर यह स्पष्ट है कि नए MDR का घोषित ढांचा ग्राहकों से सीधे शुल्क वसूलने के लिए नहीं है।


UPI उपयोगकर्ताओं के लिए क्या बदलेगा?


15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था में सामान्य ग्राहक के लिए सबसे अहम बात यह है कि मर्चेंट को किए गए पात्र UPI भुगतान पर अलग से MDR नहीं देना होगा। 2,000 रुपये तक के पात्र मर्चेंट भुगतान पर MDR नहीं है, जबकि 2,000 रुपये से अधिक के निर्दिष्ट P2M लेन-देन में 0.4 प्रतिशत MDR भुगतान तंत्र के स्तर पर लागू होगा। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच UPI भुगतान राशि की परवाह किए बिना निःशुल्क रहेगा।

इस प्रकार, UPI भुगतान पर MDR की नई व्यवस्था मुख्यतः भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र और व्यापारियों से जुड़े शुल्क ढांचे में बदलाव है, न कि ग्राहकों से सीधे UPI चार्ज वसूलने की व्यवस्था।

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