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होर्मुज संकट में भारत की बढ़त, 8 जहाज सुरक्षित निकले

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 5
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात के बीच भारत ने समुद्री कूटनीति और रणनीतिक समन्वय का मजबूत प्रदर्शन किया है। दुनिया की सबसे संवेदनशील तेल आपूर्ति लाइनों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के आठ जहाजों का सुरक्षित बाहर निकलना इस दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।


सरकारी और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, हाल ही में “ग्रीन सान्वी” नामक जहाज भी इस खतरनाक जलडमरूमध्य को पार कर सुरक्षित निकल आया। इससे पहले सात अन्य भारतीय जहाज सफलतापूर्वक बाहर निकल चुके थे। वर्तमान में इस क्षेत्र में करीब 300 जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या चीन के तेल टैंकरों (60-70) की बताई जा रही है।


ऊर्जा सुरक्षा में राहत

भारत के लिए यह सफलता केवल कूटनीतिक ही नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन जहाजों के जरिए देश को लगभग 2.79 लाख टन से अधिक एलपीजी की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो देश की औसत दैनिक खपत (करीब 1 लाख टन) के हिसाब से 2-3 दिन की जरूरत पूरी करने में सक्षम है।

इनमें “शिवालिक”, “नंदा देवी”, “पाइन गैस”, “जग वसंत”, “बीडब्लू टायर”, “बीडब्लू एल्म”, “जग लाडकी” और “ग्रीन सान्वी” प्रमुख हैं। “जग लाडकी” के माध्यम से 80,886 टन कच्चा तेल भी मुंद्रा बंदरगाह पहुंच चुका है। अन्य जहाजों ने कांडला पोर्ट, मुंबई पोर्ट और न्यू मंगलौर पोर्ट पर आपूर्ति सुनिश्चित की है।


संकट के बीच भारत की रणनीतिक बढ़त

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता के पीछे भारत की संतुलित विदेश नीति और ईरान के साथ व्यावहारिक संबंध अहम भूमिका निभा रहे हैं। मौजूदा हालात में जहां कई देशों के जहाज फंसे हुए हैं, वहीं भारत ने समन्वय और कूटनीतिक संवाद के जरिए अपने जहाजों को प्राथमिकता से सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की है।


चीन-पाकिस्तान की चुनौतियां

दूसरी ओर चीन को इस संकट में अपेक्षाकृत अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उसके केवल तीन जहाज ही अब तक होर्मुज से बाहर निकल पाए हैं, जबकि अधिकांश टैंकर अभी भी फंसे हुए हैं। वहीं पाकिस्तान ने अपने 20 जहाजों को अनुमति मिलने का दावा किया है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अब तक केवल दो पाकिस्तानी जहाज ही कराची पहुंच पाए हैं।


आगे की राह

स्थिति को देखते हुए ओमान तट के सहारे वैकल्पिक मार्ग अपनाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। हाल ही में तीन ओमानी टैंकर इस मार्ग से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं, जिससे अन्य जहाजों के लिए भी रास्ता खुलने की उम्मीद जगी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते महीने की शुरुआत में इस क्षेत्र में भारत के कुल 24 जहाज मौजूद थे, जिनमें से अब शेष जहाजों को भी चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित निकालने की योजना पर काम किया जा रहा है।


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने जिस कुशलता से अपने जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखा है, वह उसकी वैश्विक कूटनीतिक क्षमता और सामरिक तैयारी का प्रमाण है। यह घटनाक्रम न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी विश्वसनीयता और प्रभाव को भी सुदृढ़ करता है।

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