top of page

“भारतार्थ खबर – खबर नहीं, उसका अर्थ”“हर खबर का सही विश्लेषण – भारतार्थ खबर”“सच्ची खबर, सही अर्थ – भारतार्थ खबर”“जहाँ खबरों का होता है असली विश्लेषण”“ताज़ा खबरें, सटीक विश्लेषण – भारतार्थ खबर”“हर खबर की गहराई तक – भारतार्थ खबर”“Breaking News से लेकर विशेष रिपोर्ट तक”“देश-दुनिया की हर बड़ी खबर – भारतार्थ खबर”

नोएडा एयरपोर्ट का उद्घाटन: क्या “हर दो मिनट में उड़ान” भारत के विकास मॉडल की नई पहचान है?

बंगाल वोटर लिस्ट विवाद पर सीपीएम का हमला

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 3 days ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का विवाद अब गहराता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध के बाद अब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) भी खुलकर मैदान में उतर आई है। पार्टी के महासचिव एमए बेबी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर गंभीर सवाल उठाए हैं और पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बताया है।


90 लाख नाम हटने का आरोप, निष्पक्षता पर सवाल

सीपीएम ने अपने पत्र में दावा किया है कि राज्य में 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 12 प्रतिशत है। पार्टी का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हो सकता, बल्कि यह चुनावी निष्पक्षता पर सीधा प्रश्नचिह्न है।


‘एल्गोरिदम’ पर सवाल, जमीनी जांच की मांग

सीपीएम ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची संशोधन में पारदर्शिता का अभाव है। पार्टी के अनुसार—

नाम हटाने के लिए जमीनी सत्यापन के बजाय ‘एल्गोरिदम’ का सहारा लिया गया।

मतदाताओं को ‘संदिग्ध’ मानकर खुद को सही साबित करने का बोझ उन्हीं पर डाल दिया गया।

शिकायत निवारण तंत्र प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।


मानसिक आघात और मौत का दावा

पत्र में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि इस प्रक्रिया से लोगों को आर्थिक नुकसान, असुविधा और मानसिक तनाव झेलना पड़ा है। सीपीएम ने दावा किया कि दस्तावेजी प्रक्रिया के दबाव और नाम कटने के कारण कई लोगों की मौत तक हो गई। पार्टी ने इसे संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मिले मतदान के अधिकार का उल्लंघन बताया है।


आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

सीपीएम ने निर्वाचन आयोग से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि किसी भी वास्तविक नागरिक का नाम मतदाता सूची से न हटे। पार्टी ने यह भी कहा कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में ऐसी गड़बड़ियां लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत हैं।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग पहले चरण के लिए मतदाता सूची को फ्रीज कर चुका है। राज्य में 23 और 29 अप्रैल 2026 को दो चरणों में मतदान होना है, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होगी। ऐसे में यह विवाद आगामी चुनावी माहौल को और अधिक गरमा सकता है।

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page