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दिल्ली की नई ईवी नीति—रोड टैक्स माफ, इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़ा बढ़ावा

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 2 days ago
  • 3 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। राजधानी में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी किया है। इस प्रस्तावित नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस को पूरी तरह माफ करने का प्रावधान किया गया है, जिससे आम लोगों को ईवी अपनाने के लिए बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। यह पॉलिसी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 से प्रेरित है, जिसमें स्वच्छ हवा और प्रदूषण मुक्त वातावरण को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया है। इसके साथ ही, एमसी मेहता बनाम भारत संघ के ऐतिहासिक फैसले, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 जैसे कानूनी आधारों को भी इसमें शामिल किया गया है।


दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह नीति अहम मानी जा रही है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी में करीब 23 प्रतिशत प्रदूषण के लिए वाहन जिम्मेदार हैं। खासकर दोपहिया वाहन, जो कुल वाहनों का लगभग 67 प्रतिशत हैं, प्रदूषण में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन्हें तेजी से इलेक्ट्रिक में बदलना इस नीति का प्रमुख लक्ष्य है। नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर सरकार सीधे बैंक खाते में सब्सिडी (डीबीटी) देगी। दोपहिया ईवी पर पहले साल अधिकतम 30 हजार रुपये, दूसरे साल 20 हजार और तीसरे साल 10 हजार रुपये तक की सहायता मिलेगी। वहीं, ई-ऑटो के लिए पहले साल 50 हजार, दूसरे साल 40 हजार और तीसरे साल 30 हजार रुपये की सब्सिडी तय की गई है। छोटे इलेक्ट्रिक ट्रक (एन1) के लिए भी पहले साल 1 लाख रुपये तक का लाभ प्रस्तावित है। पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को हटाने के लिए स्क्रैपिंग इंसेंटिव भी दिया जाएगा। इसके तहत पुराने दोपहिया पर 10 हजार, तीन पहिया पर 25 हजार, कार पर 1 लाख और छोटे ट्रक पर 50 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा। नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक कारों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में पूरी छूट दी जाएगी, जबकि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को 50 प्रतिशत छूट मिलेगी। 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली कारों को इस छूट के दायरे से बाहर रखा गया है।


चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो चार्जिंग स्टेशनों की योजना, लोकेशन और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। साथ ही, एक डिजिटल पोर्टल और सिंगल विंडो सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना आसान होगा। वाहन निर्माताओं को हर डीलरशिप पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बैटरी कलेक्शन सेंटर और सुरक्षित निपटान के लिए नियम बनाए जाएंगे। बैटरी ट्रैकिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा, ताकि रीसाइक्लिंग और दोबारा उपयोग सुरक्षित तरीके से हो सके। नीति में भविष्य के लिए सख्त लक्ष्य भी तय किए गए हैं। 1 जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों का ही पंजीकरण होगा, जबकि 1 अप्रैल 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया ही रजिस्टर किए जाएंगे। स्कूल बसों में भी ईवी का हिस्सा 2030 तक 30 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।


सरकारी विभागों में नई खरीदी जाने वाली सभी गाड़ियां इलेक्ट्रिक होंगी और दिल्ली परिवहन निगम की नई बसें भी ईवी होंगी। इसके साथ ही, 2026 से डिलीवरी और फ्लीट कंपनियों को पेट्रोल-डीजल वाहनों को शामिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाया जाएगा और इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए परिवहन विभाग के तहत एक विशेष ईवी सेल का गठन किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नीति न केवल दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई गति देने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

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