पटना के मरीन ड्राइव पर 3 माह में 1 लाख पेड़
- धन्ना राम चौधरी

- 5 अप्रैल
- 2 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 18 अप्रैल

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
पटना। बिहार में विकास और पर्यावरण संतुलन को साथ लेकर चलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि राजधानी पटना के मरीन ड्राइव क्षेत्र में आगामी तीन महीनों के भीतर एक लाख पेड़ लगाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में जहां-जहां विकास कार्यों के दौरान पेड़ों की कटाई होती है, वहां उससे अधिक संख्या में पौधारोपण कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा रहा है।
पटना स्थित ताज सिटी सेंटर में आयोजित “मानव-वन्यजीव: द्वंद से सह-अस्तित्व की ओर” विषयक कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर है और इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग दो दशकों में राज्य में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप वन क्षेत्र 6 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को कम करने के लिए सरकार ठोस रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण, कॉरिडोर के विकास और जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही राज्य में ईको-टूरिज्म को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वाल्मीकिनगर में लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से लव-कुश पार्क विकसित किया जा रहा है, जो पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी केंद्र बनेगा। इसके अतिरिक्त मरीन ड्राइव के समीप विश्वस्तरीय एक्वेरियम निर्माण की योजना पर कार्य जारी है। पटना में शीघ्र ही वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी भी अंतिम चरण में है, जिससे शहरी परिवहन को नई दिशा मिलेगी।
कार्यशाला में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री एवं मुजफ्फरपुर सांसद डॉ. राज भूषण चौधरी ने कहा कि हाल के वर्षों में मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि हुई है, जिसका प्रमुख कारण प्राकृतिक आवासों का क्षरण है। उन्होंने वन्यजीव कॉरिडोर के संरक्षण और आम जनता की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताया। इस अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने जानकारी दी कि पटना-डोभी ग्रीन कॉरिडोर में पीपल, नीम, पाकड़ और जामुन जैसे देशी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे, जिससे जैव विविधता को मजबूती मिलेगी और पर्यावरण संतुलन कायम रहेगा।
कार्यक्रम में सुनील कुमार, सुधाकर सिंह, सुदामा प्रसाद सहित कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मानव और वन्यजीवों का सह-अस्तित्व ही पर्यावरण संरक्षण की कुंजी है। कार्यक्रम के दौरान भीमबांध वन्यप्राणी अभयारण्य की सर्वे रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमियों और विशेषज्ञों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सार्थक और प्रभावशाली बना।
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