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सीमा के 143 गांवों का कायाकल्प, 700 करोड़ की योजना

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 11 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

किशनगंज (बिहार)। भारत-नेपाल सीमा से सटे बिहार के सुदूरवर्ती गांवों की तस्वीर अब बदलने वाली है। केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज योजना (वीवीपी) के तहत पहले चरण में 143 गांवों के समग्र विकास की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इन गांवों के विकास पर करीब 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। इस पहल का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में पलायन रोकना, आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना और ग्रामीण जीवन को सशक्त बनाना है।

योजना के तहत किशनगंज जिले के 22 गांवों के लिए लगभग 112 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर सरकार को भेजा गया है। प्रति गांव औसतन पांच करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू होने की उम्मीद है।


जिलावार चयनित गांव

सीमावर्ती जिलों में चयनित गांवों की संख्या इस प्रकार है—

किशनगंज: 22, अररिया: 12, मधुबनी: 36, सीतामढ़ी: 9, बेतिया: 31, मोतिहारी: 12 और सुपौल: 30


गृहमंत्री के दौरे के बाद बढ़ी रफ्तार

फरवरी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सीमांचल दौरे के दौरान अररिया में सात जिलों के अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद इस योजना को गति मिली। बैठक में सीमावर्ती गांवों में विकास कार्यों को प्राथमिकता देने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बाद से संबंधित जिलों में अतिक्रमण हटाने, आधारभूत संरचना सुधारने और परियोजनाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है।


क्या-क्या बदलेगा गांवों में

वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत इन गांवों में व्यापक विकास कार्य किए जाएंगे। इसमें—

24 घंटे बिजली आपूर्ति एवं सौर ऊर्जा व्यवस्था।, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी।, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सेवाएं (वेलनेस सेंटर)।, स्मार्ट क्लासरूम और बहुउद्देशीय सामुदायिक केंद्र।, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा।, पर्यटन सर्किट का विकास।, महिलाओं और युवाओं का सशक्तीकरण।

स्वरोजगार, स्वयं सहायता समूह और सहकारी समितियों को मजबूती इसके साथ ही औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने और स्थानीय कला, संगीत एवं विरासत को मंच देने की भी योजना है।


सुरक्षा और रोजगार पर विशेष फोकस

योजना के तहत सीमावर्ती गांवों के निवासियों को ‘सीमा सुरक्षा बलों की आंख और कान’ के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। बेहतर रोजगार और जीवन स्तर उपलब्ध कराकर लोगों को गांव में ही रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे पलायन पर रोक लगेगी और सीमा क्षेत्र अधिक सुरक्षित बन सकेगा।


प्रशासन की तैयारी

जिलाधिकारी विशाल राज के अनुसार, चयनित गांवों के विकास की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है और डीपीआर सरकार को भेज दी गई है। पोर्टल पर दूसरे चरण के तहत 290 गांवों से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है, हालांकि इस पर अभी अंतिम निर्देश आना बाकी है। वाइब्रेंट विलेज योजना सीमावर्ती बिहार के गांवों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। यदि योजनाएं तय समय पर धरातल पर उतरती हैं, तो यह न केवल इन क्षेत्रों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देगी।

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