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कर्नाटक ने विज़न केयर में रचा इतिहास

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 4
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु। कर्नाटक सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए विज़न केयर में देश के लिए नई मिसाल पेश की है। राज्य सरकार ने ‘रिस्टोरिंग विज़न’ कार्यक्रम के तहत अपनी तरह का पहला समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन किया है, जिसके साथ कर्नाटक भारत का पहला राज्य बन गया है जो बड़े पैमाने पर प्रेसबायोपिया (उम्र से जुड़ी नजर की कमजोरी) के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।


इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत सरकार ने ‘आईदृष्टि’ के सहयोग से व्यापक स्तर पर नेत्र जांच और उपचार कार्यक्रम शुरू किया है। कार्यक्रम के पहले चरण में यादगिरी ज़िले के लोगों को विशेष लाभ मिलेगा, जहां लगभग 1 लाख जरूरतमंद नागरिकों को निःशुल्क पढ़ने के चश्मे वितरित किए जाएंगे।


सरकार द्वारा तैयार की गई इस योजना के अनुसार, 40 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए 216 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त विज़न स्क्रीनिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जांच के बाद लाभार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाले पढ़ने के चश्मे भी निःशुल्क प्रदान किए जाएंगे, जिससे उनकी दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार आएगा।


विशेषज्ञों के अनुसार, प्रेसबायोपिया एक सामान्य लेकिन उपेक्षित समस्या है, जो उम्र बढ़ने के साथ लगभग हर व्यक्ति को प्रभावित करती है। इस पहल के माध्यम से न केवल लाखों लोगों की दृष्टि संबंधी समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।


यह कार्यक्रम विश्व स्वास्थ्य संगठन की सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे इसकी प्रभावशीलता और विश्वसनीयता और अधिक बढ़ जाती है। स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकार इसे पब्लिक हेल्थ में एक ‘गेम चेंजर’ मान रहे हैं।


कर्नाटक सरकार की यह पहल न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रही है। उम्मीद की जा रही है कि अन्य राज्य भी इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए विज़न केयर को प्राथमिकता देंगे, जिससे देशभर में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिल सके।

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