चेहरा ही बनेगा पासपोर्ट, बेंगलूरु एयरपोर्ट पर नई पहल
- धन्ना राम चौधरी

- 11 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
बेंगलूरु। हवाई यात्रा के अनुभव को पूरी तरह बदल देने वाली एक अत्याधुनिक पहल की शुरुआत केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सफल परीक्षण के साथ हो चुकी है। अब यात्रियों को पासपोर्ट या बोर्डिंग पास दिखाने की झंझट से मुक्ति मिल सकती है, क्योंकि सिर्फ चेहरे की पहचान से ही पूरी यात्रा प्रक्रिया पूरी करने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
इस अभिनव प्रणाली का परीक्षण एयरपोर्ट संचालक बैंगलोर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (बीआईएएल) द्वारा किया गया, जिसमें फेस रिकग्निशन तकनीक के जरिए यात्रियों को बिना किसी फिजिकल दस्तावेज के प्रवेश और बोर्डिंग की सुविधा प्रदान की गई। ट्रायल के दौरान यात्रियों की पहचान पहले से सुरक्षित डिजिटल डेटा के आधार पर की गई और एयरपोर्ट के विभिन्न चरणों पर केवल फेस स्कैन से सत्यापन किया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो, डिजी यात्रा फाउंडेशन और अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) का सहयोग रहा। यह पहल आईएटीए के ‘एक आईडी’’ कार्यक्रम के तहत विकसित की जा रही है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर कॉन्टैक्टलेस और सहज यात्रा अनुभव को बढ़ावा देना है।
कैसे काम करती है तकनीक
इस नई प्रणाली में यात्री अपनी पहचान संबंधी जानकारी पहले से डिजिटल रूप में पंजीकृत कराते हैं। एयरपोर्ट पहुंचने पर कैमरों के माध्यम से फेस स्कैन किया जाता है, जो पहले से उपलब्ध डेटा से मिलान कर पहचान की पुष्टि करता है। इसके बाद यात्री बिना पासपोर्ट या बोर्डिंग पास दिखाए सीधे सुरक्षा जांच और बोर्डिंग तक पहुंच सकता है। इससे लंबी कतारों और दस्तावेज जांच की प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी हद तक कम हो जाएगा।
सुरक्षा और गोपनीयता पर फोकस
नई तकनीक को लेकर डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। यात्रियों का डेटा केवल उनकी सहमति से ही उपयोग किया जाता है और इसे सीमित समय तक सुरक्षित रखा जाता है। अधिकारियों के अनुसार, यह सिस्टम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया गया है, जिससे यात्रियों का भरोसा कायम रखा जा सके।
भविष्य की यात्रा का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि फेस रिकग्निशन आधारित यह प्रणाली आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय यात्रा का नया मानक बन सकती है। भारत इस क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ा रहा है और जल्द ही देश के अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर भी इस सुविधा के विस्तार की संभावना जताई जा रही है। यदि यह पहल व्यापक स्तर पर लागू होती है, तो हवाई यात्रा न केवल तेज और सुविधाजनक होगी, बल्कि यात्रियों के लिए एक पूरी तरह डिजिटल और निर्बाध अनुभव का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।
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